# एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक में शामिल हुए राम राज्य, सेंगोल और आधुनिक नीतियां

> एनसीईआरटी की नौवीं कक्षा के लिए आई 153 पन्नों की नई किताब में प्राचीन परंपराओं, महात्मा गांधी के राम राज्य और चोल कालीन सेंगोल से लेकर एनईपी 2020 तक के शासन मॉडल पढ़ाए जाएंगे।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/ncert-ki-kaksha-9-ki-nai-samajika-vijnana-pustaka-men-shamila-hue-ram-rajya-sengol-aura-adhunika-nitiyan-41789 · **Language:** Hindi
**Tags:** एनसीईआरटी, कक्षा 9 पाठ्यक्रम, सामाजिक विज्ञान, राम राज्य, सेंगोल, एनईपी 2020, लोकनीति, भारतीय शिक्षा

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद यानी एनसीईआरटी ने कक्षा 9 के सामाजिक विज्ञान पाठ्यक्रम में व्यापक बदलाव करते हुए नई पाठ्यपुस्तक जारी की है। अब तक इतिहास, भूगोल, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र को अलग-अलग खांचों में पढ़कर परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए इस बार अध्ययन सामग्री का दायरा बदला गया है। नई पुस्तक जिसका शीर्षक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' रखा गया है, कुल 153 पृष्ठों में तैयार की गई है। इस किताब का मुख्य उद्देश्य छात्रों को यह समझाना है कि भारत में शासन व्यवस्था और लोकनीति का सफर किस प्रकार प्राचीन दार्शनिक चिंतन और ऐतिहासिक परंपराओं से निकलकर आज के आधुनिक लोकतांत्रिक ढांचे तक पहुंचा है।

## प्राचीन दार्शनिक जड़ों से आधुनिक संवैधानिक व्यवस्था का सफर
इस नई पाठ्यपुस्तक का चौथा अध्याय 'गवर्नेंस एंड पब्लिक पॉलिसी' विशेष रूप से शासन और जन नीतियों के क्रमिक विकास पर केंद्रित है। इसमें रेखांकित किया गया है कि देश में शासन को समझने का नजरिया केवल समकालीन सरकारी तंत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक गहरा ऐतिहासिक और वैचारिक मंथन रहा है। इसके लिए पुस्तक में रामायण, महाभारत, मुंडक उपनिषद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और चोल राजवंश के ऐतिहासिक अभिलेखों से जुड़े उदाहरण पेश किए गए हैं। छात्रों को बताया गया है कि प्राचीन काल में सभा और समिति जैसी संस्थाओं के कामकाज, राम राज्य की परिकल्पना और राजधर्म के सिद्धांतों से आगे बढ़ते हुए भारतीय शासन व्यवस्था किस तरह संविधान, विधि के शासन और नागरिक भागीदारी पर आधारित आधुनिक लोकतंत्र के रूप में स्थापित हुई है।

## महात्मा गांधी के विचारों में राम राज्य और सुशासन का मॉडल
अध्याय 4 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के 'राम राज्य' संबंधी दृष्टिकोण को शासन और लोकनीति के एक आदर्श मॉडल के तौर पर रेखांकित किया गया है। पुस्तक में इसे किसी संकीर्ण या केवल पौराणिक संदर्भ के रूप में प्रस्तुत करने के बजाय सुशासन के सार्वभौमिक सिद्धांतों से जोड़ा गया है। इसमें स्पष्ट किया गया है कि गांधी के अनुसार राम राज्य का मूल आधार ईमानदारी, पूर्ण पारदर्शिता, करुणा, सर्वजन कल्याण और शासन के केंद्र में आम जनता को रखना था। नई पाठ्यपुस्तक यह स्थापित करने का प्रयास करती है कि जनकल्याणकारी नीतियों और निष्पक्ष प्रशासन के निर्माण में नैतिक मूल्यों तथा मानवीय दृष्टिकोण की क्या भूमिका होती है।

