पश्चिमी यूरोप के उपद्रव से भारत के एक्सपोर्टर्स पस्त, क्रिसमस ऑर्डर में 30 से 40 फीसदी की भारी गिरावट फ्रांस, इटली और स्पेन में जारी विरोध प्रदर्शनों और तनाव के कारण भारतीय हैंडीक्राफ्ट व होम फर्निशिंग एक्सपोर्टर्स के क्रिसमस ऑर्डर में 30 से 40 प्रतिशत तक की कमी आई है, जिससे कारोबार पर गहरा असर पड़ा है। भारत के औद्योगिक शहरों से करीब 6,000 किलोमीटर दूर स्थित पश्चिमी यूरोपीय महाद्वीप के कई बड़े देशों में जारी उथल-पुथल ने भारतीय निर्यातकों की नींद उड़ा दी है। फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल जैसे प्रमुख देशों में जारी उग्र विरोध प्रदर्शनों और राजनीतिक अस्थिरता के कारण स्थानीय बाजारों में व्यावसायिक गतिविधियां बुरी तरह ठप हो गई हैं। कई शहरों में दुकानें और व्यापारिक केंद्र बंद पड़े हैं। यह समय भारतीय निर्यातकों के लिए बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि साल के इसी अंतिम हिस्से में पश्चिमी बाजारों में क्रिसमस उत्सव के लिए बड़े पैमाने पर सामान भेजा जाता है। नोएडा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के निर्यातकों को आशंका है कि अगर यूरोप के हालात जल्द नहीं सुधरे, तो महीनों की दिन-रात की मेहनत और करोड़ों रुपये का निवेश दांव पर लग सकता है। विशेष रूप से फर्नीचर, होम फर्निशिंग, हस्तशिल्प और हथकरघा उत्पादों के कारोबार से जुड़े उद्यमियों की चिंता सबसे ज्यादा बढ़ गई है। ऑर्डर में 30 से 40 प्रतिशत की गिरावट और उत्पादन लागत की दोहरी मार अक्टूबर का महीना भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए रीढ़ की हड्डी माना जाता है। इसी दौरान देश में बड़े अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों का आयोजन होता है, जहां अमेरिका और यूरोप के शीर्ष खरीदार भारतीय निर्माताओं से सीधे मिलते हैं और आगामी त्योहारों के सीजन के लिए अरबों रुपये के अनुबंधों पर हस्ताक्षर करते हैं। हालांकि, इस साल यूरोपीय बाजारों में बनी अशांति के चलते विदेशी खरीदारों की आवक में भारी गिरावट दर्ज की गई है। नोएडा स्थित निर्यात गृहों से जुड़े कारोबारियों के अनुसार, चालू सीजन में क्रिसमस आपूर्ति से संबंधित ऑर्डर में लगभग 30 से 40 प्रतिशत तक की सीधी गिरावट आई है। जितने ऑर्डर सामान्य वर्षों में इस अवधि तक मिल जाते थे, उसकी तुलना में इस बार मांग काफी सुस्त है। इसके साथ ही, भारतीय निर्यातकों को दोहरी मार का सामना करना पड़ रहा है। एक तरफ जहां विदेश से मिलने वाले ऑर्डर की मात्रा कम हो गई है, वहीं दूसरी तरफ माल ढुलाई से जुड़ी समस्याएं बेहद गंभीर रूप ले चुकी हैं। अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर जहाजरानी कंटेनरों के किराए और माल परिवहन के खर्च में बेतहाशा बढ़ोतरी हुई है। भारत के भीतर कच्चे माल की कीमतें बढ़ने और विनिर्माण लागत में इजाफे के कारण तैयार उत्पादों पर मिलने वाला लाभ मार्जिन लगभग खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है। विदेशी खरीदार कम दाम पर उत्पाद मांग रहे हैं, जबकि भारत में सामान बनाने और उसे विदेश भेजने का कुल खर्च लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में निर्यात गृहों के सामने अपनी इकाइयों को चालू रखना एक बड़ी व्यावहारिक चुनौती बन गया है। क्रिसमस सीजन का व्यापारिक महत्व और 92,000 करोड़ रुपये का आंकड़ा पश्चिमी देशों में क्रिसमस और नव वर्ष के दौरान घरों की सजावट, नए फर्नीचर की खरीदारी, परिधान और विशिष्ट हस्तशिल्प वस्तुओं की खपत अपने चरम पर होती है। यूरोपीय और अमेरिकी रिटेल