# वित्तीय संस्थानों पर एजेंटिक AI के ज़रिए ऑटोमेटेड डिजिटल सेंधमारी का ख़तरा, सुरक्षा एजेंसियां सतर्क

> देश की शीर्ष साइबर सुरक्षा एजेंसियों ने बैंकों और फिनटेक संस्थानों के लिए आपातकालीन दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें स्वायत्त डिजिटल बॉट्स के ज़रिए होने वाली धोखाधड़ी रोकने के लिए त्वरित कदम उठाने को कहा गया है।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/vittiya-snsthanon-para-agentic-ai-ke-zarie-tometeda-dijitala-sendhamari-ka-khatara-suraksha-ejensiyan-satarka-56651 · **Language:** Hindi
**Tags:** साइबर सुरक्षा, बैंकिंग धोखाधड़ी, एजेंटिक एआई, फिनटेक सुरक्षा, आरबीआई, डिजिटल फ्रॉड

देश के वित्तीय तंत्र पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI आधारित तकनीकों के ज़रिए तेज़ी से डिजिटल हमले किए जा रहे हैं। सरकारी साइबर सुरक्षा विंग और आपातकालीन प्रतिक्रिया दल ने वाणिज्यिक बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFCs), फिनटेक फर्मों, पेमेंट गेटवे और एग्रीगेटर्स के लिए संयुक्त अलर्ट जारी किया है। इन हमलों में आधुनिक स्वायत्त सॉफ्टवेयर और ऑटोमेटेड टूल्स का उपयोग करके कंप्यूटर की गति से बैंकिंग सुरक्षा दीवारों में सेंध लगाई जा रही है, जिससे सुरक्षा तंत्र को संभलने का न्यूनतम समय भी नहीं मिल पाता।

## ऑटोमेटेड एपीआई और सिस्टम्स को बनाया जा रहा निशाना
जांच में यह बात सामने आई है कि वित्तीय संस्थानों के सर्वरों में अनधिकृत प्रवेश के बाद बड़े पैमाने पर धन की अवैध निकासी की गई है। घुसपैठिए विशेष रूप से उन सर्वरों और सूचना प्रौद्योगिकी ढांचे को खोजते हैं जो सीधे इंटरनेट से जुड़े हैं लेकिन जिन्हें समय पर अपडेट नहीं किया गया है। इसके अलावा, पुराने अनपैच्ड सॉफ्टवेयर और ग्राहकों की ऑनलाइन शिकायत निवारण पोर्टल्स भी इस घुसपैठ के प्रमुख प्रवेश बिंदु बन रहे हैं।

एक बार सिस्टम के आंतरिक नेटवर्क में पैर जमाने के बाद, हमलावर स्वचालित भुगतान प्रणालियों और फंड ट्रांसफर से जुड़े एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस (API) पर नियंत्रण कर लेते हैं। इन इंटरफेस के माध्यम से वित्तीय स्वीकृति प्रक्रियाओं को दरकिनार करते हुए तेज़ी से धन निकाला जाता है।

## दो प्रमुख सुरक्षा परामर्श जारी
वित्तीय नेटवर्क की सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय तकनीकी सुरक्षा तंत्र ने दो अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा परामर्श जारी किए हैं, जिन्हें तत्काल प्रभाव से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं

- **परामर्श CIAD-2026-0046 (9 अक्टूबर, 2026):** इस दस्तावेज में मुख्य रूप से डिस्बर्समेंट और पेमेंट ट्रांसफर से जुड़े डिजिटल एपीआई में मौजूद सुरक्षा कमियों और उनके ज़रिए होने वाले अनधिकृत वित्तीय लेनदेन के प्रति आगाह किया गया है।
- **परामर्श CIAD-2026-0049 (15 अक्टूबर, 2026):** इस निर्देश में एजेंटिक एआई के खतरनाक उपयोग पर प्रकाश डाला गया है, जहाँ स्वतंत्र निर्णय लेने में सक्षम एआई एजेंट्स को साइबर हमलों के मुख्य हथियार के रूप में तैनात किया जा रहा है।

## वित्तीय और बैंकिंग संस्थानों के लिए अनिवार्य प्रोटोकॉल
संस्थानों के आईटी और सुरक्षा विभागों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने-अपने नियामक प्राधिकरणों द्वारा तय साइबर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करें। इस सिलसिले में निर्धारित प्रमुख सुरक्षा कदम निम्नलिखित हैं

