# वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण का बड़ा जिम्मा, दो दिग्गज कंपनियां मिलकर तैयार करेंगी 80 सेट

> भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड ने मिलकर अस्सी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें बनाने का करार किया है। यह चौबीस हजार करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट है जिसके तहत अगले पैंतीस साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी इन्हीं कंपनियों के पास रहेगी।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/vnde-bharata-slipara-trenon-ke-nirmana-ka-bara-jimma-do-diggaja-knpaniyan-milakara-taiyara-karengi-80-seta-33316 · **Language:** Hindi
**Tags:** वंदे भारत स्लीपर, भेल, टीटागढ़ रेल, रेलवे प्रोजेक्ट, ट्रेन निर्माण, भारतीय रेलवे

देशभर में पटरियों पर दौड़ने वाली वंदे भारत ट्रेनों ने यात्रियों के बीच अपनी एक खास जगह बनाई है। अब इस आधुनिक ट्रेन बेड़े में स्लीपर संस्करण को और तेजी से जोड़ने की तैयारी चल रही है ताकि लोग लंबी दूरी का सफर भी हवाई जहाज जैसे आराम के साथ तय कर सकें। इस दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए दो प्रमुख कंपनियों ने आपस में हाथ मिलाया है। सार्वजनिक क्षेत्र की भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड ने एक संयुक्त उपक्रम तैयार किया है जो आने वाले समय में देश को अस्सी अत्याधुनिक वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट उपलब्ध कराएगा।

 

## अस्सी ट्रेनसेट और पैंतीस साल का मेंटेनेंस
 दोनों कम्पनियों के बीच हुए इस रणनीतिक समझौते के तहत कुल अस्सी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का निर्माण किया जाना है। इसके साथ ही इन सभी ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी भी पैंतीस साल यानी वर्ष दो हजार इकसठ तक इसी संयुक्त उपक्रम के पास रहेगी। इस संबंध में पंद्रह सितंबर को दोनों पक्षों के बीच आधिकारिक समझौता संपन्न हुआ था जिसके बाद अब नई कंपनी के गठन की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। रेलवे द्वारा उठाया गया यह कदम यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण के साथ-साथ लंबे समय तक ट्रेनों की तकनीकी देखरेख और गुणवत्ता बनी रहे।

 

## चौबीस हजार करोड़ रुपये का विशाल प्रोजेक्ट
 भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड के इस कंसोर्टियम को जो अनुबंध मिला है उसका कुल वित्तीय मूल्य करीब चौबीस हजार करोड़ रुपये है। इस भारी भरकम बजट में केवल अस्सी स्लीपर ट्रेनों का उत्पादन ही शामिल नहीं है बल्कि पैंतीस साल तक इनका पूरा मेंटेनेंस खर्च भी सम्मिलित है। इस नए संयुक्त उपक्रम में दोनों कंपनियों की हिस्सेदारी बराबर होगी। रेलवे ने निर्माण के साथ रखरखाव का जिम्मा भी एक ही अनुबंध के तहत सौंपकर यह सुनिश्चित किया है कि भविष्य में ट्रेनों के रख-रखाव को लेकर किसी प्रकार की असुविधा न हो और यात्री सेवाओं पर इसका सकारात्मक असर पड़े।

 

## बुनियादी ढांचे का अपग्रेडेशन और कॉन्ट्रैक्ट के चरण
 यह पूरा अनुबंध कई अलग-अलग चरणों और हिस्सों में विभाजित किया गया है। इस चौबीस हजार करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के दायरे में केवल ट्रेन के डिब्बे तैयार करना ही नहीं आता, बल्कि सरकारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और विभिन्न ट्रेनसेट डिपो का आधुनिकीकरण या अपग्रेडेशन भी शामिल है। इस व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यह है कि न केवल नई गाड़ियों का उत्पादन सुचारू रूप से हो सके, बल्कि उनके संचालन से जुड़ी बुनियादी ढांचागत सुविधाएं भी लंबे समय तक मजबूत बनी रहें और किसी भी तकनीकी चुनौती का सामना आसानी से किया जा सके।

