युद्ध के संकट से निकला बीयर का कारोबार, केरल से पोलैंड पहुंचे चंद्रमोहन नल्लूर ऐसे बने 30 देशों के ब्रांड मालिक केरल के पलक्कड़ से ताल्लुक रखने वाले चंद्रमोहन नल्लूर ने पोलैंड में संकट के बीच एक नया उद्यम खड़ा किया जो आज तीस देशों तक फैल चुका है। वैश्विक उथल-पुथल और युद्ध के माहौल में कई बार अप्रत्याशित अवसर सामने आ जाते हैं। ऐसा ही कुछ पोलैंड में रह रहे एक भारतीय नागरिक के साथ हुआ, जिन्होंने विकट परिस्थितियों को अपने पक्ष में मोड़ते हुए वैश्विक बाजार में अपनी एक अलग जगह बनाई। केरल के पलक्कड़ जिले से ताल्लुक रखने वाले चंद्रमोहन नल्लूर आज अपने लोकप्रिय ब्रांड मलयाली के जरिए दुनिया भर के तीस देशों में कारोबार का विस्तार कर चुके हैं। खास बात यह है कि निजी जीवन में शराब से दूरी रखने वाले चंद्रमोहन ने बीयर के इस बड़े ब्रांड की नींव एक अनूठी परिस्थिति के बीच रखी थी। पोहे के अटके सौदे से शुरू हुई बीयर की कहानी इस अनूठी कारोबारी यात्रा की शुरुआत किसी पेय पदार्थ के उत्पादन की योजना से नहीं हुई थी, बल्कि इसकी जड़ें पांच टन पोहे के एक व्यापारिक सौदे में जुड़ी हैं। चंद्रमोहन इंडो-पोलिश चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज से जुड़े हुए हैं और उनका मुख्य कार्य भारतीय कंपनियों को पोलिश बाजार में तथा पोलिश उद्यमों को भारत में अपनी जड़ें जमाने में सहायता करना है। इसी सिलसिले में वाराणसी के एक कारोबारी ने पोलैंड में रह रहे अफ्रीकी समुदाय के लिए पांच टन पोहा मंगाया था। रूस और यूक्रेन के बीच जंग छिड़ने से ठीक चार दिन पहले मुद्रा दरों में भारी उतार-चढ़ाव आ गया, जिससे यह पूरा सौदा संकट में पड़ गया और अंततः टूट गया। जब पांच टन पोहा हाथ में रह गया और खरीदार पीछे हट गया, तब चंद्रमोहन और उनकी टीम ने एक नया और रचनात्मक विकल्प तलाशने का फैसला किया। उन्होंने उसी पोहे से बीयर तैयार करने का जोखिम उठाया और अपने उत्पाद का नाम मलयाली रखा। यह प्रयोग इतना सफल साबित हुआ कि देखते ही देखते यह एक स्थापित व्यापार में बदल गया। आज यह ब्रांड दुनिया के तीस अलग-अलग देशों के बाजारों तक अपनी पहुंच बना चुका है, जो यह साबित करता है कि कठिन समय में सूझबूझ से काम लेने पर नए रास्ते खुल सकते हैं। चुनौतियों और बदलते बाजार के बीच कारोबार किसी भी उत्पादक के लिए उसके अपने उत्पाद का उपभोक्ता होना आवश्यक नहीं है, और चंद्रमोहन का यह सफर इस बात का जीता-जागता उदाहरण है। शराब न पीने के बावजूद उन्होंने इस क्षेत्र में जो सफलता हासिल की, उसके पीछे बाजार की गहरी समझ और सही टीम का होना सबसे बड़ा कारण रहा। हालांकि, भू-राजनीतिक तनाव और संघर्षों का असर आज भी उनके व्यवसाय पर प्रत्यक्ष रूप से पड़ता है। ईंधन के बढ़ते दाम और परिवहन की महंगी लागत सीधे तौर पर उत्पादन खर्च को बढ़ा देती है। इसके अलावा मध्य पूर्व के देशों में हालिया तनाव के कारण माल ढुलाई और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापार करना पहले से अधिक चुनौतीपूर्ण हो गया है। वैश्विक परिदृश्य में भारतीय पासपोर्ट की मजबूती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदलते हालातों और सुरक्षा के पहलुओं पर बात करते हुए चंद्रमोहन ने भारतीय नागरिकता के महत्व को रेखांकित किया। जब उनसे पूछा गया कि क्या वह कभी पोलैंड की नागरिकता लेना चाहेंगे, तो उनका रुख बहुत स्पष्ट था। