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  "type": "article",
  "title": "दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में मतों की गणना जारी, फर्जी मतदान के आरोपों और कॉलेज नतीजों के बीच कड़ा मुकाबला",
  "summary": "दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के लिए मतों की गिनती जारी है, जहां 40.46 फीसदी मतदान के बाद केंद्रीय पैनल के 4 पदों पर 20 उम्मीदवारों का भाग्य तय हो रहा है। मतगणना के दौरान लॉ सेंटर पर फर्जी पहचान पत्र से मतदान के प्रयास का मामला सामने आने पर राजनीतिक तकरार तेज हो गई है।",
  "content": "दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव के चार प्रमुख पदों के लिए मतों की गिनती नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पस हॉल में शनिवार सुबह 8 बजे से प्रारंभ हो गई है। विश्वविद्यालय के मुख्य चुनाव अधिकारी और प्रॉक्टर मनोज सिंह सहित प्रशासनिक अधिकारी मतगणना कक्ष और स्ट्रॉन्ग रूम में व्यवस्थाओं की निगरानी कर रहे हैं। इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों के खुलने के साथ ही विभिन्न छात्र संगठनों के प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं के बीच उत्सुकता बनी हुई है। इस बार केंद्रीय पैनल के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। दोपहर 1 से 2 बजे के आसपास अंतिम नतीजे घोषित होने की संभावना जताई जा रही है।\n\nलॉ सेंटर पर फर्जी मतदान के प्रयास को लेकर सियासी आरोप-प्रत्यारोप\nमतगणना और परिणामों के बीच डीयू के लॉ सेंटर में मतदान के दौरान एक छात्रा को फर्जी पहचान पत्र के जरिए वोट डालने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर संज्ञान लेते हुए उक्त छात्रा को हिरासत में लिया। इस घटना के सामने आने के बाद छात्र राजनीति का माहौल गर्मा गया और राजनीतिक दलों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई।\n\nभारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय मीडिया सह-संयोजक सिद्धार्थ यादव ने कांग्रेस और उसकी छात्र इकाई नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया पर निशाना साधते हुए कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ बयान जारी किया। सिद्धार्थ यादव ने कहा कि राहुल गांधी देश भर में वोट चोरी का आरोप लगाते रहते हैं, जबकि उनकी अपनी छात्र इकाई के कार्यकर्ता फर्जी मतदान करते पकड़े जा रहे हैं। उन्होंने मांग की कि इस मामले में देश के छात्रों और युवाओं से सार्वजनिक तौर पर माफी मांगी जानी चाहिए।\n\nहाईकोर्ट के दिशानिर्देश और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम\nमतगणना परिसर और आसपास की सुरक्षा बनाए रखने के लिए दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के 2,000 से अधिक जवानों को तैनात किया गया है। मल्टीपर्पस हॉल के बाहर बैरिकेडिंग लगाई गई है और बिना अधिकृत पहचान पत्र या पास के किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर पूर्ण प्रतिबंध है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी तथा विश्वविद्यालय प्रॉक्टर स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं ताकि प्रक्रिया शांतिपूर्ण और व्यवस्थित रहे।\n\nदिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए भी कड़े कदम उठाए गए हैं। नतीजों के ऐलान के बाद परिसर, छात्रावासों या सड़कों पर किसी भी तरह के विजय जुलूस, हुड़दंग करने या डीजे बजाने की अनुमति नहीं है। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस ने स्पष्ट किया है कि नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी और जुर्माना लगाया जाएगा।\n\nमतदान प्रतिशत में मामूली इजाफा\nशुक्रवार को संपन्न हुए मतदान के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि सभी 52 मतदान केंद्रों पर मिलाकर कुल 40.46 प्रतिशत वोटिंग दर्ज की गई। यह आंकड़ा पिछले वर्ष 2025 के 39.45 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है। कुछ माह पूर्व जंतर-मंतर पर छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर हुए प्रदर्शनों के बाद कैंपस में इन मुद्दों पर व्यापक चर्चा रही, जिसका असर मतदान की भागीदारी पर भी दिखाई दिया।