अंबिकापुर के विवेक गोस्वामी ने कॉर्पोरेट करियर छोड़ शुरू की बहुफसली खेती, 8 एकड़ जमीन पर उगा रहे 13 तरह की फसलें एमकॉम की पढ़ाई और इंदौर में टेलीपरफॉर्मेंस जैसी बहुराष्ट्रीय कंपनी में काम करने के बाद विवेक गोस्वामी ने किसानी की राह चुनी। अब वे सोलर सिंचाई और ग्राफ्टिंग तकनीक की मदद से 8 एकड़ में दर्जनों फसलें उगाकर मुनाफा कमा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग स्थित अंबिकापुर के रहने वाले विवेक गोस्वामी ने यह साबित कर दिया है कि बेहतर योजना और आधुनिक सोच से खेती को एक बेहतरीन आजीविका बनाया जा सकता है। उच्च शिक्षा हासिल करने के बाद बड़े शहरों की चकाचौंध और निजी कंपनियों की नौकरी को छोड़कर अपने गृह क्षेत्र में लौटना हर किसी के लिए आसान नहीं होता, लेकिन विवेक ने पारंपरिक धारणाओं को तोड़ते हुए मिट्टी से जुड़ने का फैसला किया। आज वे अपनी आठ एकड़ पैतृक जमीन पर एक या दो नहीं, बल्कि 12 से 13 किस्म की फसलों और सब्जियों की सफल पैदावार कर रहे हैं। लाखों रुपये की लागत और वैज्ञानिक पद्धतियों के सहारे तैयार उनका यह कृषि फार्म क्षेत्र के अन्य काश्तकारों के लिए भी प्रेरणा का केंद्र बन चुका है। कॉर्पोरेट की व्यस्त जिंदगी से मिट्टी की सौंधी खुशबू तक का सफर विवेक गोस्वामी का शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाणिज्य विषय से जुड़ा रहा है। उन्होंने एमकॉम तक की उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद मध्य प्रदेश के वाणिज्यिक शहर इंदौर का रुख किया था। वहां उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर की जानी-मानी बीपीओ कंपनी टेलीपरफॉर्मेंस में लगभग दो वर्षों तक निजी नौकरी की। कॉर्पोरेट माहौल में अनुभव लेने के उपरांत उन्होंने खुद का उद्यम शुरू करने की योजना बनाई और इंदौर में ही सूचना प्रौद्योगिकी से जुड़ा कंप्यूटर कारोबार स्थापित किया। अगले 15 वर्षों तक वे कंप्यूटर व्यवसाय के संचालन में जुटे रहे। लंबे समय तक व्यापारिक गतिविधियों में व्यस्त रहने के बावजूद उनका मन गांव और हरियाली की तरफ आकर्षित होता रहा। इस दौरान वे अन्य प्रगतिशील किसानों के अनुभवों को देखते और समझते रहे। शुरुआत में उन्होंने अपने स्तर पर टाऊ, मड़िया और धान जैसी पारंपरिक फसलों को उगाकर देखा। धीरे-धीरे कृषि की बारीकियों ने उन्हें इस कदर आकर्षित किया कि उन्होंने व्यापार को समेटकर पूरी तरह कृषि कर्म को ही अपना मुख्य पेशा बनाने का पक्का इरादा कर लिया। आठ एकड़ जमीन पर बहुस्तरीय फसलों का सटीक प्रबंधन विवेक के खेत में कदम रखते ही फसलों का अनूठा तालमेल दिखाई देता है। उन्होंने अपने आठ एकड़ क्षेत्र को अलग-अलग जरूरतों और पौधों की प्रकृति के अनुसार बांटा हुआ है। दो एकड़ हिस्से में उन्होंने बैंगन की खेती की है, जबकि इतने ही रकबे यानी दो एकड़ में धान की फसल लहलहा रही है। इसके साथ ही एक एकड़ में सेमी की फली और एक एकड़ भूमि पर हरी मिर्च लगाई