# नीट परीक्षा पास करने के बाद भी क्यों खाली रह गईं एमबीबीएस की सैकड़ों सीटें, जानिए क्या है मुख्य वजह

> देशभर में नीट यूजी पास करने वाले लाखों छात्रों की संख्या के बावजूद तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में एमबीबीएस की सैकड़ों सीटें खाली रह गई हैं। इसका मुख्य कारण इन कॉलेजों की अत्यधिक फीस और आर्थिक बोझ है।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/nita-pariksha-pasa-karane-ke-bada-bhi-kyon-khali-raha-gain-mbbs-ki-saikaron-siten-janie-kya-hai-mukhya-vajaha-50556 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीट यूजी काउंसलिंग, एमबीबीएस सीटें, मेडिकल कॉलेज फीस, स्ट्रे वैकेंसी राउंड, तमिलनाडु मेडिकल कॉलेज, डीम्ड यूनिवर्सिटी

डॉक्टर बनने की चाहत रखने वाले युवा हर साल नीट परीक्षा की तैयारी में अपनी पूरी ताकत झोंक देते हैं। इस साल भी ग्यारह लाख से ज्यादा विद्यार्थियों ने नीट यूजी की न्यूनतम कटऑफ को पार करते हुए काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया था। हालांकि काउंसलिंग के आखिरी चरण यानी स्ट्रे वैकेंसी राउंड के आंकड़े सामने आने के बाद एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। देश के अन्य हिस्सों में जहाँ मेडिकल सीटें भर चुकी हैं, वहीं तमिलनाडु और पुडुचेरी की डीम्ड यूनिवर्सिटीज में एमबीबीएस की आठ सौ चौबीस सीटें खाली रह गई हैं।

 

## भारी-भरकम ट्यूशन फीस बनी सबसे बड़ी बाधा
 इन प्रतिष्ठित सीटों के खाली रहने के पीछे कोई तकनीकी समस्या नहीं है, बल्कि इसके लिए इन संस्थानों की भारी-भरकम फीस को जिम्मेदार माना जा रहा है। इन चुनिंदा डीम्ड यूनिवर्सिटीज में एमबीबीएस पाठ्यक्रम की सालाना फीस तेरह लाख से पैंतीस लाख रुपये तक पहुँच जाती है। साढ़े चार साल के इस लंबे कोर्स के दौरान केवल ट्यूशन फीस के रूप में ही छात्रों को करोड़ों रुपये चुकाने पड़ते हैं। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी के आंकड़ों के मुताबिक, स्ट्रे राउंड की शुरुआत में पूरे देश में तीन हजार चार सौ छब्बीस सीटें खाली थीं। इनमें से कई सीटें भर गईं, लेकिन तमिलनाडु और पुडुचेरी के कई बड़े कॉलेजों में हालात जस के तस बने रहे।

 

## इन प्रमुख कॉलेजों में खाली सीटों का हाल
 चेन्नई स्थित श्री सत्य साई मेडिकल कॉलेज में पचहत्तर प्रतिशत सीटें खाली पड़ी हैं। महंगे प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों और डीम्ड यूनिवर्सिटीज की इस समस्या का सबसे अधिक प्रभाव तमिलनाडु और पुडुचेरी के संस्थानों पर पड़ा है। इस सूची में शामिल हर एक मेडिकल कॉलेज में कुल ढाई सौ सीटें थीं, लेकिन अत्यधिक फीस के कारण छात्रों ने इनसे दूरी बनाए रखी।

 
- **श्री सत्य साई मेडिकल कॉलेज:** चेन्नई के इस संस्थान में सबसे अधिक पचहत्तर प्रतिशत यानी एक सौ अट्ठासी सीटें खाली रह गई हैं।

- **मीनाक्षी मेडिकल कॉलेज:** कांचीपुरम स्थित इस कॉलेज में सैंतालीस प्रतिशत यानी एक सौ सत्रह सीटें नहीं भर पाईं।

- **महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज:** पुडुचेरी के इस संस्थान में सैंतीस प्रतिशत यानी बानवे सीटें खाली रह गईं।

- **श्री बालाजी मेडिकल कॉलेज:** क्रोमपेट स्थित इस कॉलेज में भी तैंतीस प्रतिशत यानी बयासी सीटों पर कोई प्रवेश नहीं हुआ।

 इसके अलावा एसआरएम, सविता और चेट्टीनाड जैसे नामी-गिरामी संस्थानों में भी बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गईं। रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु और पुडुचेरी की डीम्ड यूनिवर्सिटी में सालाना फीस तेरह से पैंतीस लाख रुपये तक है, जबकि देश के अन्य हिस्सों में औसत फीस बाईस लाख अड़सठ हजार रुपये के करीब है। महाराष्ट्र की डीम्ड यूनिवर्सिटी की औसत फीस चौबीस लाख अट्ठावन हजार और कर्नाटक की बीस लाख पचासी हजार रुपये है। कंसल्टेंट्स का कहना है कि कोर्स की कुल अवधि के दौरान यहाँ की फीस में इक्कीस लाख रुपये तक का भारी अंतर आ जाता है, जिसके कारण छात्रों ने इन संस्थानों से मुँह मोड़ लिया।