\n\nछात्रों के बीच रियायती व सुरक्षित आवासीय व्यवस्था (पीजी और हॉस्टल) की कमी इस चुनाव का केंद्रीय विषय रही। इसके अलावा बेहतर मेस संचालन, कम दाम पर गुणवत्तापूर्ण भोजन, मेट्रो किराए में छूट और प्रशासनिक पहुंच को सुलभ बनाने जैसी मांगें प्रमुखता से उठाई गईं।\n\nकेंद्रीय पैनल के चार पदों पर त्रिकोणीय संघर्ष\nकेंद्रीय पैनल की 4 सीटों पर मुख्य मुकाबला अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया और वामपंथी छात्र संगठनों के गठबंधन के बीच देखा जा रहा है\n\n• अध्यक्ष पद: एबीवीपी के यश डबास, एनएसयूआई के विजय शंकर मीणा और आईसा की अनन्या रतूड़ी के बीच कड़ा मुकाबला है।\n• उपाध्यक्ष पद: एबीवीपी के इशु मौर्या (इशू मौर्य), एनएसयूआई के वीर छत्रथ (वीर चतरथ) और अक्षत शिखर आमने-सामने हैं।\n• सचिव पद: एबीवीपी की रिया छावड़ी, एनएसयूआई की नम्रता चौधरी और स्टैनज़िन डेस्क्योंग के बीच मुकाबला है।\n• संयुक्त सचिव पद: एबीवीपी के लक्ष्य राज सिंह, एनएसयूआई के गोपाल चौधरी और बी. परिजात चुनावी मैदान में डटे हैं।\n\nएबीवीपी अध्यक्ष पद प्रत्याशी की प्राथमिकताएं\nएबीवीपी के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी यश डबास ने मतगणना के बीच बातचीत करते हुए अपनी जीत का भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि छात्र समुदाय ने राष्ट्रवादी सोच और संगठन के कार्यों पर विश्वास जताया है, जिससे संगठन को सभी चारों पदों पर जीत की उम्मीद है।\n\nयश डबास ने कैंपस के आसपास सत्य निकेतन जैसे इलाकों में स्थित निजी पीजी और छात्रावासों के सुरक्षा ऑडिट की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सत्य निकेतन क्षेत्र की हालिया घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि छात्रों की सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता और प्रशासन को नियमों की जांच के लिए एक समिति गठित करनी चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने विश्वविद्यालय परिसर में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग की ताकि परिसर का शैक्षणिक माहौल और सुरक्षा अक्षुण्ण बनी रहे। उन्होंने छात्राओं के लिए पिंक बूथ स्थापित करने और खेलकूद के कार्यक्रमों के आयोजन जैसे प्रयासों का भी उल्लेख किया।\n\nकॉलेज स्तर के छात्रसंघ चुनावों के नतीजे\nकेंद्रीय पैनल की मतगणना के समानांतर विभिन्न कॉलेजों के अपने छात्रसंघ चुनावों के नतीजे भी सामने आए हैं, जहां अलग-अलग संगठनों ने अपनी ताकत दिखाई है\n\n• अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी): संगठन ने श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में अध्यक्ष, सचिव और दोनों काउंसलर पदों पर जीत दर्ज की। इसके अलावा अदिति महाविद्यालय, श्री अरबिंदो कॉलेज (मॉर्निंग), शिवाजी कॉलेज, भारती कॉलेज, केशव महाविद्यालय, श्यामा प्रसाद मुखर्जी कॉलेज और डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज में प्रमुख पदों पर कब्जा जमाया।\n• नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (एनएसयूआई): संगठन ने मोतीलाल नेहरू कॉलेज (मॉर्निंग), आर्यभट्ट कॉलेज में अध्यक्ष व सचिव सहित सीटें जीतीं। इसके अतिरिक्त भगिनी निवेदिता कॉलेज, रामलाल आनंद कॉलेज और किरोड़ीमल कॉलेज के विभिन्न पदों पर प्रत्याशी विजयी रहे। आर्यभट्ट कॉलेज के विजेता उम्मीदवारों ने एनएसयूआई के राष्ट्रीय अध्यक्ष विनोद जाखड़ से भेंट भी की।\n• वामपंथी छात्र संगठन (एसएफआई व गठबंधन): जाकिर हुसैन कॉलेज (मॉर्निंग) में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (एसएफआई) के प्रत्याशी ने संयुक्त सचिव पद पर सफलता हासिल की, जबकि अन्य विभागों में भी गठबंधन के उम्मीदवारों ने उपस्थिति दर्ज कराई।\n\nप्रचार के दौरान हुए विवाद\nचुनावी अभियान के दौरान कुछ विवाद भी सामने आए थे। दयाल सिंह कॉलेज में मतदान के समय भ्रामक विवरण वाले पर्चे बांटने के आरोप में दो व्यक्तियों को पुलिस के हवाले किया गया था। वहीं एनएसयूआई ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर उनके पदाधिकारियों को बेवजह परेशान करने और हिरासत में लेने का आरोप लगाया था। अब सभी की निगाहें दोपहर बाद आने वाले अंतिम आधिकारिक नतीजों पर टिकी हैं।\n\nइसका आप पर असर\nयह चुनाव परिणाम दिल्ली विश्वविद्यालय के हजारों विद्यार्थियों की दैनिक सुविधाओं, सुरक्षा और प्रशासनिक नीतियों पर सीधा असर डालेगा।