जमुई के गौरव का प्रतीक बना केकेएम कॉलेज, सात दशक से संवार रहा है विद्यार्थियों का भविष्य साल 1955 में स्थापित कुमार कालिका मेमोरियल कॉलेज जमुई जिले में उच्च शिक्षा का प्रमुख आधार बना हुआ है। कभी आसपास के जिलों के छात्रों की पहली पसंद रहा यह संस्थान आज भी क्षेत्र की पहचान है। जमुई जिला मुख्यालय का कुमार कालिका मेमोरियल कॉलेज, जिसे स्थानीय लोग केकेएम कॉलेज के नाम से पुकारते हैं, सिर्फ एक साधारण शिक्षण संस्थान नहीं है बल्कि पूरे जिले की सांस्कृतिक और शैक्षणिक पहचान का आधार स्तंभ है। पिछले कई दशकों से इस संस्थान को इलाके के सबसे बड़े महाविद्यालय का गौरव हासिल है, जहां हर साल बड़ी तादाद में नौजवान उच्च शिक्षा की अपनी उम्मीदें लेकर पहुंचते हैं। स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति और स्थापना का सफर इस ऐतिहासिक संस्थान की नींव साल 1955 में रखी गई थी। इलाके के प्रसिद्ध स्वतंत्रता सेनानी कुमार कालिका सिंह की याद को संजोए रखने के उद्देश्य से इस महाविद्यालय का निर्माण कराया गया था। कुमार कालिका सिंह का देश की आजादी की लड़ाई में अहम योगदान रहा था और स्वाधीनता संग्राम के दौरान उन्हें कई बार जेल की यातनाएं भी सहनी पड़ी थीं। उनके इसी त्याग और बलिदान को चिरस्थायी सम्मान देने के लिए इस कॉलेज की स्थापना की गई थी। विश्वविद्यालय संबद्धता और शैक्षणिक दायरा वर्तमान समय में यह कॉलेज मुंगेर यूनिवर्सिटी से संबद्ध होकर अपनी शैक्षणिक गतिविधियों का संचालन कर रहा है। इससे पहले, यानी साल 2018 से पूर्व, इस संस्थान की संबद्धता तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयू) से हुआ करती थी। प्रशासनिक फेरबदल के बाद यह मुंगेर यूनिवर्सिटी के अधिकार क्षेत्र में आया। जमुई में उच्च अध्ययन के एक सशक्त केंद्र के तौर पर पहचान बनाने वाले इस संस्थान में अलग-अलग संकायों और विषयों की विधिवत शिक्षा दी जाती है, जिससे ग्रामीण व शहरी दोनों पृष्ठभूमि के विद्यार्थियों को सहूलियत मिलती है। विशाल परिसर, खेल मैदान और बुनियादी ढांचा संस्थान का कुल क्षेत्रफल काफी व्यापक है, जहां एक भव्य मुख्य भवन स्थापित किया गया है। इसके अलावा प्रशासनिक कार्यों के लिए अलग भवन, विभिन्न विभागों के लिए आधुनिक क्लासरूम, अकादमिक परिचर्चाओं के लिए सेमिनार हॉल और एक समृद्ध पुस्तकालय की व्यवस्था यहां मौजूद है। पढ़ाई के साथ-साथ शारीरिक विकास को ध्यान में रखते हुए खेलकूद के लिए भी विशेष इंतजाम किए गए हैं। कॉलेज परिसर के भीतर एक बड़ा खेल मैदान स्थित है, जहां साल भर तरह-तरह की खेल प्रतियोगिताएं चलती रहती हैं। इस मैदान पर कई जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय खेल आयोजनों का भी सफल संचालन होता रहा है। दूर-दराज के छात्रों का केंद्र और इग्नू की सुविधा केकेएम कॉलेज परिसर में जमुई जिले का इग्नू सेंटर भी संचालित किया जाता है, जिसके जरिए दूरस्थ शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की एक बहुत बड़ी संख्या यहां नामांकित रहती है। एक जमाना ऐसा था जब इस कॉलेज का शैक्षणिक दबदबा इतना था कि जमुई के अतिरिक्त लखीसराय और शेखपुरा जैसे पड़ोसी जिलों से भी छात्र उच्च शिक्षा ग्रहण करने यहीं आया करते थे। हालांकि बदलते वक्त के साथ लखीसराय और शेखपुरा में नए कॉलेज खुल गए, जिसके चलते अब मुख्य रूप से जमुई जिले के ही छात्र यहां दाखिला लेते हैं। इसके बावजूद संस्थान का आकर्षण कम नहीं हुआ है और यहां नामांकन पाना आज भी स्थानीय छात्र-छात्राओं का बड़ा सपना माना जाता है। विद्यार्थियों की सुविधा के लिए परिसर में कई सरकारी छात्रावास भी चलाए जाते हैं, जहां