गई है। बाकी बचे दो एकड़ के रकबे में मौसमी सब्जियों और दीर्घकालिक फलों के बाग लगाए गए हैं। इसमें मूली, पत्तागोभी, पालक भाजी और विभिन्न प्रकार के पत्तेदार साग शामिल हैं। खेत के कुछ हिस्सों में कटहल और अमरूद के फलदार पेड़ भी रोपे गए हैं, जो भविष्य में नियमित फल उत्पादन देने लगेंगे। विवेक ने सभी फसलों की बुवाई एक साथ करने की जगह उनके जीवन चक्र और बाजार की मांग के आधार पर चरणबद्ध तरीके से की है। मिर्च और बैंगन की रोपाई को लगभग चार महीने हो चुके हैं, जबकि सेमी की लताएं करीब डेढ़ से दो महीने पुरानी हैं। पत्तागोभी, पालक और मूली जैसी जल्दी तैयार होने वाली फसलों को हाल ही में लगाया गया है ताकि बाजार में लगातार उपज जाती रहे। जोखिम कम करने के लिए बहुफसली मॉडल का चयन ग्रामीण अंचल में ज्यादातर किसान केवल एक मुख्य फसल की खेती करते हैं, जिससे मौसम की मार या कीटों के प्रकोप की स्थिति में पूरी पूंजी डूबने का खतरा रहता है। विवेक गोस्वामी ने इस खतरे से बचने के लिए विविधता पर जोर दिया। उनका तर्क है कि अनिश्चित मौसम, अतिवृष्टि या बाजार में किसी एक जिंस के भाव गिरने से किसान को भारी आर्थिक आघात लग सकता है। जब एक ही भूखंड पर कई तरह की फसलें एक साथ उगाई जाती हैं, तो उनमें से किसी एक में नुकसान होने पर भी दूसरी फसलें उस घाटे को संतुलित कर देती हैं। यदि किसी सप्ताह हरी मिर्च के दाम गिर जाएं या कीटों से प्रभाव पड़े, तो बैंगन अथवा सेमी से होने वाली आवक उस नुकसान की भरपाई कर देती है। इससे किसान की मूल लागत सुरक्षित रहती है और साल भर नकदी प्रवाह बना रहता है। सौर ऊर्जा से दिन में सिंचाई और लागत में कटौती पारंपरिक खेती में बिजली कटौती और डीजल इंजन पर होने वाला खर्च किसानों की बचत का एक बड़ा हिस्सा खा जाता है। इस समस्या से पार पाने के लिए विवेक ने आधुनिक हरित ऊर्जा का सहारा लिया। उन्होंने अपने पूरे आठ एकड़ प्रक्षेत्र की सिंचाई के लिए सोलर पैनल और सौर ऊर्जा संचालित पंप की स्थापना की है। दिन के समय सूर्य की रोशनी से चलने वाला यह सोलर पंप बिना किसी अतिरिक्त ईंधन खर्च के खेतों तक निर्बाध पानी पहुंचाता है। इससे न केवल पर्यावरण की सुरक्षा होती है, बल्कि मासिक बिजली बिल और डीजल के भारी खर्च से भी पूरी तरह मुक्ति मिल जाती है। सौर ऊर्जा आधारित इस व्यवस्था से सिंचाई का समय तय करना और फसलों को आवश्यकतानुसार पानी देना बेहद सहज हो गया है। कलम बांधने की तकनीक और आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियां विवेक गोस्वामी केवल पारंपरिक तरीकों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने पैदावार बढ़ाने और पौधों को रोगों से बचाने के लिए कलम विधि यानी ग्राफ्टिंग तकनीक को भी अपनाया। उनके खेत में लगे कई बैंगन के पौधे कलम बांधकर तैयार किए गए हैं। इसी तरह उन्होंने अमरूद और कटहल के लिए भी ग्राफ्टेड पौध का उपयोग किया है, जिससे पौधे तेजी से बढ़ते हैं और जल्दी