नौकरी बचाने का नया फॉर्मूला: प्राइमबुक के अधिकारी ने बताईं 5 जरूरी एआई स्किल्स प्राइमबुक के सीओओ और को-फाउंडर अमन वर्मा के मुताबिक एआई टूल्स बदलते रहेंगे, इसलिए स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स को टूल रटने की बजाय एआई के साथ सही तरीके से काम करना सीखना होगा। जानिए वो 5 प्रैक्टिकल स्किल्स, जो भविष्य के जॉब मार्केट में सबसे बड़ा हथियार बनेंगी। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ पढ़ाई का शॉर्टकट नहीं रहा, यह नौकरी पाने और उसे टिकाए रखने की रणनीति का हिस्सा बन चुका है। कठिन चैप्टर समझना हो, प्रेजेंटेशन तैयार करनी हो या कोड की गड़बड़ी पकड़नी हो, हर मोर्चे पर एआई टूल्स मददगार बन चुके हैं। लेकिन जब बात असली जॉब मार्केट में उतरने की आती है, तो सिर्फ किसी चैटबॉट को खोलकर सवाल टाइप कर देना काफी नहीं रह जाता। वहां जीत उसी की होती है जो एआई के साथ मिलकर सोचना और काम करना जानता हो। टूल नहीं, तरीका सीखना जरूरी अमन वर्मा, जो प्राइमबुक के सीओओ और को-फाउंडर हैं, मानते हैं कि एआई टूल्स का स्वरूप आने वाले सालों में लगातार बदलता रहेगा, इसलिए स्टूडेंट्स के लिए किसी एक ऐप या सॉफ्टवेयर को रटने का कोई मतलब नहीं है। असली फायदा तब मिलेगा जब वे टेक्नोलॉजी के साथ सही साझेदारी बनाना सीखेंगे। 8 सितंबर को दुनियाभर में अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है, और इस मौके पर यह समझना जरूरी हो जाता है कि आज की डिजिटल साक्षरता सिर्फ अक्षर पहचानने तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एआई को सही दिशा देने की समझ भी शामिल हो गई है। पांच स्किल्स जो जॉब मार्केट में फर्क डालेंगी चाहे कोई अभी कॉलेज में हो या नौकरी कर रहा हो, एआई अब हर स्टेज पर मौजूद है। जो लोग समय रहते इन पांच व्यावहारिक स्किल्स पर पकड़ बना लेंगे, वही आने वाले वर्कप्लेस में सबसे आगे रहेंगे। 1. सवाल पूछने से पहले पूरी तस्वीर दें एआई का जवाब उतना ही सटीक होगा, जितना सटीक आपका सवाल होगा। सिर्फ इतना लिखना कि कॉलेज प्रेजेंटेशन के लिए आइडिया चाहिए, अधूरी और सामान्य जानकारी ही देगा। इसके बजाय अगर विषय, सुनने वाले लोग कौन हैं और कितना समय मिलेगा, यह सब साफ बताया जाए तो जवाब कहीं ज्यादा काम का निकलेगा। दफ्तर में भी यही नियम लागू होता है, क्लाइंट के लिए प्रेजेंटेशन बनाते वक्त सही बैकग्राउंड और मकसद समझाना ही एआई से बेहतरीन आउटपुट निकलवाने की चाबी है। 2. जरूरी और बेकार जानकारी में फर्क करना एआई कुछ ही सेकंड में लंबी-चौड़ी जानकारी परोस देता है, लेकिन उसमें से काम की बात छांटना इंसान का ही काम है। मान लीजिए एआई दस पन्नों की समरी बना दे, तो किसी मीटिंग के लिए उसमें से सही दो पॉइंट चुनना दिमाग की जिम्मेदारी है। फालतू जानकारी को अलग करके असल मुद्दे तक पहुंचना ही वह हुनर है जो आपको भीड़ से अलग खड़ा करता है। 3. आजमाना, बदलना और फिर कोशिश करना एआई ने नए प्रयोग करना पहले से बहुत आसान बना दिया है, चाहे कोई ऐप बनाना चाहे, कोडिंग सीखनी हो या कंटेंट लिखना हो। अलग-अलग तरीकों से हाथ आजमाना, नतीजे देखना, गलतियां सुधारना और दोबारा कोशिश करना, यही सीखने का असली तरीका है। ध्यान रहे कि पूरी जिम्मेदारी एआई पर डालकर खुद किनारे नहीं हो जाना चाहिए, क्योंकि खुद इस प्रक्रिया का हिस्सा बने बिना कुछ नया सीखना मुमकिन ही नहीं है। 4. पूरे काम को चरणों में बांटकर सोचना नौकरी में कोई भी बड़ा काम एक झटके में पूरा नहीं होता। पहले डेटा जुटाना पड़ता है, फिर उसे तरतीब देना, उसके बाद एनालिसिस करना और आखिर में सबके सामने पेश करना होता है। हर चरण पर अलग तरह के एआई टूल की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए स्टूडेंट्स को अपने प्रोजेक्ट्स में रिसर्च, एक्सेल और प्रेजेंटेशन जैसे अलग-अलग टूल्स को एक साथ जोड़कर काम करने की आदत डालनी चाहिए। 