रहकर छात्र अपनी पढ़ाई पूरी करते हैं। इसका आप पर असर जमुई जिले में उच्च शिक्षा हासिल करने की योजना बना रहे विद्यार्थियों के लिए इस कॉलेज का शैक्षणिक और ढांचागत स्वरूप काफी अहमियत रखता है। • स्थानीय विद्यार्थियों के लिए: जमुई जिले के छात्र-छात्राओं को स्नातक और अन्य उच्च स्तरीय पाठ्यक्रमों के लिए अपने गृह जिले में ही एक बड़ा केंद्र उपलब्ध मिलता है। इससे ग्रामीण व कस्बाई इलाकों के युवाओं को पढ़ाई के लिए महानगरों का रुख करने की मजबूरी से राहत मिलती है। • आवासीय सुविधा: कॉलेज परिसर में सरकारी छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है। इसका सीधा लाभ दूर-दराज के गांवों से आने वाले उन छात्रों को मिलता है जो दैनिक आवागमन का खर्च नहीं उठा सकते। • दूरस्थ शिक्षा के अवसर: परिसर में संचालित इग्नू केंद्र के जरिए कामकाजी और नियमित कॉलेज न जा पाने वाले शिक्षार्थियों को डिग्री हासिल करने की सुविधा मिलती है। इससे जमुई के युवा पत्राचार माध्यम से अपना शैक्षणिक स्तर सुधारने में सक्षम होते हैं। • खेल प्रतिभाओं को मंच: कॉलेज परिसर में मौजूद विशाल खेल मैदान और नियमित प्रतियोगिताओं से जिले के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। यहां आयोजित होने वाली जिला और राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं से नई खेल प्रतिभाएं सामने आती हैं। ऐसा क्यों हुआ केकेएम कॉलेज का निर्माण और इसका ऐतिहासिक विकास क्षेत्र में उच्च शिक्षा की भारी कमी और एक स्वतंत्रता सेनानी के सम्मान से सीधे जुड़ा हुआ है। • स्वतंत्रता सेनानी का सम्मान: देश की आजादी की लड़ाई में कई बार जेल जा चुके स्वतंत्रता सेनानी कुमार कालिका सिंह के योगदान को अमर बनाने के लिए 1955 में इस संस्थान की स्थापना की गई थी। आजादी के बाद स्थानीय स्तर पर उनकी स्मृति को शिक्षा के केंद्र के रूप में सहेजना मुख्य उद्देश्य था। • विश्वविद्यालय प्रशासनिक पुनर्गठन: वर्ष 2018 से पहले यह संस्थान तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय का हिस्सा हुआ करता था। उच्च शिक्षा व्यवस्था के प्रशासनिक पुनर्गठन और मुंगेर यूनिवर्सिटी के अस्तित्व में आने के बाद कॉलेज की संबद्धता बदल दी गई। • पड़ोसी जिलों में शैक्षणिक विस्तार: पूर्व में लखीसराय और शेखपुरा के छात्र भी इसी संस्थान पर निर्भर थे क्योंकि उनके अपने जिलों में उच्च शिक्षा के साधन नगण्य थे। कालांतर में लखीसराय और शेखपुरा में स्वतंत्र कॉलेज खुल जाने के बाद छात्रों की निर्भरता केवल जमुई तक केंद्रित रह गई। सवाल-जवाब 1. केकेएम कॉलेज जमुई की स्थापना कब और किसकी स्मृति में की गई थी? इस कॉलेज की स्थापना साल 1955 में स्वतंत्रता सेनानी कुमार कालिका सिंह की याद में की गई थी। 2. वर्तमान में केकेएम कॉलेज किस विश्वविद्यालय से संबद्ध है? वर्तमान में यह कॉलेज मुंगेर यूनिवर्सिटी से संबद्ध है, जबकि साल 2018 से पहले यह तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय से संबद्ध था। 3. क्या केकेएम कॉलेज में दूरस्थ शिक्षा (डिस्टेंस एजुकेशन) की कोई सुविधा है? हां, इस कॉलेज में जमुई जिले का इग्नू सेंटर संचालित होता है जहां बड़ी संख्या में छात्र पढ़ाई करते हैं। 4. कॉलेज परिसर में छात्रों के रहने और खेलकूद के लिए क्या व्यवस्थाएं हैं? परिसर में छात्रों के रहने के लिए कई सरकारी छात्रावास और खेलकूद प्रतियोगिताओं के लिए एक बड़ा खेल मैदान मौजूद है। https://trendkia.com/career/jamui-ke-gaurava-ka-pratika-bana-kkm-college-sata-dashaka-se-snvara-raha-hai-vidyarthiyon-ka-bhavishya-35875 TrendKia — Har trend, sabse pehle.