# ग्लोबल रैंकिंग में चमके भारतीय कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स, जानिए दुनिया के सबसे बड़े इम्तिहानों की लिस्ट में किस पायदान पर है देश

> दुनिया के 14 सबसे बड़े इम्तिहानों में भारत की चार प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएं शामिल हो गई हैं, जिसमें नीट यूजी 25 लाख आवेदनों के साथ पांचवें पायदान पर है।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/global-rankings-men-chamake-indian-competitive-exams-janie-duniya-ke-sabase-bare-imtihanon-ki-lista-men-kisa-payadana-para-hai-des-41596 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीट यूजी, यूपीएससी सीएसई, जेईई मेन, यूजीसी नेट, गाओकाओ, एसबीआई रिसर्च, प्रतियोगी परीक्षाएं, एग्जाम रिफॉर्म्स

भारत में जब भी किसी राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षा का आयोजन होता है, तो पूरा देश एक अलग ही हलचल से भर जाता है। रेलवे स्टेशनों पर छात्रों की भारी भीड़ उमड़ पड़ती है, लंबी दूरी की ट्रेनों में पैर रखने की जगह नहीं बचती और परीक्षा केंद्रों के आस-पास होटलों के कमरे मिलना मुश्किल हो जाता है। उम्मीदवारों के साथ ही उनके अभिभावक भी कई दिनों तक भारी मानसिक और शारीरिक दबाव से गुजरते हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया रिसर्च के एक नए अध्ययन ने भारतीय परीक्षाओं के इस विशाल दायरे पर वैश्विक मुहर लगाई है। इस विश्लेषण के अनुसार, देश के चार प्रमुख इम्तिहान दुनिया की सबसे विशाल प्रतियोगी परीक्षाओं की सूची में अपनी मजबूत जगह बना चुके हैं।

## ग्लोबल पैमाने पर भारतीय इम्तिहानों का दबदबा
दुनिया भर की चौदह सबसे विशाल परीक्षाओं का विश्लेषण करने पर सामने आया है कि भारत की चार प्रमुख राष्ट्रीय परीक्षाएं वैश्विक स्तर पर शीर्ष क्रम में खड़ी हैं। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट यूजी लगभग 25 लाख उम्मीदवारों के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी परीक्षा बनकर उभरी है। वहीं प्रशासनिक सेवाओं के लिए आयोजित होने वाली यूपीएससी सीएसई में करीब 12 लाख अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमाते हैं। देश के प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में दाखिले की प्रवेश परीक्षा जेईई मेन में लगभग 10 लाख प्रतिभागी शामिल होते हैं, जबकि उच्च शिक्षा और शोध पात्रता से जुड़ी यूजीसी नेट परीक्षा में 8 लाख से अधिक परीक्षार्थी हिस्सा लेते हैं।

## चीन के गाओकाओ से भारतीय व्यवस्था का मुकाबला
वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े इम्तिहान का खिताब चीन की कॉलेज प्रवेश परीक्षा 'गाओकाओ' के नाम है, जिसमें लगभग 1.29 करोड़ छात्र भाग लेते हैं। चीन में इस परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था किसी सैन्य अभियान की तरह संचालित की जाती है। वहां परीक्षा से जुड़े गोपनीय दस्तावेजों को स्टील के मजबूत कमरों में रखा जाता है, जिनकी निगरानी अत्याधुनिक मोशन सेंसर्स और हथियाबंद पुलिस बलों के कड़े पहरे में होती है। चीन को यदि अलग रख दिया जाए, तो भारत के अलावा दुनिया का कोई भी ऐसा देश नहीं है जो इतने विशाल पैमाने पर प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित करने का जिम्मा उठाता हो। भारत में इन परीक्षाओं का संचालन किसी बड़े राष्ट्रीय पर्व जैसा होता है, जहां पूरी प्रशासनिक मशीनरी झोंक दी जाती है।

## प्रशासनिक खामियां और व्यवस्थागत चुनौतियां
करोड़ों युवाओं की भागीदारी जहां एक ओर उच्च शिक्षा और सरकारी नौकरियों के प्रति देश के समर्पण को दिखाती है, वहीं दूसरी ओर यह हमारी व्यवस्था की कमजोरियों को भी सामने लाती है। हर एक सीट के लिए ऐसी जबरदस्त गलाकाट प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है, जिसकी मिसाल दुनिया में दुर्लभ है। इसके बावजूद, देश में जब भी नीट या अन्य बड़ी परीक्षाएं आयोजित होती हैं, तो पेपर लीक, परीक्षा केंद्रों पर अव्यवस्था और प्रबंधन की घोर लापरवाही जैसी गंभीर दिक्कतें खड़ी हो जाती हैं। हाल के वर्षों में इन अनियमिताओं के चलते देश का शैक्षणिक और राजनीतिक माहौल काफी गरमा गया है।

## नेशनल टेस्टिंग फ्रेमवर्क और सुधारों की जरूरत
इतने बड़े पैमाने पर हो रहे आयोजनों के बीच अब सिर्फ कमियां गिनाने के बजाय एक फुल-प्रूफ सिस्टम तैयार करने की सख्त दरकार है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों से सीख लेते हुए भारत में एक सुदृढ़ 'नेशनल टेस्टिंग फ्रेमवर्क' स्थापित करने की आवश्यकता जताई गई है। इसके तहत डिजिटल मार्किंग, किसी भी आपात स्थिति के लिए रिजर्व परीक्षा केंद्रों की तैयारी और परीक्षार्थियों की शिकायतों के त्वरित समाधान के लिए एक पारदर्शी तंत्र तैयार किया जाना चाहिए। जब देश के करोड़ों युवा अपनी मेहनत के बल पर अपने सुनहरे कल की नींव रखने निकलते हैं, तो परीक्षा प्रणाली की शुचिता और विश्वसनीयता बनाए रखना प्रशासनिक तंत्र की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