फल देने में सक्षम होते हैं। खेत में सामान्य मिर्च की पौध के साथ-साथ ग्राफ्टेड मिर्च के पौधे भी लगाए गए हैं, ताकि दोनों की पैदावार और रोग प्रतिरोधक क्षमता का प्रत्यक्ष मूल्यांकन किया जा सके। विवेक का यह नवाचार साबित करता है कि पढ़े-लिखे युवाओं द्वारा खेती को तकनीक, प्रबंधन और बाजार की समझ के साथ जोड़ने पर यह घाटे का सौदा नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और सम्मानजनक आजीविका का जरिया बन सकती है। इसका आप पर असर विवेक गोस्वामी का यह सफल कृषि मॉडल किसानों और ग्रामीण उद्यमियों के लिए आय सुरक्षा और आधुनिक तकनीकों को अपनाने का व्यावहारिक रास्ता दिखाता है। • भारत में: देश भर के किसानों के लिए बहुफसली खेती एकल फसल की विफलता और बाजार भाव में गिरावट से बचने का सबसे प्रभावी साधन साबित हो सकती है। अलग-अलग समय पर तैयार होने वाली फसलें लगाने से साल भर नकदी बनी रहती है और बिचौलियों पर निर्भरता घटती है। • छत्तीसगढ़ और सरगुजा में: अंबिकापुर और आसपास के काश्तकार सौर ऊर्जा आधारित सोलर पंप अपनाकर बिजली बिल और डीजल के महंगे खर्च से मुक्ति पा सकते हैं। राज्य की जलवायु में ग्राफ्टेड बैंगन, अमरूद और मिर्च की खेती करने से कम जमीन में भी कई गुना अधिक उपज ली जा सकती है। • लागत नियंत्रण: दिन के समय सौर ऊर्जा से सिंचाई करने से परिचालन व्यय में भारी कमी आती है। किसान अपने बचे हुए धन को उन्नत बीजों, जैविक खाद और पौध संरक्षण में लगाकर मुनाफा बढ़ा सकते हैं। • पूंजी सुरक्षा: कई तरह की सब्जियां एक साथ उगाने से कीट प्रकोप या बेमौसम बारिश की स्थिति में पूरी लागत डूबने का जोखिम खत्म हो जाता है। एक फसल में नुकसान होने पर दूसरी फसल उस घाटे की पूरी भरपाई कर देती है। ऐसा क्यों हुआ विवेक गोस्वामी ने पारंपरिक एकल फसल खेती के खतरों और भारी बिजली खर्चों से निपटने के लिए बहुफसली प्रणाली और सौर ऊर्जा का रुख किया। • एकल फसल का आर्थिक जोखिम: मौसम के उतार-चढ़ाव और कीटों के प्रकोप से केवल एक फसल पर निर्भर रहने वाले किसानों की पूरी पूंजी डूबने का डर रहता है। इस गंभीर जोखिम को समाप्त करने के लिए विवेक ने आठ एकड़ जमीन पर 12 से 13 तरह की फसलों को चरणबद्ध तरीके से लगाया। • कॉर्पोरेट अनुभव से प्रबंधन की सीख: इंदौर में टेलीपरफॉर्मेंस कंपनी में दो साल की नौकरी और 15 साल के कंप्यूटर व्यापार ने उन्हें जोखिम प्रबंधन और निवेश सुरक्षा का महत्व सिखाया। इसी व्यावसायिक सोच को उन्होंने अपनी पैतृक जमीन पर लागू किया। • सिंचाई की लागत और निर्भरता: ग्रामीण इलाकों में बिजली की अनियमित आपूर्ति और डीजल पंपों का बढ़ता खर्च खेती की लागत बढ़ा देता है। विवेक ने इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में सोलर पैनल और पंप का विकल्प चुना, जिससे दिन में मुफ्त सिंचाई संभव हुई। • उत्पादकता बढ़ाने की जरूरत: साधारण पौधों की तुलना में कलम बांधकर तैयार किए गए ग्राफ्टेड पौधे अधिक रोग