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  "type": "article",
  "title": "बालाघाट पुलिस की मुफ्त ट्रेनिंग से युवाओं को मिला वर्दी पहनने का मौका, एमपी पुलिस बैंड भर्ती में दिखा कमाल",
  "summary": "मध्य प्रदेश पुलिस बैंड भर्ती परीक्षा में बालाघाट पुलिस लाइन की मुफ्त ट्रेनिंग से सीखे 22 से अधिक उम्मीदवारों का चयन हुआ है, जिससे युवाओं के वर्दी पहनने का सपना आसान हो गया है।",
  "content": "मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में इस समय बैंड सदस्यों की भर्ती की प्रक्रिया काफी तेजी से चल रही है। इस भर्ती अभियान के तहत राज्य के अलग-अलग हिस्सों से उम्मीदवार भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में अपनी किस्मत आजमाने पहुंच रहे हैं। मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा कुल 679 रिक्त पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, जिसके बाद युवाओं में भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस पूरी चयन प्रक्रिया में सबसे खास बात यह रही है कि बालाघाट पुलिस लाइन द्वारा चलाए गए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रशिक्षित 22 से अधिक उम्मीदवारों का चयन इस सरकारी नौकरी के लिए हो चुका है। पुलिस बैंड की यह भर्ती उन लोगों के लिए एक वरदान साबित हो रही है जो सामान्य पुलिस भर्ती के कड़े शारीरिक मापदंडों को पूरा करने में असमर्थ थे।\n\nशहीद की स्मृति में शुरू हुआ यह अनूठा सेवा कार्य\nबालाघाट पुलिस लाइन में पिछले दो महीनों से भी अधिक समय से युवाओं को पूरी तरह से मुफ्त में पुलिस बैंड का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस कल्याणकारी पहल की शुरुआत एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए पुलिस इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की याद में की गई है। बालाघाट के पुलिस अधीक्षक एसपी आदित्य मिश्रा के कुशल मार्गदर्शन में सहायक उपनिरीक्षक एएसआई शैलेंद्र शुक्ला और उनके सहयोगी दल द्वारा देश के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं को वाद्य यंत्र बजाने और संगीत की गहरी बारीकियों को सिखाने का काम किया जा रहा है। इस निशुल्क प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत मई महीने में हुई थी, जिसमें शुरुआत में ही 210 से ज्यादा उत्सुक युवाओं ने अपना पंजीकरण कराया था। वर्तमान में पुलिस विभाग के वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारी लगभग 155 से ज्यादा युवाओं की संगीत प्रतिभा को निखारने में दिन-रात जुटे हुए हैं ताकि वे रोजगार के नए अवसर पा सकें।\n\nदेश के अलग-अलग राज्यों से सीखने आ रहे हैं युवा\nइस विशेष प्रशिक्षण शिविर की लोकप्रियता केवल मध्य प्रदेश तक ही सीमित नहीं है, बल्कि देश के सुदूर राज्यों से भी युवा बालाघाट पहुंच रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के रहने वाले राजू थापा भी इस प्रशिक्षण का हिस्सा बनने के लिए यहां आए हैं। राजू ने बताया कि उन्हें विभिन्न प्रकार के वाद्य यंत्र बजाना पहले से आता था, लेकिन पुलिस विभाग के बैंड में शामिल होने के लिए जिस खास अनुशासन और संगीत कला की आवश्यकता होती है, उसमें वे पूरी तरह पारंगत नहीं थे। बालाघाट पुलिस की इस पहल से जुड़कर वे अब इसकी बारीक और तकनीकी चीजें सीख रहे हैं। राजू की तरह ही अन्य कई युवा भी इस पुलिस लाइन में अपने हुनर को धार दे रहे हैं।\n\nइसी तरह मध्य प्रदेश के बैतुल जिले के रहने वाले नवीन चौरासे ने अपनी आपबीती साझा की। नवीन का हमेशा से यह सपना था कि वे पुलिस विभाग का हिस्सा बनकर देश की सेवा करें और सम्मानजनक वर्दी पहनें। लेकिन शारीरिक रूप से वे उतने मजबूत या फिट नहीं थे कि सामान्य पुलिस भर्ती की अत्यंत कठिन शारीरिक परीक्षा यानी फिजिकल टेस्ट को पास कर सकें। इस वजह से वे लंबे समय तक निराश रहे। हालांकि, जब उन्हें पुलिस बैंड भर्ती के बारे में पता चला, तो उनके मन में एक नई उम्मीद जगी। उन्होंने इस तरह के संगीत प्रशिक्षण के लिए भोपाल और इंदौर जैसे बड़े शहरों में भी काफी खोजबीन की, लेकिन उन्हें वहां कोई उचित मार्गदर्शन नहीं मिला। अंततः जब उन्हें बालाघाट पुलिस द्वारा दी जा रही इस मुफ्त ट्रेनिंग का पता चला, तो वे तुरंत यहां आ गए। अब उन्हें पूरा विश्वास है कि वे जल्द ही एमपी पुलिस का हिस्सा बनने का अपना सपना पूरा कर लेंगे।