## इसका आप पर असर
एसबीआई रिसर्च के इस तुलनात्मक अध्ययन से देश की विशाल परीक्षा प्रणाली में सुधारों और सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की दिशा तय होगी।

- **प्रतियोगी छात्रों के लिए:** परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा मानक सख्त होने से पेपर लीक और धांधली जैसी समस्याओं पर रोक लगेगी। इसके परिणामस्वरूप सामान्य अभ्यर्थियों को अपनी कड़ी मेहनत के आधार पर निष्पक्ष चयन का अवसर मिल सकेगा।
- **अभिभावकों और परिवारों के लिए:** इमरजेंसी रिजर्व सेंटर और पारदर्शी शिकायत निवारण व्यवस्था से परीक्षा रद्द होने का खतरा कम होगा। इससे बार-बार परीक्षा केंद्रों की यात्रा करने में होने वाले भारी मानसिक और आर्थिक तनाव से राहत मिलेगी।
- **प्रशासनिक व्यवस्था के लिए:** नेशनल टेस्टिंग फ्रेमवर्क लागू होने से परीक्षा आयोजन के दौरान होने वाली लॉजिस्टिक अव्यवस्थाओं पर काबू पाया जा सकेगा। स्थानीय प्रशासन डिजिटल मार्किंग और बेहतर सेंटर मैनेजमेंट के जरिए समय पर परिणाम घोषित करने में सक्षम होगा।
- **उच्च शिक्षा और रोजगार क्षेत्र के लिए:** चयन प्रक्रिया की शुचिता बहाल होने से योग्य प्रतिभाओं को सही समय पर उच्च शिक्षण संस्थानों और सरकारी सेवाओं में दाखिला मिलेगा। इससे संस्थानों के शैक्षणिक सत्र में होने वाली देरी और कोर्ट-कचहरी के विवादों में कमी आएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह शोध रिपोर्ट इसलिए जारी की गई है क्योंकि भारतीय प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही प्रशासनिक खामियों और पेपर लीक के मामलों ने पूरी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।

- **बड़े पैमाने पर अनियमितताएं:** हाल के वर्षों में मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में पेपर लीक तथा सेंटरों पर अव्यवस्था की गंभीर घटनाएं सामने आई थीं। इन गड़बड़ियों के चलते देश भर के छात्रों में भारी असंतोष फैल गया और मामला संसद से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा।
- **करोड़ों अभ्यर्थियों का दांव पर लगा भविष्य:** भारत की प्रमुख चार परीक्षाओं में ही 55 लाख से अधिक युवा आवेदन करते हैं, जहां हर सीट पर गलाकाट प्रतिस्पर्धा होती है। इतने विशाल स्तर पर युवाओं की भागीदारी के बावजूद पारदर्शी और फुल-प्रूफ सिस्टम का अभाव बना हुआ था।
- **वैश्विक मानकों से तुलना की जरूरत:** चीन जैसे देशों में 'गाओकाओ' जैसी विशाल परीक्षा को स्टील रूम्स, मोशन सेंसर्स और सैन्य स्तर की सुरक्षा में आयोजित कराया जाता है। भारतीय टेस्टिंग एजेंसियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर की आधुनिक व्यवस्थाएं अपनाने और कमियों को दूर करने के लिए ठोस सुझाव देना आवश्यक हो गया था।

## सवाल-जवाब

### 1. दुनिया की सबसे बड़ी प्रतियोगी परीक्षा कौन सी है और उसमें कितने छात्र बैठते हैं?
दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षा चीन की 'गाओकाओ' है, जिसमें लगभग 1.29 करोड़ छात्र शामिल होते हैं।

### 2. ग्लोबल स्तर पर भारत की नीट यूजी परीक्षा किस पायदान पर है?
नीट यूजी लगभग 25 लाख आवेदनों के साथ दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी परीक्षा है।

### 3. एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में भारत की कौन-कौन सी परीक्षाएं शामिल हैं?
इस रिपोर्ट में नीट यूजी, यूपीएससी सीएसई, जेईई मेन और यूजीसी नेट को दुनिया की सबसे बड़ी परीक्षाओं में शामिल किया गया है।

### 4. यूपीएससी सीएसई और जेईई मेन में कितने अभ्यर्थी हिस्सा लेते हैं?
यूपीएससी सीएसई में लगभग 12 लाख और जेईई मेन में करीब 10 लाख अभ्यर्थी बैठते हैं।

### 5. चीन की गाओकाओ परीक्षा की सुरक्षा में क्या विशेष इंतजाम किए जाते हैं?
गाओकाओ के दौरान स्टील के मजबूत कमरों, मोशन सेंसर और हथियाबंद पुलिस पहरे के बीच सैन्य जैसी कड़ी चौकसी रखी जाती है।

### 6. रिपोर्ट में भारतीय परीक्षा प्रणाली को बेहतर बनाने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?
रिपोर्ट में डिजिटल मार्किंग, इमरजेंसी रिजर्व सेंटर और पारदर्शी शिकायत निवारण तंत्र से लैस नेशनल टेस्टिंग फ्रेमवर्क बनाने की सलाह दी गई है।

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