यूरोपीय यूनियन के भारी जुर्माने के खिलाफ एलन मस्क के समर्थन में उतरी अमेरिकी सरकार, अदालत में दखल की मांग अमेरिकी न्याय विभाग ने यूरोपीय यूनियन द्वारा सोशल मीडिया मंच X पर लगाए गए 12 करोड़ यूरो के जुर्माने को रद्द कराने के लिए लक्जमबर्ग अदालत में अर्जी दाखिल की है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X और उसके मालिक एलन मस्क को यूरोपीय यूनियन के कड़े नियमों के तहत लगे भारी जुर्माने से बचाने के लिए वाशिंगटन सीधे कानूनी मैदान में कूद पड़ा है। अमेरिकी न्याय विभाग ने विदेश विभाग की मदद से यूरोपीय संघ की जनरल कोर्ट में एक विशेष आवेदन पेश किया है। लक्जमबर्ग स्थित इस अदालत से अपील की गई है कि वह मस्क की उस कानूनी चुनौती में अमेरिकी प्रशासन को पक्षकार बनने की अनुमति दे, जिसमें यूरोपीय आयोग के आदेश को पूरी तरह खारिज करने की मांग की गई है। अब इस यूरोपीय अदालत को तय करना है कि क्या अमेरिकी सरकार के पास इस विवाद में सीधे दखल देने का कानूनी अधिकार बनता है। अमेरिकी कंपनियों की ढाल बना वाशिंगटन अमेरिकी प्रशासन का तर्क है कि उसे घरेलू कंपनियों के अधिकारों और कारोबारी हितों की रक्षा के लिए इस मामले में शामिल होना जरूरी है। यह पूरा मामला डिजिटल सर्विसेज एक्ट (डीएसए) के तहत ब्लॉक की पहली बड़ी दंडात्मक कार्रवाई के रूप में सामने आया है, जो भविष्य के लिए एक मिसाल कायम कर सकता है। इस यूरोपीय कानून के जरिए बड़ी ऑनलाइन कंपनियों पर गैरकानूनी और नुकसानदेह सामग्री की रोकथाम के लिए कड़े नियम लागू किए गए हैं। अमेरिकी पक्ष का कहना है कि मेटा के फेसबुक और इंस्टाग्राम, गूगल के यूट्यूब, और माइक्रोसॉफ्ट के लिंक्डइन जैसे कई बड़े डिजिटल मंचों के मुख्यालय अमेरिका में स्थित हैं और ये सभी अमेरिकी अर्थव्यवस्था में भारी योगदान देते हैं। अमेरिकी न्याय विभाग के सिविल डिवीजन के सहायक अटॉर्नी जनरल ब्रेट ए. शुमेट ने इस संबंध में स्पष्ट किया कि वे यूरोपीय आयोग द्वारा अमेरिकी नवाचार और आर्थिक विकास के इंजनों को नियंत्रित करने के किसी भी नियामक अतिक्रमण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। ट्रांस-अटलांटिक रिश्तों में बढ़ता तनाव अमेरिकी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस विवाद के नतीजे अमेरिका और यूरोपीय संघ के आपसी कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों पर भी असर डाल सकते हैं। दरअसल, डिजिटल कानून दोनों पक्षों के बीच पहले से ही गंभीर तकरार का कारण बना हुआ है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन यूरोपीय जुर्मानों को विदेशी स्तर पर की जाने वाली जबरन वसूली करार दे चुके हैं। पिछले साल ट्रंप ने उन देशों पर आयात शुल्क लगाने की चेतावनी भी दी थी जो डिजिटल नियम लागू कर रहे हैं। उनका आरोप था कि ये सभी नियम अमेरिकी तकनीक को नुकसान पहुंचाने या उसके साथ भेदभाव करने के इरादे से बनाए गए हैं। इसी तरह, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने भी डीएसए के कंटेंट मॉडरेशन नियमों को तानाशाही सेंसरशिप कहकर उनकी आलोचना की है। यूरोपीय आयोग की जांच और जुर्माने की वजह यूरोपीय आयोग ने दो साल लंबी चली विस्तृत जांच के बाद दिसंबर में X पर 12 करोड़ यूरो (लगभग 13.7 करोड़ डॉलर) का यह भारी जुर्माना लगाया था। नियामक ने पाया कि प्लेटफॉर्म ने पारदर्शिता से जुड़ी अपनी वैधानिक