प्रतियोगी परीक्षाओं के बदलते पैटर्न के बीच आईएएस ऋत्विक मेहता ने साझा किए सफलता के मूल मंत्र पलामू में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर कार्यरत आईएएस ऋत्विक मेहता ने यूपीएससी अभ्यर्थियों को बदलते परीक्षा पैटर्न के अनुसार अपनी रणनीति ढालने की सलाह दी है। उन्होंने मुख्य विषयों और शुरुआती उत्तर लेखन के महत्व को रेखांकित किया। प्रतियोगी परीक्षाओं का स्वरूप समय के साथ बदलना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, लेकिन जब परीक्षा का पैटर्न बदलता है तो कई अभ्यर्थी तनाव और असमंजस में आ जाते हैं। झारखंड के पलामू जिले में असिस्टेंट कलेक्टर के पद पर प्रशिक्षण प्राप्त कर रहे आईएएस ऋत्विक मेहता का मानना है कि इस बदलाव से डरने के बजाय उम्मीदवारों को अपनी अध्ययन रणनीति में आवश्यक सुधार करने चाहिए। उनके अनुसार परीक्षा की बदलती जरूरतों को समझकर की गई तैयारी सफलता के द्वार खोलती है और मानसिक दबाव को भी काफी हद तक कम कर देती है। पैटर्न में बदलाव से घबराने के बजाय रणनीति बदलें संघ लोक सेवा आयोग यानी यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में हर साल प्रश्नों की शैली और पूछने के तरीके में नयापन देखा जा रहा है। आईएएस ऋत्विक मेहता कहते हैं कि पैटर्न में बदलाव परीक्षा प्रणाली को अधिक प्रासंगिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए होता है। ऐसे में अभ्यर्थियों को पुरानी लकीर पर चलने की बजाय यह देखना चाहिए कि आयोग अब किस प्रकार की तार्किक क्षमता और विषय ज्ञान की मांग कर रहा है। परीक्षा के स्वरूप के अनुसार ढलना ही सफलता की पहली कुंजी है। तथ्य रटने के बजाय कॉन्सेप्ट की समझ पर दें जोर प्रारंभिक परीक्षा के बदलते ट्रेंड को देखते हुए केवल तथ्यों और आंकड़ों को याद कर लेना पर्याप्त नहीं रह गया है। ऋत्विक मेहता के मुताबिक किसी भी विषय को पढ़ते समय उसकी पृष्ठभूमि और उसके पीछे छिपे कारणों को गहराई से समझना अनिवार्य है। जब अभ्यर्थी विषय के मूल सिद्धांतों यानी कॉन्सेप्ट को अच्छी तरह समझ लेते हैं, तो परीक्षा में प्रश्न चाहे किसी भी घुमावदार तरीके से पूछा जाए, वे उसका सही उत्तर खोजने में सक्षम होते हैं। केवल रट्टा मारने की प्रवृत्ति अब सिविल सेवा परीक्षा में मददगार साबित नहीं हो सकती। तैयारी का आधार: ये हैं बिग फोर विषय सिविल सेवा परीक्षा के विस्तृत पाठ्यक्रम में से चार मुख्य विषयों को तैयारी का मजबूत स्तंभ माना जाता है, जिन्हें 'बिग फोर' या 'स्टैटिक फोर' कहा जाता है। इनमें पहला विषय भारतीय राजनीति और शासन, दूसरा अर्थव्यवस्था, तीसरा भूगोल और पर्यावरण और चौथा इतिहास शामिल है। इतिहास के अंतर्गत कला एवं संस्कृति, प्राचीन इतिहास, मध्यकालीन इतिहास और विश्व इतिहास जैसे महत्वपूर्ण खंड आते हैं। ऋत्विक मेहता का सुझाव है कि इन चारों विषयों पर अपनी पकड़ बेहद मजबूत रखनी चाहिए क्योंकि प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का एक बड़ा हिस्सा इन्हीं से कवर होता है। हालांकि अन्य विषय भी समान रूप से महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इन चार विषयों पर अपेक्षाकृत अधिक ध्यान देने से तैयारी का बड़ा आधार तैयार हो जाता है। थ्योरी के साथ शुरुआती दिन से ही करें उत्तर लेखन अभ्यास आपदा प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय संबंध और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों को केवल किताबों या थ्योरी तक सीमित रखना सही रणनीति नहीं है। आईएएस अधिकारी के अनुसार इन विषयों का अध्ययन करते समय पहले दिन से ही प्रश्नों का अभ्यास और उत्तर लेखन शुरू