कॉलेज में सीनियर्स का कौन-सा व्यवहार माना जाता है रैगिंग? जानिए यूजीसी के नियम और शिकायत का तरीका कॉलेज में नए छात्रों के साथ मजाक या परिचय के नाम पर होने वाले मानसिक, शारीरिक और आर्थिक उत्पीड़न की पहचान कैसे करें और यूजीसी के नियमों के तहत कहां शिकायत दर्ज कराएं, जानें पूरी जानकारी। कॉलेज जीवन में कदम रखना हर छात्र के लिए एक बेहद नए और उत्साहजनक दौर की शुरुआत होती है। नए दोस्त बनाना, नया शैक्षणिक माहौल और भविष्य की नई उम्मीदें इस नए सफर को खास बनाती हैं। हालांकि, शुरुआती दिनों में सीनियर्स और जूनियर्स के बीच परिचय या 'इंट्रोडक्शन' के नाम पर कुछ ऐसी अप्रिय घटनाएं हो जाती हैं, जो नए छात्रों के मन में गहरा डर पैदा कर देती हैं। ऐसे माहौल में अक्सर फर्स्ट ईयर के छात्रों के मन में यह सवाल उठता है कि सामान्य बातचीत कहां खत्म होती है और उत्पीड़न का दायरा कहां से शुरू होता है। अक्सर छात्र इस गलतफहमी में रहते हैं कि जब तक किसी घटना में मारपीट या कोई गंभीर शारीरिक विवाद न हो, तब तक उसे रैगिंग नहीं माना जा सकता। हालांकि यह सोच पूरी तरह गलत है। नियमों के मुताबिक, किसी भी नए छात्र को मानसिक रूप से परेशान करना, सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना या उसकी इच्छा के विरुद्ध कोई भी काम करवाना रैगिंग की श्रेणी में आता है। इसमें नए छात्रों से जबरन या अजीब तरीके से नमस्ते करवाना भी शामिल है। परिसर में अपनी सुरक्षा और सम्मान बनाए रखने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों को सही तरीके से समझना जरूरी है। मानसिक उत्पीड़न और सार्वजनिक शर्मिंदगी मानसिक रूप से परेशान करना रैगिंग का सबसे प्रचलित रूप माना जाता है। यदि कोई सीनियर आपकी मर्जी के बिना कोई ऐसा काम करवाता है जिससे आपको मानसिक पीड़ा या शर्मिंदगी महसूस हो, तो वह रैगिंग है। इसके मुख्य उदाहरणों में सबके सामने अजीब या भद्दे गाने गाने और डांस करने के लिए मजबूर करना शामिल है। इसके अलावा गाली-गलौज करना, किसी छात्र के शारीरिक रूप, बोली, भाषा या उसके सामाजिक-पारिवारिक बैकग्राउंड का मज़ाक उड़ाना भी इसी दायरे में आता है। किसी के आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाने वाले शब्द बोलना या बेवजह डांटना भी उत्पीड़न माना जाता है। दैनिक दिनचर्या और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर नियंत्रण अगर कोई सीनियर हॉस्टल या कॉलेज परिसर में आपके दैनिक रूटीन को जबरन कंट्रोल करने की कोशिश करता है, तो इसे साधारण जान-पहचान नहीं कहा जा सकता। आपको अपने ही हॉस्टल के कमरे में जाने से रोकना, समय पर सोने न देना या पढ़ाई करने में बाधा उत्पन्न करना रैगिंग का हिस्सा है। किसी खास तरह के कपड़े पहनने, अजीबोगरीब हेयरस्टाइल बनाने या अजीब तरीके से चलने के लिए मजबूर करना भी स्वतंत्रता का हनन है। इसके अलावा सीनियर्स के व्यक्तिगत काम करना, जैसे उनके असाइनमेंट लिखना, उनके कपड़े धोना या कैंटीन से उनके लिए सामान लाना पूरी तरह प्रतिबंधित है। शारीरिक प्रताड़ना और जबरदस्ती शारीरिक रूप से परेशान करना रैगिंग का एक बेहद गंभीर रूप है। इसमें किसी छात्र को उसकी इच्छा के विरुद्ध कड़े शारीरिक कार्यों में धकेलना