## चोल राजवंश की सेंगोल परंपरा और संसद में उसकी स्थापना
पाठ्यपुस्तक में सेंगोल को शासन और न्यायपूर्ण सत्ता के एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में दर्ज किया गया है। ऐतिहासिक विवरणों के माध्यम से छात्रों को समझाया गया है कि राजदंड या न्यायपूर्ण सत्ता हस्तांतरण के प्रतीक के रूप में सेंगोल का उपयोग चोल राजवंश के दौर से जुड़ा रहा है। पुस्तक में आधुनिक इतिहास के उस प्रसंग का भी उल्लेख है जब भारत की स्वतंत्रता के ऐतिहासिक अवसर पर तमिलनाडु के अधीनम संतों ने देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू को सेंगोल सौंपा था। इसके साथ ही वर्ष 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नए संसद भवन में सेंगोल की स्थापना किए जाने की घटना को भी अध्याय में शामिल किया गया है। इसके जरिए यह संदेश दिया गया है कि भारत की लोकतांत्रिक संस्थाएं अपने पारंपरिक मूल्यों और ऐतिहासिक धरोहर से किस तरह निरंतर प्रेरणा लेती हैं।

## राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और प्रमुख सरकारी कल्याणकारी योजनाएं
प्राचीन संदर्भों के साथ-साथ पुस्तक में आधुनिक जन नीतियों के ठोस उदाहरण भी दिए गए हैं। अध्याय के विशेष खंड 'डोंट मिस आउट' में नेशनल एजुकेशन पॉलिसी यानी एनईपी 2020 को लोकनीति निर्माण के एक प्रमुख उदाहरण के रूप में समझाया गया है। इसमें छात्रों को बताया गया है कि इस नीति को तैयार करने वाली समिति में शिक्षाविदों के अलावा विज्ञान, प्रौद्योगिकी और लोक प्रशासन जैसे विविध क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल थे। इस नीति के निर्माण में हुए अभूतपूर्व जनपरामर्श के आंकड़े भी पाठ में दर्ज हैं, जिसके तहत 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉकों, 6,000 शहरी स्थानीय निकायों और 676 जिलों से संवाद किया गया था। इस विशाल प्रक्रिया में करीब 2 लाख सुझाव प्राप्त हुए, जिनकी सिफारिशों को समाहित करने के बाद 2020 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इसे स्वीकृति दी थी। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017, खेलो भारत नीति, ई-गवर्नेंस और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को भी आधुनिक नीतिगत पहलों के रूप में शामिल किया गया है।

## इसका आप पर असर
एनसीईआरटी की कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान पुस्तक में हुआ यह बदलाव छात्रों के पढ़ने और सीखने के तरीके को सीधे तौर पर प्रभावित करेगा।

- **छात्रों के लिए:** नौवीं कक्षा के छात्रों को अब पारंपरिक रटंत प्रणाली के बजाय प्राचीन दर्शन और आधुनिक नीतियों के अंतर्संबंधों को समझना होगा। परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों का स्वरूप अब विश्लेषणात्मक और नीति-आधारित होगा।
- **अभिभावकों के लिए:** बच्चों की पढ़ाई में अब समसामयिक नीतियों और ऐतिहासिक प्रतीकों से जुड़े नए संदर्भ देखने को मिलेंगे। घर पर परियोजना कार्यों और गृहकार्य में इन बदलावों के अनुरूप सहायता करनी होगी।
- **शिक्षकों के लिए:** सामाजिक विज्ञान के अध्यापकों को इतिहास और समकालीन नीतियों को जोड़कर पढ़ाने के लिए अपनी शिक्षण पद्धति को अपडेट करना होगा। कक्षा में चर्चाओं का दायरा अब सभा-समिति से लेकर एनईपी 2020 तक विस्तृत होगा।
- **प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए:** स्कूली स्तर पर ही लोकनीति और ऐतिहासिक प्रशासनिक व्यवस्थाओं की समझ मजबूत होने से छात्रों को आगे चलकर लाभ मिलेगा। भविष्य की नागरिक सेवा और उच्च शिक्षा की प्रवेश परीक्षाओं के लिए आधारभूत समझ अधिक सुदृढ़ होगी।

