पश्चिम एशिया संघर्ष और पाकिस्तानी प्रतिबंधों के बीच भारतीय एयरलाइंस को बड़ा नुकसान, विदेशी कंपनियों की चांदी पश्चिम एशिया के तनाव और पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र के बंद होने से भारतीय विमानन कंपनियों को भारी झटका लगा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में उनका हिस्सा काफी घट गया है और विदेशी एयरलाइंस को बड़ा फायदा हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी भारी संघर्ष और तनाव के बीच भारतीय विमानन कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के मोर्चे पर बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि इस संकट और पड़ोसी देश के हवाई प्रतिबंधों की दोहरी मार से देश की घरेलू एयरलाइंस का बाजार हिस्सा लगातार सिमटता जा रहा है, जबकि विदेशी एयरलाइंस इस स्थिति का पूरा फायदा उठाकर अपने कारोबार को तेजी से आगे बढ़ा रही हैं। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय यानी डीजीसीए के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही यानी अप्रैल से जून के दौरान भारत आने और जाने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में सालाना आधार पर 9.1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद यह आंकड़ा घटकर 1.72 करोड़ रह गया। इस पूरी गिरावट के पीछे मुख्य रूप से भारतीय एयरलाइंस का खराब प्रदर्शन जिम्मेदार रहा है, क्योंकि विदेशी ऑपरेटरों की कुल संख्या में उल्टे बढ़ोतरी ही देखने को मिली है। भारतीय एयरलाइंस के पिछड़ने की मुख्य वजहें विमानन क्षेत्र के जानकारों और आंकड़ों के अनुसार, इस गिरावट के पीछे दो बड़े कारण प्रमुख हैं। पहला कारण पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र का भारतीय उड़ानों के लिए पूरी तरह बंद होना है, और दूसरा कारण पश्चिम एशिया के कई देशों में छिड़ा हुआ युद्ध और सैन्य संघर्ष है। अप्रैल 2025 के आखिरी हफ्ते से पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपना एयरस्पेस बंद कर रखा है, जिसके जवाब में भारत ने भी पाकिस्तानी विमानों के लिए अपने आसमान को प्रतिबंधित कर दिया था। तब से लेकर अब तक दोनों देश हर महीने इस पाबंदी की अवधि को बढ़ाते आ रहे हैं। इस पाबंदी की वजह से उत्तर भारत से पश्चिम एशिया, यूरोप, यूनाइटेड किंगडम और उत्तरी अमेरिका की ओर जाने वाली करीब 800 साप्ताहिक उड़ानों पर सीधा असर पड़ा है। भारतीय विमानों को अब लंबे और चक्करदार रास्तों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत बेहिसाब बढ़ गई है और कई रूटों पर विमानों को बीच में रिफ्यूलिंग के लिए रोकना पड़ रहा है। इसके अलावा, युद्ध की वजह से कई उड़ानें रद्द भी करनी पड़ी हैं। विदेशी एयरलाइंस को मिला सीधा फायदा भारतीय कंपनियों के उलट विदेशी एयरलाइंस को इस पूरे घटनाक्रम में जबरदस्त व्यावसायिक लाभ मिला है। विदेशी विमानन कंपनियों के पास पाकिस्तानी एयरस्पेस का इस्तेमाल करने की छूट है, जिससे उन्हें पश्चिम की ओर जाने में कोई अतिरिक्त बाधा या लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ता। इसके अलावा, जब पश्चिम एशिया के हालात बिगड़ने के कारण उड़ानों में कटौती करनी पड़ी, तो विदेशी ऑपरेटरों ने अपनी बची हुई क्षमता का इस्तेमाल तुरंत भारत आने-जाने वाले दूसरे रूटों पर सेवाएं बढ़ाने