# भारत में फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स का बड़ा जमावड़ा बेंगलुरु में, हैदराबाद भी तेजी से उभरा

> देश के 34 प्रतिशत फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर अकेले बेंगलुरु में कार्यरत हैं, जबकि हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर के साथ मिलकर शीर्ष तीन शहर कुल वर्कफोर्स का 61 फीसदी हिस्सा संभालते हैं।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/bengaluru-men-bharata-ke-forward-deployed-engineers-ka-bara-jamavara-hyderabad-bhi-teji-se-ubhara-55943 · **Language:** Hindi
**Tags:** फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर, बेंगलुरु टेक, हैदराबाद टेक, आईटी रोजगार, टेक नौकरियां, एआई टैलेंट

भारत में तकनीकी समाधानों को सीधे ग्राहकों की प्रणाली पर लागू करने वाले फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स यानी एफडीई का बड़ा हिस्सा देश के कुछ चुनिंदा आईटी केंद्रों तक ही सीमित बना हुआ है। पूरे देश के कुल एफडीई पेशेवरों में से 34 प्रतिशत अकेले बेंगलुरु में काम कर रहे हैं, जिससे यह शहर इस विशिष्ट तकनीकी प्रतिभा का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। इसके साथ ही हैदराबाद भी इस क्षेत्र में एक प्रमुख और तेजी से बढ़ते केंद्र के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। **द फॉरवर्ड डिप्लॉयड इंजीनियर टैलेंट लैंडस्केप इन इंडिया** शीर्षक से जारी एक विस्तृत अध्ययन में देश भर में इस प्रतिभा के वितरण और उद्योग की प्रवृत्तियों का ब्योरा सामने रखा गया है।

## शीर्ष तीन शहरों की हिस्सेदारी 61 प्रतिशत पहुंची
अध्ययन के आंकड़े बताते हैं कि देश का 61 प्रतिशत एफडीई कार्यबल केवल तीन प्रमुख क्षेत्रों में केंद्रित है। इनमें बेंगलुरु 34 प्रतिशत के साथ पहले स्थान पर है, जबकि 14 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ हैदराबाद दूसरे स्थान पर बना हुआ है। देश की राजधानी से सटे दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र की हिस्सेदारी 13 प्रतिशत दर्ज की गई है। अन्य तकनीकी शहरों की बात करें तो पुणे में 12 प्रतिशत और मुंबई में 11 प्रतिशत एफडीई पेशेवर कार्यरत हैं। इसके अलावा चेन्नई और देश के अन्य सभी छोटे-बड़े शहरों की हिस्सेदारी 8-8 प्रतिशत आंकी गई है।

## हैदराबाद में क्यों बढ़ रही है एफडीई की मांग
इस अध्ययन को प्रस्तुत करने वाले **एफडीई एकेडमी** के अनुसार हैदराबाद एक उभरते हुए एफडीई केंद्र के तौर पर तेजी से विकसित हो रहा है। शहर में बड़े उद्यमों की तकनीकी परियोजनाओं में हो रहे पूंजी निवेश ने इस वृद्धि को रफ्तार दी है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई पर आधारित नई तकनीकी भूमिकाओं की बढ़ती संख्या ने भी यहां के टैलेंट इकोसिस्टम को पहले से कहीं अधिक मजबूत और व्यापक बना दिया है।

## कंपनियों की श्रेणी और रोजगार का ढांचा
विभिन्न कंपनियों में इन इंजीनियरों की तैनाती का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि बड़ी तकनीकी कंपनियां यानी बिग टेक फर्में सबसे बड़ी नियोक्ता हैं, जिनके पास कुल एफडीई कार्यबल का 38 प्रतिशत हिस्सा है। इसके विपरीत उत्पाद आधारित यानी प्रोडक्ट कंपनियां 24 प्रतिशत पेशेवरों को रोजगार देती हैं। पारंपरिक आईटी सेवा कंपनियों के पास भी इस कार्यबल का 24 प्रतिशत हिस्सा है, जबकि कंसल्टिंग फर्मों की हिस्सेदारी भी 24 प्रतिशत ही दर्ज की गई है। वहीं पूरी तरह एआई तकनीक पर केंद्रित स्टार्टअप्स में 14 प्रतिशत एफडीई पेशेवर काम कर रहे हैं।

