विकसित भारत 2047 के लिए फिर हो सकता है सरकारी बैंकों का विलय, ईएसी-पीएम ने सौंपा रिसर्च पेपर प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद ने देश में बड़े सरकारी बैंक बनाने के लिए छोटे बैंकों के विलय का सुझाव दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक इससे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ऋण जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। वैश्विक बाजारों में भारतीय बैंकिंग की साख बढ़ाने और मजबूत वित्तीय संस्थान तैयार करने के उद्देश्य से देश में सरकारी बैंकों के विलय का एक नया दौर शुरू हो सकता है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) ने एक रिसर्च पेपर जारी कर छोटे सरकारी बैंकों के एकीकरण की सिफारिश की है। पिछले 7 साल के दौरान मोदी सरकार 15 छोटे सार्वजनिक बैंकों का विलय कर चुकी है। परिषद का मानना है कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बैंक बनाने के लिए एकीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ानी होगी। हालांकि, यह कदम इस तरह उठाया जाना चाहिए जिससे घरेलू बैंकिंग क्षेत्र में स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बनी रहे और बड़े पैमाने के बैंक भी अस्तित्व में आ सकें। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के लिए बड़े बैंकों की आवश्यकता भारतीय बैंकिंग सुधारों पर केंद्रित इस अध्ययन में स्पष्ट किया गया है कि साल 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ रही देश की अर्थव्यवस्था को भारी मात्रा में कर्ज की आवश्यकता होगी। वर्तमान में भारतीय बैंकिंग उद्योग का कुल आकार अंतरराष्ट्रीय तुलना में काफी छोटा है और बैंकों की बाजार हिस्सेदारी में भारी अंतर देखने को मिलता है। कुछ बैंकों के पास जहां 20 फीसदी बाजार हिस्सेदारी है, वहीं कई बैंकों का शेयर एक फीसदी या उससे भी कम है। ईएसी-पीएम का सुझाव है कि छोटे बैंकों के विलय से एक मजबूत पूंजी आधार, व्यापक भौगोलिक नेटवर्क और विशाल बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को वित्तीय सहायता देने की बड़ी क्षमता वाले बैंक तैयार किए जा सकेंगे। 7 सालों में 27 से घटकर 12 रह गए थे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक बैंक एकीकरण की दिशा में केंद्र सरकार ने पिछले कुछ वर्षों में कई बड़े फैसले लिए हैं। साल 2017 में भारतीय स्टेट बैंक के सहयोगी बैंकों को मूल बैंक में मिला दिया गया था। इसके बाद साल 2019 में विजया बैंक और देना बैंक का विलय बैंक ऑफ बड़ौदा के साथ किया गया। एकीकरण का सबसे बड़ा चरण साल 2020 में आया, जब 10 सार्वजनिक बैंकों का आपस में विलय कर दिया गया। इन फैसलों के बाद देश में सरकारी बैंकों की कुल संख्या 27 से घटकर 12 रह गई। हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि विलय से बैंकों को परिचालन में तालमेल और बड़े पैमाने का लाभ मिला, लेकिन इसका पूरा फायदा तकनीक के सफल तालमेल, जोखिम प्रबंधन की संस्कृति और उत्पादकता में निरंतर सुधार पर निर्भर रहा। डीईए पद्धति से दक्षता का आकलन और 47 बैंकों के आंकड़े बैंकिंग क्षेत्र की कार्यकुशलता को जांचने के लिए वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 की अवधि के दौरान 47 बैंकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन डेटा एनवलपमेंट एनालिसिस (डीईए) पद्धति से किया गया। इस अध्ययन के अनुसार सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के प्रयासों से बैंकों की औसत तकनीकी दक्षता वित्त वर्ष 2019-20 के 77.99 फीसदी से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में 88.34 फीसदी पहुंच गई। वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों की दक्षता 93.12 फीसदी दर्ज की गई, जो निजी बैंकों के 86.02 फीसदी से अधिक रही। इसी अवधि के दौरान विदेशी बैंकों की कार्यकुशलता 83 से 85 फीसदी के बीच बनी रही। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि कमजोर बैंकों का अधिग्रहण करने से बड़े बैंकों की अपनी उत्पादकता पर अस्थायी दबाव देखने को मिला। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटलाइजेशन से बदलेगा बैंकिंग का स्वरूप भविष्य की जरूरतों पर ध्यान केंद्रित करते हुए ईएसी-पीएम ने बताया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटलाइजेशन के इस्तेमाल से बैंकों की कार्यक्षमता में और बढ़ोतरी होगी। डिजिटल तकनीकों के अपनाए जाने से युवा ग्राहकों को उनकी व्यक्तिगत जरूरतों के हिसाब से सेवाएं मिल सकेंगी। इससे बैंकिंग सेवाएं केवल ग्राहक के अनुरोध का इंतजार करने के बजाय अधिक सक्रिय और आधुनिक रुख की ओर अग्रसर होंगी। इसका आप पर असर भारत भर में प्रभाव: बड़े और मजबूत बैंकों के बनने से बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स के लिए कर्ज मिलना आसान होगा, जिससे देश की आर्थिक वृद्धि को गति मिलेगी। बैंक ग्राहकों के लिए: विलय के बाद ग्राहकों को बेहतर डिजिटल सेवाएं, व्यापक शाखा नेटवर्क और एआई आधारित व्यक्तिगत सेवाएं मिल सकेंगी, हालांकि शुरुआती चरण में शाखाओं और आईटी प्रणालियों के एकीकरण से थोड़ी असहजता हो सकती है। सवाल-जवाब 1. ईएसी-पीएम ने बैंकों के विलय की सिफारिश क्यों की है? ईएसी-पीएम ने वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की बढ़ती कर्ज जरूरतों को पूरा करने के लिए बड़े सरकारी बैंक बनाने की सिफारिश की है। 2. पिछले 7 सालों में कितने सरकारी बैंकों का विलय किया जा चुका है? मोदी सरकार ने पिछले 7 वर्षों में 15 छोटे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का एकीकरण किया है, जिससे सरकारी बैंकों की संख्या 27 से घटकर 12 रह गई है। 3. बैंकों के विलय का आकलन किस अध्ययन पद्धति से किया गया? अध्ययन में वित्त वर्ष 2014-15 से 2025-26 के दौरान 47 बैंकों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने के लिए डेटा एनवलपमेंट एनालिसिस (डीईए) पद्धति का उपयोग किया गया। 4. वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों की तकनीकी दक्षता कितनी दर्ज की गई? अध्ययन के अनुसार वित्त वर्ष 2025-26 में सरकारी बैंकों की तकनीकी दक्षता 93.12 फीसदी रही, जबकि निजी बैंकों की दक्षता 86.02 फीसदी थी। 5. भविष्य में बैंकिंग दक्षता बढ़ाने में किन तकनीकों की भूमिका मुख्य होगी? भविष्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और डिजिटलाइजेशन की मदद से बैंकिंग दक्षता बढ़ेगी और ग्राहकों को अधिक व्यक्तिगत व सक्रिय सेवाएं मिल सकेंगी। https://trendkia.com/business/vikasita-bharata-2047-ke-lie-phira-ho-sakata-hai-sarakari-bainkon-ka-vilaya-eac-pm-ne-saunpa-risarcha-pepara-22546 TrendKia — Har trend, sabse pehle.