अंबिकापुर की अनामिका चौबे का नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता के लिए चयन छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की प्रतिभावान खिलाड़ी अनामिका चौबे का चयन पुणे में होने वाली यूथ नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। रायपुर के ट्रायल में 65 खिलाड़ियों को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से ताल्लुक रखने वाली युवा प्रतिभाओं ने एक बार फिर अपनी खेलकूद क्षमता का लोहा मनवाया है। इसी कड़ी में अंबिकापुर की रहने वाली बास्केटबॉल खिलाड़ी अनामिका चौबे ने राष्ट्रीय स्तर पर अपनी जगह पक्की कर ली है। पुणे में आयोजित होने वाले आगामी मुकाबले के लिए वह पूरी तरह से तैयार हैं और मैदान पर अपना दमखम दिखाने के लिए बेताब हैं। पिछले चार वर्षों से लगातार अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में पसीना बहाते हुए उन्होंने यह मुकाम हासिल किया है। इससे पहले भी राज्य स्तर पर आयोजित कई प्रतियोगिताओं में उन्होंने हिस्सा लेकर पदक अपने नाम किए हैं, लेकिन रायपुर में संपन्न हुई चयन प्रक्रिया उनके करियर का एक बेहद खास मोड़ साबित हुई है। रायपुर के कड़े ट्रायल में मिली सफलता पुणे में होने वाली यूथ नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता के लिए रायपुर में एक कठिन चयन प्रक्रिया आयोजित की गई थी। इस ट्रायल में छत्तीसगढ़ भर से करीब 65 प्रतिभाशाली खिलाड़ियों ने अपनी किस्मत आजमाई थी। इन सभी खिलाड़ियों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली, जिनमें से बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले सिर्फ 12 खिलाड़ियों का ही चयन फाइनल टीम के लिए किया गया। इस चुनिंदा सूची में अनामिका चौबे का नाम भी शामिल होना उनके कड़े अभ्यास और लगन को दर्शाता है। इस चयन के बाद से उनका आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है और वह राष्ट्रीय मंच पर अपना सर्वश्रेष्ठ देने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। प्रतियोगिताओं का शानदार सफर और बढ़ता आत्मविश्वास अनामिका का खेल का सफर अब तक काफी प्रेरणादायक रहा है। वह अपने खेल करियर में अब तक दो राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं, दो ओपन प्रतियोगिताओं और दो स्कूल स्तरीय टूर्नामेंट्स में शिरकत कर चुकी हैं। स्कूल के दिनों की प्रतियोगिताओं में उन्होंने शानदार प्रदर्शन करते हुए एक बार स्वर्ण पदक और एक बार कांस्य पदक अपने नाम किया था। इसके अलावा राजनांदगांव में आयोजित नेशनल प्रतियोगिताओं में भाग लेना उनके लिए एक बहुत बड़ा अनुभव रहा। उन्होंने साझा किया कि शुरुआती दिनों में जब वह अन्य खिलाड़ियों के बीच अकेले जाती थीं, तो उन्हें थोड़ीि हिचकिचाहट और डर महसूस होता था, लेकिन समय के साथ खेल के अनुभव ने उनके भीतर का डर पूरी तरह खत्म कर दिया और उनका आत्मविश्वास लगातार मजबूत होता चला गया। खेल और शिक्षा के बीच बेहतरीन संतुलन मैदान पर शानदार ड्रिबलिंग और शूटिंग दिखाने वाली अनामिका पढ़ाई में भी पीछे नहीं हैं। वह केदारपुर स्कूल में अपनी शिक्षा ग्रहण कर रही हैं और अपनी पढ़ाई तथा खेल के बीच एक बहुत ही बेहतरीन संतुलन बनाकर चल रही हैं। स्कूल की किताबों के साथ तालमेल बिठाते हुए वह नियमित रूप से अंबिकापुर के बास्केटबॉल ग्राउंड पर पहुंचकर अभ्यास करती हैं। उनके लिए खेल सिर्फ समय बिताने का जरिया नहीं है, बल्कि भविष्य में एक मजबूत पहचान बनाने और आगे बढ़ने का मुख्य मार्ग है। उनकी यह प्रतिबद्धता दिखाती है कि अगर लगन सच्ची हो, तो शिक्षा और खेल दोनों को एक साथ बेहतरीन तरीके से संभाला जा सकता है। कोच के मार्गदर्शन से संवर रहा खेल किसी भी खिलाड़ी की सफलता के पीछे उसके गुरु का बहुत बड़ा हाथ होता है। अनामिका अपनी इस सफलता का श्रेय अपने कोच राजेश प्रताप सिंह के मार्गदर्शन को देती हैं। उन्होंने बताया कि कोच राजेश प्रताप सिंह खिलाड़ियों को बहुत ही बारीकी से प्रशिक्षित करते हैं और खेल की हर छोटी-बड़ी तकनीक सिखाते हैं। इसके साथ ही वह खिलाड़ियों को हर कदम पर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते रहते हैं। इसी नियमित अभ्यास और सटीक मार्गदर्शन के दम पर अनामिका दिन-प्रतिदिन अपने खेल को और अधिक निखारने में जुटी