{
  "type": "article",
  "title": "अंबिकापुर से बिलासपुर तक चला मेडिकल सफर, अजगर के मुंह के ट्यूमर की सफल सर्जरी",
  "summary": "छत्तीसगढ़ में वन्यजीव संरक्षण की एक अनोखी घटना सामने आई है जहाँ डॉक्टरों की टीम ने एक अजगर के मुंह के खतरनाक ट्यूमर का वेंटिलेटर पर रखकर जटिल ऑपरेशन किया।",
  "content": "वन्यजीव चिकित्सा के इतिहास में एक अनूठा मामला सामने आया है जहाँ एक बड़े अजगर के मुंह के अंदर उपजे ट्यूमर को जटिल सर्जरी के जरिए बाहर निकाला गया। इस पूरे मेडिकल सफर की शुरुआत अंबिकापुर से हुई जहाँ से इस बेजुबान जीव को लगभग 250 किलोमीटर दूर बिलासपुर पहुंचाया गया। इस चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया के दौरान सरीसृप को वेंटिलेटर पर रखकर उसका इलाज किया गया और डॉक्टरों की सूझबूझ से उसकी जान बचाई जा सकी।\n\nशुरुआत में शिकार समझने की हुई थी भूल\nइस पूरी घटना की शुरुआत तब हुई जब स्थानीय रेस्क्यूकर्ता सत्यम द्विवेदी ने एक इंडियन रॉक पाइथन को पकड़ा और उसके सिर का असामान्य रूप से फूला हुआ हिस्सा देखा। पहले उन्हें ऐसा लगा कि शायद इस सांप ने किसी बड़े जीव को निगल लिया है जो उसके गले में अटक गया है। लेकिन जब उन्होंने मु मु मुआयना किया तो अंदर खून के साथ एक अजीब सी गांठ दिखाई दी जिससे गंभीर बीमारी का अंदेशा हुआ।\n\nवन विभाग की अनुमति से तय किया गया लंबा सफर\nस्थिति की गंभीरता को भांपते हुए सत्यम द्विवेदी ने तुरंत सरगुजा के वन विभाग के डीएफओ से मौखिक अनुमति ली और अजगर को बेहतर इलाज के लिए छत्तीसगढ़ के दूसरे शहर ले जाने का निर्णय किया। बिलासपुर के कानन पेंडारी पहुँचकर उन्होंने डॉक्टर चंदन को वह जीव दिखाया जहाँ जाँच के दौरान पता चला कि यह गांठ कैंसर का रूप ले चुकी है। इसके बाद मामले की नजाकत को देखते हुए उसे वन्यजीव चिकित्सक डॉक्टर पीयूष दुबे के पास भेजा गया।\n\nवेंटिलेटर और आधुनिक उपकरणों का हुआ इस्तेमाल\nअजगर जैसी खतरनाक और संवेदनशील प्रजाति का ऑपरेशन करना अपने आप में डॉक्टरों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं था। इस प्रक्रिया में एनेस्थीसिया देना और उसे वेंटिलेटर पर संभालना बेहद जोखिम भरा कार्य था जिसके लिए आधुनिक चिकित्सा उपकरणों की मदद लेनी पड़ी। मेडिकल टीम ने जरूरत के वक्त आईवी फ्लूइड देने के साथ ही सीपीआर और एक्स-रे जैसी तकनीकों का भी पूरी सावधानी के साथ इस्तेमाल किया।\n\nडॉक्टरों के अथक प्रयास से बची जान\nसाढ़े तीन घंटे तक चली इस लंबी और कठिन सर्जरी के बाद भी डॉक्टरों की धड़कनें इसलिए तेज थीं क्योंकि एनेस्थीसिया का असर काफी लंबे समय तक बना हुआ था। पेट मेडिक्स के संचालक और वन्यजीव विशेषज्ञ डॉक्टर पीयूष दुबे के निरंतर प्रयासों और देखरेख के चलते धीरे-धीरे उस अजगर की सेहत में सुधार दर्ज किया जाने लगा। अब उस बेजुबान जीव ने अपने शरीर में हलचल शुरू कर दी है और उसकी निगरानी लगातार जारी है।\n\nसंरक्षण की दिशा में एक अनुठी मिसाल\nकानून के दायरे में संरक्षित इंडियन रॉक पाइथन प्रजाति के इस सफल ऑपरेशन ने वन्यजीव प्रेमियों और चिकित्सकों के बीच एक नई उम्मीद जगा दी है। इस पूरे रेस्क्यू और इलाज ने यह साबित कर दिया है कि इंसानों की तरह ही वन्यजीवों को भी समय पर सही इलाज और मेडिकल सुविधाएँ मिलने पर बचाया जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nइस घटना का असर वन्यजीव संरक्षण और क्षेत्र के पशु चिकित्सा प्रबंधन पर सीधा पड़ता है।\n\n• छत्तीसगढ़ में: वन्यजीवों के रेस्क्यू और उनके इलाज की व्यवस्थाओं में डॉक्टरों की भूमिका को लेकर जागरूकता बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर ऐसे मामलों में तुरंत वन विभाग से संपर्क करने की प्रक्रिया को बल मिला है।\n• आम नागरिकों के लिए: किसी भी वन्यजीव को मिलने वाली चिकित्सीय सहायता और आधुनिक उपकरणों के इस्तेमाल से यह संदेश जाता है कि बेजुबान जीवों की जान बचाने के लिए अब उन्नत प्रयास किए जा रहे हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह जटिल मेडिकल केस अजगर के मुंह में उपजे ट्यूमर के कारण सामने आया जिसने कैंसर का रूप ले लिया था।\n\n• स्वास्थ्य कारण: अजगर के मुंह के अंदर गंभीर गांठ बन जाने के कारण उसे खाने और सांस लेने में भारी परेशानी हो रही थी।\n• विशेषज्ञों की पहल: रेस्क्यूकर्ता द्वारा समय पर स्थिति भांपकर उसे बिलासपुर के कानन पेंडारी पहुँचाना और वन्यजीव चिकित्सकों की टीम का आगे आना इस सफल इलाज की मुख्य वजह बना।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. अजगर को कहाँ से कहाँ ले जाया गया?\nअजगर को अंबिकापुर से लगभग 250 किलोमीटर दूर बिलासपुर स्थित कानन पेंडारी ले जाया गया।\n\n2. अजगर के मुंह में क्या समस्या थी?\nअजगर के मुंह के अंदर एक ट्यूमर था जो बाद में कैंसर का रूप ले चुका था।\n\n3. यह सर्जरी किसने की?\nयह जटिल सर्जरी वन्यजीव चिकित्सक डॉ. पीयूष दुबे द्वारा की गई।\n\n4. सर्जरी में कितना समय लगा?\nअजगर के मुंह के ट्यूमर को निकालने के लिए करीब साढ़े तीन घंटे तक सर्जरी चली।\n\n5. इलाज के दौरान अजगर को किस उपकरण पर रखा गया?\nसांस और एनेस्थीसिया के जोखिम को देखते हुए अजगर को वेंटिलेटर पर रखा गया था।",
  "url": "https://trendkia.com/chhattisgarh/anbikapura-se-bilasapura-taka-chala-medikala-saphara-ajagara-ke-munha-ke-tyumara-ki-saphala-sarjari-48092",
  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-16",
  "tags": [
    "अजगर सर्जरी",
    "वन्यजीव संरक्षण",
    "बिलासपुर न्यूज",
    "अंबिकापुर",
    "कानन पेंडारी"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}