 

## कम कटऑफ के बावजूद छात्रों ने बनाई दूरी
 एक तरफ जहाँ अत्यधिक फीस के कारण सीटें खाली रहीं, वहीं जिन संस्थानों ने अपनी फीस में थोड़ी राहत दी, वहाँ कटऑफ रैंक में भारी गिरावट देखने को मिली। उदाहरण के तौर पर श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च में प्रवेश की क्लोजिंग कटऑफ रैंक सात लाख तीस हजार से लुढ़क कर सीधे दस लाख अड़सठ हजार पर आ गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि कम अंक हासिल करने वाले छात्र भी प्रवेश चाहते थे, लेकिन वे अपनी जेब पर पड़ने वाले भारी वित्तीय बोझ से डरे हुए थे।

 

## राजनीतिक गलियारों में तीखी प्रतिक्रिया
 इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में भी तीखी प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। डीएमके के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने इन संस्थानों पर कड़ा प्रहार करते हुए इन्हें मुनाफाखोर करार दिया है। उन्होंने केंद्र सरकार से माँग की है कि डीम्ड यूनिवर्सिटीज की ट्यूशन फीस पर तुरंत अधिकतम सीमा तय की जाए ताकि मेडिकल की पढ़ाई केवल धनाढ्य वर्ग तक सीमित न रहे।

 

## भविष्य के लिए छात्रों को सलाह
 जो छात्र आगामी वर्षों में नीट यूजी की परीक्षा में शामिल होने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए यह एक बड़ा सबक है। उन्हें केवल कॉलेज का नाम देखकर आवेदन नहीं करना चाहिए, बल्कि अपने बजट और वित्तीय योजना को अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर रखना बेहद आवश्यक है।

## इसका आप पर असर
नीट काउंसलिंग और मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया का यह हाल उन सभी परिवारों को सीधे तौर पर प्रभावित करता है जो अपने बच्चों को डॉक्टर बनाने का सपना देख रहे हैं।

- **छात्रों और अभिभावकों के लिए:** मेडिकल कॉलेजों की भारी-भरकम फीस के कारण अब छात्रों को प्रवेश लेते समय केवल कॉलेज की प्रतिष्ठा नहीं बल्कि अपने कुल बजट का भी विशेष ध्यान रखना होगा।

- **स्थानीय स्तर पर (तमिलनाडु और पुडुचेरी):** इन राज्यों के डीम्ड संस्थानों में सीटें खाली रहने से स्थानीय और बाहरी छात्रों को भविष्य की काउंसलिंग प्रक्रियाओं में फीस संरचना और बजट को लेकर अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर होना पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
एमबीबीएस की सीटें खाली रहने और फीस को लेकर खड़े हुए विवाद के पीछे कई आर्थिक और संस्थागत कारण जुड़े हुए हैं।

- **अत्यधिक ट्यूशन फीस:** तमिलनाडु और पुडुचेरी के चुनिंदा डीम्ड विश्वविद्यालयों में सालाना फीस तेरह लाख से पैंतीस लाख रुपये तक है, जो देश के औसत से काफी ज्यादा है।

- **वित्तीय अंतर:** अन्य राज्यों की तुलना में इन संस्थानों की कुल कोर्स फीस में इक्कीस लाख रुपये तक का भारी अंतर होना छात्रों के पीछे हटने का प्रमुख कारण बना।

- **कटऑफ में गिरावट:** जिन संस्थानों ने फीस में थोड़ी राहत दी, वहाँ कटऑफ रैंक सात लाख से दस लाख तक गिर गई, जिससे साबित होता है कि फीस ही मुख्य बाधा थी।

## सवाल-जवाब

### 1. इस साल कितने छात्रों ने नीट यूजी की न्यूनतम कटऑफ पार की?
इस साल ग्यारह लाख से ज्यादा छात्रों ने नीट यूजी की न्यूनतम कटऑफ पार करके काउंसलिंग प्रक्रिया में हिस्सा लिया।

### 2. किन राज्यों के मेडिकल कॉलेजों में सबसे ज्यादा सीटें खाली रहीं?
तमिलनाडु और पुडुचेरी की डीम्ड यूनिवर्सिटीज में एमबीबीएस की आठ सौ चौबीस सीटें खाली रह गईं।

### 3. डीम्ड यूनिवर्सिटीज में एमबीबीएस की सालाना फीस कितनी है?
इन चुनिंदा डीम्ड यूनिवर्सिटीज में एमबीबीएस की सालाना फीस तेरह लाख से पैंतीस लाख रुपये तक है।

### 4. श्री सत्य साई मेडिकल कॉलेज में कितनी सीटें खाली रहीं?
चेन्नई के श्री सत्य साई मेडिकल कॉलेज में पचहत्तर प्रतिशत यानी एक सौ अट्ठासी सीटें खाली रह गईं।

### 5. राजकीय या राजनीतिक स्तर पर इस स्थिति पर क्या प्रतिक्रिया आई है?
डीएमके के राज्यसभा सांसद पी. विल्सन ने इन संस्थानों को मुनाफाखोर बताते हुए केंद्र सरकार से ट्यूशन फीस पर अधिकतम सीमा तय करने की माँग की है।

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