# नीति आयोग की रिपोर्ट: सिर्फ 8.25 फीसदी ग्रेजुएट्स को मिल रही नौकरियां, शिक्षा प्रणाली में बड़े बदलाव की जरूरत

> नीति आयोग की एक नई रिपोर्ट के अनुसार देश में स्नातक पूरी करने वाले सिर्फ 8.25 फीसदी युवाओं को ही उनकी योग्यता के अनुसार काम मिल पा रहा है, जो उच्च शिक्षा और कॉर्पोरेट जगत के बीच की गहरी खाई को उजागर करता है।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-08-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/niti-aayog-report-revelation-8-25-percent-graduates-secure-jobs-20482 · **Language:** Hindi
**Tags:** नीति आयोग, बेरोजगारी, ग्रेजुएट्स, स्किल गैप, हायर एजुकेशन, जॉब मार्केट

हर साल देश के विभिन्न शिक्षण संस्थानों से लाखों छात्र सुनहरे भविष्य के सपनों और हाथों में महंगी डिग्रियां लेकर बाहर निकलते हैं। इस उम्मीद के साथ कि डिग्री मिलते ही किसी बेहतरीन संस्थान में अच्छी नौकरी मिल जाएगी और जीवन संवर जाएगा। लेकिन जैसे ही ये युवा वास्तविक नौकरी बाजार में कदम रखते हैं, इनकी उम्मीदें धराशायी होने लगती हैं। नीति आयोग की एक हालिया रिपोर्ट ने देश के इस गंभीर और कड़वे सच को उजागर किया है, जिसे जानने के बाद हर कोई चिंता में पड़ सकता है।

 

## नौकरी बाजार और उच्च शिक्षा के आंकड़े
 नीति आयोग की ‘Reimagining Skilling for Viksit Bharat@2047’ रिपोर्ट में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। इसके अनुसार, डिग्री पूरी करने के बाद सिर्फ 8.25 फीसदी युवाओं को ही उनकी योग्यता के अनुकूल रोजगार मिल पाता है। इसका मतलब यह है कि 91 फीसदी से ज्यादा युवा या तो पूरी तरह बेरोजगार घूम रहे हैं या फिर ऐसी नौकरियों में काम करने को मजबूर हैं जो उनके शैक्षणिक स्तर से काफी नीचे हैं। उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी युवाओं को इस तरह दर-दर क्यों भटकना पड़ रहा है, यह आज के समय का सबसे बड़ा सवाल बन चुका है।

 

## पारंपरिक डिग्रियां और बदलता बाजार
 नीति आयोग की इस रिपोर्ट से यह भी साफ पता चलता है कि देश में उच्च शिक्षा हासिल करने वाले छात्रों की तादाद तो तेजी से बढ़ी है, लेकिन उस अनुपात में रोजगार बाजार में उनकी मांग नहीं है। वर्तमान में भारत में लगभग 3.4 करोड़ छात्र अंडरग्रेजुएट कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं। इनमें से 1.3 करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स अकेले बीए (BA) की पढ़ाई कर रहे हैं। यदि बीए, बीएससी और बीकॉम के आंकड़ों को आपस में मिला लिया जाए, तो यह संख्या 2 करोड़ का आंकड़ा पार कर जाती है। मुख्य समस्या यह है कि दशकों से चली आ रही इन पारंपरिक डिग्रियों का आज के आधुनिक जॉब मार्केट के साथ तालमेल लगभग टूट चुका है।

 

## स्किल गैप और व्यावहारिक ज्ञान की कमी
 रोजगार न मिलने के पीछे सबसे बड़ा कारण ‘स्किल गैप’ यानी कौशल की कमी है। आसान भाषा में कहें तो जिन विषयों की पढ़ाई कॉलेजों के भीतर कराई जा रही है, कॉर्पोरेट कार्यालयों या उद्योगों में उनकी कोई मांग नहीं रह गई है। आज के समय में टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट जगत बहुत तेज गति से बदल रहा है, जबकि कई यूनिवर्सिटीज और कॉलेज आज भी पुराना पाठ्यक्रम पढ़ा रहे हैं। इसका परिणाम यह होता है कि तीन साल तक पढ़ाई करने के बाद भी जब कोई छात्र इंटरव्यू देने पहुंचता है, तो कंपनी उसे सीधे खारिज कर देती है, क्योंकि उसके पास वह व्यावहारिक हुनर होता ही नहीं है जो काम के लिए जरूरी होता है।

 