कर देना चाहिए। कई अभ्यर्थी परीक्षा की तिथि नजदीक आने पर उत्तर लेखन का अभ्यास शुरू करते हैं, जिससे उन पर अत्यधिक दबाव बन जाता है। ऐन वक्त पर टेस्ट सीरीज में कम अंक आने से हताशा और निराशा घेर लेती है। इसलिए थ्योरी पढ़ने के साथ ही नियमित रूप से उत्तर लिखने का अभ्यास जारी रखना चाहिए। डिजिटल संसाधनों का सही इस्तेमाल और घर पर पढ़ाई का लाभ आज के डिजिटल दौर में पढ़ाई के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं है। मोबाइल और इंटरनेट के जरिए अभ्यर्थी घर बैठे ही उच्च स्तरीय अध्ययन सामग्री प्राप्त कर सकते हैं। किसी भी कठिन विषय या मुद्दे की गहरी समझ के लिए गूगल पर खोज की जा सकती है और यूट्यूब के माध्यम से विस्तृत व्याख्या देखी जा सकती है। इसके साथ ही उत्तर लिखते समय अत्यधिक जानकारी ठूंसने के बजाय उपलब्ध तथ्यों को स्पष्ट, सटीक और क्रमबद्ध तरीके से प्रस्तुत करने की कला सीखनी चाहिए। आईएएस ऋत्विक मेहता का यह भी मानना है कि यदि अनुशासित ढंग से पढ़ाई की जाए तो घर पर रहकर तैयारी करना एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है, क्योंकि इससे यात्रा और अन्य गैर जरूरी गतिविधियों में जाने वाला समय बचता है और अभ्यर्थी अपनी पढ़ाई पर पूरी तरह ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। इसका आप पर असर यह मार्गदर्शन यूपीएससी और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। • तनाव प्रबंधन: पैटर्न में बदलाव को स्वाभाविक मानकर तैयारी करने से अंतिम समय में होने वाली घबराहट कम होगी। इससे अभ्यर्थी बेहतर मानसिक संतुलन के साथ परीक्षा दे सकेंगे। • समय की बचत: घर पर रहकर डिजिटल माध्यमों से पढ़ाई करने पर कोचिंग आने-जाने का समय बचेगा। इस बचे हुए समय का उपयोग उत्तर लेखन के अभ्यास में किया जा सकता है। • बेहतर स्कोर: 'बिग फोर' विषयों पर ध्यान केंद्रित करने और पहले दिन से उत्तर लिखने से प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा दोनों में अंक सुधारने में मदद मिलेगी। • सटीक प्रस्तुतीकरण: उत्तरों में अनावश्यक तथ्य भरने के बजाय व्यवस्थित प्रस्तुतीकरण सीखने से मुख्य परीक्षा में अच्छे अंक हासिल किए जा सकते हैं। सवाल-जवाब 1. परीक्षा पैटर्न में बदलाव होने पर अभ्यर्थियों को क्या करना चाहिए? आईएएस ऋत्विक मेहता के अनुसार पैटर्न बदलने पर घबराने की जगह अभ्यर्थियों को परीक्षा की नई जरूरतों के हिसाब से अपनी तैयारी की रणनीति में बदलाव करना चाहिए। 2. यूपीएससी की तैयारी में 'बिग फोर' विषय कौन से हैं? बिग फोर में भारतीय राजनीति एवं शासन, अर्थव्यवस्था, भूगोल एवं पर्यावरण और इतिहास शामिल हैं। 3. तथ्यों को याद करने के बजाय कॉन्सेप्ट पर ध्यान देना क्यों जरूरी है? जब प्रश्नों का स्वरूप या पूछने का तरीका बदलता है, तब गहराई से समझा गया कॉन्सेप्ट ही सही उत्तर तक पहुंचने में मदद करता है। 4. उत्तर लेखन का अभ्यास कब शुरू करना चाहिए? आपदा प्रबंधन, अंतरराष्ट्रीय संबंध और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों के लिए तैयारी के शुरुआती दिनों से ही थ्योरी के साथ-साथ उत्तर लेखन अभ्यास शुरू कर देना चाहिए। 5. ऑनलाइन संसाधनों का इस्तेमाल करते समय किस बात का ध्यान रखें? गूगल और यूट्यूब से जानकारी लेते समय उत्तर में बहुत अधिक तथ्य भरने से बचें और उपलब्ध जानकारी को स्पष्ट तथा व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत करें। https://trendkia.com/career/pratiyogi-parikshaon-ke-badalate-paitarna-ke-bicha-ias-ritwik-mehta-ne-sajha-kie-saphalata-ke-mula-mntra-23806 TrendKia — Har trend, sabse pehle.