- किसी भी सुरक्षा उल्लंघन या संदिग्ध घटना की सूचना मिलने के 6 घंटे के भीतर CERT-In को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए।
- बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के लिए यह अनिवार्य किया गया है कि वे घटना के 6 घंटे के अंदर ही RBI के DAKSH पोर्टल पर पूरी जानकारी दर्ज कराएं।
- भुगतान और वित्तीय हस्तांतरण से जुड़े सभी डिजिटल इंटरफेस और एपीआई का संपूर्ण और अद्यतन ब्योरा तैयार किया जाए।
- सभी पुराने, निष्क्रिय, अप्रयुक्त और परीक्षण के उद्देश्य से बनाए गए टेस्ट एपीआई को तुरंत स्थायी रूप से निष्क्रिय किया जाए।
- मुख्य सूचना सुरक्षा अधिकारी (CISO), आईटी कोर टीम और लेनदेन निगरानी प्रभाग के बीच वास्तविक समय में तालमेल सुनिश्चित हो।
- प्रति लेन-देन और 24 घंटे की अवधि में होने वाले कुल फंड ट्रांसफर की सख्त अधिकतम सीमाएं निर्धारित की जाएं।
- रकम भेजने से पहले लाभार्थी के नाम और बैंक खाते की जानकारी का बहु-स्तरीय सत्यापन अनिवार्य किया जाए।
- अस्वाभाविक गति से लगातार होने वाले वित्तीय लेन-देन पर गहन स्वचालित निगरानी रखी जाए।
- अनाधिकृत और गैर-अनुमोदित आईपी पतों से आने वाले विफल एक्सेस टोकन के प्रयासों की तुरंत फोरेंसिक जांच की जाए।
- शिकायत दर्ज करने वाले उपभोक्ता इंटरफेस की फायरवॉल और सुरक्षा को नए सिरे से मजबूत किया जाए।
- एक बार नेटवर्क में घुसने के बाद हमलावर को अन्य आंतरिक प्रणालियों में फैलने से रोकने के लिए सुरक्षा ढांचे और नेटवर्क विभाजन की समीक्षा की जाए।
- लेनदेन के विवरण, लाभार्थियों की बैंकिंग प्रोफाइल और लेन-देन की कुल संख्या में अचानक आए उछाल पर पैनी नज़र रखी जाए।
- ग्राहक सत्यापन (KYC), आंतरिक अनुमोदन और सभी जरूरी प्रमाणीकरण पूरे किए बिना किसी भी परिस्थिति में फंड ट्रांसफर की अनुमति न दी जाए।
- कंप्यूटर की तीव्र गति से होने वाले हमलों से निपटने की तैयारी परखने के लिए नियमित रूप से अधिकृत रेड टीम ड्रिल आयोजित की जाएं।
- सुरक्षा संचालन केंद्र (SOC) और पेमेंट सुरक्षा प्रणालियों की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता का निरंतर मूल्यांकन किया जाए।

## एजेंटिक एआई और म्यूल खातों का जटिल नेटवर्क
सुरक्षा विश्लेषकों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क में एजेंटिक एआई फ्रेमवर्क की भूमिका बेहद खतरनाक है। पारंपरिक हमलों के विपरीत, यह स्वचालित फ्रेमवर्क मानव हस्तक्षेप के बिना सुरक्षा खामियों को पहचानता है और सेकंडों के भीतर अनधिकृत निकासी निष्पादित कर देता है।

निकाली गई अवैध रकम को तुरंत विभिन्न बैंकों में पहले से तैयार किए गए फर्जी और म्यूल बैंक खातों में विभाजित कर दिया जाता है। इसके पश्चात आईएमपीएस और एनईएफटी जैसी त्वरित भुगतान सेवाओं का सहारा लेकर धनराशि को आगे अन्य खातों में स्थानांतरित किया जाता है या सीधे निकाल लिया जाता है। अपराध को अंजाम देने के तुरंत बाद साइबर गिरोह डिजिटल लॉग्स और ट्रैकिंग विवरण मिटाने के उन्नत साधनों का इस्तेमाल करते हैं, ताकि फोरेंसिक जांचकर्ताओं के लिए डिजिटल सुराग खोजना अत्यंत कठिन हो जाए।

## इसका आप पर असर
यह चेतावनी दर्शाती है कि बैंकिंग धोखाधड़ी अब इंसानी गति के बजाय ऑटोमेटेड बॉट्स की रफ्तार से हो रही है, जिससे ग्राहकों और संस्थानों दोनों के लिए सुरक्षा जांच के मानक कड़े किए जा रहे हैं।

