# पश्चिम एशिया संकट के बीच शुरू हुई आरबीआई की समीक्षा, क्या महंगा होने वाला है कर्ज

> पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और बढ़ती महंगाई के खतरों के बीच भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने तीन दिवसीय बैठक शुरू कर दी है, जिसके नतीजे 7 अक्टूबर को घोषित किए जाएंगे।

**Type:** article · **Category:** व्यापार · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/business/west-asia-snkata-ke-bicha-shuru-hui-rbi-ki-samiksha-kya-mahnga-hone-vala-hai-karja-43391 · **Language:** Hindi
**Tags:** आरबीआई एमपीसी, रेपो रेट, भारतीय रिजर्व बैंक, ब्याज दर, मौद्रिक नीति, गोल्डमैन सैक्स

भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने सोमवार को अपनी तीन दिवसीय द्विमासिक समीक्षा बैठक की शुरुआत कर दी है। पश्चिम एशिया के भू-राजनीतिक हालात में बढ़ते तनाव ने वैश्विक और घरेलू स्तर पर मुद्रास्फीति के जोखिमों को नए सिरे से भड़का दिया है। ऐसे नाजुक आर्थिक माहौल में वित्तीय विशेषज्ञों और बैंकरों के एक बड़े वर्ग का अनुमान है कि केंद्रीय बैंक नीतिगत ब्याज दर यानी रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करने का कड़ा कदम उठा सकता है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि यदि इस बैठक में ब्याज दरों को बढ़ाया जाता है, तो यह केंद्रीय बैंक के समग्र नीतिगत रुख में एक अहम बदलाव का स्पष्ट संकेत होगा।

## 7 अक्टूबर को सुबह घोषित किए जाएंगे नीतिगत फैसले
केंद्रीय बैंक ने साल 2025 के दौरान दरों में कटौती की शुरुआत करने के बाद से एक लंबे अरसे तक अपने नीतिगत रुख में कोई बड़ा फेरबदल नहीं किया है। रिजर्व बैंक ने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी साझा करते हुए बताया कि अर्थव्यवस्था से जुड़ी अंतर्दृष्टि, ताजा आकलन और आगे के नीतिगत दिशा-निर्देश जल्द ही जनता के समक्ष रखे जाएंगे। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया है कि मौद्रिक नीति समिति की इस तीन दिवसीय गहन चर्चा के बाद लिए गए अंतिम फैसलों की घोषणा 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे सार्वजनिक रूप से की जाएगी।

## फरवरी 2023 से लेकर अब तक की ब्याज दर यात्रा
ऐतिहासिक आंकड़ों पर नजर डालें तो भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछली बार फरवरी 2023 में रेपो दर को 0.25 प्रतिशत बढ़ाकर 6.50 प्रतिशत पर पहुंचाया था। उस फैसले के बाद पूरे वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान केंद्रीय बैंक ने नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं किया और लंबे समय तक स्थिरता बनाए रखी। इसके उपरांत वर्ष 2025 में आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया गया था, जिसके चलते वर्तमान समय में रेपो दर घटकर 5.25 प्रतिशत के स्तर पर मौजूद है। उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों और बैंकरों के बीच सामने आए रुझानों के अनुसार, अधिकांश विश्लेषकों को लगता है कि इस बार केंद्रीय बैंक रेपो दर में इजाफा कर सकता है, हालांकि नीतिगत रुख के औपचारिक बदलाव पर वित्तीय जानकारों के बीच अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।

## क्या मौजूदा स्तर पर ही थमी रहेगी नीतिगत दर
ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की चर्चाओं के बीच कुछ अर्थशास्त्री यथास्थिति बनाए रखने के पक्ष में भी तर्क दे रहे हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि रिजर्व बैंक फिलहाल रेपो रेट को उसके मौजूदा स्तर पर ही बरकरार रख सकता है। मदन सबनवीस ने कहा, "हम मानते हैं कि अगला ब्याज दर चक्र 0.50-0.75 प्रतिशत की बढ़ोतरी वाला होगा, लेकिन हमारा मानना है कि अक्टूबर की समीक्षा में रेपो रेट पर विराम ही रहेगा।" इस आकलन से स्पष्ट है कि केंद्रीय बैंक निकट भविष्य में दरों में इजाफा करने की तैयारी भले ही कर रहा हो, लेकिन मौजूदा बैठक में वह परिस्थितियों पर करीब से नजर बनाए रखने का विकल्प भी चुन सकता है।

## अक्टूबर और दिसंबर दोनों महीनों में दरें बढ़ने का अनुमान
दूसरी तरफ, प्रमुख वैश्विक वित्तीय संस्थान गोल्डमैन सैक्स का आर्थिक परिप्रेक्ष्य कहीं अधिक आक्रामक रुख की ओर इशारा करता है। फर्म की एक विश्लेषणात्मक रिपोर्ट में यह रेखांकित किया गया है कि अगस्त में हुई मौद्रिक नीति समिति की बैठक का विस्तृत ब्योरा आधिकारिक नीतिगत वक्तव्य की तुलना में काफी सख्त था। समिति के सदस्यों ने इस तथ्य को स्वीकार किया था कि खाद्य सामग्री और ईंधन की बढ़ती कीमतों से उत्पन्न होने वाली महंगाई अर्थव्यवस्था में दूसरे दौर के व्यापक असर छोड़ सकती है। यदि मूल्य वृद्धि का यह दबाव व्यापक और स्थायी रूप लेता है, तो केंद्रीय बैंक को सख्त नीतिगत कदम उठाने के लिए बाध्य होना पड़ेगा।

