# आसनसोल शूटिंग में बिलासपुर की बेटियों का दबदबा, वसुधा और सानवी की बदौलत छत्तीसगढ़ की झोली में आए 9 पदक

> पश्चिम बंगाल के आसनसोल में आयोजित 10वीं ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप में बिलासपुर की वसुधा डड़सेना ने 2 गोल्ड और 14 साल की सानवी मारू ने 4 पदक हासिल किए। इस शानदार प्रदर्शन की बदौलत छत्तीसगढ़ ने जोनल स्तर पर पहली बार कुल 9 मेडल जीतकर इतिहास रचा।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/asansol-shooting-mein-bilaspur-ki-betiyon-ka-dabdaba-vasudha-aur-sanvi-ki-badoulat-chhattisgarh-ki-jholi-mein-aaye-9-padak-26195 · **Language:** Hindi
**Tags:** ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ शूटिंग, वसुधा डड़सेना, सानवी मारू, आसनसोल, निशानेबाजी

पश्चिम बंगाल के आसनसोल शहर में 25 से 30 अगस्त के बीच आयोजित हुई 10वीं ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। बिलासपुर जिले की दो प्रतिभाशाली महिला निशानेबाजों, वसुधा डड़सेना और महज़ 14 वर्ष की सानवी मारू ने अपनी बेहतरीन निशानेबाजी के दम पर पूरे राज्य का नाम ऊंचा किया। इस प्रतियोगिता में राज्य भर से लगभग 50 खिलाड़ियों का दल शामिल हुआ था। दोनों महिला एथलीटों ने कुल मिलाकर 6 पदक अपनी झोली में डाले, जिसकी मदद से छत्तीसगढ़ को पहली बार इस जोनल प्रतियोगिता में कुल 9 पदक प्राप्त हुए हैं।

## आसनसोल चैंपियनशिप में मेडल का विवरण
आसनसोल की राइफल और पिस्टल शूटिंग रेंज में छह दिनों तक चले इस मुकाबले में बिलासपुर की सानवी मारू ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया। 14 साल की सानवी ने 10 मीटर राइफल प्रतिस्पर्धा में हिस्सा लेते हुए सब यूथ, जूनियर तथा सीनियर तीनों श्रेणियों में अपनी छाप छोड़ी। उन्होंने 1 रजत और 3 कांस्य पदक जीतकर कुल 4 मेडल पर कब्जा किया। दूसरी ओर, बिलासपुर के मंगला इलाके की रहने वाली वसुधा डड़सेना ने पिस्टल स्पर्धा में अपनी सटीकता दिखाई। वसुधा ने जूनियर और सीनियर दोनों वर्गों के पिस्टल मुकाबलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए 2 स्वर्ण पदक अपने नाम किए।

## दो वर्षों की कड़ी मेहनत और दैनिक दिनचर्या
इन दोनों महिला खिलाड़ियों की यह सफलता रातों-रात नहीं मिली है, बल्कि इसके पीछे पिछले दो सालों की निरंतर ट्रेनिंग और अनुशासन की बड़ी भूमिका रही है। सानवी मारू के अनुसार, इस राष्ट्रीय स्तर की जोनल चैंपियनशिप के लिए वे लंबे समय से पसीना बहा रही थीं। उनकी दैनिक दिनचर्या में हर दिन कम से कम दो घंटे शूटिंग अभ्यास के साथ-साथ शारीरिक वार्मअप और विशेष एक्सरसाइज शामिल रहती है। सानवी अपनी इस उपलब्धि का पूरा श्रेय अपने माता-पिता के प्रोत्साहन और अपने कोच के सटीक मार्गदर्शन को देती हैं। वहीं वसुधा डड़सेना ने अपनी सफलता के राज पर बात करते हुए बताया कि उन्होंने पिछले दो वर्षों से बेहद कड़े अनुशासन का पालन किया है। सुबह जल्दी जागना, रोजाना व्यायाम करना और अपनी डाइट तथा खान-पान पर सख्त नियंत्रण रखना उनकी जीवनशैली का हिस्सा बन चुका है। दोनों निशानेबाजों का अंतिम लक्ष्य अब ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए मेडल जीतना है।

