अब छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूलों को NOC नहीं, सिर्फ सेल्फ-सर्टिफिकेशन से मिलेगी मान्यता, नाम में 'इंटरनेशनल' लगाने पर रोक छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से प्राइवेट स्कूलों की मान्यता प्रक्रिया बदल दी है, अब NOC की जगह सेल्फ-सर्टिफिकेशन से काम चलेगा, लेकिन झूठी जानकारी देने पर स्कूल पर तुरंत ताला लग जाएगा. रायपुर में शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूल खोलने वालों के लिए कागजी झंझट घटाकर सीधी जिम्मेदारी बढ़ा दी है. छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से नए स्कूलों को मान्यता देने की पूरी प्रक्रिया बदल दी है और अब स्कूल संचालकों को अनापत्ति प्रमाणपत्र यानी NOC के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे. NOC की जगह सेल्फ-सर्टिफिकेशन, झूठ पकड़ में आया तो सीधा ताला नए निर्देश के मुताबिक स्कूल चलाने वालों को सुरक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर और कानूनी शर्तों को लेकर खुद एक स्वप्रमाणन देना होगा, साथ ही एक शपथ-पत्र भी जमा करना होगा; इसी आधार पर उन्हें तुरंत मान्यता मिल जाएगी. यानी अब अलग-अलग विभागों से मंजूरी लेने में लगने वाला महीनों का समय बचेगा. लेकिन इस भरोसे का गलत फायदा उठाना स्कूल संचालकों को भारी पड़ेगा. अगर बाद में हुई जांच में पता चला कि दी गई जानकारी झूठी या भ्रामक थी, या कोई जरूरी तथ्य जानबूझकर छिपाया गया था, तो मंडल उस स्कूल की मान्यता तुरंत खत्म कर उस पर ताला लगा देगा. इसके अलावा भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ प्रबंधन पर भी कानूनी शिकंजा कसा जाएगा. आवेदन के वक्त वीडियोग्राफी अनिवार्य, परीक्षा से पहले स्कूल बीच सत्र में बंद नहीं होगा मंडल ने यह भी तय किया है कि आवेदन करते समय स्कूल भवन की पूरी वीडियोग्राफी करानी होगी और निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को यही फुटेज दिखानी होगी. मंडल का मानना है कि इस कदम से मान्यता देने की प्रक्रिया में होने वाली देरी और मनमानी की गुंजाइश खत्म होगी और पूरा सिस्टम पहले से ज्यादा पारदर्शी बनेगा. साथ ही यह भी साफ किया गया है कि एक बार मान्यता मिल जाने पर बोर्ड परीक्षाएं पूरी होने से पहले किसी भी स्कूल को शैक्षणिक सत्र के बीच में बंद नहीं किया जा सकेगा. अगर मापदंड पूरे न करने पर किसी स्कूल के खिलाफ कार्रवाई भी होती है, तो कक्षा 9वीं से 12वीं तक के छात्रों को परीक्षा दिलाने के लिए आसपास के किसी दूसरे स्कूल से जोड़ा जाएगा, ताकि उनकी पढ़ाई बीच में न रुके और परीक्षा छूटने का डर न रहे. काउंसलर रखना और लीगल लिटरेसी क्लब बनाना अब जरूरी सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों का हवाला देते हुए मंडल ने प्राइवेट स्कूलों के लिए काउंसलर नियुक्त करना और परिसर में लीगल लिटरेसी क्लब बनाना भी अनिवार्य कर दिया है. काउंसलर की जिम्मेदारी छात्रों के साथ-साथ उनके अभिभावकों में भी तनाव कम करने पर काम करने की होगी, जबकि लीगल लिटरेसी क्लब के जरिए बच्चों में उनके अधिकारों और कानूनी नियमों की समझ बढ़ाई जाएगी. नाम में 'नेशनल', 'इंटरनेशनल' जैसे शब्द जोड़ना अब भारी पड़ेगा नामकरण को लेकर भी मंडल ने खासी सख्ती दिखाई है. इसके तहत नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय, एकलव्य, प्रयास, केंद्रीय, राष्ट्रीय, पीएम श्री, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय या स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय जैसे भ्रामक शब्दों का इस्तेमाल अब कोई भी प्राइवेट स्कूल अपने नाम में नहीं कर पाएगा. अगर किसी स्कूल के आवेदन में ऐसा कोई शब्द पाया गया, तो उसकी मान्यता की अर्जी बिना किसी दूसरी सुनवाई के सीधे खारिज कर दी जाएगी. इसका आप पर असर यह बदलाव सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ में बच्चों को स्कूल भेजने वाले अभिभावकों और नया स्कूल खोलने की योजना बना रहे लोगों को प्रभावित करेगा. • भारत में: अगर यह सेल्फ-सर्टिफिकेशन मॉडल कामयाब रहा, तो दूसरे राज्यों के शिक्षा बोर्ड भी NOC जैसी लंबी मंजूरी प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए