# कक्षा 9 के पाठ्यक्रम में शामिल हुआ उद्यमिता का नया पाठ, लिज्जत पापड़ और ओबेरॉय की मिसाल से सीखेंगे व्यापार

> एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में उद्यमिता पर नया अध्याय शामिल किया है, जिसमें लिज्जत पापड़ और मोहन सिंह ओबेरॉय की सफलताओं के जरिए व्यापारिक हुनर सिखाया जाएगा।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-10-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/kaksha-9-ke-pathyakrama-men-shamila-hua-udyamita-ka-naya-patha-lijjat-papad-aura-oberoi-ki-misala-se-sikhenge-vyapara-42156 · **Language:** Hindi
**Tags:** एनसीईआरटी, शिक्षा, कक्षा 9, स्टार्टअप, उद्यमिता, लिज्जत पापड़, मोहन सिंह ओबेरॉय, सामाजिक विज्ञान

स्कूली शिक्षा के पारंपरिक ढांचे में अक्सर सैद्धांतिक विषयों पर अधिक जोर रहता था, लेकिन अब विद्यार्थियों को व्यावहारिक समझ और व्यावसायिक कौशल से जोड़ने की दिशा में ठोस बदलाव किए जा रहे हैं। इसी क्रम में एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में उद्यमिता पर केंद्रित एक नया अध्याय शामिल किया है। इस पहल का मुख्य उद्देश्य छात्रों में बहुत कम उम्र से ही जोखिम उठाने की क्षमता, नए विचारों पर काम करने का हौसला और स्वतंत्र उद्यम खड़ा करने की बुनियादी समझ विकसित करना है। किताबी परिभाषाओं में उलझाने के बजाय इस नए पाठ को व्यावहारिक उदाहरणों से तैयार किया गया है, ताकि युवा पीढ़ी केवल रोजगार तलाशने तक सीमित न रहे बल्कि भविष्य में रोजगार पैदा करने की सोच भी अपना सके।

## तीन बुनियादी सवालों पर टिका है नया पाठ्यक्रम
नौवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में शामिल यह नया खंड मुख्य रूप से तीन अहम बिंदुओं के इर्द-गिर्द संरचित किया गया है। सबसे पहले विद्यार्थियों को यह समझाया गया है कि किसी भी समाज और अर्थव्यवस्था के विकास में उद्यमशीलता किस तरह महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। दूसरा मुख्य पहलू यह स्पष्ट करता है कि किसी व्यावसायिक संस्थान या उपक्रम के संचालन में कौन-कौन से मुख्य कार्यक्षेत्र सक्रिय होते हैं। इसके साथ ही छात्रों को यह भी सिखाया जा रहा है कि जमीन पर काम करने वाला एक प्रभावी और सफल बिजनेस प्लान किस तरह तैयार किया जाता है।

## शुरुआती उम्र में बाजार की समझ और तकनीकी टूल्स का मेल
इस पाठ्यक्रम के जरिए बच्चों को बाजार की दैनिक गतिविधियों को बारीकी से समझने, नए मौकों की पहचान करने, अपने कामकाज का सही मूल्यांकन करने और उपलब्ध संसाधनों की पूर्व योजना बनाने के व्यावहारिक तौर-तरीके सिखाए जा रहे हैं। बदलते वक्त के साथ तालमेल बिठाते हुए इसमें आधुनिक तकनीक की भूमिका को भी प्रमुखता दी गई है। अध्याय में यह रेखांकित किया गया है कि आज के दौर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) किस प्रकार बाजार के रुझानों का विश्लेषण करने और व्यापारिक निर्णय लेने में उद्यमियों की मदद कर सकता है।

## भारत के स्टार्टअप विस्तार की जमीनी तस्वीर
पाठ्यक्रम में भारतीय स्टार्टअप व्यवस्था के पिछले एक दशक के सफर को स्पष्ट आंकड़ों के जरिए प्रस्तुत किया गया है। करीब एक दशक पहले देश में जहां केवल 350 से 400 स्टार्टअप सक्रिय थे, वहीं आज इनकी कुल संख्या बढ़कर लगभग 2.3 लाख तक पहुंच चुकी है। इन आंकड़ों के साथ भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है। इस व्यवस्था को आगे बढ़ाने में अनुसंधान, औद्योगिक इकाइयों और नए स्टार्टअप्स को एक साझा मंच पर लाने की नीतिगत सोच ने अहम भूमिका निभाई है।

