श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस ने शुरू किया हिंदी में बीटेक, मिलेंगे 2 लाख रुपये मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित SGSITS ने सिविल इंजीनियरिंग में हिंदी मीडियम का कोर्स शुरू किया है। इस बैच में एडमिशन लेने वाले छात्रों को फाइनल ईयर में 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। अगर किसी छात्र ने स्कूली शिक्षा हिंदी माध्यम से पूरी की है और अंग्रेजी भाषा के डर से तकनीकी शिक्षा से दूर रहते थे, तो उनके लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में स्थित ‘श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस’ ने सिविल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रम को हिंदी माध्यम में उपलब्ध कराने की अनूठी शुरुआत की है। इस व्यवस्था के लागू होने से तकनीकी सिद्धांतों को अपनी मातृभाषा में समझना काफी आसान हो जाएगा, जिससे विद्यार्थियों की पढ़ाई का मानसिक तनाव कम होगा और विषयों को गहराई से पकड़ने की उनकी क्षमता में उल्लेखनीय सुधार आएगा। यह अहम पहल केवल भाषा की बाधा को ही समाप्त नहीं करती, बल्कि उन प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं का आत्मविश्वास भी आसमान पर पहुंचाती है जो केवल फर्राटेदार अंग्रेजी न बोल पाने की वजह से मुख्यधारा की शिक्षा में पिछड़ जाते थे। इसके अलावा, इस विशेष सिविल इंजीनियरिंग कोर्स का विकल्प चुनने वाले युवाओं के लिए मध्य प्रदेश सरकार की ओर से वित्तीय सहायता प्रदान करने की भी पूरी योजना बनाई गई है। पाठ्यक्रम के अंतिम यानी फाइनल ईयर में पहुंचते ही विद्यार्थियों को 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी, जिससे उनका भविष्य और करियर दोनों आर्थिक रूप से मजबूत हो सकेंगे। मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा और भाषा का बढ़ता दायरा अक्सर यह देखा जाता है कि उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश या बिहार जैसे राज्यों से ताल्लुक रखने वाले छात्र जब बीटेक में दाखिला लेते हैं, तो अचानक अंग्रेजी की भारी-भरकम और जटिल किताबों को देखकर अंदर से सहम जाते हैं। SGSITS का यह नया हिंदी बैच विद्यार्थियों की इसी मानसिक झिझक और डर को पूरी तरह से दूर करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। अब छात्र अपनी क्लासरूम के भीतर अपनी सहज भाषा में सवाल पूछ सकेंगे, उत्तर पुस्तिका में जवाब लिख सकेंगे और बिना किसी प्रकार के मानसिक दबाव के अपनी इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी कर पाएंगे। तीस सीटों का विशेष बैच और छात्रों का शानदार रुझान संस्थान ने इस नए प्रयोग को बेहद गंभीरता और योजनाबद्ध तरीके से अमलीजामा पहनाया है। इसके लिए सिविल इंजीनियरिंग विभाग के अंतर्गत कुल 30 सीटों का एक विशेष बैच तैयार किया गया है। संस्थान की इस अभिनव पहल को विद्यार्थियों की तरफ से बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली है और शुरुआती दौर में ही लगभग 20 छात्र इसमें एडमिशन ले चुके हैं। इस शानदार आंकड़े से यह साफ जाहिर होता है कि क्षेत्रीय और हिंदी भाषा में तकनीकी शिक्षा की मांग जमीनी स्तर पर कितनी अधिक व्यापक है। चार साल की लंबी मेहनत के बाद तैयार हुआ हिंदी स्टडी मटीरियल यह बदलाव कोई ऐसा कारनामा नहीं है जो रातों-रात सामने आ गया हो। संस्थान के फैकल्टी मेंबर्स पिछले चार लंबे वर्षों से इस चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट पर पूरी तन्मयता के साथ काम कर रहे थे। अंग्रेजी के अत्यधिक कठिन तकनीकी शब्दों और शब्दावली को सरल तथा बोलचाल की सहज हिंदी में ढाला गया है। इसके साथ ही, प्रोफेसरों के लिए विशेष शिक्षण कार्यशालाओं यानी ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया गया, ताकि वे बिना किसी हिचकिचाहट के विद्यार्थियों को हिंदी भाषा में ही इंजीनियरिंग के तमाम जटिल कॉन्सेप्ट्स आसानी से समझा सकें। परीक्षा में लिखने की पूरी छूट और समझने पर जोर सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी सुनील अजमेरा के अनुसार, कई बार अंग्रेजी भाषा ठीक से न समझ पाने के कारण युवा भारी डिप्रेशन या मानसिक तनाव का शिकार हो जाते हैं या फिर बीच में ही अपनी पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं। नए