# अंबिकापुर में दो दशकों से धूम मचा रहा अजीत का देसी जायका, लकड़ी के चूल्हे पर बनते हैं आलू चाप और बड़ा

> छत्तीसगढ़ के अंबिकापुर में पिछले 22 साल से चल रही अजीत कुमार तिग्गा की छोटी सी दुकान अपने पारंपरिक स्वाद के लिए मशहूर है। यहां आज भी लकड़ी के चूल्हे पर आलू चाप और उड़द दाल का बड़ा तैयार किया जाता है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/ambikapur-mein-ajeet-ka-desi-jayka-aur-wood-fired-stove-ke-aloo-chop-vada-32364 · **Language:** Hindi
**Tags:** अंबिकापुर, छत्तीसगढ़, आलू चाप, स्ट्रीट फूड, पारंपरिक नाश्ता

छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के नवापारा इलाके में एक ऐसा पारंपरिक देसी ठिकाना मौजूद है, जहां के आलू चाप और उड़द दाल के बड़े का स्वाद शहर भर में बेहद लोकप्रिय है। इस छोटी सी दुकान पर रोजाना बड़ी संख्या में लोग नाश्ता करने पहुंचते हैं और यह जगह यहां के स्थानीय निवासियों की पहली पसंद बनी हुई है। इस प्रतिष्ठान की शुरुआत साल 2004 में अजीत कुमार तिग्गा द्वारा नवापारा चौक के नजदीक एक छोटे से होटल के रूप में की गई थी। स्थानीय लोग इस जगह को मुख्य रूप से अजीत होटल के नाम से ही पहचानते हैं। यह कोई आलीशान या बड़ा रेस्टोरेंट नहीं है, बल्कि एक ऐसा पारंपरिक और साधारण स्नैक्स कॉर्नर है जहां आज भी पुराने तरीकों से ही खाने-पीने की चीजें तैयार की जाती हैं।

## रोजाना आते हैं दर्जनों ग्राहक
दुकान के संचालक अजीत कुमार तिग्गा के मुताबिक, उनके इस होटल में हर दिन लगभग 100 से 150 ग्राहक नाश्ते का आनंद लेने आते हैं। इनमें से कई लोग ऐसे हैं जो नियमित रूप से यहां आते हैं और उनके हाथ के बने जायके को बेहद पसंद करते हैं। इस छोटे से व्यवसाय से होने वाली कमाई इतनी हो जाती है कि उनके परिवार का भरण-पोषण बहुत अच्छी तरह से चल जाता है और किसी प्रकार की आर्थिक परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता है।

## पारंपरिक विधि से तैयार होता है नाश्ता
इस होटल के मेनू में मुख्य रूप से उड़द दाल के बड़े और आलू चाप को ही शामिल किया गया है। अजीत कुमार तिग्गा बताते हैं कि बड़ा बनाने के लिए सबसे पहले शुद्ध उड़द दाल का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें बारीक कटे हुए प्याज, हरी मिर्च, अदरक और लहसुन जैसे मसाले मिलाए जाते हैं ताकि इसका स्वाद बेहतरीन बन सके। दूसरी ओर, आलू चाप तैयार करने के लिए सबसे पहले आलू को उबाला जाता है और फिर उन्हें छीलकर विशेष मसाले मिलाए जाते हैं। इसके बाद इस मिश्रण को बेसन की परत में लपेटकर कड़ाही में तला जाता है, जिससे यह क्रिस्पी और स्वादिष्ट बनता है।

## लकड़ी के चूल्हे का जादू और खास चटनी
अजीत के इस होटल की एक और सबसे बड़ी खासियत यहां पर परोसी जाने वाली टमाटर की चटनी है, जो साल के बारह महीने यानी हर मौसम में ग्राहकों को उपलब्ध कराई जाती है। गरमा-गरम बड़ा और आलू चाप के साथ इस अनोखी चटनी का मेल खाने वालों को बहुत भाता है। आज के इस आधुनिक दौर में जहां हर जगह गैस चूल्हे और इंडक्शन का इस्तेमाल किया जाता है, वहीं अजीत आज भी पूरी तरह से पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर ही सारा नाश्ता तैयार करते हैं। लकड़ी की धीमी आंच पर पकने के कारण इन व्यंजनों का स्वाद और भी अधिक बढ़ जाता है, जो ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है।