इसी तरह के कदम उठा सकते हैं, जिससे देश भर में नए प्राइवेट स्कूल खुलने की रफ्तार बढ़ सकती है. • छत्तीसगढ़ में: जो लोग 2026-27 सत्र से नया स्कूल खोलना चाहते हैं, उन्हें अब NOC के लिए अलग से आवेदन नहीं करना होगा, लेकिन वीडियोग्राफी, शपथ-पत्र और स्वप्रमाणन जैसे कागजात पहले से तैयार रखने होंगे. • अभिभावकों के लिए: बच्चे का दाखिला कराने से पहले स्कूल के नाम पर गौर करें, अगर नाम में नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय जैसे शब्द अब भी दिखें तो यह चेतावनी का संकेत है, ऐसे में सीधे मंडल से स्कूल की मान्यता की स्थिति जांच लें. • छात्रों के लिए: अगर किसी स्कूल की मान्यता झूठी जानकारी के चलते रद्द होती है, तो कक्षा 9वीं से 12वीं के छात्रों को पास के स्कूल से जोड़ा जाएगा, यानी परीक्षा छूटने की चिंता नहीं करनी होगी. • स्कूल संचालकों के लिए: सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी जानकारी में जरा सी भी गड़बड़ी अब सीधे भारी जुर्माने और मान्यता रद्द होने का कारण बन सकती है, इसलिए स्वप्रमाणन में सतर्कता बेहद जरूरी होगी. ऐसा क्यों हुआ छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल ने यह बदलाव आगामी शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए मान्यता प्रक्रिया को तेज और पारदर्शी बनाने के मकसद से किया है. • पुरानी प्रक्रिया में देरी: NOC लेने की प्रक्रिया में कई विभागों से मंजूरी लेनी पड़ती थी, जिससे मान्यता मिलने में लंबा समय लगता था, इसीलिए मंडल ने इसे सेल्फ-सर्टिफिकेशन से बदल दिया. • कोर्ट के निर्देश: काउंसलर और लीगल लिटरेसी क्लब की अनिवार्यता सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करने के लिए लाई गई है. • नाम को लेकर भ्रम: मंडल ने नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय जैसे शब्दों के इस्तेमाल पर इसलिए रोक लगाई है क्योंकि ऐसे नाम स्कूल को लेकर भ्रम पैदा करते हैं. • आगे क्या: मंडल की मंशा है कि जवाबदेही स्कूल संचालक पर डालकर मान्यता प्रक्रिया को तेज किया जाए, लेकिन झूठी जानकारी मिलने पर मान्यता रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई के जरिए दुरुपयोग रोका जाए. सवाल-जवाब 1. क्या अब छत्तीसगढ़ में प्राइवेट स्कूल खोलने के लिए NOC लेना जरूरी है? नहीं, नए नियम के तहत अब NOC की जरूरत नहीं है, स्कूल को सेल्फ-सर्टिफिकेशन और शपथ-पत्र देना होगा. 2. नए नियम कब से लागू होंगे? ये नियम शैक्षणिक सत्र 2026-27 से लागू होंगे. 3. झूठी जानकारी देने पर स्कूल के साथ क्या होगा? जांच में जानकारी झूठी पाए जाने पर स्कूल की मान्यता तुरंत रद्द कर उसे बंद कर दिया जाएगा और भारी जुर्माने के साथ प्रबंधन पर कार्रवाई होगी. 4. अगर किसी स्कूल की मान्यता रद्द होती है तो 9वीं से 12वीं के छात्रों का क्या होगा? उन्हें परीक्षा दिलाने के लिए आसपास के किसी दूसरे स्कूल से जोड़ा जाएगा ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो. 5. स्कूलों के नाम में कौन से शब्द अब इस्तेमाल नहीं हो सकते? नेशनल, इंटरनेशनल, नवोदय, एकलव्य, प्रयास, केंद्रीय, राष्ट्रीय, पीएम श्री, स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय और स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट विद्यालय जैसे शब्द अब स्कूल के नाम में इस्तेमाल नहीं किए जा सकेंगे. 6. स्कूलों के लिए वीडियोग्राफी अनिवार्य क्यों की गई है? आवेदन के वक्त स्कूल भवन की वीडियोग्राफी कराकर निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को दिखाना अनिवार्य किया गया है ताकि मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता आए. 7. प्राइवेट स्कूलों के लिए काउंसलर और लीगल लिटरेसी क्लब क्यों जरूरी किए गए हैं? सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करने के लिए तनाव प्रबंधन हेतु काउंसलर और कानूनी जागरूकता के लिए लीगल लिटरेसी क्लब अनिवार्य किए गए हैं. https://trendkia.com/chhattisgarh/aba-chhattisgarh-men-praiveta-skulon-ko-noc-nahin-sirpha-selpha-sartiphikeshana-se-milegi-manyata-nama-men-intaraneshanala-lagane--29427 TrendKia — Har trend, sabse pehle.