और सुधरे हुए सिस्टम के तहत छात्रों को सबसे बड़ी राहत यह दी गई है कि वे अपनी परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं में हिंदी में ही जवाब लिख सकेंगे। जब अपनी मातृभाषा में लिखने की पूरी छूट मिलती है, तो छात्र चीजों को रटने के बजाय उनके मूल सिद्धांतों को गहराई से समझने पर ज्यादा जोर देते हैं। संतुलित दृष्टिकोण और अंग्रेजी से नाता न टूटने की नीति संस्थान इस बात को बहुत अच्छी तरह समझता है कि आज की वैश्विक अर्थव्यवस्था यानी ग्लोबल मार्केट और कॉरपोरेट जॉब इंटरव्यूज में अंग्रेजी भाषा की क्या असल अहमियत है। यही कारण है कि छात्रों को अंग्रेजी से पूरी तरह काटा या अलग नहीं किया जाएगा। अध्ययन के दौरान हिंग्लिश या द्विभाषी यानी बाईलिंगुअल अप्रोच अपनाई जाएगी, जिसके तहत मुख्य तकनीकी शब्द अंग्रेजी में भी बताए जाएंगे। इससे छात्र अपनी भाषा में विषय की बारीकियां तो सीखेंगे ही, साथ ही आधुनिक औद्योगिक जगत की जरूरतों के लिए भी पूरी तरह तैयार रहेंगे। मध्य प्रदेश सरकार की तरफ से दो लाख रुपये का स्कॉलरशिप बोनस राज्य सरकार भी इस सार्थक पहल को हर संभव स्तर पर बढ़ावा दे रही है और पूरा सहयोग प्रदान कर रही है। इस कोर्स का चयन करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को फाइनल ईयर में 2 लाख रुपये की भारी आर्थिक प्रोत्साहन राशि दिए जाने का स्पष्ट प्रावधान किया गया है। इसका सीधा और बड़ा फायदा उन गरीब तथा जरूरतमंद छात्र-छात्राओं को मिलेगा जो कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि से आते हैं और पैसों की भयंकर तंगी के कारण उच्च शिक्षा के सपनों से वंचित रह जाते थे। भारतभर में हिंदी माध्यम से इंजीनियरिंग की बदलती तस्वीर राष्ट्रीय शिक्षा नीति यानी NEP 2020 के तहत पूरे देश भर के शिक्षण संस्थानों में मातृभाषा के माध्यम से ही उच्च शिक्षा प्रदान करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद यानी AICTE ने भी क्षेत्रीय और भारतीय भाषाओं में बीटेक की किताबें तैयार करने के लिए अपनी आधिकारिक मंजूरी दे दी है। SGSITS इंदौर की यह शानदार शुरुआत मध्य प्रदेश में एक बड़ा ट्रेंडसेटर साबित होने जा रही है। आने वाले समय में देश और राज्य के अन्य सरकारी तथा निजी कॉलेज भी मैकेनिकल, इलेक्ट्रिकल और कंप्यूटर साइंस जैसे प्रमुख विषयों में हिंदी माध्यम का विकल्प अपने यहां शुरू कर सकते हैं। इसका आप पर असर यह नई पहल उन हिंदी माध्यम के छात्रों के लिए बेहद फायदेमंद है जो भाषा की दीवार के कारण तकनीकी शिक्षा से दूर रहते थे। • भारत में: देश भर के तकनीकी संस्थानों में क्षेत्रीय और मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने के रास्ते खुल रहे हैं, जिससे ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्रों को बड़ा अवसर मिलेगा। • इंदौर में: श्री गोविंदराम सेकसरिया इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड साइंस में सिविल इंजीनियरिंग पढ़ने वाले छात्रों को स्थानीय भाषा में पढ़ाई का लाभ मिलेगा और फाइनल ईयर में 2 लाख रुपये की आर्थिक मदद प्राप्त होगी। सवाल-जवाब 1. SGSITS ने कौन सा नया कोर्स हिंदी माध्यम में शुरू किया है? SGSITS ने सिविल इंजीनियरिंग में हिंदी मीडियम से बीटेक कोर्स शुरू किया है। 2. इस कोर्स के लिए कितनी सीटों का विशेष बैच बनाया गया है? सिविल इंजीनियरिंग विभाग में 30 सीटों का विशेष बैच तैयार किया गया है। 3. शुरुआती दौर में इस बैच में कितने छात्रों ने एडमिशन लिया है? शुरुआती दौर में लगभग 20 छात्रों ने इस हिंदी मीडियम बैच में एडमिशन लिया है। 4. छात्रों को सरकार की तरफ से कितनी प्रोत्साहन राशि मिलेगी? बीटेक फाइनल ईयर में पहुंचने पर छात्रों को 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलेगी। 5. यह स्टडी मटीरियल तैयार करने में कितना समय लगा? संस्थान के फैकल्टी मेंबर्स ने पिछले 4 सालों से इस प्रोजेक्ट पर काम करके स्टडी मटीरियल तैयार किया है। 6. सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी कौन हैं? सिविल इंजीनियरिंग विभाग के एचओडी सुनील अजमेरा हैं। https://trendkia.com/career/shri-govindarama-sekasariya-instityuta-pha-teknoloji-enda-sainsa-ne-shuru-kiya-hindi-men-btech-milenge-2-lakh-rupaye-28394 TrendKia — Har trend, sabse pehle.