# इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी 2026 के दो विवादित सवाल हटाए, अब 148 अंकों के आधार पर जारी होगा संशोधित परिणाम

> इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी 2026 के मास्टर सेट से दो विवादास्पद प्रश्नों को मूल्यांकन से बाहर करने का निर्देश दिया है। अब अभ्यर्थियों का परिणाम 150 के बजाय 148 अंकों के आधार पर तैयार किया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/allahabad-high-court-ne-uptet-2026-ke-do-vivadita-savala-hatae-aba-148-ankon-ke-adhara-para-jari-hoga-snshodhita-parinama-54195 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूपीटीईटी 2026, इलाहाबाद हाईकोर्ट, उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग, शिक्षक पात्रता परीक्षा, संशोधित परिणाम, यूपीटीईटी कट ऑफ

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा 2026 में शामिल होने वाले लाखों अभ्यर्थियों के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट की तरफ से एक महत्वपूर्ण फैसला सामने आया है। अदालत ने प्राथमिक स्तर की इस पात्रता परीक्षा के मास्टर प्रश्नपत्र में शामिल दो विवादास्पद प्रश्नों को मूल्यांकन प्रक्रिया से पूरी तरह बाहर करने का आदेश दिया है। इस न्यायिक हस्तक्षेप के बाद परीक्षा का संपूर्ण स्कोरकार्ड अब नए सिरे से तैयार किया जाएगा, जिससे उन हजारों उम्मीदवारों को सीधी राहत मिलने की संभावना है जो केवल एक या दो अंकों के मामूली अंतर से उत्तीर्ण होने से वंचित रह गए थे।

## मास्टर सेट के दो सवालों पर क्यों खड़ा हुआ था विवाद
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 3 जुलाई को प्राथमिक स्तर की यूपीटीईटी परीक्षा आयोजित की थी। इसके बाद 26 अगस्त को परीक्षा के परिणाम घोषित किए गए थे। परिणाम सार्वजनिक होते ही परीक्षा की अंतिम उत्तर कुंजी यानी फाइनल आंसर की को लेकर अभ्यर्थियों में असंतोष फैल गया। मास्टर प्रश्नपत्र के प्रश्न संख्या 36 और प्रश्न संख्या 37 के उत्तरों को लेकर आयोग ने एक ही प्रश्न के दो अलग-अलग विकल्पों को सही मान लिया था। एक बहुविकल्पीय परीक्षा प्रणाली में किसी एक प्रश्न के दो अलग उत्तरों को वैध ठहराए जाने से पूरी मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे।

## अभ्यर्थियों के हाईकोर्ट जाने की मुख्य वजह
आयोग ने परिणाम तैयार करते समय केवल उन्हीं परीक्षार्थियों को अंक प्रदान किए थे जिन्होंने उन दो स्वीकृत विकल्पों में से किसी एक को अपनी उत्तर पुस्तिका में चुना था। दूसरी तरफ, जिन अभ्यर्थियों ने विकल्पों में विरोधाभास देखकर प्रश्न हल नहीं किया या जो भ्रम की स्थिति के कारण कोई अन्य निर्णय ले बैठे, उन्हें इसका कोई लाभ नहीं मिला। इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान उन सामान्य और ओबीसी वर्ग के उम्मीदवारों को उठाना पड़ा, जो निर्धारित न्यूनतम अर्हक अंक यानी 82 अंकों से केवल एक या डेढ़ नंबर के फासले से अनुत्तीर्ण घोषित हो गए थे। इसी विसंगति और असमान मूल्यांकन के विरोध में विजय सोनकर तथा अन्य प्रभावित अभ्यर्थियों ने न्याय की गुहार लगाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की शरण ली थी।

## न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर की अहम टिप्पणी और आदेश
इस याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने परीक्षा प्रणाली की निष्पक्षता पर बेहद महत्वपूर्ण अवलोकन किया। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि जब किसी बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ परीक्षा में चयन संस्था स्वयं ही एक प्रश्न के दो अलग-अलग उत्तरों को सही स्वीकार कर लेती है, तो उस प्रश्न का वास्तविक औचित्य और मूल्यांकन क्षमता समाप्त हो जाती है। ऐसा प्रश्न किसी भी स्थिति में योग्य और अयोग्य अभ्यर्थी के बीच सटीक अंतर तय करने में सक्षम नहीं रह जाता। संविधान में निहित समानता के मौलिक अधिकार की रक्षा करने के उद्देश्य से अदालत ने आदेश दिया कि प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन प्रक्रिया से पूरी तरह हटा दिया जाए।

## अब 148 अंकों पर इस तरह तैयार होगा नया परिणाम
अदालत के निर्देश के अनुसार, अब यूपीटीईटी 2026 का पूरा प्रश्नपत्र 150 अंकों के स्थान पर 148 अंकों का माना जाएगा। कुल पूर्णांक 148 होने के बाद उसी अनुपात में उत्तीर्ण होने के लिए आवश्यक न्यूनतम प्रतिशत की पुनः गणना की जाएगी। उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को निर्देशित किया गया है कि वह सभी प्रभावित अभ्यर्थियों के प्राप्तांकों की नए सिरे से गणना करे और संशोधित स्कोरकार्ड जारी करे। इसके साथ ही अदालत ने यह तथ्य भी पूरी तरह स्पष्ट कर दिया कि इस परीक्षा में सफल होने का प्रमाण पत्र केवल पात्रता निर्धारित करता है, यह किसी भी अभ्यर्थी को परिषदीय विद्यालयों में सहायक अध्यापक के पद पर सीधे नियुक्ति पाने का दावा करने का अधिकार नहीं देता है।

