बस्तर में पीएम नरेंद्र मोदी का बड़ा बयान, बोले- हथियारबंद नक्सली खत्म, लेकिन दिमागी नक्सलियों से खतरा बरकरार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर में सुरक्षाकर्मियों के साथ दिवाली मनाते हुए कहा कि हालांकि हथियारबंद माओवाद का सफाया हो चुका है, लेकिन 'दिमागी नक्सली' अभी भी कई संगठनों में घुसपैठ कर लोकतंत्र को नुकसान पहुंचा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के करनपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर में सुरक्षाकर्मियों के साथ दीपावली का पर्व मनाया। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में देश की आंतरिक सुरक्षा और वामपंथी उग्रवाद के खात्मे को लेकर बड़े बयान दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भले ही जंगलों से हथियारबंद माओवादियों का लगभग सफाया हो चुका है, लेकिन नक्सलवाद का खतरा अभी पूरी तरह से टला नहीं है और देश के सामने एक नया वैचारिक संकट पैदा हो गया है। दिमागी नक्सलियों पर तीखा हमला कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नरेन्द्र मोदी ने आरोप लगाया कि 'दिमागी नक्सली' अब राजनीतिक दलों और विभिन्न संगठनों के भीतर घुसपैठ कर चुके हैं। ये तत्व लगातार देश के संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के खिलाफ आम नागरिकों को भड़काने का काम कर रहे हैं। उन्होंने बल देकर कहा कि सुरक्षा बलों और देशवासियों को ऐसे लोगों की सही पहचान करनी होगी, उन्हें परास्त करना होगा और देश की सुरक्षा को सुनिश्चित करना होगा। इससे पहले इस साल 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में भी उन्होंने इसी खतरे की चेतावनी दी थी और कहा था कि वैचारिक समर्थक अब भी अराजकता फैलाने के मौके तलाश रहे हैं। दंतेवाड़ा और पुराने दिनों की हिंसा को किया याद नक्सलवाद के खिलाफ दशकों पुरानी और कठिन लड़ाई को याद करते हुए नरेन्द्र मोदी ने बताया कि एक समय देश के लगभग 20 राज्यों के 230 से ज्यादा जिले वामपंथी उग्रवाद की गिरफ्त में थे। उन दिनों सूर्यास्त के बाद इन इलाकों में सामान्य जनजीवन पूरी तरह थम जाता था, जिससे हजारों गांव और करोड़ों लोग प्रभावित होते थे तथा हर साल करीब दो हजार नक्सली हमले दर्ज किए जाते थे। पिछली सरकारों पर सीधा निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि 2010 में दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ हुई एक भयंकर मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे और एक अन्य घटना में 44 निर्दोष नागरिकों की जान चली गई थी। उन्होंने अ अफसोस जताया कि उस दौरान छत्तीसगढ़ की धरती वीरों के खून से लाल हो गई थी, लेकिन महलों में बैठे किसी भी नामदार की आंख से आंसू नहीं निकला और न ही किसी की सिसकी सुनाई दी। 2004 से 2013 के दौर और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी वर्ष 2004 से 2013 के बीच के समय का जिक्र करते हुए उन्होंने आंकड़ों का हवाला दिया कि उस कालखंड में हर साल जितने नक्सली मारे जाते थे, उससे कहीं अधिक संख्या में देश के वीर जवान शहीद हो जाया करते थे। नक्सली संगठनों के शीर्ष नेता इसे अपनी बड़ी जीत मानते थे और जश्न मनाते थे। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती सरकारों ने वामपंथी उग्रवाद को एक लाइलाज बीमारी मानकर अपने हाल पर छोड़ दिया था और आदिवासी परिवारों को उनकी ही किस्मत के भरोसे जीने के लिए विवश कर दिया गया था। उन्होंने कहा कि देश दुश्मनों के खिलाफ 'जैसेतैसे सब चलता रहेगा' के ढर्रे पर नहीं चल सकता, बल्कि इसके लिए मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है, जिसकी कमी 2014 के बाद दूर की गई। बदलाव और सुरक्षाबलों को पूरी आजादी वर्ष 2014 के बाद आए बदलावों का जिक्र करते हुए नरेन्द्र मोदी ने कहा कि उस समय के बाद हालात और आंकड़े दोनों में बड़ा सुधार देखने को मिला है। