# सरकारी विभागों में स्थाई और एडहॉक पदों के बीच वेतन अधिकार एवं सुरक्षा का बड़ा अंतर जानिए

> सरकारी तथा अर्ध-सरकारी नौकरियों में प्रिंसिपल यानी स्थाई और एडहॉक पदों के बीच चयन प्रक्रिया, वेतनमान और जॉब सिक्योरिटी में बड़ा अंतर होता है। जानिए दोनों पदों के नियम और भर्ती प्रक्रिया।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-07-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/sarakari-vibhagon-men-permanent-aura-ad-hoc-padon-ke-bicha-vetana-adhikara-evn-suraksha-ka-bara-antara-janie-12155 · **Language:** Hindi
**Tags:** प्रिंसिपल पद, एडहॉक पद, सरकारी नौकरी, 7वां वेतन आयोग, यूपीएससी, जॉब सिक्योरिटी

सरकारी तथा अर्ध-सरकारी संस्थानों में जब भी भर्तियों का विज्ञापन निकलता है या कर्मचारियों की नियुक्ति होती है, तो वहां अक्सर दो प्रमुख शब्दावलियां सुनने को मिलती हैं, जिनमें पहली 'प्रिंसिपल' या स्थाई पद है और दूसरी 'एडहॉक' पद है। देखने में इन दोनों पदों पर कार्यरत कर्मचारी एक ही तरह की जिम्मेदारियां संभालते हैं और समान कार्यस्थल पर काम करते हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अधिकारों, आर्थिक सुविधाओं, वेतन संरचना और भविष्य की सुरक्षा के पैमाने पर इन दोनों के मध्य व्यापक भिन्नता देखने को मिलती है। कई अभ्यर्थी और सामान्य नागरिक इन दोनों पदों के कानूनी और सेवा संबंधी अंतर को समझ नहीं पाते हैं। इस विस्तृत विश्लेषण के माध्यम से हम स्थाई और एडहॉक पदों के बीच के सभी तकनीकी पहलुओं, नियमों और अधिकारों की स्पष्ट पड़ताल कर रहे हैं।

## स्थाई प्रिंसिपल भर्ती और एडहॉक पद का मूल अर्थ
सार्वजनिक और सरकारी सेवा के अंतर्गत 'प्रिंसिपल' पद का तात्पर्य पूर्ण रूप से नियमित और स्थाई (Permanent) नियुक्ति से होता है। यह एक ऐसी सेवा स्थिति है जहां कर्मचारी की नियुक्ति आयोग द्वारा निर्धारित पूरी चयन प्रक्रिया का पालन करते हुए की जाती है। इसके विपरीत 'एडहॉक' शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा से हुई है, जिसका शाब्दिक अर्थ 'किसी विशेष प्रयोजन के लिए' या 'सीमित अवधि हेतु' होता है। जब किसी सरकारी विभाग, संस्थान या उपक्रम में नियमित भर्ती प्रक्रिया पूरी होने में समय लग रहा हो और तात्कालिक रूप से कार्यबल की आवश्यकता हो, तो उस समय काम चलाने के उद्देश्य से एडहॉक व्यवस्था के तहत अस्थायी भर्तियां की जाती हैं।

## भर्ती प्रक्रिया और चयन के नियमों में अंतर
दोनों पदों के लिए अपनाई जाने वाली चयन प्रणाली में भी मौलिक भिन्नता होती है। स्थाई या प्रिंसिपल पदों पर कर्मचारियों और अधिकारियों का चयन राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की केंद्रीय एजेंसियों के माध्यम से किया जाता है। इसमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) तथा कर्मचारी चयन आयोग (SSC) जैसे प्रतिष्ठित भर्ती बोर्ड शामिल होते हैं। इन संस्थाओं द्वारा त्रिस्तरीय या दो स्तरीय कठिन लिखित परीक्षाएं, कौशल परीक्षण और गहन साक्षात्कार आयोजित किए जाते हैं। इसके उलट एडहॉक पदों के लिए इतनी जटिल प्रतियोगी परीक्षाओं की आवश्यकता नहीं होती। इन पदों पर भर्ती सीधे वॉॉक-इन इंटरव्यू, शैक्षणिक अंकों की मेरिट या अल्पकालिक अनुबंध के आधार पर तुरंत कर ली जाती है।

## वेतनमान 7वें वेतन आयोग और भत्तों का गणित
वित्तीय लाभ और प्रतिमाह मिलने वाले वेतन के मामले में भी दोनों व्यवस्थाओं के बीच बड़ा अंतर मौजूद है। नियमित या प्रिंसिपल पद पर कार्यरत कर्मचारी को 7वें वेतन आयोग (7th Pay Commission) की सिफारिशों के अनुरूप निर्धारित पे मैट्रिक्स के तहत ग्रेड पे, मूल वेतन और अन्य तमाम सुविधाएं दी जाती हैं। इसके साथ ही उन्हें समय-समय पर बढ़ने वाला महंगाई भत्ता (DA), मकान किराया भत्ता (HRA), यात्रा भत्ता और मेडिकल भत्ते का पूर्ण लाभ प्राप्त होता है। दूसरी ओर, एडहॉक कर्मचारियों को अमूमन कोई भत्ता नहीं दिया जाता। उन्हें एक निश्चित राशि यानी समेकित वेतन (Consolidated Pay) या फिक्स सैलरी पर रखा जाता है, जिसमें समय के साथ नियमित वेतन वृद्धि या भत्तों का प्रावधान नहीं होता है।