गोल्डमैन सैक्स ने अपनी ताजा रिपोर्ट में निष्कर्ष निकालते हुए कहा, "इसलिए अब हमारा अनुमान है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर में रेपो रेट में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है। इसके साथ एमपीसी अपने रुख को 'तटस्थ' से बदलकर 'संतुलित सख्ती' या 'समायोजन वापस लेने' वाला कर सकती है।" ऐसे में यदि यह अनुमान सच साबित होता है, तो आने वाले महीनों में कर्जदारों के लिए वित्तीय चुनौतियां बढ़ सकती हैं।

## इसका आप पर असर
यदि भारतीय रिजर्व बैंक आगामी 7 अक्टूबर को रेपो रेट में बढ़ोतरी का फैसला करता है, तो आम नागरिकों और कारोबारियों के लिए बैंक कर्ज तत्काल महंगे हो सकते हैं।

- **कर्जदारों पर असर:** रेपो रेट में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि होते ही होम लोन, ऑटो लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई सीधे बढ़ जाएगी। फ्लोटिंग रेट पर लोन लेने वाले ग्राहकों को अपने मासिक बजट में अतिरिक्त ब्याज भुगतान के लिए तैयार रहना होगा।
- **बचतकर्ताओं को लाभ:** नीतिगत ब्याज दर बढ़ने के बाद वाणिज्यिक बैंक सावधि जमा यानी एफडी और बचत खातों पर ब्याज दरों में इजाफा कर सकते हैं। वरिष्ठ नागरिकों और फिक्स्ड डिपॉजिट में पैसा लगाने वाले निवेशकों को अपनी जमा पूंजी पर बेहतर रिटर्न मिलने की उम्मीद है।
- **नए कर्ज की योजना:** जो लोग निकट भविष्य में नया मकान या कार खरीदने के लिए कर्ज लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें अब अधिक ब्याज दर चुकानी पड़ सकती है। ग्राहकों को सलाह दी जाती है कि वे दरों की औपचारिक घोषणा होने तक अपने ऋण समझौतों की शर्तों पर विचार करें।
- **घरेलू बजट और महंगाई:** पश्चिम एशिया के संकट के कारण ईंधन और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों से घरेलू खर्च पहले ही दबाव में हैं। यदि ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो उपभोग और मासिक खर्चों का प्रबंधन मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाएगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पश्चिम एशिया में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल व खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल के कारण मुद्रास्फीति के दोबारा अनियंत्रित होने का गंभीर खतरा पैदा हो गया है, जिसके चलते केंद्रीय बैंक को अपनी नरम मौद्रिक नीति पर पुनर्विचार करना पड़ रहा है।

- **भू-राजनीतिक तनाव और तेल के दाम:** पश्चिम एशिया में संघर्ष तेज होने से अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने और कच्चे तेल के दाम बढ़ने का सीधा जोखिम बना हुआ है। आयातित ईंधन महंगा होने से भारतीय अर्थव्यवस्था में समग्र लागत और उत्पादन मूल्य बढ़ने की आशंका गहरा गई है।
- **महंगाई के दूसरे दौर का खतरा:** खाद्य और ईंधन की निरंतर ऊंची कीमतों के कारण आवश्यक वस्तुओं और सेवाओं के दाम तेजी से बढ़ने लगते हैं। केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति को चिंता है कि यदि इस दबाव को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह टिकाऊ महंगाई में तब्दील हो सकता है।
- **नीतिगत रुख में सख्ती की ओर झुकाव:** समिति की पिछली बैठक के विवरणों से यह उजागर हुआ था कि नीति निर्माता बढ़ती कीमतों को लेकर अत्यधिक सतर्क हैं। नतीजतन, अर्थव्यवस्था को मुद्रास्फीति के झटके से बचाने के लिए 'तटस्थ' रुख को त्यागकर सख्ती की तरफ बढ़ने की जमीन तैयार हो चुकी है।

## सवाल-जवाब

### 1. आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की बैठक कब शुरू हुई?
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति की तीन दिवसीय बैठक सोमवार को शुरू हुई।

### 2. बैठक के अंतिम फैसलों की घोषणा कब और किस समय की जाएगी?
मौद्रिक नीति समिति के फैसलों की घोषणा 7 अक्टूबर को सुबह 10 बजे की जाएगी।

### 3. वर्तमान में रिजर्व बैंक का रेपो रेट किस स्तर पर है?
वर्तमान में भारतीय रिजर्व बैंक का रेपो रेट 5.25 प्रतिशत के स्तर पर है।

### 4. केंद्रीय बैंक ने पिछली बार रेपो रेट में बढ़ोतरी कब की थी?
रिजर्व बैंक ने आखिरी बार फरवरी 2023 में 0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर रेपो दर को 6.50 प्रतिशत किया था।

### 5. बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री का इस बैठक पर क्या रुख है?
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस का मानना है कि अक्टूबर की समीक्षा में दरों में कोई बदलाव नहीं होगा और यथास्थिति बनी रहेगी।

### 6. गोल्डमैन सैक्स ने रेपो रेट को लेकर क्या अनुमान लगाया है?
गोल्डमैन सैक्स का अनुमान है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर दोनों महीनों में रेपो रेट में 0.25-0.25 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर सकता है।

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