# अक्टूबर में स्ट्रॉबेरी रोपाई से सरगुजा के किसान कमा सकते हैं ₹5 लाख, विंटर डाउन किस्म से 45 दिनों में तैयार होगी फसल

> छत्तीसगढ़ के सरगुजा स्थित सिलफिली में किसान बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे हैं। 1 से 5 अक्टूबर के बीच विंटर डाउन किस्म की रोपाई कर किसान प्रति एकड़ करीब ₹5 लाख की सकल उपज हासिल कर सकते हैं।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/aktubara-men-strawberry-ropai-se-surguja-ke-kisana-kama-sakate-hain-5-lakha-winter-dawn-kisma-se-45-dinon-men-taiyara-hogi-phasala-42796 · **Language:** Hindi
**Tags:** स्ट्रॉबेरी की खेती, सरगुजा, सिलफिली, विंटर डाउन, किसान कमाई, बागवानी खेती

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में स्थित सिलफिली क्षेत्र में किसान बड़े पैमाने पर स्ट्रॉबेरी की व्यावसायिक खेती की ओर रुख कर रहे हैं। कृषि विशेषज्ञ राकेश राजवाड़े के अनुसार, इस नकदी फसल की रोपाई के लिए मौजूदा समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। सितंबर का अंतिम सप्ताह बीतने और अक्टूबर की शुरुआत होने के साथ ही खेतों में काम शुरू करने की जरूरत होती है। यदि उत्पादक 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर के बीच पौधे लगा देते हैं, तो रोपाई के लगभग 45 दिनों के भीतर शुरुआती पैदावार आनी शुरू हो जाती है।

## प्रति एकड़ पौधे, उपज और कमाई का गणित
एक एकड़ खेत में लगभग 5,000 स्ट्रॉबेरी के पौधे रोपे जा सकते हैं। सामान्य परिस्थितियों में प्रति पौधे से औसतन आधा किलो (500 ग्राम) फल मिल जाता है, जिससे कुल पैदावार लगभग 2,500 किलोग्राम तक पहुंच जाती है। बेहतर पोषण और अनुकूल मौसम मिलने पर एक पौधा 500 ग्राम से 750 ग्राम तक भी उत्पादन दे सकता है। बिक्री के लिहाज से शुरुआती सीजन में बाजार में इसके दाम काफी ऊंचे रहते हैं। यदि किसान को औसतन ₹200 प्रति किलो का भाव भी मिलता है, तो 2,500 किलोग्राम फल से करीब ₹5 लाख की सकल बिक्री हासिल की जा सकती है। हालांकि वास्तविक आमदनी बाजार के उतार-चढ़ाव, फल की गुणवत्ता और कुल उत्पादन पर निर्भर करती है।

## लागत और शुद्ध मुनाफे का आकलन
स्ट्रॉबेरी की आधुनिक खेती में पौधे की खरीद, प्लास्टिक मल्चिंग, खाद, कीटनाशक और सिंचाई के प्रबंध पर खर्च आता है। राकेश राजवाड़े के आकलन के अनुसार, प्रति एकड़ कुल कृषि लागत लगभग ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक बैठती है। इन सभी शुरुआती और प्रबंधकीय खर्चों को निकालने के बाद भी किसान को एक सीजन में आकर्षक शुद्ध बचत मिलने की पूरी गुंजाइश रहती है।

## खेत की तैयारी और मेड़ बनाने का तरीका
इस फसल के लिए जमीन तैयार करते समय मेड़ (बेड) बनाना और प्लास्टिक मल्चिंग बिछाना अनिवार्य तकनीक है। विशेषज्ञों के अनुसार, एक पौधे से दूसरे पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर रखी जानी चाहिए। वहीं दो समानांतर मेड़ों के बीच 90 से 120 सेंटीमीटर का फासला रखना सही रहता है, जिससे पौधों को पर्याप्त धूप और हवा मिलती रहे तथा काम करने में सहूलियत हो।