## अनुभव का अभाव और वरिष्ठ प्रतिभा की जरूरत
कार्यबल के अनुभव स्तर की पड़ताल करने पर यह तथ्य सामने आया है कि इस क्षेत्र से जुड़े अधिकांश पेशेवर अपने करियर के शुरुआती चरण में हैं। कुल एफडीई प्रतिभाओं में से करीब 70 प्रतिशत के पास 8 साल या उससे कम समय का कार्य अनुभव है। अध्ययन में रेखांकित किया गया है कि इस तरह का रुझान उद्योग में अधिक अनुभवी और वरिष्ठ नेतृत्व की भारी कमी को दर्शाता है। इसी वजह से तकनीकी इकोसिस्टम के भीतर समय के साथ गहरे तकनीकी और व्यावसायिक अनुभव का निर्माण करना बेहद आवश्यक हो गया है।

## नेतृत्व का नजरिया और भविष्य की चुनौतियां
एफडीई एकेडमी के संस्थापक और सीईओ राघव गुप्ता ने इस आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एआई आधारित प्रणालियों को तैनात करने के लिए इंजीनियरिंग की गहरी समझ, कारोबारी प्रक्रिया की सूझबूझ और ग्राहक के माहौल में नतीजों की पूरी जिम्मेदारी लेने की क्षमता का सही तालमेल होना जरूरी है। राघव गुप्ता ने यह भी स्पष्ट किया कि विभिन्न शहरों में प्रतिभा के इस तरह के भारी जमावड़े का सीधा प्रभाव कंपनियों की नियुक्ति रणनीतियों पर पड़ता है। उन्होंने सुझाव दिया कि नियोक्ताओं को सिर्फ दफ्तरों के भौगोलिक स्थान पर ध्यान देने के बजाय समय के साथ कर्मचारियों की कार्यक्षमता और विशेषज्ञता को तराशने पर जोर देना चाहिए।

समग्र रूप से यह अध्ययन दर्शाता है कि भारत में तकनीकी और एआई से जुड़े एफडीई पेशेवरों का फैलाव कुछ ही महानगरों के इर्द-गिर्द सिमटा हुआ है। बेंगलुरु की अग्रणी स्थिति और हैदराबाद की तेज तरक्की के बीच अनुभव का यह अंतर आने वाले दिनों में कंपनियों की प्रतिभा निर्माण और उन्हें अपने साथ बनाए रखने की नीतियों को गहराई से प्रभावित करेगा।

## इसका आप पर असर
तकनीकी क्षेत्र में काम करने वाले सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स और नई नौकरियां तलाश रहे युवाओं के लिए यह रिपोर्ट करियर की दिशा और प्रमुख शहरों के अवसरों को स्पष्ट करती है।

- **भारत भर में अवसर:** यदि आप फॉरवर्ड-डिप्लॉयड या ग्राहक-केंद्रित तकनीकी भूमिकाओं में जाना चाहते हैं, तो कोडिंग के साथ कारोबारी समझ विकसित करना अनिवार्य होगा। वरिष्ठ पदों की भारी कमी के कारण 8 साल से अधिक अनुभव वाले योग्य प्रोफेशनल्स को कंपनियों से बेहतर पैकेज और पद मिलने की मजबूत संभावना है।
- **बेंगलुरु में स्थिति:** देश की एक-तिहाई से अधिक एफडीई नौकरियां इसी शहर में मौजूद होने के कारण अनुभवी प्रोफेशनल्स के लिए बिग टेक और प्रोडक्ट फर्मों में सबसे ज्यादा विकल्प बने रहेंगे। स्थानीय स्तर पर कंपनियों के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा के चलते यहां कुशल टैलेंट के लिए नौकरी बदलने और वेतन वृद्धि के मौके अधिक हैं।
- **हैदराबाद में स्थिति:** उद्यम पूंजी निवेश और एआई-संचालित भूमिकाओं में तेज उछाल के चलते स्थानीय सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल्स को शहर छोड़े बिना वैश्विक स्तर के प्रोजेक्ट्स पर काम करने का अवसर मिल रहा है। यह शहर प्रोडक्ट और कंसल्टिंग दोनों क्षेत्रों में नई तकनीकी भर्तियों का बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है।
- **कैरियर योजना:** 70 फीसदी कार्यबल आठ साल से कम अनुभव वाला होने के कारण नए इंजीनियरों को केवल बुनियादी प्रोग्रामिंग तक सीमित रहने से बचना चाहिए। सीधे ग्राहक के सिस्टम पर समाधान लागू करने और परिणामों की जिम्मेदारी लेने की क्षमता सीखने से करियर में तेजी से पदोन्नति मिल सकेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह स्थिति भारत के प्रमुख महानगरों में बहुराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी कंपनियों के स्थापित कार्यालयों, पूंजी निवेश और कुशल प्रतिभा की उपलब्धता के कारण बनी है।