\n\nसंगीत के विभिन्न उपकरणों का कराया जा रहा है कड़ा अभ्यास\nटर्निंग दे रहे एएसआई शैलेंद्र शुक्ला ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उनके करियर में यह पहली बार है जब वे इतनी बड़ी संख्या में युवाओं को इस तरह की ट्रेनिंग प्रदान कर रहे हैं। इस प्रशिक्षण शिविर में ब्रास यानी पीतल, वुडविंड यानी लकड़ी और परकशन यानी ताल श्रेणियों के वाद्य यंत्रों का बेहतरीन कॉम्बिनेशन सिखाया जा रहा है, जिन्हें किसी भी सरकारी परेड या महत्वपूर्ण शासकीय समारोहों के दौरान आसानी से बजाया जा सके। इसमें ट्रम्पेट, कॉर्नेट, ट्रॉम्बोन और ट्यूबा जैसे भारी ब्रास यंत्रों के साथ-साथ तबला और हारमोनियम बजाने के इच्छुक युवाओं को भी विशेष मार्गदर्शन दिया जा रहा है। प्रशिक्षण दल के एक अन्य मुख्य सदस्य संजय डहरवाल ने बताया कि शुरुआत में जब बच्चे यहां आए थे, तो उनमें से अधिकांश को इन पेशेवर वाद्य यंत्रों के बारे में कोई बुनियादी जानकारी भी नहीं थी। ऐसे में ट्रेनर्स ने अत्यंत धैर्य के साथ उन्हें छोटी से छोटी बात सिखाई और पुलिस बैंड के सभी आवश्यक नियमों से परिचित कराया, जिसका परिणाम आज सबके सामने है।\n\nइसका आप पर असर\n• मध्य प्रदेश में: इस विशेष बैंड भर्ती से शारीरिक रूप से कम फिट होने के बावजूद पुलिस विभाग में करियर बनाने के इच्छुक राज्य के युवाओं को सरकारी नौकरी पाने का एक बेहतरीन वैकल्पिक जरिया मिला है।\n• बालाघाट और अन्य जिलों में: स्थानीय पुलिस विभागों द्वारा इस तरह के मुफ्त कल्याणकारी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने से युवाओं को बिना भारी फीस चुकाए पेशेवर कौशल हासिल करने और आत्मनिर्भर बनने में मदद मिल रही है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में कुल कितने बैंड पदों पर भर्ती निकाली गई है?\nमध्य प्रदेश पुलिस विभाग में कुल 679 रिक्त बैंड पदों के लिए आवेदन मंगाए गए थे।\n\n2. बालाघाट पुलिस लाइन में यह मुफ्त ट्रेनिंग किसकी याद में शुरू की गई है?\nयह निशुल्क पुलिस बैंड ट्रेनिंग एंटी नक्सल ऑपरेशन के दौरान शहीद हुए इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की स्मृति में शुरू की गई है।\n\n3. इस प्रशिक्षण कार्यक्रम का मार्गदर्शन और संचालन कौन कर रहा है?\nयह कार्यक्रम बालाघाट एसपी आदित्य मिश्रा के मार्गदर्शन में चल रहा है और मुख्य रूप से एएसआई शैलेंद्र शुक्ला और संजय डहरवाल द्वारा युवाओं को ट्रेनिंग दी जा रही है।\n\n4. इस फ्री ट्रेनिंग कैंप में किस तरह के वाद्य यंत्र बजाना सिखाया जा रहा है?\nशिविर में ब्रास (ट्रम्पेट, कॉर्नेट, ट्रॉम्बोन, ट्यूबा), वुडविंड और परकशन वाद्य यंत्रों के साथ-साथ तबला और हारमोनियम बजाने की ट्रेनिंग दी जा रही है।\n\n5. इस बालाघाट पुलिस लाइन के ट्रेनिंग सेंटर से अब तक कितने युवाओं का चयन हुआ है?\nबालाघाट पुलिस लाइन के इस ट्रेनिंग कैंप से प्रशिक्षित होकर अब तक 22 से अधिक उम्मीदवारों का चयन पुलिस विभाग की भर्ती में हो चुका है।\n\nप्रेरणा और सबक\n• शारीरिक सीमाओं से ऊपर उठना: बैतुल के नवीन की कहानी सिखाती है कि अगर आप सामान्य दौड़-भाग की शारीरिक परीक्षा में असफल भी होते हैं, तो भी वैकल्पिक रास्तों से अपने सपने को हासिल कर सकते हैं।\n• शहीदों के सम्मान में सेवा: शहीद इंस्पेक्टर आशीष शर्मा की याद में शुरू की गई यह पहल दिखाती है कि किस तरह पुलिस विभाग समाज के युवाओं को सकारात्मक दिशा देकर अपने नायकों को श्रद्धांजलि दे सकता है।\n• समर्पण और लगन: हिमाचल से बालाघाट आकर ट्रेनिंग ले रहे राजू की लगन दर्शाती है कि जब आप में कुछ सीखने की इच्छा हो, तो भौगोलिक दूरियां मायने नहीं रखतीं।\n• बुनियाद से शुरुआत: ट्रेनर्स का शून्य से शुरुआत करके बच्चों को पेशेवर स्तर तक लाना साबित करता है कि सही मार्गदर्शन से किसी भी क्षेत्र में महारत हासिल की जा सकती है।",
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  "category": "करियर",
  "publishedAt": "2026-07-12",
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