5. यह पहचानना कि कहां खुद दिमाग लगाना है एआई आसान काम पलक झपकते निपटा सकता है, लेकिन इसका यह मतलब हरगिज नहीं कि अपनी सोच-समझ पर ताला लगा दिया जाए। अगर गणित का जवाब सीधे एआई से लिखकर जमा कर दिया जाए, तो सवाल हल करने का तरीका कभी समझ में नहीं आएगा। इसी तरह क्लाइंट को मेल भेजने से पहले एआई से ड्राफ्ट भले ले लें, लेकिन उसमें अपनी भावना और अपनी सोच जरूर जोड़ें। एआई का सहारा लें, मगर अपनी सोचने की ताकत को कमजोर मत होने दें। आगे की राह जो लोग इन पांच आदतों को अभी से अपनी रोजमर्रा की पढ़ाई और काम में शामिल कर लेंगे, उनके लिए आने वाले वर्कप्लेस में जगह बनाना कहीं आसान होगा। एआई को सिर्फ जवाब देने वाली मशीन मानने के बजाय एक साथी की तरह इस्तेमाल करना ही आने वाले वर्षों में असली मुकाबला जीतने का तरीका बनेगा। इसका आप पर असर यह खबर सीधे तौर पर उन सभी स्टूडेंट्स और प्रोफेशनल्स के लिए मायने रखती है जो आने वाले वर्षों में नौकरी ढूंढेंगे या मौजूदा जॉब बचाए रखना चाहेंगे। • प्रेजेंटेशन और असाइनमेंट: कॉलेज या ऑफिस में प्रेजेंटेशन बनाते वक्त सिर्फ एआई से आइडिया मांगने के बजाय विषय, ऑडियंस और समय जैसी पूरी जानकारी देना जरूरी होगा। इससे जो रिजल्ट मिलेगा, वह सीधे इस्तेमाल लायक होगा और समय की बचत करेगा। • इंटरव्यू और स्किल टेस्ट: भर्ती करने वाली कंपनियां अब सिर्फ चैटबॉट चला लेने भर से संतुष्ट नहीं होंगी। उम्मीदवारों को यह दिखाना होगा कि वे एआई के जवाबों में से सही जानकारी छांट सकते हैं, यही आगे इंटरव्यू में फर्क डालेगा। • प्रोजेक्ट वर्क: स्टूडेंट्स को रिसर्च, डेटा और प्रेजेंटेशन के लिए अलग-अलग एआई टूल्स साथ चलाने की आदत डालनी होगी, क्योंकि दफ्तर के प्रोजेक्ट भी इसी तरह चरणों में बंटे होते हैं। • पर्सनल स्किल: गणित, राइटिंग या कोडिंग सीखते वक्त सीधे एआई का जवाब कॉपी करने से बचना होगा, वरना असल समझ कभी विकसित नहीं होगी, जो लंबे समय में करियर पर भारी पड़ सकती है। सवाल-जवाब 1. प्राइमबुक के सीओओ और को-फाउंडर कौन हैं? प्राइमबुक के सीओओ और को-फाउंडर अमन वर्मा हैं। 2. अमन वर्मा के मुताबिक स्टूडेंट्स को क्या सीखना चाहिए? उनका कहना है कि टूल्स रटने के बजाय एआई के साथ सही पार्टनरशिप बनाना सीखना चाहिए, क्योंकि टूल्स समय के साथ बदलते रहेंगे। 3. अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस कब मनाया जाता है? 8 सितंबर को अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाया जाता है। 4. भविष्य के जॉब मार्केट के लिए कितनी एआई स्किल्स बताई गई हैं? पांच प्रैक्टिकल एआई स्किल्स बताई गई हैं। 5. पहली जरूरी स्किल क्या है? एआई को सवाल पूछते वक्त सही कॉन्टेक्स्ट यानी विषय, ऑडियंस और समय की पूरी जानकारी देना पहली जरूरी स्किल है। 6. एआई पर पूरी तरह निर्भर रहने का क्या नुकसान बताया गया है? बताया गया है कि पूरा काम एआई पर छोड़ देने से इंसान खुद कुछ नया सीख नहीं पाता, इसलिए प्रक्रिया में खुद शामिल रहना जरूरी है। 7. नौकरी के कामों में स्टेप-बाय-स्टेप सोच क्यों जरूरी बताई गई है? क्योंकि डेटा जुटाने, व्यवस्थित करने, एनालाइज करने और प्रेजेंट करने के हर चरण पर अलग एआई टूल की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए चरणबद्ध सोच जरूरी है। 8. आखिरी स्किल में क्या समझाया गया है? यह समझाया गया है कि आसान काम एआई से करवाया जा सकता है, लेकिन अपनी सोचने-समझने की क्षमता को कमजोर नहीं होने देना चाहिए। https://trendkia.com/career/naukari-bachane-ka-naya-phormula-primebook-ke-adhikari-ne-batain-5-jaruri-ai-skilsa-28088 TrendKia — Har trend, sabse pehle.