## घरेलू छत से वैश्विक पहचान तक पहुंचा लिज्जत पापड़
किताबी सिद्धांतों को जीवन के अनुभवों से जोड़ने के लिए पाठ्यक्रम में दो ऐतिहासिक भारतीय उद्यमों की प्रेरक यात्रा को शामिल किया गया है। इनमें पहला उदाहरण श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ का है, जिसकी शुरुआत साल 1959 में मुंबई में एक घर की छत से हुई थी। सात गृहिणियों ने महज 80 रुपये उधार लेकर पापड़ बनाने का यह काम शुरू किया था। घरेलू जिम्मेदारियों के साथ-साथ गुणवत्ता और कड़े अनुशासन को प्राथमिकता देते हुए इन महिलाओं ने एक साधारण घरेलू प्रयास को दुनिया भर में पहचाने जाने वाले बड़े ब्रांड में तब्दील कर दिया।

## 50 रुपये की नौकरी से बड़े होटल समूह की स्थापना
दूसरा प्रमुख उदाहरण मोहन सिंह ओबेरॉय के जीवन संघर्ष और सफलता का है। पंजाब में जन्मे ओबेरॉय ने अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत महज 50 रुपये महीने की मामूली नौकरी से की थी। अपने सपनों को विस्तार देने के लिए उन्होंने अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर पहला होटल खरीदा। अपने समर्पण और दूरदर्शिता के बल पर उन्होंने भारतीय आतिथ्य सत्कार उद्योग में एक विशाल होटल श्रृंखला की नींव रखी और उद्योग जगत के प्रमुख दिग्गजों में अपनी पहचान बनाई। इन दोनों कहानियों के माध्यम से छात्रों को यह संदेश दिया जा रहा है कि सीमित संसाधनों के बावजूद मजबूत संकल्प और सही योजना से बड़े मुकाम हासिल किए जा सकते हैं।

## इसका आप पर असर
एनसीईआरटी का यह नया पाठ्यक्रम स्कूली स्तर पर छात्रों की व्यावसायिक सोच और वित्तीय दृष्टिकोण को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

- **छात्रों के लिए:** नौवीं कक्षा के विद्यार्थियों को कम उम्र में ही प्रोजेक्ट प्लानिंग, वित्तीय समझ और बाजार की बारीकियां सीखने को मिलेंगी। इससे वे पारंपरिक रटने की पद्धति से हटकर व्यावहारिक कौशल विकसित कर सकेंगे।
- **अभिभावकों के लिए:** माता-पिता को अपने बच्चों में नौकरी खोजने के बजाय स्वतंत्र उद्यम शुरू करने की सोच विकसित होते दिखेगी। इससे परिवार के स्तर पर करियर से जुड़े विकल्पों को लेकर बातचीत का दायरा बढ़ेगा।
- **शिक्षकों के लिए:** सामाजिक विज्ञान पढ़ाने वाले अध्यापकों को वास्तविक जीवन के उदाहरणों और केस स्टडीज के आधार पर इंटरैक्टिव तरीके से कक्षाएं संचालित करनी होंगी। उन्हें पारंपरिक इतिहास और भूगोल के साथ व्यावसायिक संकल्पनाओं को जोड़कर पढ़ाना होगा।
- **शिक्षा व्यवस्था पर:** स्कूल स्तर पर ही व्यापार योजना और तकनीक के उपयोग की नींव मजबूत होगी। आगे चलकर उच्च शिक्षा और करियर में छात्रों को नवाचार और स्टार्टअप शुरू करने में सहूलियत मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
एनसीईआरटी ने शिक्षा को रोजगारोन्मुखी और व्यावहारिक बनाने के उद्देश्य से सामाजिक विज्ञान की नौवीं कक्षा की पुस्तक में यह बदलाव किया है।

