जमुई के उत्क्रमित मध्य विद्यालय दिघौत ने बदली सरकारी शिक्षा की तस्वीर, 1.5 प्रतिशत पर सिमटी ड्रॉपआउट दर बिहार के जमुई जिले में स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय दिघौत 85 से 90 प्रतिशत दैनिक उपस्थिति और 1.5 प्रतिशत की न्यूनतम ड्रॉपआउट दर के साथ गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की नई मिसाल पेश कर रहा है। बिहार के जमुई जिले अंतर्गत इस्लामनगर अलीगंज प्रखंड का एक सुदूर ग्रामीण स्कूल आज संपूर्ण राज्य में सरकारी शिक्षा व्यवस्था के लिए अनुकरणीय मॉडल बन चुका है। उत्क्रमित मध्य विद्यालय दिघौत नाम के इस संस्थान ने अपनी अनूठी कार्यप्रणाली, उच्च अनुशासन और बच्चों के अनुकूल वातावरण के बल पर निजी शिक्षण संस्थानों को भी पीछे छोड़ दिया है। ग्रामीण परिवेश के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण माहौल देने की सोच के साथ चलाए जा रहे इस विद्यालय में दैनिक व्यवस्था इस तरह विकसित की गई है कि छात्र स्वयं प्रतिदिन पढ़ने के लिए आकर्षित होते हैं। नामांकन के आंकड़े और उत्कृष्ट दैनिक उपस्थिति प्रारंभिक से लेकर उच्च प्राथमिक स्तर यानी कक्षा 1 से कक्षा 8 तक संचालित होने वाले इस विद्यालय में वर्तमान समय में कुल 553 विद्यार्थियों का नामांकन दर्ज है। विद्यालय प्रशासन और शिक्षकों की समर्पित कार्यशैली का ही परिणाम है कि यहां रोजाना बच्चों की उपस्थिति 85 प्रतिशत से 90 प्रतिशत के बीच बनी रहती है। इस उच्च उपस्थिति दर को हासिल करने के लिए अध्यापकों को किसी दबाव का सहारा नहीं लेना पड़ता, बल्कि स्कूल का खुशनुमा माहौल बच्चों को खुद ब खुद खींच लाता है। प्रधानाचार्य अभिषेक कुमार के नेतृत्व में संचालित इस संस्था में वर्तमान में कुल 9 शिक्षक कार्यरत हैं, जिनमें 7 पुरुष शिक्षक और 2 महिला शिक्षिकाएं शामिल हैं। इसके साथ ही विद्यार्थियों को दिए जाने वाले मध्याह्न भोजन की व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए 5 रसोइयों का पदस्थापन किया गया है। रोजाना सुबह 9:00 बजे से विद्यालय की गतिविधियां पूरी समयबद्धता के साथ आरंभ हो जाती हैं। चेतना सत्र की अनूठी पहल और रोजाना का नया ज्ञान विद्यालय की सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक यहां प्रतिदिन आयोजित होने वाला 15 मिनट का चेतना सत्र है। इस चेतना सत्र को सामान्य प्रार्थना सभा से अलग बनाते हुए इसमें पाठ्यपुस्तक से इतर व्यापक ज्ञान की जानकारी दी जाती है। इस सत्र का खाका एक दिन पूर्व ही पूरी योजना बनाकर तैयार किया जाता है, जिससे बच्चों को हर सुबह कुछ नया और प्रेरणादायक सीखने को मिल सके। चेतना सत्र में प्रतिदिन की ऐतिहासिक और सामान्य ज्ञान की घटनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जाता है। उदाहरण के तौर पर 5 सितंबर के दिन बच्चों को शिक्षक दिवस की पृष्ठभूमि और डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के जीवन वृत्त से परिचित कराया जाता है। इसी तरह वर्ष के प्रत्येक दिन से जुड़े महत्वपूर्ण ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी छात्रों को दी जाती है। इसके अतिरिक्त योग अभ्यास, महापुरुषों के प्रेरक विचार, जीवन मूल्य, अनुशासन और उचित ढंग से पंक्तिबद्ध होकर खड़े होने का प्रशिक्षण भी इस 15 मिनट के समय में दिया जाता है। पीएम श्री योजना में चयन और ड्रॉपआउट पर प्रभावी अंकुश गुणवत्तापूर्ण मापदंडों पर खरा उतरने के कारण इस संस्था को केंद्र सरकार की प्रतिष्ठित पीएम श्री योजना में शामिल किया गया है। जहां एक ओर बिहार के ग्रामीण इलाकों में माध्यमिक और उच्च प्राथमिक स्तर पर