## प्रैक्टिकल एक्सपोजर का अभाव
 रिपोर्ट में छात्रों के सामने आने वाली कठिनाइयों का जो विवरण दिया गया है, वह आंखें खोलने वाला है। लगभग 80 फीसदी छात्रों ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि उनके पास किसी भी प्रकार का प्रैक्टिकल ज्ञान और इंडस्ट्री का एक्सपोजर नहीं है। उन्होंने किताबें तो पूरी तरह रट ली हैं, लेकिन असल दुनिया में काम कैसे किया जाता है, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है। इसके अलावा, 34 फीसदी युवाओं ने स्किल गैप को अपने करियर की सबसे बड़ी बाधा माना है, जबकि 18 फीसदी युवाओं का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं पता कि किसी इंटरव्यू की तैयारी किस तरह की जाती है।

 

## सरकारी नौकरियों के प्रति रुझान और भयंकर प्रतिस्पर्धा
 जब प्राइवेट सेक्टर में कौशल की कमी के कारण रास्ते बंद नजर आने लगते हैं, तब युवाओं का झुकाव सरकारी नौकरियों की तरफ बढ़ने लगता है। हालांकि, वहां भी हालात बेहद कठिन और तनावपूर्ण हैं। रिपोर्ट के आंकड़ों के मुताबिक, नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच सिर्फ 55 हजार सरकारी रिक्तियों के लिए 1.86 करोड़ से अधिक आवेदन प्राप्त हुए। इसका सीधा अर्थ यह है कि एक-एक पद के लिए हजारों उम्मीदवार कतार में खड़े हैं। यह स्थिति बताती है कि केवल सरकारी नौकरी के भरोसे बैठना आज की युवा पीढ़ी के लिए कितना बड़ा जोखिम साबित हो रहा है।

 

## समाधान और भविष्य की दिशा
 जब समस्या इतनी स्पष्ट है, तो इसका समाधान भी साफ नजर आता है। अब केवल बीए, बीकॉम या बीएससी की कागजी डिग्रियों से काम नहीं चलने वाला है। डिग्रियों के साथ-साथ युवाओं को इस दौर की मांग के अनुसार नई स्किल्स सीखनी होंगी, जिनमें निम्नलिखित क्षेत्र शामिल हैं

 
- **डिजिटल स्किल्स:** कंप्यूटर संचालन, डेटा विश्लेषण, बुनियादी कोडिंग या डिजिटल टूल्स की जानकारी रखना।

- **कम्युनिकेशन स्किल्स:** अपनी बात को लिखित और मौखिक रूप से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की कला।

- **ऑफिस वर्क और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग:** अपनी पढ़ाई के दौरान ही इंटर्नशिप करना और वास्तविक कार्य अनुभव प्राप्त करना।

 जब तक कॉलेज की पढ़ाई और इंडस्ट्री की वास्तविक जरूरतों के बीच सही तालमेल नहीं बैठता, तब तक केवल डिग्रियां बांटने से देश से बेरोजगारी का संकट समाप्त नहीं हो सकता। युवाओं को भी अब किताबी ज्ञान तक सीमित रहने के बजाय अपने कौशल को निखारने पर विशेष ध्यान देना होगा।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यह रिपोर्ट देश के लाखों युवाओं और छात्रों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि पारंपरिक डिग्रियों के भरोसे रहना अब सुरक्षित नहीं है, और सभी को आधुनिक स्किल्स पर ध्यान देना होगा।

## सवाल-जवाब

### 1. नीति आयोग की रिपोर्ट के अनुसार कितने फीसदी ग्रेजुएट्स को नौकरी मिलती है?
रिपोर्ट के अनुसार सिर्फ 8.25 फीसदी ग्रेजुएट्स को ही उनकी योग्यता के अनुसार नौकरी मिल पाती है।

### 2. देश में सबसे ज्यादा छात्र कौन सा कोर्स कर रहे हैं?
देश में 1.3 करोड़ से ज्यादा स्टूडेंट्स सिर्फ बीए (BA) कोर्स कर रहे हैं।

### 3. नौकरी न मिलने का सबसे बड़ा कारण क्या बताया गया है?
नौकरी न मिलने का सबसे बड़ा कारण कॉलेज की पढ़ाई और कॉर्पोरेट जरूरत के बीच का स्किल गैप है।

### 4. सरकारी नौकरियों के लिए कितना कॉम्पिटिशन है?
नवंबर 2024 से जुलाई 2025 के बीच सिर्फ 55 हजार सरकारी पदों के लिए 1.86 करोड़ से ज्यादा आवेदन आए थे।

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