## ऐसा क्यों हुआ
एनसीईआरटी द्वारा यह बदलाव छात्रों को शासन व्यवस्था की समग्र और ऐतिहासिक समझ प्रदान करने तथा समकालीन नीतियों को पाठ्यक्रम का व्यावहारिक हिस्सा बनाने के उद्देश्य से किया गया है।

- **एकीकृत दृष्टिकोण का अभाव:** पूर्ववर्ती पाठ्यपुस्तकों में इतिहास, नागरिक शास्त्र और अर्थशास्त्र अलग-अलग अध्यायों तक सीमित थे। नई पुस्तक 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' के जरिए इन विषयों को एक एकीकृत सामाजिक विज्ञान के रूप में पेश करने की जरूरत महसूस की गई।
- **पारंपरिक शासन दर्शन का परिचय:** आधुनिक लोकतांत्रिक संस्थाओं की जड़ों को प्राचीन भारतीय चिंतन से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसके लिए रामायण, महाभारत, उपनिषद, कौटिल्य के अर्थशास्त्र और चोल कालीन परंपराओं को प्रशासनिक संदर्भ में शामिल किया गया।
- **व्यावहारिक नीति निर्माण का अध्ययन:** केवल सैद्धांतिक व्यवस्था पढ़ाने के बजाय छात्रों को यह दिखाना आवश्यक समझा गया कि नीतियां धरातल पर कैसे बनती हैं। इसी कारण एनईपी 2020 के जनपरामर्श और आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं को व्यावहारिक केस स्टडी के रूप में शामिल किया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. एनसीईआरटी की कक्षा 9 की नई सामाजिक विज्ञान पुस्तक का नाम क्या है?
इस नई पुस्तक का नाम 'अंडरस्टैंडिंग सोसाइटी: इंडिया एंड बियॉन्ड-पार्ट 2' है, जिसमें कुल 153 पृष्ठ हैं।

### 2. किताब के चौथे अध्याय में किन मुख्य ऐतिहासिक संदर्भों का उल्लेख है?
अध्याय 4 में शासन व्यवस्था के विकास को समझाने के लिए चोल राजवंश, महाभारत, रामायण, मुंडक उपनिषद और कौटिल्य के अर्थशास्त्र के उदाहरण दिए गए हैं।

### 3. महात्मा गांधी के राम राज्य के विचार को किस रूप में प्रस्तुत किया गया है?
गांधी के राम राज्य को ईमानदारी, पारदर्शिता, करुणा और जनकल्याण पर आधारित एक आदर्श शासन मॉडल के रूप में शामिल किया गया है।

### 4. सेंगोल के बारे में पुस्तक में क्या ऐतिहासिक जानकारी दी गई है?
सेंगोल को चोल राजवंश की सुशासन परंपरा से जुड़ा सत्ता का प्रतीक बताया गया है, जिसे आजादी पर जवाहरलाल नेहरू को सौंपा गया था और 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए संसद भवन में स्थापित किया।

### 5. एनईपी 2020 के निर्माण को लेकर किताब में क्या आंकड़े दिए गए हैं?
नीति तैयार करते समय 2.5 लाख ग्राम पंचायतों, 6,600 ब्लॉकों, 6,000 शहरी निकायों और 676 जिलों से परामर्श कर लगभग 2 लाख सुझाव प्राप्त किए गए थे।

### 6. किताब में किन अन्य प्रमुख सरकारी योजनाओं और नीतियों का जिक्र है?
किताब में राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017, खेलो भारत नीति, ई-गवर्नेंस और आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना को उदाहरण के रूप में शामिल किया गया है।

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