## नौकरी की सुरक्षा पेंशन और पीएफ के लाभ
सेवा की शर्तों और भविष्य की आर्थिक सुरक्षा के नजरिए से देखा जाए तो प्रिंसिपल पद पर नियुक्त व्यक्ति को पूर्ण जॉब सिक्योरिटी हासिल होती है। ऐसे कर्मचारियों को बिना किसी गंभीर अनुशासनात्मक कार्रवाई या कानूनी प्रक्रिया के पद से नहीं हटाया जा सकता है। इसके अलावा उन्हें भविष्य निधि (PF), ग्रेच्युटी और नियमानुसार पेंशन का लाभ भी मिलता है। इसके बिल्कुल विपरीत, एडहॉक आधार पर काम करने वाले कर्मचारियों का कार्यकाल पूरी तरह से अनिश्चित होता है। अनुबंध की अवधि समाप्त होते ही अथवा संबंधित पद पर किसी नियमित कर्मचारी के आते ही एडहॉक कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सेवा से मुक्त किया जा सकता है।

## विभिन्न सरकारी विभागों और क्षेत्रों में एडहॉक नियुक्तियां
प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों में गति बनाए रखने के लिए देश के विभिन्न विभागों में बड़े पैमाने पर एडहॉक आधार पर नियुक्तियां की जाती हैं

- **शिक्षा क्षेत्र:** दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) सहित देश के कई प्रमुख केंद्रीय एवं राज्य विश्वविद्यालयों तथा सरकारी माध्यमिक स्कूलों में एडहॉक प्रोफेसर और एडहॉक टीचर्स की तैनाती की जाती है।
- **स्वास्थ्य सेवाएं:** सरकारी अस्पतालों में मरीजों की भारी संख्या और चिकित्सकों की कमी को देखते हुए तात्कालिक व्यवस्था के तहत एडहॉक रेजिडेंट डॉक्टर नियुक्त किए जाते हैं।
- **न्यायपालिका:** अदालतों में लंबित मुकदमों के शीघ्र निस्तारण और न्यायिक प्रक्रिया को गति देने के लिए आवश्यकतानुसार एडहॉक जजों (Ad Hoc Judges) की नियुक्ति का प्रावधान है।
- **सरकारी मंत्रालय और पीएसयू:** विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) में विशेष परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए एडहॉक कंसल्टेंट्स की सेवाएं ली जाती हैं।

## क्या एडहॉक कर्मचारियों को स्थाई होने का मौका मिलता है
सेवा नियमों के सामान्य मानकों के अनुसार एडहॉक नियुक्ति अपने आप में किसी कर्मचारी को स्थाई या परमानेंट होने का विधिक अधिकार प्रदान नहीं करती है। हालांकि, व्यावहारिक धरातल पर यदि कोई कर्मचारी कई वर्षों से लगातार एडहॉक पद पर अपनी सेवाएं दे रहा है, तो समय-समय पर राज्य या केंद्र सरकारें विशेष नीतिगत फैसले लेती हैं। इसके अलावा विभिन्न न्यायालयों द्वारा जारी आदेशों के तहत दीर्घकालिक अनुभव को प्राथमिकता देते हुए ऐसे कर्मचारियों को नियमितीकरण (Regularization) की प्रक्रिया में शामिल होने या स्थाई भर्ती में आयु सीमा एवं अंकों में छूट प्राप्त करने का अवसर दिया जाता है।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों को विज्ञापन में पद की प्रकृति (स्थाई या एडहॉक) देखकर ही आवेदन करना चाहिए ताकि वेतन और सुरक्षा को लेकर भ्रम न रहे।
- **वेतन एवं सुरक्षा पर प्रभाव:** एडहॉक पद तात्कालिक रोजगार तो देते हैं लेकिन उनमें 7वें वेतन आयोग के भत्ते, पीएफ और जॉब सिक्योरिटी का लाभ नहीं मिलता।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रिंसिपल और एडहॉक पद में मुख्य अंतर क्या है?
प्रिंसिपल पद मुख्य, नियमित और स्थाई भर्ती होता है, जबकि एडहॉक पद तात्कालिक जरूरत या स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए बनाया गया अस्थायी पद होता है।

### 2. एडहॉक पदों पर भर्ती की प्रक्रिया क्या होती है?
एडहॉक पदों पर भर्ती सीधे वॉॉक-इन इंटरव्यू, शैक्षणिक मेरिट या अल्पकालिक अनुबंध के जरिए होती है, जबकि स्थाई पदों पर UPSC या SSC जैसी कठिन परीक्षा पास करनी होती है।

### 3. क्या एडहॉक कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के भत्ते मिलते हैं?
नहीं, एडहॉक कर्मचारियों को आमतौर पर फिक्स सैलरी या समेकित वेतन दिया जाता है, जबकि स्थाई कर्मचारियों को 7वें वेतन आयोग के तहत ग्रेड पे, DA, HRA और मेडिकल भत्ते मिलते हैं।

### 4. किन-किन सरकारी विभागों में एडहॉक नियुक्तियां होती हैं?
शिक्षा विभाग (स्कूल और कॉलेज), सरकारी अस्पताल, न्यायपालिका (अदालतें) तथा विभिन्न सरकारी मंत्रालयों एवं PSUs में एडहॉक नियुक्तियां की जाती हैं।

### 5. क्या सालों तक काम करने के बाद एडहॉक कर्मचारी परमानेंट हो सकते हैं?
सामान्य नियमों के अनुसार एडहॉक पद अपने आप परमानेंट होने का अधिकार नहीं देता, लेकिन सरकारें विशेष नीतियों या कोर्ट के आदेशों के तहत उनके अनुभव को प्राथमिकता देकर नियमितीकरण का मौका दे सकती हैं।

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