# यूजीसी नेट री-एग्जाम पर भड़के छात्र और शिक्षक, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के दफ्तर पहुंचकर उठाई ये मांगें

> यूजीसी नेट की तीन विषयों की परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और शिक्षकों ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के दफ्तर पर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि एजेंसी की गलती का खामियाजा उम्मीदवारों को भुगतना पड़ रहा है।

**Type:** article · **Category:** करियर · **Published:** 2026-08-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/career/ugc-net-students-and-teachers-protest-against-re-exam-and-demand-immediate-relief-from-nta-18010 · **Language:** Hindi
**Tags:** यूजीसी नेट, NTA, री-एग्जाम, शिक्षा समाचार, पॉलिटिकल साइंस, परीक्षा विवाद

यूजीसी नेट की तीन विषयों की परीक्षा रद्द किए जाने के बाद से शुरू हुआ घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। परीक्षा रद्द होने और उसके बाद सामने आ रही नई-नई दिक्कतों को लेकर उम्मीदवारों और शिक्षकों में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। इसी कड़ी में प्रभावित छात्रों और शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल सीधे नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA के कार्यालय जा पहुंचा। वहां उन्होंने अधिकारियों के सामने अपनी समस्याओं का पिटारा खोल दिया और साफ शब्दों में अपनी मांगें रखीं। प्रतिनिधिमंडल की सबसे बड़ी और मुख्य मांग यह थी कि इंग्लिश और कॉमर्स विषयों की परीक्षा दोबारा न करवाई जाए।

 

## परीक्षा रद्द होने पर खड़े किए गए गंभीर सवाल

छात्रों का साफ कहना है कि उन्होंने इन परीक्षाओं को पास करने के लिए महीनों और सालों तक दिन-रात एक करके कड़ी मेहनत की है। अब यदि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की अपनी किसी खामी या तकनीकी गड़बड़ी की वजह से परीक्षा को रद्द किया जाता है, तो इस बात का कोई औचित्य नहीं बनता कि उसकी सजा छात्र भुगतें। प्रतिनिधिमंडल में शामिल शिक्षकों और छात्रों ने इस बात पर जोर दिया कि परीक्षा के दोबारा आयोजन से उनकी आगे की पढ़ाई का पूरा शेड्यूल बिगड़ जाता है।

 

## NTA कार्यालय में छात्रों और शिक्षकों का विरोध प्रदर्शन

अपनी इन्हीं तमाम परेशानियों को लेकर छात्रों और शिक्षकों का एक समूह NTA के दफ्तर पहुंचा था। प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रहे शिक्षक प्रद्युम्न त्रिपाठी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि वे अपनी मांगों का ज्ञापन लेकर वहां पहुंचे थे, लेकिन अधिकारियों की तरफ से उन्हें कोई भी संतोषजनक या ठोस आश्वासन नहीं मिला। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि इंग्लिश और कॉमर्स की री-एग्जाम की योजना को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए क्योंकि इससे छात्रों पर मानसिक और अकादमिक दबाव बढ़ रहा है।

 

## पॉलिटिकल साइंस की आंसर की पर भी उठे बड़े सवाल

न सिर्फ री-एग्जाम बल्कि पॉलिटिकल साइंस विषय की आंसर की और रिस्पॉन्स शीट में भी भारी गड़बड़ियों के आरोप लगाए गए हैं। छात्रों का आरोप है कि इस विषय की आंसर की में करीब 14 से 15 ऐसे सवाल हैं जिनके उत्तर पूरी तरह गलत दिए गए हैं और उन पर गंभीर आपत्तियां बनती हैं। छात्रों के सामने सबसे बड़ी दुविधा यह है कि यदि वे इन सभी 14-15 गलत सवालों को चुनौती देना चाहें, तो उन्हें प्रति प्रश्न भारी शुल्क चुकाना होगा। छात्रों ने तीखा सवाल किया कि इतने सारे सवालों को चैलेंज करने के एवढ में छात्र 3,000 रुपये की बड़ी रकम आखिर कहां से लेकर आएंगे, जबकि गलती पूरी तरह एजेंसी की तरफ से है।

 