छात्रों के बीच पढ़ाई छोड़ने यानी ड्रॉपआउट की समस्या अक्सर देखी जाती है, वहीं इस स्कूल ने ड्रॉपआउट दर को घटाकर मात्र 1.5 प्रतिशत पर ला खड़ा किया है। जो बच्चे यहां पहली कक्षा में दाखिला लेते हैं, वे अपनी बुनियादी शिक्षा पूरी करके ही आगे बढ़ते हैं। शिक्षक और अभिभावकों के साझा प्रयास का परिणाम उत्क्रमित मध्य विद्यालय दिघौत की यह उपलब्धि रातों-रात हासिल नहीं हुई है। बीते कुछ वर्षों के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षकों, स्थानीय अभिभावकों और ग्रामवासियों के निरंतर तालमेल और कठिन परिश्रम ने इस संस्थान की सूरत बदल दी है। अभिभावक भी विद्यालय की बैठकों और शैक्षणिक सुधारों में बढ़-चढ़कर अपना योगदान देते हैं। इसी सामूहिक प्रयास के बल पर आज यह ग्रामीण स्कूल क्षेत्र के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की श्रेणी में गिना जाने लगा है। इसका आप पर असर यह समाचार दर्शाता है कि सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में सही नेतृत्व और सामुदायिक प्रयास से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दी जा सकती है। • भारत में: देश भर के ग्रामीण क्षेत्रों में पीएम श्री योजना और अभिनव प्रार्थना सत्रों के जरिए सरकारी स्कूलों की साख मजबूत करने का मॉडल तैयार हो रहा है। इससे आम परिवारों का निजी स्कूलों की महंगी फीस पर निर्भर रहना कम हो सकता है। • बिहार और जमुई में: जमुई जिले के निवासियों को अपने नजदीकी सरकारी स्कूल में 85 से 90 प्रतिशत उपस्थिति और 1.5 प्रतिशत की न्यूनतम ड्रॉपआउट दर के साथ बेहतर प्राथमिक शिक्षा का विकल्प मिल रहा है। इससे स्थानीय अभिभावकों का सरकारी व्यवस्था में विश्वास बढ़ रहा है। सवाल-जवाब 1. उत्क्रमित मध्य विद्यालय दिघौत बिहार के किस जिले में स्थित है? यह विद्यालय बिहार राज्य के जमुई जिले के इस्लामनगर अलीगंज प्रखंड में स्थित है। 2. इस विद्यालय में वर्तमान में कितने बच्चे नामांकित हैं और उपस्थिति दर क्या है? विद्यालय में कुल 553 छात्र नामांकित हैं और रोजाना औसतन 85 से 90 प्रतिशत उपस्थिति दर्ज की जाती है। 3. चेतना सत्र क्या है और इसमें बच्चों को क्या सिखाया जाता है? चेतना सत्र रोजाना सुबह 9:00 बजे आयोजित होने वाला 15 मिनट का कार्यक्रम है, जिसमें योग, सामान्य ज्ञान, दैनिक इतिहास, महापुरुषों के विचार और अनुशासन सिखाया जाता है। 4. विद्यालय में ड्रॉपआउट दर कितनी है? इस विद्यालय में ड्रॉपआउट दर घटकर मात्र 1.5 प्रतिशत रह गई है। 5. स्कूल में कुल कितने शिक्षक और रसोइया कार्यरत हैं? विद्यालय में 9 शिक्षक (7 पुरुष और 2 महिला शिक्षिकाएं) तथा मध्याह्न भोजन के लिए 5 रसोइया पदस्थापित हैं। प्रेरणा और सबक जमुई का यह ग्रामीण स्कूल साबित करता है कि सीमित संसाधनों के बावजूद दूरदृष्टि और प्रतिबद्धता से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। • पूर्व तैयारी का महत्व: चेतना सत्र के लिए एक दिन पहले की जाने वाली योजना दिखाती है कि दैनिक दिनचर्या में नयापन लाने से बच्चों का रुझान बढ़ाया जा सकता है। • सामूहिक प्रयास में बल: शिक्षकों और अभिभावकों के साझा सहयोग ने एक सामान्य ग्रामीण स्कूल को क्षेत्र का मॉडल संस्थान बना दिया। • अनुशासन और मूल्य शिक्षा: योग, महापुरुषों के विचार और अनुशासन को रोजाना की गतिविधियों में शामिल करने से छात्रों का सर्वांगीण विकास होता है। https://trendkia.com/career/jamui-ke-utkramit-madhya-vidyalaya-dighaut-ne-badali-sarakari-shiksha-ki-tasvira-1-5-pratishata-para-simati-dropaauta-dara-27001 TrendKia — Har trend, sabse pehle.