कंपनियां इन सामानों की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए महीनों पहले से भारतीय कारखानों में ऑर्डर दर्ज कराती हैं, ताकि समय रहते माल समुद्री जहाजों के माध्यम से विदेशी बंदरगाहों तक पहुंच सके। पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के आंकड़ों को देखें तो केवल भारत के होम फर्निशिंग सेक्टर ने लगभग 92,000 करोड़ रुपये का विशाल निर्यात दर्ज किया था। इस आंकड़े से स्पष्ट होता है कि देश की आर्थिक प्रगति में इस क्षेत्र का योगदान कितना व्यापक है। लेकिन इस बार अक्टूबर के व्यापार मेलों में परिदृश्य पूरी तरह बदला हुआ दिखाई दे रहा है। निर्यातकों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय मेलों में यूरोपीय खरीदारों की संख्या बहुत कम रही है। जो खरीदार आ भी रहे हैं, वे नए ऑर्डर देने में अत्यधिक हिचकिचाहट दिखा रहे हैं और उनकी व्यापारिक पूछताछ की संख्या भी पिछले सालों के मुकाबले काफी घट गई है। बाजार में बनी इस अनिश्चितता के कारण करोड़ों रुपये के तैयार स्टॉक के फंसने का खतरा पैदा हो गया है। अमेरिकी टैरिफ की अनिश्चितता और औद्योगिक रोजगार पर मंडराता खतरा भारतीय निर्यातकों की मुश्किलें केवल यूरोपीय बाजारों के संकट तक सीमित नहीं हैं। दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था, अमेरिका में आयात शुल्क यानी टैरिफ को लेकर बनी अनिश्चितता ने भी कारोबारियों को पहले से ही परेशानी में डाल रखा है। अमेरिकी खरीदारों ने आयात नीतियों में संभावित बदलावों के डर से अपने कई पुराने ऑर्डर पहले ही रोक दिए थे। अब जब यूरोप से आने वाली मांग भी सुस्त पड़ गई है, तो भारतीय निर्यात क्षेत्र के लिए दोनों मोर्चों पर एक साथ संकट गहरा गया है। यदि विदेशी बाजारों में मांग की यह सुस्ती लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका सीधा प्रभाव भारत में स्थित विनिर्माण इकाइयों के परिचालन पर पड़ेगा। ऑर्डर घटने का सीधा अर्थ है कि कारखानों में उत्पादन की पारियों को कम करना पड़ेगा, जिससे इकाइयों की कुल आय में बड़ी गिरावट आएगी। इसके अलावा, कारखानों में काम करने वाले लाखों कुशल और अकुशल कारीगरों व कर्मचारियों के रोजगार पर भी इसका बुरा असर पड़ने की संभावना है। हालांकि, अलग-अलग सेक्टर और अलग-अलग कंपनियों पर इसका प्रभाव एक जैसा नहीं होगा। वास्तविक आर्थिक नुकसान इस बात पर निर्भर करेगा कि विदेशी खरीदार आने वाले हफ्तों में कितने ऑर्डर पूरी तरह रद्द करते हैं या कितने ऑर्डर अनिश्चित काल के लिए स्थगित करते हैं। निर्यात संवर्धन और वित्तीय सहायता के लिए सरकार से मांग इस अभूतपूर्व संकट की घड़ी में भारतीय निर्यातकों ने केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप और सहायता की गुहार लगाई है। कारोबारियों का कहना है कि अतीत में सरकार निर्यातकों को नए विदेशी बाजारों की खोज करने और अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों तक पहुंचने के लिए बाजार विकास सहायता प्रदान करती थी। इस तरह की वित्तीय मदद से निर्यातक वैश्विक व्यापार मेलों में स्टॉल लगाने, नए देशों की यात्रा करने और नए खरीदारों से संपर्क स्थापित करने में सक्षम होते थे। वर्तमान समय में विदेशी बाजारों में जाकर नए व्यापारिक संपर्क बनाने का खर्च बहुत ज्यादा बढ़ चुका है। निर्यातकों के अनुमान के अनुसार, आज के दौर में किसी एक देश में नए ग्राहक तलाशने और व्यापार वार्ता आयोजित करने के लिए प्रति व्यक्ति लगभग 5 से 6 लाख रुपये तक का खर्च आता है। जब वैश्विक मंदी के कारण ऑर्डर में 40 प्रतिशत तक की कमी आ चुकी है, तब इतना बड़ा खर्च उठाना मध्यम और छोटे निर्यातकों के लिए लगभग असंभव साबित हो रहा है। इसके अलावा, विदेशी खरीदारों की ओर से भुगतानों में हो रही देरी ने निर्यातकों की कार्यशील पूंजी को पूरी तरह ब्लॉक कर दिया है। निर्यातकों की मांग है कि सरकार जल्द से जल्द वित्तीय प्रोत्साहन और बाजार विस्तार से जुड़ी योजनाएं शुरू करे, ताकि भारतीय निर्यात क्षेत्र को इस वैश्विक संकट से उबारा जा सके। इसका आप पर असर पश्चिमी यूरोप में उथल-पुथल के कारण भारतीय निर्यात क्षेत्र को भारी नुकसान हो रहा है, जिसका सीधा असर निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था और रोजगार पर पड़ेगा। • भारत भर में: यूरोपीय देशों में ऑर्डर 30 से 40 प्रतिशत घटने के कारण देश के लगभग ₹92,000 करोड़ के होम फर्निशिंग और हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्ट सेक्टर पर नकारात्मक असर पड़ेगा। इससे निर्यातकों का मुनाफा घटेगा और नई विनिर्माण गतिविधियों की गति धीमी हो सकती है। • नोएडा और पश्चिमी यूपी में: नोएडा, मुरादाबाद और भदोही जैसे प्रमुख निर्यात केंद्रों में स्थित कारखानों में काम के घंटे और उत्पादन की पारियां घट सकती हैं। इसके चलते स्थानीय कारीगरों और फैक्ट्री कर्मचारियों की आय तथा रोजगार पर सीधा असर पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ यूरोप के प्रमुख देशों में चल रहे विरोध प्रदर्शनों और आर्थिक सुस्ती ने उत्सव के सीजन में भारतीय सामानों की वैश्विक मांग को कम कर दिया है। • यूरोपीय अशांति: फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में जारी उग्र प्रदर्शनों की वजह से मुख्य बाजारों और रिटेल दुकानों में ताले लग गए हैं, जिससे विदेशी खरीदार नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं। • लागत में वृद्धि: अंतरराष्ट्रीय समुद्री शिपिंग कंटेनरों के किराए और स्थानीय उत्पादन लागत में वृद्धि के कारण निर्यातकों के लिए कम ऑर्डर पर मुनाफा कमाना मुश्किल हो गया है। • अमेरिकी टैरिफ का डर: अमेरिका में आयात शुल्कों को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अमेरिकी खरीदारों ने भी पहले ही अपने ऑर्डर रोक रखे हैं। सवाल-जवाब 1. यूरोप में तनाव के कारण भारतीय एक्सपोर्टर्स को कितना नुकसान हो रहा है? यूरोपीय देशों में विरोध प्रदर्शनों के कारण इस बार क्रिसमस के ऑर्डर में लगभग 30 से 40 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है। 2. कौन-कौन से भारतीय उद्योग इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं? फर्नीचर, होम फर्निशिंग, हस्तशिल्प (हैंडीक्राफ्ट) और हथकरघा (हैंडलूम) जैसे सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। 3. कौन से यूरोपीय देश इस समय व्यापारिक उथल-पुथल का सामना कर रहे हैं? फ्रांस, इटली, स्पेन और पुर्तगाल में विरोध प्रदर्शनों की वजह से बाजार प्रभावित हुए हैं। 4. पिछले वित्त वर्ष में भारत का होम फर्निशिंग एक्सपोर्ट कितना था? वित्तीय वर्ष 2025-26 में भारत से होम फर्निशिंग का कुल एक्सपोर्ट लगभग 92,000 करोड़ रुपये का रहा था। 5. भारतीय एक्सपोर्टर्स सरकार से किस तरह की मदद मांग रहे हैं? एक्सपोर्टर्स विदेशी बाजारों में ग्राहक तलाशने के लिए सरकारी सहायता (मार्केट डेवलपमेंट सपोर्ट), व्यापार मेलों के लिए सब्सिडी और भुगतान में देरी की समस्या का समाधान चाहते हैं। https://trendkia.com/business/western-europe-unrest-hits-indian-exporters-hard-as-christmas-orders-fall-up-to-40-percent-52310 TrendKia — Har trend, sabse pehle.