## अधिकारियों पर लगाए गए गंभीर आरोप

जब प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने NTA कार्यालय के भीतर अधिकारियों के सामने पॉलिटिकल साइंस की आंसर की की इन गड़बड़ियों को रखा, तो माहौल और गरमा गया। छात्रों का यह भी आरोप है कि जब उन्होंने अधिकारियों को इन गलतियों के बारे में बताया, तो वहां मौजूद अधिकारियों ने तल्ख लहजे में उनसे यह तक कह दिया कि आप झूठ बोल रहे हैं। इस मुलाकात के दौरान कई छात्राएं भी मौजूद थीं जिन्होंने अपनी परेशानियों को साझा किया। प्रतिनिधिमंडल को बताया गया कि उस समय NTA के DG मौके पर मौजूद नहीं थे, जिसके बाद उनकी बातचीत कम्युनिकेशन इंचार्ज गुप्ता से हुई। हालांकि, छात्रों द्वारा लगाए गए इन तमाम गंभीर आरोपों पर NTA की तरफ से कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया आना अभी बाकी है।

 

## तारीखों के टकराने से भविष्य दांव पर

छात्रों और शिक्षकों की प्रमुख चिंता यही है कि इंग्लिश और कॉमर्स का री-एग्जाम कराने से उनकी दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की तारीखें आपस में टकरा सकती हैं। इस बात का उदाहरण देते हुए हिमाचल प्रदेश की रहने वाली श्वेता शर्मा ने अपनी व्यक्तिगत परेशानी साझा की। उन्होंने बताया कि उन्होंने हिमाचल प्रदेश यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया हुआ है और इसके लिए उन्हें हिमाचल प्रदेश स्टेट एलिजिबिलिटी टेस्ट यानी HP SET की परीक्षा भी देनी है। शेड्यूल के मुताबिक HP SET की यह परीक्षा सितंबर के दूसरे सप्ताह में होनी तय है, जबकि दूसरी ओर यूजीसी नेट की इंग्लिश परीक्षा का री-एग्जाम 9 सितंबर को आयोजित होने की चर्चा है। श्वेता का कहना है कि यदि इन दोनों महत्वपूर्ण परीक्षाओं की तारीखें एक ही दिन पड़ गईं, तो उनका पूरा करियर और भविष्य संकट में आ जाएगा।

 

## परीक्षा के 40 दिन बाद फैसला लेने पर आपत्ति

श्वेता शर्मा ने इंग्लिश की परीक्षा को लेकर एक और बड़ा और तार्किक सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि यदि परीक्षा के दौरान कोई तकनीकी समस्या या गड़बड़ी थी, तो इस बात का पता एजेंसी को बहुत पहले चल जाना चाहिए था। उनके अनुसार, इंग्लिश की परीक्षा में तकनीकी त्रुटि की बात काफी समय पहले सामने आई थी, लेकिन इस परीक्षा को रद्द करने का फैसला इसके आयोजन के लगभग 40 दिन बाद लिया गया। छात्रों का यही कहना है कि अगर तकनीकी दिक्कत इतनी ही बड़ी थी तो उस पर तुरंत निर्णय क्यों नहीं लिया गया, और अब इतनी लंबी देरी के बाद री-एग्जाम थोपने से छात्रों का पूरा एकेडमिक कैलेंडर बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।

## इसका आप पर असर
**भारत में:** यूजीसी नेट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे देश भर के छात्रों को री-एग्जाम और परीक्षा की तारीखें आपस में टकराने की समस्या से मानसिक तनाव और अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. यूजीसी नेट के किस प्रतिनिधिमंडल ने NTA कार्यालय का दौरा किया?
इंग्लिश और कॉमर्स की परीक्षा रद्द किए जाने के विरोध में छात्रों और शिक्षकों का एक प्रतिनिधिमंडल NTA कार्यालय पहुंचा था।

### 2. छात्रों की मुख्य मांग क्या थी?
छात्रों और शिक्षकों की मुख्य मांग थी कि इंग्लिश और कॉमर्स विषयों की परीक्षा दोबारा नहीं कराई जानी चाहिए।

### 3. पॉलिटिकल साइंस की आंसर की को लेकर क्या विवाद है?
छात्रों का आरोप है कि पॉलिटिकल साइंस की आंसर की में करीब 14-15 सवाल गलत हैं और उन्हें चुनौती देने के लिए भारी शुल्क चुकाना पड़ रहा है।

### 4. श्वेता शर्मा को किस बात का डर सता रहा है?
श्वेता शर्मा को डर है कि यूजीसी नेट इंग्लिश का री-एग्जाम और हिमाचल प्रदेश का HP SET एग्जाम एक ही तारीख पर पड़ने से उनकी परीक्षा छूट सकती है।

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