शामिल है। जैसे कि बिना वजह लंबे समय तक तेज धूप में खड़े रखना, उठक-बैठक करवाना या अन्य कठिन टास्क देना। किसी छात्र को ऐसा कुछ खाने या पीने के लिए मजबूर करना जो वह नहीं चाहता, पूरी तरह गैरकानूनी है। इसके साथ ही, किसी भी प्रकार का अनिच्छुक शारीरिक स्पर्श या हाथापाई करना भी गंभीर अपराध है। आर्थिक शोषण और व्यक्तिगत सामान का इस्तेमाल अगर कोई सीनियर आपकी मर्जी के बिना आपसे पैसे या सामान की मांग करता है, तो यह भी रैगिंग का ही हिस्सा माना जाता है। इसके तहत जूनियर्स से जबरन खाने-पीने का बिल भरवाना या कैंटीन में जबरन दावत मांगना शामिल है। बिना अनुमति किसी छात्र की किताबें, पढ़ाई के नोट्स, लैपटॉप या अन्य व्यक्तिगत चीजें ले लेना और उन्हें वापस न करना भी वित्तीय उत्पीड़न के अंतर्गत आता है। शिकायत दर्ज कराने के आधिकारिक माध्यम यदि किसी छात्र को ऊपर बताई गई किसी भी परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है, तो इसे सहने के बजाय तुरंत कानूनी और आधिकारिक कदम उठाने चाहिए। छात्र सबसे पहले अपने संस्थान की एंटी-रैगिंग कमेटी (Anti-Ragging Committee) से संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा, यूजीसी के राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-5522 पर अपनी शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। ऐसे मामलों में पुलिस एफआईआर दर्ज कराने का भी स्पष्ट प्रावधान मौजूद है। इसका आप पर असर • भारत भर में: उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश लेने वाले नए छात्रों और उनके अभिभावकों को अपने कानूनी अधिकारों तथा यूजीसी के शिकायत तंत्र की स्पष्ट जानकारी मिलेगी। • छात्रों के लिए: फर्स्ट ईयर के छात्र मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न को चुपचाप सहने के बजाय तुरंत टोल-फ्री नंबर 1800-180-5522 पर शिकायत दर्ज करा सकेंगे। सवाल-जवाब 1. कॉलेज में किन गतिविधियों को रैगिंग माना जाता है? किसी छात्र को मानसिक रूप से परेशान करना, जबरन काम करवाना, कपड़े या हेयरस्टाइल पर दबाव बनाना, शारीरिक कष्ट देना और बिना सहमति पैसे या सामान लेना रैगिंग माना जाता है। 2. क्या बिना मारपीट के केवल मानसिक तनाव देना रैगिंग है? हां, यूजीसी के नियमों के तहत शारीरिक हिंसा के बिना भी किसी छात्र को मानसिक रूप से प्रताड़ित करना या सार्वजनिक रूप से शर्मिंदा करना रैगिंग की श्रेणी में आता है। 3. रैगिंग की शिकायत दर्ज कराने के लिए यूजीसी का हेल्पलाइन नंबर क्या है? छात्र यूजीसी के राष्ट्रीय टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-5522 पर सीधे संपर्क करके अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। 4. कॉलेज परिसर में रैगिंग होने पर सबसे पहले किससे संपर्क करना चाहिए? छात्रों को सबसे पहले अपने कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी से संपर्क करना चाहिए या यूजीसी की राष्ट्रीय हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए। https://trendkia.com/career/koleja-men-siniyarsa-ka-kauna-sa-vyavahara-mana-jata-hai-ragging-janie-ugc-ke-niyama-aura-shikayata-ka-tarika-17633 TrendKia — Har trend, sabse pehle.