NEET के बाद MBBS, BDS या BAMS: जानें फीस, एडमिशन, करियर स्कोप और सैलरी का पूरा हिसाब नीट पास करने के बाद सही मेडिकल कोर्स चुनने के लिए एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस की फीस, पढ़ाई की अवधि, सिलेबस और सैलरी की तुलना करना बेहद जरूरी है। हर साल देश में लाखों छात्र डॉक्टर बनने का सपना लेकर नीट यूजी परीक्षा में शामिल होते हैं। परीक्षा का परिणाम और कटऑफ अंक जारी होते ही अभ्यर्थियों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा होता है कि किस मेडिकल स्ट्रीम में दाखिला लिया जाए। जिनकी रैंक बहुत अच्छी होती है, उनकी पहली प्राथमिकता एमबीबीएस होती है। लेकिन रैंक थोड़ी पीछे रहने या मनचाहा सरकारी संस्थान न मिलने की स्थिति में छात्र बीडीएस या बीएएमएस के विकल्पों पर विचार करने लगते हैं। सही जानकारी के अभाव में जल्दबाजी में लिया गया फैसला बाद में करियर पर असर डाल सकता है। कई छात्रों को लगता है कि बीडीएस में अब संभावनाएं सीमित हो चुकी हैं या बीएएमएस करके एलोपैथिक डॉक्टर जैसी पहचान नहीं मिलेगी। सच्चाई यह है कि तीनों ही मेडिकल कोर्सेस का अपना अलग महत्व, सिलेबस और शानदार करियर स्कोप है। मेडिकल पद्धतियों में बुनियादी अंतर एमबीबीएस का पूरा नाम बैचलर ऑफ मेडिसिन, बैचलर ऑफ सर्जरी है। यह कोर्स मॉडर्न साइंस और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति पर आधारित है, जिसमें मानव शरीर की बनावट, विभिन्न बीमारियों, पैथोलॉजी और सर्जिकल प्रक्रियाओं का गहन अध्ययन कराया जाता है। बीडीएस का पूरा नाम बैचलर ऑफ Dental सर्जरी है। यह पाठ्यक्रम पूरी तरह से ओरल हेल्थ, मुंह, दांतों, मसूड़ों और जबड़ों की बीमारियों तथा दंत चिकित्सा से जुड़ी सर्जरी पर केंद्रित होता है। वहीं, बीएएमएस का पूरा नाम बैचलर ऑफ आयुर्वेदिक मेडिसिन एंड सर्जरी है। इस कोर्स में पारंपरिक भारतीय आयुर्वेद, जड़ी-बूटियों और पंचकर्म चिकित्सा के साथ-साथ मॉडर्न मेडिसिन और बेसिक सर्जरी का समन्वित अध्ययन कराया जाता है। योग्यता मानदंड और प्रवेश प्रक्रिया इन तीनों मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए नियम समान हैं। अभ्यर्थी का मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ कम से कम 50% अंक हासिल करना अनिवार्य है। इसके बाद सभी छात्रों को नीट यूजी परीक्षा में शामिल होकर क्वालीफाई करना होता है। एमबीबीएस में दाखिले के लिए नीट में सबसे उच्च कटऑफ और शीर्ष रैंक की आवश्यकता होती है। बीडीएस अधिकांश छात्रों की दूसरी पसंद बनता है, इसलिए इसमें एमबीबीएस की तुलना में थोड़ा कम कटऑफ पर भी दाखिला मिल जाता है। बीएएमएस में प्रवेश के लिए भी नीट क्वालीफाई होना आवश्यक है, लेकिन इसका कटऑफ एमबीबीएस और बीडीएस दोनों के मुकाबले राहत देने वाला होता है। कोर्स की अवधि और फीस का ढांचा अध्ययन की अवधि के लिहाज से तीनों पाठ्यक्रमों में ज्यादा अंतर नहीं है, लेकिन शैक्षणिक फीस में बड़ा अंतर देखने को मिलता है। एमबीबीएस पाठ्यक्रम की कुल अवधि 5.5 वर्ष होती है, जिसमें 4.5 साल का शैक्षणिक अध्ययन और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सालाना फीस 20 हजार से 1 लाख रुपये के बीच होती है, जबकि प्राइवेट संस्थानों में पूरे कोर्स का खर्च 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक पहुंच जाता है। बीडीएस कोर्स की अवधि कुल 5 वर्ष है, जिसमें 4 साल की पढ़ाई और 1 साल की इंटर्नशिप शामिल है। सरकारी कॉलेजों में बीडीएस की फीस बेहद कम होती है, जबकि प्राइवेट डेंटल कॉलेजों में 15 से 35 लाख रुपये का खर्च आता है। बीएएमएस कोर्स भी कुल 5.5 साल (4.5 साल पढ़ाई + 1 साल इंटर्नशिप) का होता है, और प्राइवेट कॉलेजों में इसकी कुल फीस 10 से 25 लाख रुपये के बीच रहती है। अध्ययन सामग्री और पाठ्यक्रम का ढांचा एमबीबीएस के दौरान छात्रों को एलोपैथिक दवाओं, ह्यूमन एनाटॉमी, बायोकैमिस्ट्री, फार्माकोलॉजी, पैथोलॉजी, गायनेकोलॉजी और जनरल सर्जरी की आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का अध्ययन कराया जाता है। बीडीएस के सिलेबस में ओरल एनाटॉमी, मैक्सिलोफेशियल सर्जरी, ऑर्थोडॉन्टिक्स, पीरियडोंटिक्स और डेंटिस्ट्री की आधुनिक तकनीकों पर विशेष जोर दिया जाता है। बीएएमएस के पाठ्यक्रम में चरक संहिता और सुश्रुत संहिता जैसे आयुर्वेदिक ग्रंथों के साथ-साथ जड़ी-बूटियों के गुण, पंचकर्म थेरेपी और आधुनिक एनाटॉमी व फिजियोलॉजी का मिश्रित अध्ययन शामिल होता है। करियर स्कोप और जॉब प्रोफाइल एमबीबीएस स्नातकों के पास करियर के सबसे व्यापक विकल्प मौजूद होते हैं। वे अस्पतालों में जूनियर रेजीडेंट या मेडिकल ऑफिसर के रूप में काम शुरू कर सकते हैं और आगे MD या MS की डिग्री हासिल करके विशेषज्ञ डॉक्टर या सर्जन बन सकते हैं। बीडीएस पास करने के बाद छात्र डेंटल सर्जन या ऑर्थोडॉन्टिस्ट के रूप में अस्पतालों में सेवाएं दे सकते हैं, हालांकि बीडीएस डॉक्टरों के लिए अपना खुद का क्लिनिक शुरू करना सबसे अधिक लाभदायक माना जाता है। बीएएमएस डॉक्टर आयुर्वेदिक चिकित्सक, रिसर्च ऑफिसर या हेल्थ कंसलटेंट के रूप में कार्य कर सकते हैं। वर्तमान समय में वेलनेस इंडस्ट्री, प्राकृतिक चिकित्सा और पंचकर्म सेंटर्स की बढ़ती मांग के कारण बीएएमएस डॉक्टरों का स्कोप भी तेजी से बढ़ा है। सैलरी और कमाई की संभावनाएं एमबीबीएस डॉक्टर की शुरुआती मासिक सैलरी 60,000 से 1,00,000 रुपये के बीच होती है। MD या MS की पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री पूरी करने के बाद सैलरी लाखों रुपये प्रति महीना तक पहुंच जाती है। बीडीएस डॉक्टरों को अस्पतालों में शुरुआत में 25,000 से 45,000 रुपये प्रति महीना वेतन मिलता है, लेकिन खुद का डेंटल क्लिनिक स्थापित हो जाने के बाद कमाई की कोई ऊपरी सीमा नहीं रहती। बीएएमएस डॉक्टरों की शुरुआती मासिक सैलरी 30,000 से 50,000 रुपये के बीच होती है, जो अनुभव, विशेषज्ञता और खुद की निजी प्रैक्टिस बढ़ने के साथ तेजी से बढ़ती है। छात्रों को अपनी व्यक्तिगत रुचि, बजट और दीर्घकालिक करियर लक्ष्यों को ध्यान में रखकर ही सही मेडिकल स्ट्रीम का चुनाव करना चाहिए। इसका आप पर असर • देशभर में: नीट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र फीस के अंतर, कटऑफ अंक और करियर की संभावनाओं को समझकर अपनी स्थिति के अनुसार सबसे उपयुक्त मेडिकल कोर्स चुन सकते हैं। • छात्रों और अभिभावकों के लिए: 20 हजार रुपये से 1 करोड़ रुपये तक की सरकारी और प्राइवेट फीस संरचना की स्पष्ट जानकारी मिलने से परिवार अपनी उच्च शिक्षा का बजट बेहतर तरीके से तय कर सकते हैं। सवाल-जवाब 1. एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस में मुख्य अंतर क्या है? एमबीबीएस एलोपैथिक मेडिसिन और जनरल सर्जरी पर आधारित है, बीडीएस दांतों और जबड़ों के इलाज पर केंद्रित है, जबकि बीएएमएस आयुर्वेदिक चिकित्सा और मॉडर्न साइंस का मिला-जुला रूप है। 2. इन मेडिकल कोर्सेस में एडमिशन के लिए 12वीं में कितने अंक चाहिए? उम्मीदवार को 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ कम से कम 50% अंक हासिल करना अनिवार्य है। 3. एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस की फीस कितनी होती है? एमबीबीएस की सरकारी फीस 20,000 से 1,00,000 रुपये सालाना और प्राइवेट फीस 50 लाख से 1 करोड़ रुपये तक है। बीडीएस की प्राइवेट फीस 15 से 35 लाख रुपये और बीएएमएस की 10 से 25 लाख रुपये के बीच होती है। 4. एमबीबीएस, बीडीएस और बीएएमएस डॉक्टरों की शुरुआती सैलरी कितनी है? एमबीबीएस डॉक्टर की शुरुआती सैलरी 60,000 से 1,00,000 रुपये प्रति महीना, बीडीएस की अस्पतालों में 25,000 से 45,000 रुपये प्रति महीना और बीएएमएस की 30,000 से 50,000 रुपये प्रति महीना होती है। https://trendkia.com/career/neet-ke-bada-mbbs-bds-ya-bams-janen-phisa-edamishana-kariyara-skopa-aura-sailari-ka-pura-hisaba-14652 TrendKia — Har trend, sabse pehle.