एमबीए में दाखिले से पहले समझें ऑनलाइन और रेगुलर कोर्स का फर्क, जानिए फीस, पैकेज और UGC के नियम एमबीए की पढ़ाई के लिए 15 से 25 लाख रुपये का खर्च करें या 1 से 3 लाख रुपये में घर बैठे ऑनलाइन एमबीए करें, दाखिला लेने से पहले यूजीसी के नियम, रिक्रूटर्स की सोच और सैलरी पैकेज के गणित को गहराई से समझना बेहद जरूरी है। करियर में तेजी से तरक्की पाने और मोटी सैलरी पाने के लिए एमबीए हमेशा से युवाओं की पहली पसंद रहा है। हालांकि, मौजूदा समय में छात्रों और वर्किंग प्रोफेशनल्स के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि क्या 15 से 25 लाख रुपये की भारी-भरकम फीस चुकाकर 2 साल की रेगुलर क्लास अटेंड की जाए, या फिर नौकरी के साथ कम बजट में ऑनलाइन एमबीए की राह चुनी जाए। इंटरनेट और सोशल मीडिया विज्ञापनों में ऑनलाइन एमबीए के जरिए 10-15 लाख रुपये तक का पैकेज दिलाने के कई दावे किए जाते हैं। ऐसे में किसी भी कॉलेज में एडमिशन लेने से पहले इस पूरी प्रक्रिया का सही गणित, रिक्रूटर्स का नजरिया और डिग्रियों का वास्तविक मूल्य जानना आवश्यक है। यूजीसी और एआईसीटीई के नियमों में ऑनलाइन डिग्री का दर्जा अक्सर छात्रों के मन में यह आशंका होती है कि क्या ऑनलाइन एमबीए की डिग्री को सरकारी या कॉर्पोरेट क्षेत्र में मान्यता मिलती है। भारत में यूजीसी और एआईसीटीई के आधिकारिक नियमों के अनुसार, यूजीसी से मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी द्वारा दी जाने वाली ऑनलाइन एमबीए डिग्री की कानूनी वैल्यू रेगुलर एमबीए डिग्री के बिल्कुल बराबर होती है। कानून की नजर में दोनों डिग्रियों को एक समान दर्जा दिया गया है। इसके बावजूद, जब वास्तविक नौकरी और सैलरी पैकेज की बात आती है, तो कॉरपोरेट जगत और रिक्रूटर्स का नजरिया दोनों डिग्रियों के मूल्यांकन में थोड़ा भिन्न हो सकता है। क्या ऑनलाइन एमबीए से 10 लाख से अधिक का सैलरी पैकेज मिलना संभव है? विज्ञापनों में किए जाने वाले 10 से 15 लाख रुपये के पैकेज के दावों की सच्चाई थोड़ी व्यावहारिक है। ऑनलाइन एमबीए के आधार पर 10 लाख रुपये या उससे अधिक का शुरुआती पैकेज मुख्य रूप से उन अभ्यर्थियों को मिलता है, जिनके पास पहले से ही 2 से 4 साल का वर्क एक्सपीरियंस मौजूद होता है। अगर आप पहले से किसी कंपनी में जॉब कर रहे हैं, तो ऑनलाइन मैनेजमेंट डिग्री आपके रिज्यूमे को मजबूती देती है, जिससे आपको मौजूदा नौकरी में प्रमोशन और 30% से 50% तक की सैलरी वृद्धि पाने में मदद मिलती है। इसके विपरीत, किसी फ्रेशर छात्र के लिए बिना किसी पूर्व कार्य अनुभव के केवल ऑनलाइन एमबीए की डिग्री के बल पर शुरुआती दौर में ही 10 लाख रुपये से ऊपर का पैकेज हासिल करना काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है। कॉर्पोरेट रिक्रूटर्स की बदलती सोच और इंडस्ट्री की मांग तकनीकी विकास के साथ आईटी, टेक, स्टार्टअप्स, डिजिटल मार्केटिंग और ऑपरेशन्स जैसी आधुनिक इंडस्ट्रीज में रिक्रूटर्स की मानसिकता में बड़ा बदलाव आया है। आज की कंपनियां इस बात पर अधिक ध्यान नहीं देतीं कि आपने अपनी पढ़ाई क्लासरूम में बैठकर की है या अपने घर के सोफे पर। उनका प्राथमिक ध्यान इस बात पर होता है कि उम्मीदवार के पास काम करने का व्यावहारिक कौशल और समस्याओं को सुलझाने की क्षमता कितनी है। यदि आपने जिस यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है, वह यूजीसी-एंटाइटल्ड और नैक A+ ग्रेड प्राप्त है, तो अधिकांश कंपनियां आपकी ऑनलाइन डिग्री को बिना किसी संकोच के स्वीकार कर लेती हैं। रेगुलर एमबीए के मुख्य फायदे और कैंपस