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  "title": "केरल में जन्मदर घटने से खाली पड़े क्लासरूम, पीएससी से चयनित 5800 से अधिक शिक्षक नियुक्ति के इंतजार में धरने पर मजबूर",
  "summary": "केरल में जन्मदर में गिरावट और प्राथमिक स्कूलों में दाखिले घटने के कारण शिक्षक भर्ती पर संकट गहरा गया है। पीएससी द्वारा चयनित 6,114 शिक्षकों में से केवल 239 को जॉइनिंग मिली है, जबकि 5,800 से अधिक अभ्यर्थी सचिवालय के बाहर धरने पर बैठे हैं।",
  "content": "भारत में सर्वोच्च साक्षरता दर का गौरव रखने वाला राज्य केरल इस समय एक अभूतपूर्व सामाजिक और प्रशासनिक संकट का सामना कर रहा है। राज्य में लगातार गिरती जन्मदर के कारण प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की संख्या तेजी से घट रही है। कक्षा में छात्रों की अनुपस्थिति और कम दाखिलों का सीधा दुष्प्रभाव अब उन युवाओं पर पड़ रहा है जो वर्षों की कठिन मेहनत के बाद सरकारी शिक्षक बनने का सपना संजोए बैठे थे। राज्य में खाली होते क्लासरूम और घटते पदों के बीच हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ नजर आ रहा है।\n\n \n\nस्कूलों में दाखिले घटे, 5800 से ज्यादा उम्मीदवार सड़क पर\n हाल ही में जारी आंकड़ों से पता चलता है कि केरल पब्लिक सर्विस कमीशन (पीएससी) ने लोअर प्राइमरी स्कूलों में भर्ती के लिए जून 2025 से तीन साल की अवधि के वास्ते 6,114 सरकारी शिक्षकों का चयन किया था। हालांकि इस विशाल सूची में से अब तक केवल 239 अभ्यर्थियों को ही औपचारिक नियुक्ति पत्र प्राप्त हो सका है। बाकी बचे 5,800 से अधिक चयनित अभ्यर्थी अपनी जायज नियुक्ति की मांग को लेकर राज्य सचिवालय के बाहर पिछले 41 दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठने को मजबूर हैं। लंबे इंतजार और अनिश्चितता के कारण इन युवाओं में भारी निराशा व्याप्त है।\n\n \n\nचार सालों में 3.33 लाख छात्र हुए कम\n इस विकट समस्या की मुख्य जड़ राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त (एडेड) स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या में आ रही भारी गिरावट है। शैक्षणिक वर्ष 2021-22 में केरल के सरकारी और एडेड स्कूलों में कुल 38.68 लाख विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे थे। वहीं वर्ष 2025-26 तक यह संख्या गिरकर 35.35 लाख पर आ गई। इसका सीधा अर्थ यह है कि महज चार वर्षों की समयावधि के भीतर स्कूल शिक्षा व्यवस्था से लगभग 3.33 लाख छात्र कम हो चुके हैं। जब कक्षाओं में पढ़ाने के लिए छात्र ही नहीं बचेंगे तो नए शिक्षकों के लिए पदों का सृजन होना लगभग नामुमकिन हो जाता है।\n\n \n\n1:30 का छात्र-शिक्षक अनुपात और 2022 का नियम\n लोअर प्राइमरी सेक्शन के लिए तय किए गए नियमों के अनुसार प्रत्येक 30 छात्रों पर एक शिक्षक की नियुक्ति का प्रावधान है (1:30 का अनुपात)। ऐसे में जब विद्यार्थियों का नामांकन घटता है, तो स्कूल प्रबंधन नए पदों को समाप्त करने के लिए बाध्य हो जाता है। राज्य सरकार द्वारा बनाए गए नए दिशानिर्देशों के तहत वर्ष 2022 तक नियुक्त हो चुके शिक्षकों की नौकरियां तो सुरक्षित रखी गई हैं, लेकिन वर्ष 2022 के बाद नियुक्त हुए अथवा रैंक लिस्ट में शामिल अभ्यर्थियों के पदों पर लगातार अनिश्चितता की तलवार लटकी हुई है। इन अभ्यर्थियों को नई वैकेंसी आने तक केवल इंतजार ही करना पड़ेगा।