# सामान्य ज्ञान: देश और दुनिया के किन स्कूलों में रविवार को नहीं होती छुट्टी? जानिए इसके पीछे की दिलचस्प वजह

> बचपन से यही माना जाता है कि रविवार यानी संडे मतलब स्कूल की छुट्टी, लेकिन दुनिया में कई ऐसे संस्थान और स्कूल हैं जहां इस नियम का पालन नहीं होता। धार्मिक मान्यताओं, स्थानीय परंपराओं और व्यवस्थाओं के चलते कई जगहों पर संडे को सामान्य दिनों की तरह पढ़ाई होती है और वीकेंड का दिन दूसरा तय होता है।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-08-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/general-knowledge-facts-which-schools-and-institutes-do-not-close-on-sunday-20089 · **Language:** Hindi
**Tags:** सामान्य ज्ञान, स्कूल की छुट्टी, रविवार अवकाश, मदरसा शिक्षा, बोर्डिंग स्कूल, वनस्थली विद्यापीठ

बचपन से ही हम सभी इस बात से वाकिफ रहते हैं कि हफ्ते के आखिरी दिन यानी रविवार को स्कूल और पढ़ाई से राहत मिलती है। शनिवार की शाम ढलते ही स्कूली बच्चों के चेहरों पर एक अलग ही रौनक और खुशी छा जाती है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि क्या देश और दुनिया के हर स्कूल में रविवार को ही छुट्टी होती है? इसका जवाब है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है। दुनिया में तमाम ऐसे शिक्षण संस्थान और इलाके हैं जहां संडे को आम दिनों की तरह ही कक्षाएं चलती हैं और बच्चे पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं। साप्ताहिक अवकाश यानी वीकली ऑफ का यह नियम हर जगह एक जैसा नहीं होता है।

संस्थान के प्रकार, धार्मिक मान्यताओं और स्थानीय परंपराओं के आधार पर वीकेंड का दिन बदल जाता है। कई जगहों पर रविवार के बजाय शुक्रवार यानी जुम्मे के दिन साप्ताहिक अवकाश रखा जाता है, तो कुछ आवासीय और बोर्डिंग स्कूलों में रविवार को अलग ही तरह की गतिविधियां चलती हैं। हफ्ते के बीच में किसी अन्य दिन छुट्टी मिलने से शिक्षक और छात्र अपने जरूरी बैंकिंग व अन्य निजी काम भी आसानी से निपटा लेते हैं। जनरल नॉलेज के इस पहलू में आइए विस्तार से जानते हैं कि किन-किन जगहों और स्कूलों में रविवार को छुट्टी नहीं होती है और इसके पीछे क्या मुख्य कारण हैं।

दुनिया के अधिकांश हिस्सों में भले ही संडे के दिन स्कूल, कॉलेज और दफ्तर बंद रहते हों, लेकिन कई खास जगहों पर यह नियम लागू नहीं होता। इसके पीछे कई ठोस प्रशासनिक और धार्मिक वजहें जुड़ी हुई हैं। भारत के कई प्रमुख राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में संचालित होने वाले मदरसों और इस्लामी शिक्षण संस्थानों में रविवार को कोई अवकाश नहीं होता है। इन जगहों पर संडे को सामान्य दिनों की तरह पढ़ाई कराई जाती है। इसके पीछे मुख्य कारण धार्मिक मान्यताएं हैं, क्योंकि इस्लाम धर्म में शुक्रवार यानी जुम्मे के दिन सामूहिक नमाज का विशेष महत्व माना गया है। यही वजह है कि इन संस्थानों में हफ्ते का साप्ताहिक अवकाश शुक्रवार को ही तय होता है।

खाड़ी देशों जैसे सऊदी अरब, यूएई, कतर और ओमान में चलने वाले कई भारतीय व अंतरराष्ट्रीय स्कूलों में भी संडे को वर्किंग डे रखा जाता है। हालांकि संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों ने अब शनिवार और रविवार के वीकेंड को अपना लिया है, लेकिन कुछ अन्य खाड़ी देशों में आज भी शुक्रवार और शनिवार को ही साप्ताहिक छुट्टी होती है। ऐसे में वहां रहने वाले भारतीय परिवारों के बच्चों के स्कूल संडे को पूरी तरह खुले रहते हैं और नियमित रूप से पढ़ाई होती है। इसके अलावा, कई बड़े रेजिडेंशियल और गुरुकुल पैटर्न पर चलने वाले बोर्डिंग स्कूलों में भी रविवार को पूरी तरह काम बंद नहीं रहता है।

इन आवासीय संस्थानों में हालांकि उस दिन कोई औपचारिक या नियमित क्लास नहीं चलती है, लेकिन संडे को एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी, खेलकूद, विशेष टेस्ट या सेल्फ-स्टडी का पूरा शेड्यूल तय होता है। हॉस्टल में रहने वाले बच्चों के लिए रविवार का दिन उनके पर्सनल डेवलपमेंट और कोचिंग के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिससे उनके लिए यह दिन पूरी तरह से खाली नहीं होता। राजस्थान में स्थित प्रसिद्ध वनस्थली विद्यापीठ में भी रविवार को सामान्य दिनों की तरह ही कक्षाएं संचालित होती हैं। इस संस्थान में रविवार के बजाय मंगलवार के दिन स्कूल और कॉलेज बंद रहते हैं। यह एक बड़ा आवासीय स्कूल और विश्वविद्यालय है, जहां यही नियम बरसों से चला आ रहा है। यहाँ अध्ययन करने वाली छात्राएं और शिक्षक मंगलवार के दिन अपने बैंक और पोस्ट ऑफिस से जुड़े जरूरी काम निपटाते हैं और रविवार को अपनी शिक्षा ग्रहण करने के लिए कक्षाओं में जाते हैं।

बिहार, झारखंड और असम के कुछ विशेष ग्रामीण क्षेत्रों में भी यही व्यवस्था देखने को मिलती है जहां आबादी का एक बड़ा हिस्सा मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखता है। वहां स्थानीय प्रशासन या स्कूल प्रबंधन की आपसी सहमति से शुक्रवार को वीकेंड घोषित किया जाता है और उन स्कूलों में रविवार को पढ़ाई कराई जाती है ताकि हफ्ते के कुल निर्धारित कार्य दिवस यानी वर्किंग डेज पूरे हो सकें और बच्चों की पढ़ाई का कोई नुकसान न हो। इसके अलावा, ग्यारहवीं और बारहवीं कक्षा के ऐसे स्कूल जिनका टाइअप जेईई या नीट की तैयारी कराने वाले कोचिंग संस्थानों से होता है, वे भी संडे के दिन अक्सर मॉक टेस्ट, डाउट क्लीयरिंग क्लासेस या साप्ताहिक परीक्षाओं का आयोजन करते हैं। इन डमी और इंटीग्रेटेड स्कूलों में हालांकि रविवार को रेगुलर पढ़ाई नहीं होती है, लेकिन छात्रों को टेस्ट देने के लिए स्कूल जाना ही पड़ता है।

## इसका आप पर असर
**सामान्य प्रभाव:** यह जानकारी छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणालियों और उनके साप्ताहिक अवकाश के नियमों को समझने में मदद करती है।

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