 

## एक ही कंपनी के पास निर्माण और रख-रखाव
 इस पूरे प्रोजेक्ट की सबसे अनूठी और महत्वपूर्ण विशेषता इसका दीर्घकालिक मेंटेनेंस प्लान है। आमतौर पर देखा जाता है कि ट्रेन बनाने वाली एजेंसी अलग होती है और रखरखाव का काम किसी अन्य पक्ष को सौंपा जाता है, जिससे कई बार समन्वय की कमी खलती है। इस खामी को दूर करने के लिए निर्माण और पैंतीस साल की देखरेख का काम एक ही कंसोर्टियम को दिया गया है। जब ट्रेन बनाने वाली कंपनी को खुद ही लंबे समय तक उसका रखरखाव करना होता है, तो वह उत्पादन के दौरान ही गुणवत्ता और टिकाऊपन का विशेष ध्यान रखती है ताकि भविष्य में कम से कम तकनीकी समस्याएं आएं।

 

## लंबी दूरी के सफर के लिए खास डिजाइन
 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों को विशेष रूप से देश के विभिन्न महानगरों और प्रमुख दूरदराज के शहरों के बीच लंबी दूरी की यात्रा को आरामदायक बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। यही कारण है कि इन ट्रेनों के निर्माण में पैसेंजर कम्फर्ट, आधुनिक इंटीरियर डिजाइन और अत्याधुनिक तकनीक पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी साल जनवरी के महीने में पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन का संचालन शुरू हुआ था और अब इस योजना का दायरा बढ़ाकर इसे देश के कई अन्य अहम रूटों पर दौड़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। उल्लेखनीय है कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में तैयार किया गया था।

## इसका आप पर असर
यह प्रोजेक्ट देश में रेल यात्रा के अनुभव को पूरी तरह बदलने जा रहा है जिससे आम यात्रियों को लंबी दूरी के सफर में हवाई जहाज जैसी सुविधाएं मिलेंगी।

- **आम यात्रियों के लिए:** देश के बड़े शहरों के बीच आधुनिक स्लीपर ट्रेनों का संचालन शुरू होने से यात्रा अधिक आरामदायक और तेज हो जाएगी।

- **भारतीय रेलवे पर:** पैंतीस साल तक मेंटेनेंस का जिम्मा एक ही कंपनी के पास रहने से रेलवे पर रखरखाव का बोझ लंबे समय तक नहीं रहेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह बड़ा अनुबंध दोनों कंपनियों की तकनीकी क्षमताओं और रेलवे की आधुनिकाररण नीति के तहत तय किया गया है।

- **संयुक्त उपक्रम की आवश्यकता:** अस्सी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों के निर्माण और उनके पैंतीस साल लंबे रखरखाव को सुचारू रूप से चलाने के लिए भेल और टीटागढ़ ने हाथ मिलाया है।

- **गुणवत्ता नियंत्रण:** ट्रेन निर्माण के साथ मेंटेनेंस का काम एक ही कंपनी को देने से उत्पादन के दौरान ही उच्चतम गुणवत्ता मानकों का पालन सुनिश्चित होता है।

## सवाल-जवाब

### 1. वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रोजेक्ट के तहत कुल कितनी ट्रेनें बनाई जाएंगी?
इस प्रोजेक्ट के तहत कुल अस्सी वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें तैयार की जाएंगी।

### 2. किन दो कंपनियों को यह अनुबंध दिया गया है?
यह अनुबंध भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड के संयुक्त उपक्रम को दिया गया है।

### 3. इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत कितनी है?
यह पूरा प्रोजेक्ट करीब चौबीस हजार करोड़ रुपये का है जिसमें निर्माण और मेंटेनेंस दोनों शामिल हैं।

### 4. ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी कितने वर्षों तक रहेगी?
इन ट्रेनों के रखरखाव की जिम्मेदारी पैंतीस साल यानी वर्ष दो हजार इकसठ तक रहेगी।

### 5. देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन कहां बनाई गई थी?
देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को चेन्नई की इंटीग्रल कोच फैक्ट्री में बनाया गया था।

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