## इसका आप पर असर
इलाहाबाद हाईकोर्ट के इस निर्णय से यूपीटीईटी 2026 में सीमांत अंकों से असफल हुए उम्मीदवारों के लिए दोबारा उत्तीर्ण होने का वास्तविक अवसर बन गया है।

- **उत्तर प्रदेश में:** प्राथमिक स्तर की परीक्षा में शामिल हुए लाखों अभ्यर्थियों के अंक अब 148 के नए पूर्णांक पर पुनः आंके जाएंगे। इससे एक या दो अंकों से पिछड़ जाने वाले सामान्य और आरक्षित वर्ग के हजारों उम्मीदवारों को पात्रता प्रमाण पत्र मिल सकता है।
- **आयोग की समयसीमा:** उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को अब सभी परीक्षार्थियों के अंकों का दोबारा मिलान करके नया स्कोरकार्ड तैयार करना होगा। अभ्यर्थियों को आधिकारिक पोर्टल पर अपनी संशोधित मार्कशीट के लिए आयोग की नई अधिसूचना पर नजर रखनी होगी।
- **नियुक्ति की स्थिति:** परीक्षा पास करने से उम्मीदवारों को केवल आगामी शिक्षक भर्तियों में आवेदन करने की पात्रता मिलेगी। अदालत ने स्पष्ट कर दिया है कि यह प्रमाण पत्र किसी भी प्रकार से सीधे सरकारी नौकरी पाने की कानूनी गारंटी नहीं है।
- **पारदर्शिता की मिसाल:** दोहरे विकल्पों वाले दोषपूर्ण प्रश्नों को हटाने से भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के मूल्यांकन में निष्पक्षता बढ़ेगी। परीक्षार्थियों को अब प्रश्नपत्र में अस्पष्ट या विवादित सवालों के चलते अनुचित नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब परीक्षा नियामक संस्था ने बहुविकल्पीय प्रश्नों की निष्पक्ष मूल्यांकन प्रणाली के बुनियादी नियमों की अनदेखी करते हुए अंतिम उत्तर कुंजी जारी की।

- **दोहरे विकल्पों को मान्यता:** उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 के लिए दो-दो उत्तरों को सही घोषित कर दिया था। वस्तुनिष्ठ परीक्षा में एक ही प्रश्न के परस्पर विरोधी उत्तर मान्य करने से पूरी परीक्षा प्रक्रिया में विसंगति पैदा हो गई।
- **मार्किंग का असमान तरीका:** आयोग ने अंक केवल उन अभ्यर्थियों को दिए जिन्होंने उन दो विशिष्ट विकल्पों में से किसी एक को चुना था। प्रश्न छोड़ने वाले या अन्य विकल्पों को लेकर भ्रमित हुए छात्रों को इसका कोई लाभ नहीं मिला और वे कुछ अंकों से फेल हो गए।
- **समानता के अधिकार का हनन:** याचियों ने अदालत को बताया कि चयन संस्था का यह तरीका संविधान में दिए गए समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। अदालत ने पाया कि जिस प्रश्न के दो सही उत्तर हों, वह योग्य और अयोग्य छात्र में भेद करने की क्षमता खो देता है।

## सवाल-जवाब

### 1. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपीटीईटी 2026 को लेकर क्या फैसला सुनाया है?
अदालत ने मास्टर सेट के प्रश्न संख्या 36 और 37 को मूल्यांकन से हटाने और 148 अंकों के आधार पर नया परिणाम तैयार करने का आदेश दिया है।

### 2. यूपीटीईटी 2026 की परीक्षा किस तारीख को आयोजित हुई थी?
उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग ने 3 जुलाई को प्राथमिक स्तर की यूपीटीईटी परीक्षा आयोजित की थी और परिणाम 26 अगस्त को जारी किया गया था।

### 3. परीक्षार्थी इस मामले को लेकर हाईकोर्ट क्यों गए थे?
आयोग ने दो सवालों के दो-दो विकल्प सही मान लिए थे और केवल उन्हीं विकल्पों को चुनने वालों को अंक दिए, जिससे कई अभ्यर्थी एक या डेढ़ नंबर से फेल हो गए थे।

### 4. इस मामले की सुनवाई किस जज की अदालत में हुई?
इस याचिका पर सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने की।

### 5. हाईकोर्ट की मुख्य याचिका किसके द्वारा दायर की गई थी?
न्याय की मांग को लेकर यह याचिका विजय सोनकर और अन्य प्रभावित अभ्यर्थियों द्वारा दायर की गई थी।

### 6. क्या यूपीटीईटी पास करने से सीधे सरकारी शिक्षक की नौकरी मिल जाएगी?
नहीं, अदालत ने साफ किया है कि यह केवल एक पात्रता प्रमाण पत्र है और इससे किसी को सीधे सरकारी नौकरी पाने का अधिकार नहीं मिलता।

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