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि 47 वर्षों में यह ऐतिहासिक रूप से पहली बार हुआ है कि पिछले एक वर्ष के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक भी जवान को अपनी ड्यूटी के दौरान जान नहीं गंवानी पड़ी। उन्होंने इसे सही नीतियों और राजनीतिक इच्छाशक्ति की जीत बताया तथा सुरक्षाबलों की वीरता, साहस और संयम की सराहना की। उन्होंने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई कड़े कदम उठाए हैं, जिससे नक्सलियों और अलगाववादियों के फंडिंग नेटवर्क को करारा झटका लगा है। जाली मुद्रा के अवैध नेटवर्क को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई, हथियारों की आपूर्ति रुकी और नई भर्तियों में भी भारी कमी आई। साथ ही, पिछली सरकारों पर जवानों के हाथ बांधने का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने सुरक्षाबलों को हर आवश्यक निर्णय लेने की पूरी छूट दी है। इसका आप पर असर बस्तर और देश की आंतरिक सुरक्षा से जुड़े इस घटनाक्रम का आम नागरिकों और देश की प्रशासनिक व्यवस्था पर दूरगामी प्रभाव पड़ता है। • भारत में: देश भर में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा मजबूत होने से आम नागरिकों और व्यापारियों का जीवन सुरक्षित हुआ है। इस बदलाव से वामपंथी उग्रवाद प्रभावित इलाकों में आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के निर्माण को बढ़ावा मिला है। • बस्तर में: बस्तर और आसपास के जिलों में हिंसा में कमी आने से स्थानीय निवासियों को दशकों बाद भयमुक्त जीवन जीने का अवसर मिला है। इस क्षेत्र के युवाओं के लिए शिक्षा, रोजगार और विकास के नए रास्ते खुल रहे हैं। ऐसा क्यों हुआ वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों की सफलताओं और बदलते सुरक्षा समीकरणों के पीछे कई ठोस कारण और रणनीतिक बदलाव रहे हैं। • रणनीतिक स्वतंत्रता: सरकार द्वारा सुरक्षा बलों को जमीनी अभियानों के दौरान हर आवश्यक निर्णय लेने की पूरी छूट दी गई, जिससे माओवादी हमलों का प्रभावी जवाब देना संभव हुआ। • फंडिंग और आपूर्ति पर प्रहार: सुरक्षा एजेंसियों ने नक्सलियों और अलगाववादियों के वित्तीय नेटवर्क तथा जाली मुद्रा की आपूर्ति श्रृंखला को पूरी तरह से नष्ट कर दिया, जिससे उनके हथियार और संसाधन समाप्त हो गए। • राजनीतिक इच्छाशक्ति: वर्ष 2014 के बाद देश में मजबूत राजनीतिक इच्छाशक्ति के साथ सख्त नीतियां लागू की गईं, जिसने वामपंथी उग्रवाद के खिलाफ अभियान को निर्णायक मोड़ दिया। सवाल-जवाब 1. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बस्तर का दौरा कहां किया? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के करनपुर में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के शिविर का दौरा किया। 2. पीएम मोदी ने किस खतरे के प्रति सचेत किया? उन्होंने चेतावनी दी कि भले ही हथियारबंद नक्सली समाप्त हो चुके हैं, लेकिन 'दिमागी नक्सली' कई संगठनों और राजनीतिक दलों में घुसपैठ कर चुके हैं। 3. वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में क्या घटना हुई थी? वर्ष 2010 में दंतेवाड़ा में नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के 76 सुरक्षाकर्मी शहीद हो गए थे। 4. सीआरपीएफ के जवानों की शहादत को लेकर क्या बदलाव आया है? 47 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि पिछले एक वर्ष के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के एक भी जवान को ड्यूटी के दौरान जान नहीं गंवानी पड़ी। 5. नक्सलियों की कमर कैसे टूटी? सरकार द्वारा सख्त फैसले लेने से नक्सलियों के फंडिंग नेटवर्क, जाली मुद्रा के कारोबार और हथियारों की आपूर्ति लाइन पूरी तरह ठप हो गई। https://trendkia.com/chhattisgarh/armed-maoists-gone-but-ideological-naxals-remain-a-threat-says-pm-modi-in-bastar-57957 TrendKia — Har trend, sabse pehle.