\n\n \n\nमई 2028 तक की मियाद और लाखों का डोनेशन\n केरल पीएससी की इस आधिकारिक रैंक लिस्ट की वैधता मई 2028 में समाप्त होने वाली है। भर्ती प्रक्रिया की इस समय-सीमा के कारण अभ्यर्थियों पर समय का दबाव लगातार बढ़ रहा है। उदाहरण के तौर पर 40 वर्षीया अभ्यर्थी वलर्मथी ने वर्ष 2017 में अपना टीचर ट्रेनिंग कोर्स (टीटीसी) पूरा किया था। पीएससी की मेरिट लिस्ट में नाम दर्ज होने के बावजूद उन्हें अपनी आजीविका चलाने के लिए दैनिक दिहाड़ी मजदूरी करने पर मजबूर होना पड़ रहा है। दूसरी ओर एडेड प्राइवेट स्कूलों की स्थिति भी बेहद चिंताजनक है, जहां प्रबंधन एक शिक्षक पद के बदले 30 से 40 लाख रुपये तक की भारी-भरकम राशि बतौर डोनेशन मांग रहा है। गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों से आने वाले मेधावी अभ्यर्थियों के लिए इतनी बड़ी रकम चुका पाना पूरी तरह असंभव है।\n\n \n\nपहली कक्षा में महज 2.06 लाख दाखिले और बदलता जनांकिकी ढांचा\n यह पूरा मामला केवल शिक्षक बेरोजगारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह केरल के बदलते जनांकिकी ढांचे की ओर एक बड़ा संकेत करता है। चालू वर्ष में पहली कक्षा में प्रवेश लेने वाले बच्चों की कुल संख्या केवल 2.06 लाख दर्ज की गई है। प्रजनन दर में आई इस गिरावट के कारण राज्य का सामाजिक स्वरूप बदल रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह रुझान इसी प्रकार जारी रहा तो आने वाले वर्षों में अनेक प्राथमिक विद्यालयों पर ताले लटकने की स्थिति पैदा हो जाएगी और सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे हजारों युवाओं का भविष्य गहरे अंधकार में समा जाएगा।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: घटती जन्मदर और बदलते जनांकिकी ढांचे के कारण भविष्य में देश के अन्य राज्यों में भी प्राथमिक शिक्षा और शिक्षक भर्ती के मॉडल में बदलाव करने की आवश्यकता हो सकती है।\n\nकेरल में: राज्य के हजारों योग्य अभ्यर्थियों की सरकारी नौकरियां अधर में लटकी हुई हैं और सामान्य परिवारों के युवाओं के लिए निजी एडेड स्कूलों में भारी डोनेशन देना बेहद कठिन हो गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. केरल में पीएससी द्वारा चयनित कितने शिक्षक नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं?\nकेरल पब्लिक सर्विस कमीशन ने लोअर प्राइमरी स्कूलों के लिए 6,114 शिक्षकों का चयन किया था, जिनमें से केवल 239 को जॉइनिंग मिली है और 5,800 से ज्यादा अभ्यर्थी नियुक्ति का इंतजार कर रहे हैं।\n\n2. केरल के प्राथमिक स्कूलों में छात्रों की संख्या कितनी घटी है?\nसाल 2021-22 में सरकारी और एडेड स्कूलों में 38.68 लाख बच्चे थे, जो 2025-26 में घटकर 35.35 लाख रह गए, यानी चार साल में करीब 3.33 लाख छात्र कम हुए हैं।\n\n3. लोअर प्राइमरी सेक्शन में छात्र-शिक्षक अनुपात का नियम क्या है?\nनियम के अनुसार लोअर प्राइमरी सेक्शन में 30 विद्यार्थियों पर एक शिक्षक होना अनिवार्य है, जिसे 1:30 का अनुपात कहा जाता है।\n\n4. केरल पीएससी की इस रैंक लिस्ट की वैधता कब समाप्त होगी?\nकेरल पीएससी द्वारा लोअर प्राइमरी शिक्षकों की चयन सूची जून 2025 से तीन साल के लिए बनाई गई थी, जिसकी वैधता मई 2028 में समाप्त हो जाएगी।\n\n5. निजी एडेड स्कूलों में शिक्षक पद के लिए कितना डोनेशन मांगा जा रहा है?\nसहायता प्राप्त निजी स्कूलों में प्रबंधन द्वारा एक शिक्षक पद के लिए 30 से 40 लाख रुपये तक के डोनेशन की मांग की जा रही है।",
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  "category": "करियर",
  "publishedAt": "2026-08-21",
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    "केरल शिक्षक भर्ती",
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