प्लेसमेंट का गणित रेगुलर एमबीए कोर्स की सबसे बड़ी ताकत उसकी ऑन-कैंपस प्लेसमेंट प्रक्रिया, नेटवर्किंग के अवसर और लाइव क्लासरूम का माहौल है। देश के शीर्ष बी-स्कूल्स, जैसे कि आईआईएम या नामी प्राइवेट संस्थानों में बड़ी कंपनियां स्वयं कैंपस में आती हैं और फ्रेशर्स को भी 12 से 25 लाख रुपये तक का शुरुआती सैलरी पैकेज ऑफर करती हैं। दूसरी ओर, ऑनलाइन एमबीए कराने वाले संस्थान यूनिवर्सिटी करियर सपोर्ट और एलुमनाई नेटवर्क की सुविधा जरूर प्रदान करते हैं, लेकिन छात्रों को जॉब पाने के लिए ज्यादातर स्वयं ही ऑफ-कैंपस या ऑन-ऑफिस स्तर पर आवेदन करना पड़ता है। फीस का अंतर और रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट की तुलना अगर आर्थिक दृष्टिकोण से तुलना की जाए, तो रेगुलर और ऑनलाइन एमबीए में बहुत बड़ा अंतर देखने को मिलता है। रेगुलर एमबीए की कुल फीस 3 लाख रुपये से लेकर 25 लाख रुपये तक हो सकती है। इसके अतिरिक्त छात्र को 2 साल तक अपनी नियमित नौकरी छोड़नी पड़ती है और रहने-खाने का अलग से खर्च उठाना पड़ता है। दूसरी ओर, ऑनलाइन एमबीए का पूरा कोर्स मात्र 1 लाख से 3 लाख रुपये के बजट में पूरा हो जाता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपकी मौजूदा नौकरी और मासिक सैलरी बंद नहीं होती, जिससे इसका रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट काफी शानदार रहता है। एडमिशन से पहले अपने लिए सही विकल्प का चुनाव कैसे करें? सही कोर्स का चयन आपकी व्यक्तिगत स्थिति पर निर्भर करता है। यदि आप एक फ्रेशर हैं, आपका कैट स्कोर अच्छा है और आप कैंपस लाइफ के साथ-साथ ऑन-कैंपस प्लेसमेंट का भरोसा चाहते हैं, तो रेगुलर एमबीए में दाखिला लेना एक बेहतर फैसला होगा। इसके विपरीत, यदि आप पहले से वर्किंग प्रोफेशनल हैं, अपनी नौकरी नहीं छोड़ सकते, बजट सीमित है और मौजूदा जॉब में ही ग्रोथ पाना चाहते हैं या इंडस्ट्री बदलना चाहते हैं, तो आपके लिए ऑनलाइन एमबीए कोर्स चुनना सबसे उपयुक्त रहेगा। इसका आप पर असर भारत भर के वर्किंग प्रोफेशनल्स के लिए: कम बजट और नौकरी जारी रखते हुए 1 से 3 लाख रुपये में ऑनलाइन एमबीए करके करियर में 30% से 50% तक सैलरी हाइक पाई जा सकती है। फ्रेशर्स के लिए: कैंपस प्लेसमेंट और 12 से 25 लाख रुपये तक के शुरुआती पैकेज के लिए रेगुलर एमबीए ज्यादा फायदेमंद विकल्प साबित होता है। सवाल-जवाब 1. क्या ऑनलाइन एमबीए की डिग्री की कानूनी मान्यता रेगुलर एमबीए के बराबर है? हाँ, यूजीसी और एआईसीटीई के नियमों के तहत यूजीसी से अप्रूव्ड ऑनलाइन एमबीए डिग्री की कानूनी वैल्यू रेगुलर डिग्री के बिल्कुल बराबर होती है। 2. ऑनलाइन एमबीए करने के बाद कितना सैलरी पैकेज मिल सकता है? 2 से 4 साल के कार्य अनुभव वाले प्रोफेशनल्स को 10 से 15 लाख रुपये का पैकेज मिल सकता है और उनकी सैलरी में 30% से 50% तक की बढ़ोतरी हो सकती है। 3. रेगुलर एमबीए और ऑनलाइन एमबीए की फीस में कितना अंतर होता है? रेगुलर एमबीए की फीस 3 लाख से 25 लाख रुपये तक होती है, जबकि ऑनलाइन एमबीए कोर्स केवल 1 लाख से 3 लाख रुपये में पूरा हो जाता है। 4. फ्रेशर्स के लिए रेगुलर एमबीए और ऑनलाइन एमबीए में से कौन सा बेहतर है? फ्रेशर्स के लिए रेगुलर एमबीए अधिक फायदेमंद है क्योंकि इसमें कैंपस प्लेसमेंट के जरिए 12 से 25 लाख रुपये तक का शुरुआती पैकेज पाने के अच्छे अवसर मिलते हैं। https://trendkia.com/career/mba-men-dakhile-se-pahale-samajhen-nalaina-aura-regulara-korsa-ka-pharka-janie-phisa-paikeja-aura-ugc-ke-niyama-14718 TrendKia — Har trend, sabse pehle.