## खाद प्रबंधन और विंटर डाउन किस्म की उपयोगिता
फसल की गुणवत्ता मिट्टी के पोषण स्तर पर निर्भर करती है। खेत की आवश्यकता के अनुसार सड़ी गोबर की खाद, केंचुआ खाद (वर्मी कंपोस्ट), बोन मील और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व डाले जाने चाहिए। इसके साथ ही सामान्य रासायनिक संतुलन के लिए एनपीके उर्वरकों का संतुलित प्रबंधन किया जाता है। सरगुजा की स्थानीय जलवायु और ठंड को देखते हुए विंटर डाउन किस्म सबसे उपयुक्त और सफल साबित हुई है। सिलफिली इलाके में इसी किस्म की बदौलत किसान बड़े स्तर पर उत्पादन ले रहे हैं।

## तुड़ाई का चक्र और बाजार प्रबंधन
अक्टूबर के पहले हफ्ते में रोपे गए पौधों में नवंबर के दूसरे पखवाड़े अथवा दिसंबर के शुरुआती सप्ताह तक फल पकने लगते हैं। अनुकूल मौसम में यह उत्पादन मार्च-अप्रैल तक लगातार जारी रहता है। पके फलों को एक दिन के अंतराल पर तोड़ना जरूरी होता है, क्योंकि फल नाजुक होते हैं। समय पर तुड़ाई और तुरंत नजदीकी मंडियों या व्यापारियों तक पहुंचाने का लॉजिस्टिक्स प्रबंध किसानों को पहले से ही तय कर लेना चाहिए।

## इसका आप पर असर
स्ट्रॉबेरी जैसी नकदी फसल परंपरागत खेती के मुकाबले कम समय में कई गुना अधिक मुनाफा देकर ग्रामीण आय को तेजी से बढ़ा सकती है।

- **भारत में:** बागवानी फसलों में विविधीकरण करने वाले किसान सीमित जोत पर भी लाखों रुपये की कमाई कर सकते हैं। 45 दिनों में शुरुआती उत्पादन देने वाली किस्में रबी सीजन में किसानों के नकदी प्रवाह को मजबूत बनाती हैं।
- **सरगुजा में:** सिलफिली और आसपास के किसान 1 से 5 अक्टूबर के बीच विंटर डाउन किस्म की रोपाई कर ₹5 लाख तक की सकल बिक्री हासिल कर सकते हैं। ₹1 से ₹1.5 लाख की शुरुआती लागत के बाद स्थानीय उत्पादकों के पास शुद्ध मुनाफा कमाने का बड़ा अवसर उपलब्ध है।
- **खर्च और तैयारी:** किसानों को प्लास्टिक मल्चिंग, ड्रिप और नर्सरी पौधों की अग्रिम व्यवस्था समय पर सुनिश्चित करनी होगी। सही दूरी (30-45 सेमी पौधे और 90-120 सेमी मेड़) पर रोपाई करने से नुकसान घटता है और फसल स्वस्थ रहती है।
- **बाजार और लॉजिस्टिक्स:** एक दिन छोड़कर होने वाली तुड़ाई के चलते किसानों को स्थानीय मंडियों और खरीदारों से पहले ही संपर्क साधना होगा। ताजा फल समय पर बाजार पहुंचने पर ही ₹200 प्रति किलो जैसे प्रीमियम दाम मिल पाते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
सरगुजा के सिलफिली में बड़े स्तर पर स्ट्रॉबेरी की खेती और इसके सफल अर्थशास्त्र के पीछे विशिष्ट मौसमी कारक, आधुनिक तकनीक और सही किस्म का चयन प्रमुख वजह है।

