त्योहारी मांग से चमकेगा रोजगार बाजार, गिग और सीजनल सेक्टर में खुलेंगे 2.5 लाख अवसर त्योहारी सीजन में ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स और खुदरा क्षेत्र में 2.5 लाख तक अस्थायी और गिग नौकरियां निकलने का अनुमान है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से कुल नियुक्तियों की 45 फीसदी हिस्सेदारी आने की उम्मीद जताई गई है। अक्टूबर के महीने से भारत में फेस्टिव सीजन रफ्तार पकड़ने जा रहा है और इसके साथ ही देश के युवाओं के लिए कमाई के शानदार रास्ते खुलने वाले हैं। डिजिटल टैलेंट और ग्लोबल तकनीकी समाधान देने वाली कंपनी एनएलबी सर्विसेज के ताजा अध्ययन के अनुसार, इस साल त्योहारी दौर में भारतीय अर्थव्यवस्था के भीतर करीब 2.5 लाख नई नौकरियां पैदा होने का अनुमान लगाया गया है। जुलाई से दिसंबर 2026 की छमाही के दौरान करीब दो से 2.5 लाख मौसमी और गिग नियुक्तियां सामने आने की संभावना है, जिससे त्योहारी सीजन की कुल भर्ती प्रक्रिया में 15 से 20 फीसदी की उल्लेखनीय बढ़त दर्ज की जा सकती है। बाजार में गिग वर्कर्स उन कर्मचारियों को कहा जाता है जो ई-कॉमर्स या संबंधित कंपनियों के लिए अस्थायी अनुबंध या जरूरत के आधार पर सेवाएं देते हैं। त्योहारी मांग चरम पर पहुंचने की संभावना को देखते हुए ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, यात्रा और कंज्यूमर सर्विसेज से जुड़ी सभी प्रमुख कंपनियां वर्ष के इस सबसे व्यस्त समय के लिए अभी से कमर कस रही हैं। एनएलबी सर्विसेज के वरिष्ठ उपाध्यक्ष एवं एपीएसी प्रमुख वरुण सचदेवा के मुताबिक, त्योहारों का यह दौर भारत के रोजगार बाजार के लिए एक सख्त परीक्षा की तरह बन गया है। उन्होंने रेखांकित किया कि भर्तीकर्ता अब पहले से ही चयन प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं और पुराने ढर्रे के रोजगार केंद्रों से बाहर निकलकर तकनीक में दक्ष, कार्यकुशल और त्वरित रूप से तैनात किए जा सकने वाले कार्यबल पर अधिक भरोसा कर रहे हैं। शॉर्ट टर्म जरूरत से आगे बढ़कर प्रतिभा परखने का मंच बने त्योहार उद्योग जगत के नजरिए में आए इस बड़े बदलाव पर बात करते हुए वरुण सचदेवा ने स्पष्ट किया कि त्योहारों में आने वाली अचानक मांग को संभालना अब महज कुछ हफ्तों की तात्कालिक जरूरत तक सीमित नहीं रह गया है। असल में यह कंपनियों के लिए नए प्रतिभा समूहों तक सीधे पहुंचने, बड़े पैमाने पर उनकी कार्यक्षमता का आकलन करने और आगे चलकर उन्हें लंबी अवधि के स्थायी रोजगार देने का जरिया भी बन रहा है। इसी रणनीति के तहत कंपनियां त्योहारी सीजन की चरम मांग शुरू होने से लगभग 12 से 14 सप्ताह पहले ही अपनी भर्ती आवश्यकताओं का खाका तैयार करना शुरू कर देती हैं। इस अग्रिम तैयारी से नियोक्ताओं को पहले से एक दक्ष टैलेंट पूल तैयार करने में आसानी होती है और ऐन मौके पर हड़बड़ी में होने वाले हायरिंग दबाव से पूरी तरह निजात मिल जाती है। टियर-2 और टियर-3 शहरों से आ रही नियुक्तियों की 45 फीसदी मांग त्योहारी सीजन में होने वाली इस भर्ती लहर का दायरा अब बड़े महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के छोटे और मझोले शहरों तक फैल चुका है। जुटाए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल त्योहारी भर्ती मांग में करीब 45 फीसदी हिस्सा दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों से आने की उम्मीद है। इतना ही नहीं, इन टियर-2 और टियर-3 बाजारों में भर्ती दर में 25 से 30 फीसदी तक की जबरदस्त तेजी देखी जा रही है। ई-कॉमर्स और त्वरित डिलीवरी देने वाले क्विक कॉमर्स के विस्तार के साथ-साथ संगठित खुदरा दुकानों और क्षेत्रीय स्तर पर ऑर्डर सप्लाई नेटवर्क के मजबूत होने से जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में कर्मचारियों की भारी मांग निकल रही है। फ्रेशर्स, महिलाओं और तकनीकी युवाओं के लिए बढ़े नए अवसर इस अध्ययन में एक और अहम पहलू यह रेखांकित किया गया है कि त्योहारी दौर में पहली बार कार्यक्षेत्र में कदम रखने वाले फ्रेशर्स और कामकाजी महिलाएं एक बेहद महत्वपूर्ण