अंबिकापुर के सैनिक स्कूल के 10वीं के छात्र ने बना डाला संस्कृत सिखाने वाला डिजिटल पोर्टल सरगुजा के सैनिक स्कूल में पढ़ने वाले मोहित साहू ने तीन महीने की मेहनत से 'संस्कृतम लैब' नाम का पोर्टल बनाया है, जो केजी से पीएचडी तक के छात्रों को संस्कृत सिखाने में मदद करेगा. छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक स्कूली छात्र ने अपनी पढ़ाई के साथ-साथ ऐसा काम कर दिखाया है जिसकी चर्चा अब पूरे इलाके में हो रही है. सरगुजा संभाग मुख्यालय अंबिकापुर स्थित सैनिक स्कूल में कक्षा 10वीं में पढ़ने वाले मोहित साहू ने संस्कृत भाषा सिखाने के लिए एक डिजिटल पोर्टल तैयार किया है, जिसका नाम उन्होंने 'संस्कृतम लैब' रखा है. तीन महीने की मेहनत से तैयार हुआ पोर्टल मोहित ने लोकल 18 को बताया कि रोजाना की पढ़ाई को व्यवस्थित तरीके से मैनेज करते हुए उन्होंने इस पोर्टल पर काम किया. इसे पूरा करने में उन्हें तीन महीने से ज्यादा का वक्त लगा. इस पूरी प्रक्रिया में उन्हें तकनीक की बारीकियां समझने के साथ-साथ संस्कृत भाषा को नए सिरे से सीखने और समझने का मौका भी मिला. केजी से लेकर पीएचडी तक के लिए उपयोगी 'संस्कृतम लैब' की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे अलग-अलग उम्र और शिक्षा स्तर के विद्यार्थियों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. छोटे बच्चों के लिए इसमें चित्रों की मदद से शब्द सिखाने की व्यवस्था है, जिससे संस्कृत के शुरुआती शब्द उन्हें आसानी से याद रह सकें. वहीं दूसरी ओर, उच्च शिक्षा और शोध कार्य में जुटे विद्यार्थी भी इसी पोर्टल पर मौजूद संस्कृत से जुड़ी सामग्री का उपयोग कर सकेंगे. यानी एक ही मंच पर केजी स्तर से लेकर पीएचडी स्तर तक की जरूरतें पूरी हो सकेंगी. बच्चों की घटती रुचि बनी वजह मोहित का कहना है कि आजकल कई बच्चे संस्कृत पढ़ने से दूरी बना रहे हैं, और यही बात उन्हें खटकती थी. उनका मानना है कि अगर संस्कृत को आधुनिक तकनीक के जरिए आसान और रोचक तरीके से बच्चों के सामने रखा जाए, तो उनकी रुचि फिर से बढ़ाई जा सकती है. यही सोच 'संस्कृतम लैब' के पीछे की मूल प्रेरणा बनी. शिक्षक सौरभ जैन के मार्गदर्शन का योगदान मोहित साहू ने इस पूरी उपलब्धि का श्रेय अपने मार्गदर्शक शिक्षक सौरभ जैन को दिया है. उन्होंने बताया कि सौरभ जैन के मार्गदर्शन में ही उन्हें संस्कृत के लिए यह डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार करने का अवसर मिला. मोहित के मुताबिक, इस पहल का सबसे बड़ा मकसद बच्चों में संस्कृत के प्रति रुचि जगाना और इसके लिए एक मजबूत डिजिटल इकोसिस्टम खड़ा करना है, ताकि आने वाले समय में और भी ज्यादा विद्यार्थी इस भाषा से जुड़ सकें. इसका आप पर असर यह पोर्टल संस्कृत सीखने के तरीके को आसान बना सकता है, खासकर उन बच्चों के लिए जो इस भाषा से दूर हो रहे हैं. • भारत में: जिन स्कूलों में संस्कृत पढ़ाई जाती है, वहां के छात्र और शिक्षक ऐसे डिजिटल टूल का इस्तेमाल पूरक सामग्री के तौर पर कर सकते हैं. इससे केजी से पीएचडी तक के विद्यार्थियों को एक ही जगह अलग-अलग स्तर की सामग्री मिल सकती है. • सरगुजा-अंबिकापुर में: स्थानीय स्तर पर इस पहल से सैनिक स्कूल और आसपास के अन्य स्कूलों के छात्रों को सीधा फायदा मिल सकता है, क्योंकि पोर्टल एक स्थानीय छात्र द्वारा ही तैयार किया गया है. • शिक्षकों के लिए: संस्कृत पढ़ाने वाले शिक्षक इस तरह के चित्र-आधारित मॉड्यूल का इस्तेमाल कक्षा में रुचि बढ़ाने के लिए कर सकते हैं. • शोधार्थियों के लिए: उच्च शिक्षा और शोध स्तर के विद्यार्थियों को संस्कृत से जुड़ी सामग्री एक ही मंच पर मिलने से समय की बचत हो सकती है. सवाल-जवाब 1. 'संस्कृतम लैब' पोर्टल किसने बनाया है? इसे सरगुजा के सैनिक स्कूल, अंबिकापुर के कक्षा 10वीं के छात्र मोहित साहू ने बनाया है. 2. इस पोर्टल को बनाने में कितना समय लगा? मोहित को इस पोर्टल को तैयार करने में तीन महीने से अधिक का समय लगा. 3. यह पोर्टल किन विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है? यह पोर्टल केजी स्तर से लेकर पीएचडी स्तर तक के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी है. 4. छोटे बच्चों के लिए पोर्टल में क्या खास सुविधा है? छोटे बच्चों के लिए इसमें चित्रों के माध्यम से संस्कृत के शब्द सिखाने और समझने की सुविधा दी गई है. 5. मोहित को इस पहल के लिए किसका मार्गदर्शन मिला? मोहित ने अपने शिक्षक सौरभ जैन के मार्गदर्शन में यह डिजिटल प्लेटफॉर्म तैयार किया. 6. मोहित ने यह पोर्टल बनाने का फैसला क्यों किया? उनका मानना है कि आजकल कई बच्चे संस्कृत पढ़ने से दूर हो रहे हैं, इसलिए उन्होंने तकनीक के जरिए संस्कृत को आसान बनाने की कोशिश की. प्रेरणा और सबक मोहित साहू की कहानी बताती है कि सही मार्गदर्शन और लगन मिले तो एक स्कूली छात्र भी बड़ा बदलाव ला सकता है. • अपनी पढ़ाई को मैनेज करना सीखें: मोहित ने रोजाना की स्कूली पढ़ाई को व्यवस्थित करते हुए तीन महीने में यह पोर्टल तैयार किया, यानी सही समय-प्रबंधन से पढ़ाई और अतिरिक्त काम दोनों साथ हो सकते हैं. • समस्या को पहचानें: उन्होंने पहले यह देखा कि बच्चे संस्कृत से दूर हो रहे हैं, फिर उसी समस्या का समाधान तकनीक से खोजा. • सही मार्गदर्शक चुनें: शिक्षक सौरभ जैन के मार्गदर्शन ने मोहित के आइडिया को असल रूप देने में अहम भूमिका निभाई. • सबके लिए उपयोगी चीज बनाएं: मोहित ने पोर्टल को सिर्फ अपने स्तर तक सीमित न रखकर केजी से पीएचडी तक हर उम्र के लिए उपयोगी बनाया. https://trendkia.com/chhattisgarh/anbikapura-ke-sainik-school-ke-10vin-ke-chhatra-ne-bana-dala-snskrita-sikhane-vala-dijitala-portala-28460 TrendKia — Har trend, sabse pehle.