प्रतिरोधी होते हैं और जल्दी पैदावार देते हैं। आधुनिक बागवानी की इसी तकनीक ने उन्हें अमरूद, कटहल और बैंगन में ग्राफ्टिंग अपनाने के लिए प्रेरित किया। सवाल-जवाब 1. विवेक गोस्वामी कौन हैं और वे कहां खेती कर रहे हैं? विवेक गोस्वामी एमकॉम डिग्री धारक हैं, जो इंदौर में नौकरी और कारोबार छोड़कर छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर में अपने आठ एकड़ खेत में आधुनिक बहुफसली खेती कर रहे हैं। 2. खेती शुरू करने से पहले विवेक क्या काम करते थे? उन्होंने इंदौर में बहुराष्ट्रीय कंपनी टेलीपरफॉर्मेंस में लगभग दो साल नौकरी की थी और उसके बाद करीब 15 वर्षों तक कंप्यूटर व्यवसाय का संचालन किया। 3. उनके आठ एकड़ खेत में कौन-कौन सी मुख्य फसलें लगी हैं? उनके खेत में दो एकड़ में बैंगन, दो एकड़ में धान, एक एकड़ में सेमी और एक एकड़ में मिर्च लगी है, जबकि बाकी भूमि पर मूली, पत्तागोभी, पालक और फलदार कटहल व अमरूद के पौधे हैं। 4. विवेक गोस्वामी ने बहुफसली खेती का मॉडल क्यों चुना? मौसम की अनिश्चितता और बाजार भाव के उतार-चढ़ाव से होने वाले नुकसान से बचने के लिए उन्होंने यह मॉडल चुना, ताकि एक फसल के घाटे की भरपाई दूसरी फसल से हो सके। 5. खेत में सिंचाई के लिए किस ऊर्जा प्रणाली का उपयोग किया जा रहा है? सिंचाई की जरूरतों को पूरा करने के लिए उन्होंने सोलर पैनल और सौर ऊर्जा चालित सोलर पंप लगाया है, जिससे दिन के समय बिना बिजली बिल या डीजल खर्च के सिंचाई होती है। 6. उन्होंने पौधों की गुणवत्ता सुधारने के लिए कौन सी तकनीक अपनाई है? विवेक ने बैंगन, अमरूद, कटहल और कुछ मिर्च के पौधों के लिए कलम विधि यानी ग्राफ्टिंग तकनीक का उपयोग किया है, जिससे रोग प्रतिरोधक क्षमता और पैदावार बढ़ती है। प्रेरणा और सबक विवेक गोस्वामी का यह सफर उन सभी युवाओं के लिए एक मार्गदर्शक है जो कॉर्पोरेट जीवन की सीमाओं से बाहर निकलकर अपनी जमीन पर कुछ नया करना चाहते हैं। • कैरियर में बदलाव से न डरें: उच्च शिक्षा और 17 साल के शहरी अनुभव के बाद भी खेती में नई शुरुआत की जा सकती है, बशर्ते आपके पास सीखने का जज्बा हो। • सारे अंडे एक टोकरी में न रखें: व्यापार की तरह खेती में भी विविधीकरण सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है, जिससे एक असफलता पूरे व्यवसाय को प्रभावित नहीं कर पाती। • आधुनिक तकनीक को अपनाएं: केवल पुरानी लकीर पर चलने के बजाय सौर ऊर्जा और ग्राफ्टिंग जैसी वैज्ञानिक विधियों का उपयोग करके कम लागत में बेहतर परिणाम पाए जा सकते हैं। • योजनाबद्ध प्रबंधन: सभी फसलों को एक साथ बोने के बजाय बाजार की मांग और कटाई के समय के अनुसार चरणबद्ध रोपाई करना नियमित आय का मुख्य आधार है। https://trendkia.com/chhattisgarh/ambikapur-ke-vivek-goswami-ne-korporeta-kariyara-chhora-shuru-ki-bahuphasali-kheti-8-ekara-jamina-para-uga-rahe-13-taraha-ki-phasa-50780 TrendKia — Har trend, sabse pehle.