- **पारंपरिक तकनीकी आधार:** बेंगलुरु में दशकों से स्थापित वैश्विक अनुसंधान केंद्रों और बिग टेक मुख्यालयों की मौजूदगी ने वहां एफडीई प्रतिभा का सबसे बड़ा जमावड़ा तैयार किया। इसी बुनियादी ढांचे की बदौलत 34 प्रतिशत पेशेवरों की मौजूदगी के साथ शहर पहले स्थान पर बना हुआ है।
- **हैदराबाद में बढ़ता उद्यम निवेश:** हैदराबाद में बड़े अंतरराष्ट्रीय कॉरपोरेट्स द्वारा एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी में किए गए नए निवेश और राज्य के बुनियादी ढांचे ने शीर्ष कंपनियों को आकर्षित किया है। इसके साथ ही कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित परियोजनाओं की बढ़ती संख्या ने शहर को 14 प्रतिशत हिस्सेदारी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
- **ग्राहक-केंद्रित समाधानों की मांग:** आधुनिक सॉफ्टवेयर और एआई मॉडल केवल दूर बैठकर बनाने के बजाय ग्राहकों के अपने तकनीकी परिवेश में स्थापित करने की जरूरत बढ़ी है। इसी कारण कंपनियों को ऐसे इंजीनियरों की आवश्यकता पड़ रही है जो कोडिंग और व्यापारिक जरूरतों दोनों को एक साथ संभाल सकें।

## सवाल-जवाब

### 1. भारत में फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर्स की सबसे ज्यादा संख्या किस शहर में है?
भारत के कुल फॉरवर्ड-डिप्लॉयड इंजीनियर कार्यबल का 34 प्रतिशत हिस्सा अकेले बेंगलुरु में स्थित है।

### 2. शीर्ष तीन तकनीकी शहर मिलकर देश की कितनी एफडीई प्रतिभा को संभालते हैं?
बेंगलुरु, हैदराबाद और दिल्ली-एनसीआर मिलकर देश के कुल एफडीई टैलेंट का 61 प्रतिशत हिस्सा बनाते हैं।

### 3. हैदराबाद में एफडीई प्रतिभा की हिस्सेदारी कितनी दर्ज की गई है?
हैदराबाद देश के कुल एफडीई पेशेवरों में से 14 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।

### 4. एफडीई कार्यबल का सबसे बड़ा नियोक्ता कौन सा कंपनी क्षेत्र है?
बिग टेक कंपनियां सबसे आगे हैं, जिनके पास कुल एफडीई पेशेवरों का 38 प्रतिशत कार्यबल कार्यरत है।

### 5. भारत में एफडीई पेशेवरों के अनुभव स्तर की मुख्य स्थिति क्या है?
लगभग 70 प्रतिशत एफडीई पेशेवरों के पास आठ साल या उससे कम समय का कार्य अनुभव है, जिससे वरिष्ठ प्रतिभा की भारी जरूरत बनी हुई है।

### 6. एफडीई एकेडमी के अनुसार एआई डिप्लॉयमेंट के लिए किन कौशलों की आवश्यकता होती है?
राघव गुप्ता के अनुसार इसके लिए गहन इंजीनियरिंग समझ, व्यापारिक सूझबूझ और ग्राहक के परिवेश में काम के नतीजों की जिम्मेदारी लेने की क्षमता जरूरी है।

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