- **व्यावहारिक ज्ञान की जरूरत:** लंबे समय से स्कूली पाठ्यक्रम में केवल अकादमिक थ्योरी पर ध्यान दिया जाता रहा था, जिससे छात्रों में वास्तविक व्यापारिक कौशल की कमी महसूस की जा रही थी। शिक्षा को वास्तविक जीवन की चुनौतियों से जोड़ने के लिए इस नए खंड की रचना की गई।
- **देश में बढ़ता स्टार्टअप दायरा:** भारत में सक्रिय स्टार्टअप्स की संख्या 350-400 से बढ़कर लगभग 2.3 लाख तक पहुंच चुकी है। देश की इस बदलती आर्थिक वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए नीतिगत स्तर पर युवा पीढ़ी को शुरुआती दौर से ही इस व्यवस्था से परिचित कराना आवश्यक समझा गया।
- **रोजगार प्रदाता बनाने का दृष्टिकोण:** केवल नौकरी तलाशने वाली मानसिकता के स्थान पर नए उपक्रम खड़े करने और रोजगार सृजन की क्षमता विकसित करने के लिए पाठ्यक्रम में यह रणनीतिक बदलाव किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. एनसीईआरटी ने नौवीं कक्षा के किस विषय में उद्यमिता का पाठ जोड़ा है?
एनसीईआरटी ने कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में उद्यमिता पर केंद्रित यह नया अध्याय जोड़ा है।

### 2. इस नए अध्याय को किन तीन मुख्य सवालों के आधार पर तैयार किया गया है?
यह अध्याय समाज पर उद्यमिता के प्रभाव, व्यापार के मुख्य कार्यक्षेत्रों और एक प्रभावी बिजनेस प्लान तैयार करने के तौर-तरीकों पर आधारित है।

### 3. पाठ्यक्रम में तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की क्या भूमिका बताई गई है?
इसमें बताया गया है कि कैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बाजार का विश्लेषण करने और व्यापारिक फैसलों को बेहतर बनाने में मददगार साबित होता है।

### 4. किताब के अनुसार पिछले एक दशक में भारत में स्टार्टअप्स की संख्या में क्या बदलाव आया है?
किताब के अनुसार देश में स्टार्टअप्स की संख्या एक दशक पहले के 350-400 से बढ़कर अब करीब 2.3 लाख तक पहुंच चुकी है।

### 5. वैश्विक स्तर पर भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम किस पायदान पर है?
आंकड़ों के अनुसार भारत वर्तमान में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम बन चुका है।

### 6. लिज्जत पापड़ की शुरुआत कब और कितने रुपयों से हुई थी?
इसकी शुरुआत 1959 में मुंबई की एक छत से 7 महिलाओं ने महज 80 रुपये उधार लेकर की थी।

### 7. मोहन सिंह ओबेरॉय ने अपने पहले होटल की शुरुआत कैसे की थी?
उन्होंने 50 रुपये महीने की नौकरी से शुरुआत की थी और बाद में अपनी पत्नी के गहने गिरवी रखकर अपना पहला होटल खरीदा था।

## प्रेरणा और सबक
लिज्जत पापड़ और मोहन सिंह ओबेरॉय के संघर्ष छात्रों को सिखाते हैं कि दृढ़ संकल्प से किसी भी स्तर पर बड़ा मुकाम हासिल किया जा सकता है।

- **छोटे संसाधनों से शुरुआत:** लिज्जत पापड़ की 7 महिलाओं ने मात्र 80 रुपये उधार लेकर काम शुरू किया था, जो यह साबित करता है कि बड़ा व्यापार शुरू करने के लिए शुरुआत में भारी पूंजी से ज्यादा जरूरी स्पष्ट विचार और पहल है।
- **गुणवत्ता और सामूहिक अनुशासन:** घरेलू कामकाज के साथ-साथ कड़े नियमों और गुणवत्ता पर अडिग रहकर महिलाओं ने इसे वैश्विक पहचान दिलाई, जिससे यह सीख मिलती है कि निरंतरता ही सफलता की कुंजी है।
- **कठिन परिस्थितियों में साहस:** मोहन सिंह ओबेरॉय ने 50 रुपये की नौकरी से शुरुआत की और पत्नी के गहने गिरवी रखकर पहला होटल लिया, जो यह सिखाता है कि अपने विजन पर भरोसा रखकर सोचा-समझा जोखिम उठाना पड़ता है।
- **स्थानीय पहचान से वैश्विक विस्तार:** दोनों ही उदाहरण दर्शाते हैं कि जमीन से जुड़े पारंपरिक काम भी सही प्रबंधन और दूरदर्शिता के दम पर वैश्विक स्तर के उद्यम बन सकते हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._