वर्कफोर्स के रूप में उभरकर सामने आ रहे हैं। देश में जिस तरह से गिग इकनॉमी का दायरा तेजी से फैल रहा है, उसी अनुपात में अलग-अलग विधाओं के कर्मियों की मांग भी गति पकड़ रही है। अब गिग और सीजनल सेक्टर केवल गैर तकनीकी कामों तक सीमित नहीं रहा है, बल्कि ऐसे युवाओं को भी बड़े पैमाने पर अवसर मिल रहे हैं जो प्रशिक्षित हैं, डिजिटल उपकरणों का सुगमता से उपयोग कर सकते हैं और तकनीकी तौर पर पूरी तरह दक्ष हैं। इसका आप पर असर त्योहारी सीजन में लाखों अस्थायी और गिग नौकरियां निकलने से काम की तलाश कर रहे युवाओं और कॉलेज छात्रों को कमाई का तुरंत मौका मिलेगा। • भारत में: देश भर में ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों में लगभग 2.5 लाख अस्थायी पद खुलेंगे। फ्रेशर्स और महिलाएं इन अनुबंध आधारित पदों पर काम करके तुरंत आय हासिल कर सकते हैं। • छोटे शहरों में: जयपुर, लखनऊ, इंदौर और सूरत जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों में कुल भर्तियों की 45 फीसदी मांग रहेगी। इन इलाकों में स्थानीय डिलीवरी नेटवर्क और रिटेल स्टोर्स में युवाओं को अपने ही शहर में रोजगार मिलेगा। • करियर निर्माण: बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सीजनल वर्कर्स को कंपनियां आगे चलकर स्थायी पदों पर भी रख सकती हैं। यह अनुभव युवाओं के रिज्यूमे को मजबूत करने और कार्यकुशलता साबित करने का अच्छा जरिया बनेगा। • तकनीकी युवाओं के लिए: सिर्फ डिलीवरी ही नहीं, बल्कि डेटा मैनेजमेंट और इन्वेंटरी संभालने वाले तकनीकी युवाओं को भी प्राथमिकता मिलेगी। इससे स्किल्ड युवाओं को बेहतर वेतन और जिम्मेदारी वाले रोल हासिल होंगे। ऐसा क्यों हुआ त्योहारी सीजन के दौरान खुदरा बिक्री और ऑनलाइन खरीदारी में भारी उछाल आता है, जिसे संभालने के लिए कंपनियों को अतिरिक्त कार्यबल की आवश्यकता पड़ती है। • त्योहारी मांग में उछाल: अक्टूबर से शुरू होने वाले फेस्टिव सीजन में उपभोक्ता खर्च, ई-कॉमर्स ऑर्डर और यात्रा गतिविधियों में अचानक तेज बढ़ोतरी होती है। इस अतिरिक्त कार्यभार को समय पर पूरा करने के लिए कंपनियों को हजारों अस्थायी कर्मचारियों की जरूरत होती है। • सप्लाई चेन का विस्तार: क्विक कॉमर्स और रीजनल वेयरहाउसिंग का नेटवर्क छोटे शहरों तक गहराई से फैल चुका है। तेजी से डिलीवरी देने और ऑर्डर पूरा करने के लिए स्थानीय स्तर पर अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती अनिवार्य हो गई है। • अग्रिम योजना: कंपनियां सीजन शुरू होने से 12 से 14 सप्ताह पहले ही भर्तियों की रूपरेखा तय कर लेती हैं। इस पूर्व योजना की वजह से अंतिम क्षणों में कार्यबल की कमी का जोखिम पूरी तरह समाप्त हो जाता है। सवाल-जवाब 1. त्योहारी सीजन में कितनी नौकरियां आने का अनुमान है? एनएलबी सर्विसेज की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से दिसंबर 2026 के दौरान करीब दो से 2.5 लाख मौसमी और गिग नौकरियां पैदा होने की संभावना है। 2. किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा नियुक्तियां होने की उम्मीद है? ई-कॉमर्स, क्विक कॉमर्स, रिटेल, लॉजिस्टिक्स, हॉस्पिटैलिटी, यात्रा और कंज्यूमर सर्विसेज जैसे क्षेत्रों में सबसे ज्यादा भर्तियां होंगी। 3. छोटे शहरों की इस त्योहारी भर्ती में कितनी हिस्सेदारी रहेगी? कुल त्योहारी भर्तियों में से लगभग 45 फीसदी मांग टियर-2 और टियर-3 शहरों से आने का अनुमान है। 4. कंपनियां त्योहारी सीजन के लिए कितने हफ्ते पहले से भर्ती योजना बनाती हैं? कंपनियां मांग बढ़ने से लगभग 12 से 14 सप्ताह पहले ही अपनी भर्ती आवश्यकताओं की योजना बनाना शुरू कर देती हैं। 5. किन प्रमुख गैर-मेट्रो शहरों में रोजगार के अवसर बढ़ रहे हैं? जयपुर, लखनऊ, इंदौर, सूरत, नागपुर, भुवनेश्वर, कोयंबटूर, चंडीगढ़ और कोच्चि जैसे शहरों में रोजगार की मांग तेजी से बढ़ रही है। https://trendkia.com/career/tyohari-manga-se-chamakega-rojagara-bajara-giga-aura-sijanala-sektara-men-khulenge-2-5-lakha-avasara-35058 TrendKia — Har trend, sabse pehle.