जिम्मेदारियों का उल्लंघन किया है। आयोग के फैसले में कहा गया कि केवल भुगतान के आधार पर मिलने वाले ब्लू चेकमार्क को सत्यापित खाता बताना आम उपयोगकर्ताओं को भ्रम में डालता है। इसके अलावा, नियामक ने यह भी रेखांकित किया कि प्लेटफॉर्म का अधूरा और अप्राप्य विज्ञापन रिपोजिटरी, साथ ही स्वतंत्र शोधकर्ताओं को सार्वजनिक डेटा तक पहुंच न देना, साइट से जुड़े संभावित जोखिमों के अध्ययन में बाधा बनता है। जुलाई के महीने में आयोग ने डेटा एक्सेस संबंधी खामियों को ठीक करने की X की योजना को मंजूरी दे दी थी, जिसे लागू करने के लिए कंपनी को छह महीने की समय-सीमा दी गई है। फैसले को चुनौती और वैश्विक नियमों पर मस्क की आपत्ति एलन मस्क और X ने फरवरी में ही इस फैसले के खिलाफ दोनों पक्षों की तरफ से संयुक्त अपील दायर कर दी थी। अपनी अपील में उन्होंने यूरोपीय संघ की जांच प्रक्रिया को अधूरा और सतही करार दिया, जबकि डीएसए के प्रावधानों की व्याख्या को बेहद विकृत बताया। उनका यह भी आरोप था कि उन्हें बचाव का उचित अधिकार नहीं दिया गया, जो सीधे तौर पर अभियोजन के पक्षपात को दर्शाता है। मस्क लगातार सोशल मीडिया कंपनियों पर लगाए जा रहे कड़े प्रशासनिक और वित्तीय बोझ की शिकायत करते रहे हैं, क्योंकि दुनिया भर की सरकारें इन मंचों के खतरों को सीमित करने के नाम पर नए-नए नियम बना रही हैं। इसी कड़ी में जुलाई के दौरान उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया प्रतिबंध से जुड़े व्यापक जांच अधिकारों को अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन बताया था। उस समय क्वीन मैरी यूनिवर्सिटी ऑफ लंदन में इंटरनेट कानून की प्रोफेसर जूलिया हॉर्नले ने स्पष्ट किया था कि किसी भी देश के नियामकों के पास अपनी सीमा के भीतर संचालित होने वाली कंपनी से जरूरी खुलासे मांगने का पूरा विधिक अधिकार होता है। इसका आप पर असर अमेरिकी सरकार के इस कड़े कदम से सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं, वैश्विक टेक कंपनियों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार नियमों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा। • सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं पर असर: सत्यापन बैज और पारदर्शी नियमों के मामले में यूरोपीय और वैश्विक स्तर पर अलग नीतियां देखने को मिल सकती हैं। यदि यूरोपीय आयोग के नियम बने रहते हैं तो कंपनियों को भुगतान आधारित ब्लू टिक की पारदर्शिता बढ़ानी होगी और शोधकर्ताओं को डेटा उपलब्ध कराना होगा। • वैश्विक टेक कंपनियों के लिए नजीर: अमेरिका का यह हस्तक्षेप मेटा, गूगल और माइक्रोसॉफ्ट जैसी अन्य दिग्गज फर्मों के लिए विनियामक संरक्षण की दिशा तय करेगा। यदि वाशिंगटन इस जुर्माने को रोकने में सफल रहता है तो इन कंपनियों को यूरोपीय संघ के कड़े तकनीकी कानूनों से निपटने में अतिरिक्त मजबूती मिलेगी। • व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शुल्कों का जोखिम: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा पहले दी गई टैरिफ की चेतावनियों के चलते दोनों क्षेत्रों के बीच व्यापारिक तनाव बढ़ सकता है। यदि यह गतिरोध सुलझा नहीं तो इसका असर अंतरराष्ट्रीय टेक सेवाओं की कीमतों और वैश्विक नियामकीय मानकों पर पड़ सकता है। • सामग्री और सेंसरशिप बहस: डिजिटल मंचों पर निगरानी और अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी टकराव तेज होगा। उपयोगकर्ताओं के लिए मंचों पर पोस्ट नियंत्रण और मॉडरेशन की नीतियों में क्षेत्रीय आधार पर बदलाव आ सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह पूरा कानूनी विवाद यूरोपीय संघ के कड़े डिजिटल नियमों के तहत X पर लगाए गए भारी जुर्माने और वाशिंगटन द्वारा अमेरिकी टेक कंपनियों के बचाव में खड़े होने के कारण पैदा हुआ है। • डीएसए के तहत पहला दंडात्मक फैसला: यूरोपीय आयोग ने दो साल की जांच के बाद पाया कि X ने अपने विज्ञापनों, शोधकर्ताओं को डेटा पहुंच और पेड ब्लू टिक सत्यापन में पारदर्शिता नियमों का उल्लंघन किया है। इसी आधार पर दिसंबर में प्लेटफॉर्म पर 12 करोड़ यूरो का रिकॉर्ड जुर्माना लगाया गया। • अमेरिकी आर्थिक हितों की सुरक्षा: अमेरिकी न्याय विभाग का मानना है कि यूरोपीय संघ द्वारा अपने डिजिटल कानूनों का उपयोग अमेरिकी नवाचार और प्रमुख तकनीकी कंपनियों को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है। चूंकि फेसबुक, यूट्यूब और लिंक्डइन जैसी कंपनियां अमेरिकी अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देती हैं, इसलिए प्रशासन ने इस मामले में दखल दिया। • कूटनीतिक और राजनीतिक तकरार: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इन जुर्मानों को विदेशी जबरन वसूली कह चुके हैं और जवाबी शुल्क लगाने की चेतावनी दे चुके हैं, जबकि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इन नियमों को सेंसरशिप बताया है। इस राजनीतिक पृष्ठभूमि ने कानूनी लड़ाई को एक बड़े ट्रांस-अटलांटिक टकराव में तब्दील कर दिया है। • कंपनी द्वारा कानूनी चुनौती: एलन मस्क और X ने फरवरी में लक्जमबर्ग अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए यूरोपीय आयोग की जांच को पक्षपातपूर्ण और सतही बताया था, जिसके बाद अमेरिकी सरकार ने भी इसमें औपचारिक रूप से शामिल होने की अर्जी दी। सवाल-जवाब 1. यूरोपीय संघ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कितना जुर्माना लगाया है? यूरोपीय आयोग ने X पर 12 करोड़ यूरो (लगभग 13.7 करोड़ डॉलर) का जुर्माना लगाया है। 2. X पर किस नियम के उल्लंघन का आरोप लगा था? प्लेटफॉर्म पर डिजिटल सर्विसेज एक्ट के तहत विज्ञापनों की पारदर्शिता, शोधकर्ताओं को डेटा पहुंच न देने और पैसे देकर मिलने वाले ब्लू टिक को सत्यापित बताने के आरोप लगे थे। 3. अमेरिकी सरकार इस मामले में क्यों हस्तक्षेप कर रही है? अमेरिकी न्याय विभाग का तर्क है कि वह नवाचार के इंजन कही जाने वाली घरेलू तकनीकी कंपनियों को यूरोपीय नियामक अतिक्रमण से बचाने के लिए अदालत में उतरा है। 4. इस मामले पर अदालत कब और कहां फैसला करेगी? लक्जमबर्ग स्थित यूरोपीय संघ की जनरल कोर्ट यह तय करेगी कि अमेरिकी सरकार को इस कानूनी चुनौती में हस्तक्षेप करने का अधिकार है या नहीं। 5. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोपीय तकनीकी नियमों पर क्या रुख अपनाया था? डोनाल्ड ट्रंप ने इन जुर्मानों को विदेशी जबरन वसूली कहा था और डिजिटल नियम लागू करने वाले देशों पर आयात शुल्क लगाने की चेतावनी दी थी। https://trendkia.com/business/yuropiya-yuniyana-ke-bhari-jurmane-ke-khilapha-elon-musk-ke-samarthana-men-utari-ameriki-sarakara-adalata-men-dakhala-ki-manga-38527 TrendKia — Har trend, sabse pehle.