ऑटोमेशन के बढ़ते प्रभाव के बीच नौकरीपेशा लोग कैसे सुरक्षित रखें अपना करियर, अपनाएं 5 जरूरी रणनीतियां कार्यस्थल पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रसार से उपजी चिंताओं के बीच विशेषज्ञों ने करियर सुरक्षित रखने के लिए रीस्किलिंग, डेटा समझ और क्रिटिकल थिंकिंग जैसी 5 अहम रणनीतियों को अपनाने की सलाह दी है। एक सामान्य कार्यदिवस में जब कोई कर्मचारी अपनी मेज पर चाय की चुस्की ले रहा हो और तभी सहकर्मी यह खबर दे कि घंटों में होने वाला काम मशीनों ने महज 5 मिनट में पूरा कर दिया, तो मन में चिंता की लहर उठना स्वाभाविक है। वर्तमान समय में लगभग हर क्षेत्र के दफ्तरों में कर्मचारियों के बीच अपनी आजीविका को लेकर इसी प्रकार का संशय और भय देखा जा रहा है। लोगों को लगता है कि कहीं उन्नत तकनीक उनकी जगह न ले ले। यह आशंका पूरी तरह बेबुनियाद भी नहीं है, क्योंकि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का दायरा अब केवल वैज्ञानिक अनुसंधान प्रयोगशालाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह हमारे दैनिक कार्यालयीन कामकाज का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। मशीनी दौर में काम करने के तरीकों में बदलाव नौकरीपेशा वर्ग में इस बात को लेकर भारी घबराहट है कि स्वचालित प्रणालियां उनके रोजगार को नुकसान पहुंचाएंगी। हालांकि डेक्सियन के स्ट्रैटेजिक इनीशिएटिव्स के वाइस प्रेसिडेंट और कंट्री हेड इंडिया, कुमार राजगोपालन का दृष्टिकोण इस मामले में अलग है। उनका मानना है कि यह तकनीक नौकरियां समाप्त करने के बजाय हमारे काम करने की शैली और स्वरूप को पूरी तरह बदल रही है। उनके अनुसार जिन कार्यों में बार-बार एक ही प्रक्रिया दोहराई जाती है, वे काम स्वाभाविक रूप से मशीनों के सुपुर्द हो रहे हैं। इसके विपरीत, जहां सूक्ष्म इंसानी समझ, तर्क और निर्णय क्षमता की आवश्यकता होगी, वहां इंसानों का वर्चस्व बना रहेगा। मुख्य विषय यह नहीं है कि यह बदलाव आएगा या नहीं, बल्कि महत्वपूर्ण यह है कि व्यक्ति खुद को इस नई व्यवस्था के अनुकूल कैसे तैयार करता है। क्रिटिकल थिंकिंग और दूरदर्शी निर्णय क्षमता वर्तमान डिजिटल युग में अपने करियर को सुरक्षित रखने का पहला अहम कदम यह है कि तकनीक से दूर भागने के बजाय उसे अपना मित्र बनाया जाए। जिस प्रकार बीते दौर में कंप्यूटर का ज्ञान अनिवार्य आवश्यकता बन गया था, उसी तरह आज विभिन्न आधुनिक टूल्स की समझ होना बेहद जरूरी है। जो कर्मचारी इन टूल्स का उपयोग करके अपनी कार्य गति और उत्पादकता बढ़ाते हैं, वे प्रतिस्पर्धा में अग्रणी रहते हैं। इस संदर्भ में करियर सुरक्षा के लिए पहला महत्वपूर्ण पहलू क्रिटिकल थिंकिंग और निर्णय लेने की क्षमता है। कोई भी जटिल कोड या गणितीय एल्गोरिदम उस स्तर की सूझबूझ और विवेक प्रदर्शित नहीं कर सकता जो एक मानव मस्तिष्क में होता है। कार्यालय में उत्पन्न होने वाली अप्रत्याशित चुनौतियों के दौरान दूरगामी सोच के साथ सही कदम उठाना केवल मनुष्य के बस में है, इसलिए अपनी इस बौद्धिक क्षमता को निरंतर मांझते रहना चाहिए। इंसानी संवेदनाएं और संवाद कौशल का महत्व दूसरा प्रमुख बिंदु इंसानी भावनाओं, सहानुभूति और प्रभावी कम्युनिकेशन स्किल्स से जुड़ा हुआ है। दूसरों की बात को ध्यानपूर्वक सुनना, आपसी भरोसा कायम करना और भावनात्मक स्तर पर जुड़ना ऐसे गुण हैं जिन्हें कोई भी स्वचालित मशीन कभी नहीं सीख सकती। यही