के लिए कर लिया। ताजा आंकड़ों के अनुसार, विदेशी एयरलाइंस के यात्रियों की कुल संख्या 6 प्रतिशत बढ़कर 1.08 करोड़ पर पहुंच गई, जो इससे पहले 1.02 करोड़ थी। इसके चलते विदेशी ऑपरेटरों का कुल बाजार हिस्सा 53.8 प्रतिशत से छलांग लगाकर सीधा 62.7 प्रतिशत हो गया। वहीं दूसरी ओर, भारतीय एयरलाइंस का कुल अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर ट्रैफिक 26.6 प्रतिशत गोता लगाकर 64.2 लाख रह गया, और उनका मार्केट शेयर 46.2 प्रतिशत से घटकर महज 37.3 प्रतिशत पर सिमट गया। प्रमुख भारतीय विमानन कंपनियों का हाल बाजार में आई इस भारी गिरावट का असर देश की लगभग सभी प्रमुख एयरलाइंस के प्रदर्शन पर साफ तौर पर दिखाई दिया है। • इंडिगो: देश की इस सबसे बड़ी एयरलाइन के अंतरराष्ट्रीय यात्रियों में 15.4 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई, और इसका बाजार हिस्सा घटकर 19.4 प्रतिशत रह गया। • एयर इंडिया: यात्रियों की संख्या में 27.2 प्रतिशत की बड़ी कमी आई और कंपनी का मार्केट शेयर लुढ़ककर 11.2 प्रतिशत पर आ गया। • एयर इंडिया एक्सप्रेस: पश्चिम एशिया के बाजारों पर मुख्य रूप से केंद्रित होने के कारण इस एयरलाइन की यात्री संख्या घटकर केवल आधी यानी 8.34 लाख रह गई। • स्पाइसजेट: इस सूची में सबसे बुरा हाल स्पाइसजेट का रहा, जिसने अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक में सबसे अधिक 56 प्रतिशत की भारी गिरावट का सामना किया। • अकासा एयर: मौजूदा संकट के इस दौर में अकासा एयर अकेली ऐसी भारतीय एयरलाइन रही जिसने अपने बढ़ते बेड़े और कम शुरुआती आधार के दम पर सकारात्मक वृद्धि दर्ज की। इस कंपनी ने अपना अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर ट्रैफिक सालाना आधार पर 26 प्रतिशत बढ़ाकर 1.72 लाख तक पहुंचा दिया। इसका आप पर असर भारत में: अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के महंगे होने और टिकटों की उपलब्धता घटने से देश के यात्रियों को विदेशों में यात्रा करने के लिए अधिक किराया चुकाना पड़ सकता है। विमानन क्षेत्र में: घरेलू एयरलाइंस के मुनाफे पर भारी दबाव बना रहेगा जबकि विदेशी कंपनियों का दबदबा भारतीय आसमान पर और मजबूत होगा। सवाल-जवाब 1. अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या में कितनी गिरावट आई है? चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में भारत आने-जाने वाले कुल अंतरराष्ट्रीय यात्रियों की संख्या सालाना आधार पर 9.1 प्रतिशत घटकर 1.72 करोड़ रह गई। 2. भारतीय एयरलाइंस का मार्केट शेयर कितना कम हुआ है? भारतीय एयरलाइंस का बाजार हिस्सा 46.2 प्रतिशत से घटकर 37.3 प्रतिशत रह गया है। 3. पाकिस्तानी एयरस्पेस कब बंद किया गया था? पाकिस्तान ने 24 अप्रैल 2025 को भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया था। 4. किस एकमात्र भारतीय एयरलाइन ने अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक में बढ़ोतरी दर्ज की? अकासा एयर इकलौती ऐसी भारतीय एयरलाइन रही जिसने अपने अंतरराष्ट्रीय पैसेंजर ट्रैफिक में 26 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की। https://trendkia.com/business/west-asia-conflict-and-pakistani-airspace-ban-crush-indian-airlines-while-foreign-carriers-profit-20085 TrendKia — Har trend, sabse pehle.