हुई हैं, जिसका सकारात्मक परिणाम उनके चयन के रूप में सामने आया है। भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व करने का बड़ा सपना अनामिका चौबे की निगाहें अब एक बहुत बड़े लक्ष्य पर टिकी हुई हैं। उनका मुख्य सपना भविष्य में भारतीय बास्केटबॉल टीम का हिस्सा बनना और अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का प्रतिनिधित्व करना है। राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में लगातार मिल रहा अनुभव उनके इस बड़े सपने को और अधिक मजबूती दे रहा है। पुणे में होने वाली आगामी यूथ नेशनल प्रतियोगिता उनके लिए अपनी प्रतिभा को पूरे देश के सामने रखने का एक सुनहरा अवसर है। उनकी कड़ी मेहनत, लगन और बुलंद हौसलों को देखकर यह पूरी उम्मीद की जा रही है कि आने वाले समय में वह सरगुजा और पूरे छत्तीसगढ़ राज्य का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगी। इसका आप पर असर अनामिका चौबे के इस चयन का छत्तीसगढ़ के युवा खिलाड़ियों और खेल जगत पर सकारात्मक असर पड़ेगा। • छत्तीसगढ़ में: स्थानीय स्तर के खिलाड़ियों को बड़े राष्ट्रीय मंचों तक पहुंचने की प्रेरणा मिलेगी और खेल संसाधनों के विकास पर जोर बढ़ेगा। • अंबिकापुर में: गांधी स्टेडियम में अभ्यास करने वाले अन्य युवाओं का मनोबल ऊँचा होगा और क्षेत्र में खेलों के प्रति रुझान बढ़ेगा। • खेल शिक्षा में: पढ़ाई और खेल दोनों को एक साथ संभालने वाले विद्यार्थियों को अपना समय बेहतर ढंग से प्रबंधित करने की सीख मिलेगी। • करियर के लिहाज से: युवा प्रतिभाओं के लिए राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के जरिए भविष्य में सरकारी नौकरियों और खेल कोटे का लाभ पाने के रास्ते खुलेंगे। ऐसा क्यों हुआ अनामिका चौबे का चयन उनकी लंबी मेहनत और चयन प्रक्रिया के नियमों के आधार पर संभव हुआ है। • कड़ा अभ्यास: खिलाड़ी ने पिछले चार वर्षों से लगातार अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में पसीना बहाकर अपने खेल कौशल को निखारा है। • चयन ट्रायल: रायपुर में आयोजित यूथ नेशनल ट्रायल प्रक्रिया में करीब 65 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था, जिनमें से सर्वश्रेष्ठ 12 चुने गए। • कोच का मार्गदर्शन: कोच राजेश प्रताप सिंह की देखरेख में मिलने वाले नियमित प्रशिक्षण ने उनके प्रदर्शन को बेहतर बनाया। • पूर्व अनुभव: इससे पहले दो नेशनल और स्कूल स्तरीय प्रतियोगिताओं में खेलने से उन्हें बड़े मंच का दबाव झेलने की मानसिक मजबूती मिली। सवाल-जवाब 1. अनामिका चौबे का चयन किस प्रतियोगिता के लिए हुआ है? उनका चयन यूथ नेशनल बास्केटबॉल प्रतियोगिता के लिए हुआ है। 2. यह प्रतियोगिता कहां आयोजित की जाएगी? यह प्रतियोगिता पुणे में आयोजित की जाएगी। 3. चयन ट्रायल में कुल कितने खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था? रायपुर में आयोजित चयन ट्रायल में करीब 65 खिलाड़ियों ने हिस्सा लिया था। 4. ट्रायल में कुल कितने खिलाड़ियों का चयन किया गया? ट्रायल के बाद कुल 12 खिलाड़ियों का चयन किया गया है। 5. अनामिका पिछले कितने वर्षों से अभ्यास कर रही हैं? वह पिछले चार वर्षों से लगातार अभ्यास कर रही हैं। 6. वह कहां अभ्यास करती हैं? वह अंबिकापुर के गांधी स्टेडियम में अभ्यास करती हैं। 7. उनके कोच का क्या नाम है? वह कोच राजेश प्रताप सिंह के मार्गदर्शन में अभ्यास करती हैं। 8. अनामिका किस स्कूल में पढ़ती हैं? वह केदारपुर स्कूल में अध्ययन करती हैं। प्रेरणा और सबक अनामिका चौबे की यह सफलता युवा खिलाड़ियों को कड़े संघर्ष से बड़ी मंजिल पाने का रास्ता दिखाती है। • निरंतर अभ्यास: चार साल तक बिना रुके लगातार अभ्यास करने से किसी भी खेल में महारत हासिल की जा सकती है। • संतुलन बनाना: पढ़ाई और खेल दोनों को एक साथ समय देकर अपने सपनों को पूरा किया जा सकता है। • हिचकिचाहट दूर करना: बड़े मंच पर जाने पर शुरुआती डर या झिहिचकिचाहट को अनुभव के जरिए आत्मविश्वास में बदला जा सकता है। • लक्ष्य निर्धारण: भारतीय टीम में खेलने का बड़ा सपना रखकर हर दिन कड़ी मेहनत करने से सफलता अवश्य मिलती है। https://trendkia.com/chhattisgarh/ambikapur-ki-anamika-choubey-ka-national-basketball-pratiyogita-ke-liye-chayan-51845 TrendKia — Har trend, sabse pehle.