कारण है कि शिक्षण, स्वास्थ्य सेवा, परामर्श और टीम नेतृत्व जैसे क्षेत्रों में मानव कर्मचारियों का स्थान हमेशा अग्रणी रहेगा। अपनी इन विशिष्ट इंसानी खूबियों को कभी कमजोर न पड़ने दें, क्योंकि ये आपको मशीनों से अलग और श्रेष्ठ बनाती हैं। बदलाव को स्वीकार करने की लचक और निरंतर सीख तीसरा महत्वपूर्ण टिप बदलाव के साथ खुद को ढालने की फ्लेक्सिबिलिटी रखना है। आज के समय में केवल वही पेशेवर लंबे समय तक टिक सकते हैं जो नई तकनीकों को सीखने में झिझकते नहीं हैं। आज जो कौशल प्रासंगिक नजर आ रहा है, संभव है कि आने वाले समय में उसका स्थान कोई नया आधुनिक टूल ले ले। समय की मांग को देखते हुए लगातार नई चीजें सीखते रहना और अपने ज्ञान को अपडेट रखना ही एक कर्मचारी की सबसे बड़ी ताकत साबित होती है। डेटा विश्लेषण और व्यावहारिक समझ की आवश्यकता चौथा सुझाव डेटा को सही ढंग से समझने और उसकी व्याख्या करने की क्षमता से संबंधित है। भले ही आप सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट या कोडिंग के क्षेत्र से न जुड़े हों, लेकिन बुनियादी आंकड़ों को समझना और उनका विश्लेषण करना अब हर पेशेवर के लिए जरूरी हो गया है। प्राप्त जानकारी से सही निष्कर्ष निकालना और तथ्यात्मक निर्णय लेना वर्तमान में हर जॉब प्रोफाइल का आवश्यक हिस्सा बनता जा रहा है। रीस्किलिंग के जरिए भविष्य को सुरक्षित बनाने की रणनीति पाँचवाँ और अंतिम बिंदु रीस्किलिंग पर केंद्रित है। तकनीक के प्रसार से डरने के स्थान पर कंपनियों और कर्मचारियों दोनों को मिलकर नए हुनर सीखने पर ध्यान केंद्रित करना होगा। जो लोग समय के रुख को पहचानकर समय रहते खुद में बदलाव लाएंगे, वे इस दौर में पिछड़ने के बजाय सफलता के नए कीर्तिमान स्थापित करेंगे। इसका आप पर असर भारत में: तेजी से बदलते कॉरपोरेट माहौल में कर्मचारियों को नई तकनीक सीखने और कार्यकुशलता बढ़ाने में मदद मिलेगी। पेशेवरों के लिए: अपनी नौकरी को सुरक्षित रखने के लिए रीस्किलिंग, डेटा विश्लेषण और इंसानी संवाद जैसे कौशलों का महत्व समझ आएगा। सवाल-जवाब 1. क्या एआई के आने से इंसानी नौकरियां पूरी तरह खत्म हो जाएंगी? नहीं, विशेषज्ञ कुमार राजगोपालन के अनुसार एआई नौकरियां खत्म नहीं कर रहा बल्कि काम करने के तरीके को बदल रहा है। दोहराव वाले काम मशीनों के पास जा रहे हैं, लेकिन जहां इंसानी समझ की जरूरत है वहां इंसान ही आगे रहेंगे। 2. एआई के दौर में नौकरी सुरक्षित रखने के 5 मुख्य उपाय कौन से हैं? इसके लिए क्रिटिकल थिंकिंग, इंसानी भावनाएं व कम्युनिकेशन स्किल्स, बदलाव के साथ ढलने की फ्लेक्सिबिलिटी, डेटा को समझने की काबिलियत और रीस्किलिंग पर ध्यान देना जरूरी है। 3. किन क्षेत्रों में इंसानी कर्मचारियों का दबदबा बना रहेगा? टीचिंग, हेल्थकेयर, काउंसलिंग और टीम लीडरशिप जैसे क्षेत्रों में सहानुभूति, भरोसा और इंसानी संवाद की जरूरत के कारण इंसानों का वर्चस्व हमेशा कायम रहेगा। 4. क्या गैर-तकनीकी कर्मचारियों के लिए भी डेटा समझना जरूरी है? हां, आज के समय में सॉफ्टवेयर इंजीनियर न होने पर भी बुनियादी डेटा को देखना, उससे सही निष्कर्ष निकालना और फैसले लेना लगभग हर जॉब प्रोफाइल का हिस्सा बन चुका है। https://trendkia.com/career/tomeshana-ke-barhate-prabhava-ke-bicha-naukaripesha-loga-kaise-surakshita-rakhen-apana-kariyara-apanaen-5-jaruri-rananitiyan-18963 TrendKia — Har trend, sabse pehle.