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  "title": "30 करोड़ खर्च होने के बावजूद नवा रायपुर का बॉटनिकल गार्डन बन गया उजड़ी झाड़ियों का मैदान",
  "summary": "छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास नवा रायपुर में 2014 में शुरू हुए एशिया के सबसे बड़े बॉटनिकल गार्डन प्रोजेक्ट पर 30 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद आज वहां सिर्फ सूखी झाड़ियां और टूटी पगडंडियां बची हैं।",
  "content": "छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से सटे नवा रायपुर में करीब 12 साल पहले जिस जगह को एशिया का सबसे बड़ा बॉटनिकल गार्डन बनाने का दावा किया गया था, वहां आज सिर्फ सूखी झाड़ियां और उजड़े रास्ते नजर आते हैं। साल 2014 में शुरू हुए इस प्रोजेक्ट पर सरकार ने करीब 30 करोड़ रुपए खर्च किए थे, लेकिन एक दशक से ज्यादा समय बीतने के बाद भी जमीन पर कुछ खास नजर नहीं आता।\n\nक्या था प्रोजेक्ट का मकसद\nइस गार्डन को 153 हेक्टेयर इलाके में अपग्रेड करने की योजना बनाई गई थी। मकसद था छत्तीसगढ़ में पाई जाने वाली दुर्लभ और औषधीय वनस्पतियों को बचाना, वनस्पति विज्ञान से जुड़ी रिसर्च को बढ़ावा देना और छात्रों के लिए एक स्टडी सेंटर तैयार करना। योजना के मुताबिक यहां जर्मप्लाज्म बैंक, अनुसंधान केंद्र, पाम हाउस, कैक्टस हाउस और बोन्साई हाउस बनाए जाने थे। इसके अलावा तितलियों के लिए बटरफ्लाई गार्डन और जलीय पौधों को सहेजने के लिए तालाब बनाने का भी प्लान था। पर्यटकों को लुभाने के लिए वनस्पति ट्रेल और बच्चों के लिए वाटर स्पोर्ट्स की सुविधा भी प्रस्तावित थी।\n\nमौके पर हकीकत कुछ और\nलेकिन आज हालात इस दावे से बिल्कुल उलट हैं। पूरे परिसर में सिर्फ एक बोर्ड टंगा दिखता है, बाकी जगह सूखी घास, कांटेदार झाड़ियों और टूटी-फूटी पगडंडियों से भरी पड़ी है। पूरे गार्डन को कंटीले तारों से घेर दिया गया है और आम लोगों के लिए इसके दरवाजे लगभग बंद हैं। यह सिर्फ तब खुलता है जब कोई नया अधिकारी निरीक्षण के लिए वहां पहुंचता है। जलीय पौधों को बचाने के लिए बनाए गए दोनों तालाब भी आधे सूख चुके हैं। जहां वैज्ञानिक तरीके से विकसित वनस्पति उद्यान बनना था, वहां अब आम पौधों की क्यारियां तक दिखाई नहीं देतीं। रिसर्च हो, शिक्षा हो या वनस्पति संरक्षण, यहां कोई भी गतिविधि होती नजर नहीं आती।\n\nकागजों तक सिमटी योजना\nप्रोजेक्ट शुरू करते वक्त दावा किया गया था कि छत्तीसगढ़ के हर जिले में मिलने वाली वनस्पति प्रजातियों का वैज्ञानिक ढंग से संरक्षण किया जाएगा। विलुप्त होने के कगार पर पहुंच चुकी और बेहद दुर्लभ प्रजातियों को सुरक्षित रखने के लिए जर्मप्लाज्म बैंक बनाने की बात कही गई थी, लेकिन यह पूरी योजना सिर्फ कागजों पर ही रह गई।\n\nअफसरों का क्या कहना है\nप्रधान मुख्य वन संरक्षक (PCCF) अरुण पांडे ने कहा कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यह प्रोजेक्ट अचानक बीच में क्यों रुक गया। उन्होंने बताया कि अब इस बॉटनिकल गार्डन को दोबारा विकसित करने की तैयारी चल रही है और इस बार इसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मॉडल पर बनाया जाएगा। उनके मुताबिक जल्द ही एक प्री-टेंडर बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें निजी कंपनियों से यह सुझाव मांगे जाएंगे कि वे इस प्रोजेक्ट को किस तरीके से और कितने समय में पूरा कर सकती हैं। इसके बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह मामला दिखाता है कि करोड़ों रुपए के सरकारी पर्यावरण और संरक्षण प्रोजेक्ट अगर सही निगरानी के बिना चलें तो जनता के पैसे का कोई ठोस नतीजा नहीं मिलता।\n• छत्तीसगढ़ में: नवा रायपुर और रायपुर के आसपास रहने वाले लोगों को अब तक न तो कोई पर्यटन स्थल मिला, न ही छात्रों के लिए वादा किया गया स्टडी सेंटर, और स्थिति तभी बदलेगी जब PPP मॉडल के तहत नया टेंडर पूरा होगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. एशिया का सबसे बड़ा बॉटनिकल गार्डन कहां बनाया जाना था?\nछत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास नवा रायपुर में इसे बनाने की योजना थी।\n\n2. इस प्रोजेक्ट पर कितना पैसा खर्च हुआ?\nइस प्रोजेक्ट पर करीब 30 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।\n\n3. यह प्रोजेक्ट कब शुरू हुआ था?\nयह प्रोजेक्ट साल 2014 में शुरू किया गया था।\n\n4. गार्डन को कितने क्षेत्र में विकसित किया जाना था?\nइसे 153 हेक्टेयर क्षेत्र में अपग्रेड किया जाना था।\n\n5. अभी गार्डन की क्या हालत है?\nवहां सिर्फ एक बोर्ड, सूखी घास, झाड़ियां और टूटी पगडंडियां हैं, गार्डन कंटीले तारों से घिरा है और आधे सूख चुके तालाबों के अलावा कोई गतिविधि नजर नहीं आती।\n\n6. प्रोजेक्ट अचानक क्यों बंद हुआ?\nप्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे के मुताबिक उन्हें इसकी वजह की जानकारी नहीं है।\n\n7. अब गार्डन का क्या भविष्य है?\nइसे अब पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर फिर से विकसित करने की योजना बनाई जा रही है और जल्द ही प्री-टेंडर बैठक होगी, जिसमें निजी कंपनियों से सुझाव लिए जाएंगे।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-07-03",
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    "बॉटनिकल गार्डन",
    "नवा रायपुर",
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    "रायपुर वन विभाग",
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