## इसका आप पर असर
यह खबर स्थानीय खानपान, छोटे कारोबारियों और पारंपरिक व्यंजनों से जुड़ी है, जिसका सीधा असर खाने-पीने के शौकीनों और छोटे स्तर पर काम करने वाले दुकानदारों पर पड़ता है।

- **भारत में:** देश भर के छोटे शहरों में इस तरह के पारंपरिक देसी खानपान व्यवसाय स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करते हैं और लोगों को रोजगार देते हैं। ऐसे व्यंजनों की लोकप्रियता यह दिखाती है कि आज भी लोग आधुनिक फास्ट फूड की जगह पारंपरिक और ताजे नाश्ते को प्राथमिकता देते हैं।
- **अंबिकापुर में:** अंबिकापुर और आसपास के इलाकों के स्थानीय लोगों और नाश्ता प्रेमियों को इस दुकान पर पारंपरिक स्वाद का किफायती विकल्प मिलता है। स्थानीय ग्राहकों के लिए यह जगह रोजमर्रा के खानपान का एक भरोसेमंद और पुराना ठिकाना बनी हुई है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह दुकान पिछले दो दशकों से अधिक समय से अपनी खास रेसिपी और पारंपरिक तरीकों के कारण टिके रहने में कामयाब रही है।

- **पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता:** अजीत कुमार तिग्गा द्वारा पिछले 22 वर्षों से एक ही तरह की रेसिपी और मसालों का इस्तेमाल करने से ग्राहकों का भरोसा बना हुआ है।
- **लकड़ी के चूल्हे का प्रयोग:** आधुनिक गैस स्टोव के बजाय लकड़ी के चूल्हे पर खाना पकाने से भोजन में एक अलग पारंपरिक सौंधी खुशबू और स्वाद आता है जो ग्राहकों को आकर्षित करता है।
- **नियमित ग्राहक वर्ग:** दुकान पर मिलने वाली खास टमाटर की चटनी और किफायती दामों के कारण स्थानीय लोग यहां बार-बार आते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. अजीत होटल कहां स्थित है?
यह होटल छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर के नवापारा इलाके में स्थित है।

### 2. इस दुकान की शुरुआत कब हुई थी?
इस छोटे से होटल की शुरुआत साल 2004 में हुई थी।

### 3. रोजाना कितने ग्राहक यहां नाश्ता करने आते हैं?
इस दुकान पर रोजाना लगभग 100 से 150 ग्राहक नाश्ता करने आते हैं।

### 4. होटल में मुख्य रूप से क्या बनाया जाता है?
यहां मुख्य रूप से उड़द दाल के बड़े और आलू चाप बनाए जाते हैं।

### 5. नाश्ता किस पर पकाया जाता है?
आधुनिक गैस चूल्हों के दौर में भी यहां सारा नाश्ता पारंपरिक लकड़ी के चूल्हे पर तैयार किया जाता है।

## प्रेरणा और सबक
अजीत कुमार तिग्गा की यह सफलता की कहानी छोटे कारोबारियों और मेहनत करने वाले लोगों के लिए एक बड़ी सीख देती है।

- **निरंतरता और मेहनत:** पिछले 22 वर्षों से बिना अपना तरीका बदले एक ही काम को पूरी लगन के साथ करना सफलता की कुंजी है।
- **गुणवत्ता से समझौता न करना:** पारंपरिक स्वाद और देसी मसालों की गुणवत्ता को बनाए रखकर ही ग्राहक का स्थायी भरोसा जीता जा सकता है।
- **सादे जीवन से संतुष्टि:** एक छोटे से व्यवसाय के जरिए अपने परिवार का पालन-पोषण करना और अपनी कला पर भरोसा रखना आत्मनिर्भरता का बेहतरीन उदाहरण है।

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