\n\n• परिसर सुरक्षा और पीजी नियम: नए छात्रसंघ के गठन से सत्य निकेतन और आसपास के निजी पीजी के सुरक्षा ऑडिट की मांग पर कार्रवाई हो सकती है। इससे बाहर से आकर रहने वाले विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित और विनियमित हॉस्टल व्यवस्था का रास्ता खुलेगा।\n• विश्वविद्यालय में प्रवेश नियम: कैंपस में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश पर सख्ती बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है। इसके लागू होने पर छात्रों को परिसर में प्रवेश के लिए हमेशा वैध पहचान पत्र साथ रखना अनिवार्य होगा।\n• आंदोलन और रियायती मांगें: मेट्रो किराए में रियायत और हॉस्टल सीटों की संख्या बढ़ाने जैसे मुद्दों पर निर्वाचित संघ प्रशासन पर दबाव बनाएगा। छात्रों को आने वाले महीनों में इन मांगों को लेकर होने वाले फैसलों पर नजर रखनी होगी।\n• कानून व्यवस्था और उत्सव प्रतिबंध: अदालत के आदेशानुसार नतीजों के बाद किसी भी तरह के जुलूस या लाउडस्पीकर के प्रयोग पर सख्त रोक है। नियमों का उल्लंघन करने पर छात्रों और समर्थकों के खिलाफ सीधी पुलिस कार्रवाई और जुर्माना हो सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nडूसू चुनाव 2026 में बढ़ी हुई राजनीतिक सरगर्मी और कड़े मुकाबले के पीछे कई प्रमुख कारण और हालिया घटनाक्रम जिम्मेदार हैं।\n\n• छात्र सुरक्षा और विरोध प्रदर्शन: कुछ माह पहले जंतर-मंतर पर छात्र सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर युवाओं ने व्यापक प्रदर्शन किए थे। इन आंदोलनों ने सुरक्षा, हॉस्टल किल्लत और परिसर के माहौल जैसे बुनियादी मुद्दों को चुनावी विमर्श के केंद्र में स्थापित कर दिया।\n• फर्जी मतदान और राजनीतिक टकराव: लॉ सेंटर में फर्जी पहचान पत्र के सहारे मतदान के प्रयास ने राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप शुरू कर दिए। इससे छात्र संगठनों के बीच अपनी शुचिता साबित करने और प्रतिद्वंद्वी को घेरने की होड़ बढ़ गई।\n• अदालती कड़ाई और व्यवस्था परिवर्तन: दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जीत के जुलूसों और ध्वनि प्रदूषण पर लगाई गई रोक के चलते प्रशासन ने भारी सुरक्षा व्यवस्था की। इसके कारण चुनाव प्रचार और परिणाम की प्रक्रिया का स्वरूप पहले के मुकाबले ज्यादा नियंत्रित हो गया।\n• मतदान भागीदारी में वृद्धि: 52 बूथों पर 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया जो पिछले वर्ष से अधिक रहा। इस बढ़ोतरी ने कॉलेज स्तर और केंद्रीय पैनल दोनों में विभिन्न संगठनों के बीच चुनावी मुकाबले को बेहद करीबी बना दिया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. डूसू चुनाव 2026 की मतगणना कब और कहां शुरू हुई?\nमतगणना शनिवार सुबह 8 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के नॉर्थ कैंपस स्थित यूनिवर्सिटी स्पोर्ट्स स्टेडियम के मल्टीपर्पस हॉल में शुरू हुई।\n\n2. इस वर्ष छात्रसंघ चुनाव में कुल कितना मतदान दर्ज किया गया?\nसभी 52 मतदान केंद्रों पर कुल 40.46 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जो 2025 के 39.45 प्रतिशत से थोड़ा अधिक है।\n\n3. लॉ सेंटर पर मतदान के दौरान क्या विवाद हुआ था?\nलॉ सेंटर पर एक छात्रा को फर्जी पहचान पत्र के जरिए अवैध मतदान करने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया और हिरासत में लिया गया।\n\n4. केंद्रीय पैनल के किन पदों पर कितने उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं?\nअध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव के चार केंद्रीय पदों के लिए कुल 20 उम्मीदवार मैदान में हैं।\n\n5. चुनावी नतीजों के बाद विजय जुलूस निकालने पर क्या पाबंदी है?\nदिल्ली हाईकोर्ट के आदेशानुसार परिसर, हॉस्टल या सड़कों पर किसी भी तरह के विजय जुलूस, हुड़दंग या डीजे बजाने पर पूर्ण रोक है।\n\n6. श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स (एसआरसीसी) में छात्रसंघ चुनाव के नतीजे क्या रहे?\nएसआरसीसी में एबीवीपी ने क्लीन स्वीप करते हुए अध्यक्ष, सचिव और दोनों काउंसलर पदों पर जीत हासिल की।",
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  "category": "करियर",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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