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक माहौल को देखते हुए किसी अन्य देश के मुकाबले भारतीय पासपोर्ट होना ज्यादा बेहतर और सुरक्षित है। दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच उनका यह दृष्टिकोण देश के प्रति उनके विश्वास और भारतीय पासपोर्ट की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है। संकट के समय मानवीय सहायता और ऑपरेशन गंगा चंद्रमोहन का योगदान केवल व्यावसायिक सीमाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने मानवीय आपदा के दौर में भी अपनी सक्रिय भूमिका निभाई। रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध के शुरुआती दिनों में जब हजारों छात्र और आम नागरिक जान बचाकर पोलैंड की सीमा पर पहुंच रहे थे, तब वह राहत कार्यों में डटे हुए थे। सीमा पर पहुंचे माता-पिता और युवा बेहद डरे हुए थे और दूसरे देश में प्रवेश करते ही उनके सामने मोबाइल कनेक्टिविटी की बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। इस संकट से निपटने के लिए उन्होंने अपनी पुरानी टेलीकॉम कंपनी से संपर्क साधा और करीब पांच से छह हजार सिम कार्ड का इंतजाम करवाया। इन सभी सिम कार्ड के साथ बीस जीबी इंटरनेट डेटा पूरी तरह मुफ्त उपलब्ध कराया गया, जिससे सीमा पर फंसे लोगों को अपने स्वजनों से संपर्क साधने में भारी मदद मिली। उस दौर की यादों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि लगभग एक हफ्ते तक तीन से चार सौ स्वयंसेवक अलग-अलग भाषाओं में लोगों की सहायता कर रहे थे और वह खुद उन सबके बीच समन्वय का काम संभाल रहे थे। उस समय सबसे बड़ी चुनौती केवल सीमा पार कराना नहीं, बल्कि डरे हुए परिवारों को ढांढस बंधाना था क्योंकि किसी को नहीं पता था कि रूसी सेना आगे किस रुख पर बढ़ेगी। उन्होंने भारत सरकार के ऑपरेशन गंगा की सराहना करते हुए कहा कि निकासी अभियान ने न केवल भारतीयों को सुरक्षित निकाला बल्कि अन्य देशों के नागरिकों की भी मदद की। भारत और पोलैंड के बीच बढ़ते व्यापारिक अवसर आने वाले समय को लेकर चंद्रमोहन भारत और पोलैंड के द्विपक्षीय संबंधों को लेकर बेहद आशावादी नजर आते हैं। उनका मानना है कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और व्यावसायिक सहयोग केवल आयात और निर्यात तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि इसका दायरा बहुत बड़ा है। भारतीय और पोलिश कंपनियों को संयुक्त उद्यमों, उन्नत तकनीक के आदान-प्रदान और पेशेवर प्रतिभाओं के सही इस्तेमाल पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके अनुसार इस तरह की साझेदारियों में मजबूत नेटवर्किंग और आपसी भरोसा सबसे अहम भूमिका निभाते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो हजार चौबीस की पोलैंड यात्रा के बाद से दोनों देशों के कारोबारी माहौल में एक सकारात्मक बदलाव आया है, जिससे नए रास्ते खुल रहे हैं। इसका आप पर असर अंतरराष्ट्रीय व्यापार और युद्ध जनित परिस्थितियों का यह असर सीधे तौर पर आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक उत्पादों की लागत पर प्रभाव डालता है। • भारत में: अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मुद्रा के उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव भारतीय निर्यातकों की लागत और ढुलाई को प्रभावित करते हैं। इससे विदेशों में व्यापार करने वाले उद्यमियों को नए विकल्पों की तलाश करनी पड़ती है। • पोलैंड में: पूर्वी यूरोप में जारी संघर्ष के माहौल और ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण वहां स्थानीय स्तर पर परिवहन और उत्पादन खर्च में बढ़ोतरी देखी जा रही है। इसका असर सीधे तौर पर छोटे और मध्यम आकार के नए व्यवसायों पर पड़ता है। ऐसा क्यों हुआ रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े संघर्ष ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को बाधित किया, जिसके कारण कई व्यापारिक सौदे अचानक प्रभावित हुए। • मुद्रा में उतार-चढ़ाव: युद्ध की शुरुआत से ठीक पहले विनिमय दरों में आए भारी बदलाव के कारण वाराणसी से भेजा गया पांच टन पोहे का सौदा बीच में ही टूट गया। • आसन्न संकट से नए विचार: जब पारंपरिक खरीदार पीछे हट गए तो स्थानीय उद्यमी ने उसी अनाज से नया पेय उत्पाद तैयार करने का जोखिम उठाया। • लॉजिस्टिक्स की चुनौतियाँ: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और ईंधन के महंगे होने से माल ढुलाई का खर्च बढ़ गया है, जिससे वैश्विक व्यापार प्रभावित होता है। सवाल-जवाब 1. चंद्रमोहन नल्लूर मूल रूप से कहां के रहने वाले हैं? चंद्रमोहन नल्लूर मूल रूप से केरल के पलक्कड़ जिले के रहने वाले हैं। 2. उनके ब्रांड का क्या नाम है जो दुनिया के 30 देशों में बिकता है? उनके बीयर ब्रांड का नाम 'मलयाली' है जो वर्तमान में तीस देशों में अपनी मौजूदगी रखता है। 3. यह कारोबार शुरू करने से पहले कौन सा सौदा संकट में पड़ा था? वाराणसी के एक कारोबारी द्वारा मंगाए गए पांच टन पोहे का सौदा मुद्रा में उतार-चढ़ाव के कारण संकट में पड़ गया था। 4. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उन्होंने किस राहत कार्य में मदद की थी? उन्होंने सीमा पर फंसे छात्रों और नागरिकों के लिए पांच से छह हजार सिम कार्ड और मुफ्त इंटरनेट डेटा उपलब्ध कराने में मदद की थी। 5. उन्होंने भारतीय पासपोर्ट के बारे में क्या राय दी है? उन्होंने कहा कि मौजूदा भू-राजनीतिक हालात में किसी अन्य पासपोर्ट के मुकाबले भारतीय पासपोर्ट रखना सबसे सुरक्षित है। 6. किस प्रधानमंत्री की यात्रा के बाद भारत-पोलैंड संबंधों में बदलाव आया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की साल 2024 की पोलैंड यात्रा के बाद दोनों देशों के कारोबारी माहौल में सकारात्मक बदलाव आया। प्रेरणा और सबक चंद्रमोहन नल्लूर की यह असाधारण यात्रा दिखाती है कि किस प्रकार विकट परिस्थितियों और व्यावसायिक संकट को एक बड़े अवसर में बदला जा सकता है। • संकट में अवसर तलाशें: जब पारंपरिक व्यापारिक सौदा टूट गया, तब उद्यमी ने हार मानने के बजाय उपलब्ध सामग्री से नया उत्पाद बनाकर सफलता हासिल की। • उत्पादक होना जरूरी नहीं: किसी खास व्यवसाय में सफल होने के लिए उस उत्पाद का खुद उपभोक्ता होना आवश्यक नहीं है, बल्कि बाजार की मांग की समझ मायने रखती है। • मुश्किल समय में दृढ़ता: भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति श्रृंखला की बाधाओं के बावजूद निरंतर प्रयास करने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में पहचान बनाई जा सकती है। • मानवीय दायित्व निभाएं: संकट के समय में जरूरतमंदों की मदद करना और सामाजिक समन्वय स्थापित करना एक सच्चे उद्यमी की पहचान है। https://trendkia.com/business/yuddha-ke-snkata-se-nikala-beer-ka-karobara-kerala-se-poland-pahunche-chandramohan-nalloor-aise-bane-30-deshon-ke-brand-malika-50617 TrendKia — Har trend, sabse pehle.