- **सटीक रोपाई समय:** सितंबर के अंत और अक्टूबर की शुरुआत में मौसम में आने वाला बदलाव पौधों की शुरुआती स्थापना के लिए अत्यंत अनुकूल होता है। 1 से 5 अक्टूबर के बीच रोपाई करने से पौधों को ठंड की शुरुआत में ही फलने-फूलने का सटीक चक्र मिल जाता है।
- **सफल किस्म का चयन:** सरगुजा की क्षेत्रीय जलवायु के लिए विंटर डाउन किस्म विशेष रूप से अनुकूल सिद्ध हुई है। यह किस्म प्रतिकूल तापमान में भी लगातार फल देती है और फल की गुणवत्ता बाजार योग्य बनी रहती है।
- **वैज्ञानिक प्रबंधन तकनीक:** प्लास्टिक मल्चिंग और उठी हुई क्यारियों (मेड़) का प्रयोग नमी बनाए रखने, खरपतवार रोकने और फलों को सड़ने से बचाने में मददगार बनता है। साथ ही वर्मी कंपोस्ट, गोबर खाद और एनपीके का समन्वित उपयोग प्रति पौधा 500 से 750 ग्राम उपज सुनिश्चित करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाने का सबसे उपयुक्त समय कौन सा है?
कृषि विशेषज्ञ के अनुसार 1 अक्टूबर से 5 अक्टूबर के बीच का समय स्ट्रॉबेरी की रोपाई के लिए सबसे बेहतर माना गया है।

### 2. रोपाई के कितने दिनों बाद फसल की तुड़ाई शुरू हो जाती है?
अक्टूबर के पहले हफ्ते में रोपाई करने पर करीब 45 दिनों में उत्पादन शुरू हो जाता है और नवंबर अंत से दिसंबर शुरुआत तक फल मिलने लगते हैं।

### 3. एक एकड़ में कितने स्ट्रॉबेरी के पौधे लगाए जा सकते हैं?
एक एकड़ खेत में करीब 5,000 स्ट्रॉबेरी के पौधे रोपे जा सकते हैं।

### 4. प्रति एकड़ कुल उत्पादन कितना होने का अनुमान है?
औसतन प्रति पौधा 500 ग्राम से 750 ग्राम उत्पादन के हिसाब से कुल 2,500 किलोग्राम तक स्ट्रॉबेरी पैदा हो सकती है।

### 5. स्ट्रॉबेरी की खेती से किसान को कितनी सकल कमाई हो सकती है?
यदि बाजार में ₹200 प्रति किलो का भाव मिले, तो 2,500 किलो उत्पादन से लगभग ₹5 लाख की सकल बिक्री हो सकती है।

### 6. प्रति एकड़ खेती में कितनी लागत आने का अनुमान है?
पौधे, प्लास्टिक मल्चिंग, खाद, सिंचाई और अन्य कृषि व्यय मिलाकर करीब ₹1 लाख से ₹1.5 लाख तक खर्च आता है।

### 7. पौधे और मेड़ के बीच कितनी दूरी रखनी चाहिए?
पौधे से पौधे की दूरी 30 से 45 सेंटीमीटर और मेड़ से मेड़ की दूरी 90 से 120 सेंटीमीटर रखनी चाहिए।

### 8. सरगुजा क्षेत्र के लिए कौन सी किस्म सबसे सफल मानी गई है?
सरगुजा के मौसम के अनुसार विंटर डाउन किस्म का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा है।

## प्रेरणा और सबक
सरगुजा के सिलफिली क्षेत्र के किसानों ने लीक से हटकर नकदी बागवानी अपनाकर यह साबित किया है कि सही तकनीक और समय के प्रबंधन से खेती को अत्यंत लाभकारी व्यवसाय बनाया जा सकता है।

- **पारंपरिक फसलों से आगे सोचें:** पारंपरिक फसलों के स्थान पर उच्च मूल्य वाली बागवानी फसलें अपनाकर किसान अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं। सीमित रकबे में भी आधुनिक फसलों के जरिए आर्थिक आत्मनिर्भरता हासिल की जा सकती है।
- **समयबद्ध योजना का महत्व:** कृषि में समय की पाबंदी ही मुनाफे की कुंजी है, जैसा कि 1 से 5 अक्टूबर के रोपाई चक्र से स्पष्ट होता है। सही समय पर रोपाई से बाजार में अगेती उपज पहुंचती है, जिससे उच्चतम दाम हासिल होते हैं।
- **आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाना:** प्लास्टिक मल्चिंग, संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन और अनुकूलित किस्मों (विंटर डाउन) का उपयोग उत्पादकता को दोगुना कर सकता है। वैज्ञानिक तकनीक में किया गया शुरुआती निवेश अंततः भारी मुनाफा लौटाता है।

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