- **भारत में:** बैंक और फिनटेक प्लेटफॉर्म्स अपने फंड ट्रांसफर सिस्टम और एपीआई में अतिरिक्त सुरक्षा परतें जोड़ रहे हैं। इसके चलते आम खाताधारकों को बड़े लेनदेन, नए लाभार्थियों को जोड़ने और भुगतान पूरा करने के दौरान अतिरिक्त सत्यापन और देरी का सामना करना पड़ सकता है।
- **वित्तीय सुरक्षा:** संस्थानों में संदिग्ध लेनदेन की पहचान के लिए सख्त दैनिक सीमाएं और असामान्य गति की निगरानी लागू की जा रही है। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अपने खातों पर अज्ञात लेन-देन के अलर्ट आते ही बिना देरी किए संबंधित बैंक को तुरंत सूचित करें।
- **डिजिटल इंटरफेस:** ग्राहक सेवा और शिकायत निवारण से जुड़े ऑनलाइन पोर्टलों की सुरक्षा जांच बढ़ाई जा रही है। इस प्रक्रिया के तहत सेवा पोर्टलों पर अस्थायी रखरखाव या लॉगिन प्रक्रिया में अतिरिक्त जांच देखने को मिल सकती है।
- **धोखाधड़ी से बचाव:** म्यूल खातों में अवैध रकम के फैलाव को रोकने के लिए बैंक त्वरित कदम उठा रहे हैं। किसी भी अपरिचित व्यक्ति के साथ अपने बैंकिंग क्रेडेंशियल साझा करने या अपने खाते को किसी अन्य के पैसे ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल करने से बचें।

## ऐसा क्यों हुआ
वित्तीय संस्थानों पर यह नया खतरा आधुनिक एआई तकनीकों के दुरुपयोग और कॉर्पोरेट आईटी प्रणालियों में मौजूद तकनीकी कमियों के संगम के कारण उत्पन्न हुआ है।

- **स्वायत्त बॉट्स का उपयोग:** हमलावर एजेंटिक एआई तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बिना इंसानी दखल के सुरक्षा खामियों को ढूंढकर मशीन की गति से अनधिकृत फंड ट्रांसफर करने में सक्षम है।
- **कमजोर और आउटडेटेड इंफ्रास्ट्रक्चर:** कई संस्थानों में इंटरनेट से सीधे जुड़े सर्वर और पुराने सॉफ्टवेयर समय पर अपडेट नहीं किए गए हैं, जिससे हमलावरों को सिस्टम में पैर जमाने का आसान रास्ता मिल जाता है।
- **असुरक्षित एपीआई और इंटरफेस:** भुगतान प्रणालियों में सक्रिय पुराने, अप्रयुक्त और टेस्ट एपीआई के साथ-साथ शिकायत निवारण पोर्टल्स बिना पर्याप्त सत्यापन के खुले रह गए थे, जिनका उपयोग आंतरिक वित्तीय नेटवर्क में घुसपैठ के लिए किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. सुरक्षा एजेंसियों ने किस तरह के साइबर खतरे को लेकर चेतावनी दी है?
एजेंसियों ने बैंकों, NBFCs और फिनटेक कंपनियों पर एजेंटिक एआई की मदद से मशीन की गति से होने वाले स्वचालित साइबर हमलों और अवैध फंड निकासी के प्रति आगाह किया है।

### 2. साइबर हमलावर संस्थानों के सिस्टम में कैसे प्रवेश कर रहे हैं?
हमलावर पुराने व अनपैच्ड सॉफ्टवेयर, इंटरनेट से जुड़े कमजोर सर्वरों और ऑनलाइन ग्राहक शिकायत पोर्टलों की खामियों का फायदा उठाकर घुसपैठ कर रहे हैं।

### 3. हमले के बाद अवैध धन को कैसे निकाला जाता है?
सिस्टम में घुसपैठ के बाद एपीआई के जरिए अनधिकृत फंड ट्रांसफर कर रकम को विभिन्न बैंकों के म्यूल खातों में भेजा जाता है और फिर त्वरित भुगतान सेवाओं से निकाल लिया जाता है।

### 4. साइबर हमले की स्थिति में बैंकों के लिए रिपोर्टिंग की क्या समयसीमा तय की गई है?
किसी भी साइबर हमले की जानकारी मिलने के 6 घंटे के भीतर CERT-In को और आरबीआई के DAKSH पोर्टल पर घटना की रिपोर्ट करना अनिवार्य है।

### 5. संस्थानों को अपनी एपीआई सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं?
सभी डिजिटल पेमेंट इंटरफेस की पूरी सूची बनाने, पुराने व अप्रयुक्त टेस्ट एपीआई को तुरंत बंद करने और अनधिकृत आईपी से आने वाले टोकन अनुरोधों की जांच के निर्देश दिए गए हैं।

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