## राज्य स्तरीय प्रतियोगिता से जोनल तक का सफर
ईस्ट जोन चैंपियनशिप में मिली यह कामयाबी उस मजबूत नींव का परिणाम है जो इन खिलाड़ियों ने राज्य स्तर पर रखी थी। इससे पहले रायपुर स्थित माना शूटिंग रेंज में आयोजित 25वीं छत्तीसगढ़ राज्य शूटिंग चैंपियनशिप में भी बिलासपुर के निशानेबाजों ने जबरदस्त प्रदर्शन किया था। राज्य स्तरीय स्पर्धा में बिलासपुर के एथलीटों ने 21 स्वर्ण पदकों सहित कुल 32 मेडल हासिल किए थे। उस प्रतियोगिता में वसुधा डड़सेना ने 4 गोल्ड मेडल जीते थे, जबकि सानवी मारू ने 6 गोल्ड मेडल पर कब्जा जमाया था। राज्य प्रतियोगिता के इसी प्रदर्शन के आधार पर छत्तीसगढ़ के 17 निशानेबाजों ने जोनल और प्री-नेशनल स्पर्धाओं के लिए अपनी पात्रता सिद्ध की थी।

## कोच शशांक मसीह का मार्गदर्शन और सफलता का मंत्र
खिलाड़ियों के इस शानदार सफर पर रोशनी डालते हुए कोच शशांक मसीह ने कहा कि किसी भी खिलाड़ी को बड़े मंच पर पहुंचाने के लिए सिर्फ शारीरिक ट्रेनिंग ही नहीं, बल्कि उसके भीतर की मजबूत इच्छाशक्ति भी सबसे ज्यादा मायने रखती है। उन्होंने बताया कि एक दौर ऐसा भी था जब राज्य स्तरीय प्रतियोगिताओं में पदक हासिल करना कठिन होता था, लेकिन इन निशानेबाजों ने अपनी अटूट मेहनत और अनुशासन के बल पर अपनी स्थिति पूरी तरह बदल दी है। कोच शशांक मसीह ने युवा खिलाड़ियों को सलाह दी कि खेल में सफलता पाने के लिए सबसे पहले बड़े लक्ष्य निर्धारित करना जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने उभरते हुए खिलाड़ियों को सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल और जंक फूड से पूरी तरह दूर रहकर अपने खेल पर ध्यान केंद्रित करने का सुझाव दिया। वसुधा और सानवी की इस ऐतिहासिक उपलब्धि से बिलासपुर के साथ-साथ पूरे प्रदेश में खुशी का माहौल है।

## इसका आप पर असर
ईस्ट जोन शूटिंग में बिलासपुर की युवा निशानेबाजों की इस सफलता से प्रदेश में शूटिंग खेल को नया प्रोत्साहन मिलेगा।

- **छत्तीसगढ़ में:** राज्य में जोनल स्तर पर पहली बार 9 मेडल आने से शूटिंग खेल के प्रति युवाओं में रुझान बढ़ेगा। इससे स्थानीय स्पोर्ट्स अकादमियों में नए दाखिलों में तेजी आने की संभावना है।
- **बिलासपुर में:** बिलासपुर के खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन से जिले में अत्याधुनिक शूटिंग रेंज और बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं की मांग मजबूत होगी। स्थानीय प्रशासन खेलों के लिए विशेष बजट आवंटित कर सकता है।
- **उभरते खिलाड़ियों के लिए:** सानवी और वसुधा की सफलता से छोटे शहरों की बालिकाओं को शूटिंग जैसे तकनीकी खेलों में करियर बनाने की प्रेरणा मिलेगी। अभिभावक भी अपनी बेटियों को खेल के प्रति प्रोत्साहित करेंगे।
- **राष्ट्रीय स्तर पर:** जोनल स्तर पर 9 पदकों के साथ 17 खिलाड़ियों का क्वालीफाई होना भारतीय शूटिंग परिदृश्य में छत्तीसगढ़ की उपस्थिति दर्ज कराता है। आगामी राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में राज्य के खिलाड़ियों की भागीदारी बढ़ेगी।

## सवाल-जवाब

### 1. 10वीं ईस्ट जोन शूटिंग चैंपियनशिप कहां और कब आयोजित हुई थी?
यह प्रतियोगिता पश्चिम बंगाल के आसनसोल में 25 से 30 अगस्त तक आयोजित की गई थी।

### 2. प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के खिलाड़ियों ने कुल कितने मेडल जीते?
छत्तीसगढ़ के निशानेबाजों ने ईस्ट जोन चैंपियनशिप में पहली बार कुल 9 मेडल हासिल किए।

### 3. बिलासपुर की सानवी मारू ने कौन-कौन से पदक जीते?
14 साल की सानवी मारू ने 10 मीटर राइफल की सब यूथ, जूनियर और सीनियर श्रेणियों में 1 सिल्वर और 3 ब्रॉन्ज समेत कुल 4 मेडल जीते।

### 4. वसुधा डड़सेना ने किस स्पर्धा में स्वर्ण पदक हासिल किए?
वसुधा डड़सेना ने जूनियर और सीनियर वर्ग के पिस्टल इवेंट में 2 गोल्ड मेडल जीते।

### 5. राज्य स्तरीय शूटिंग चैंपियनशिप में बिलासपुर के खिलाड़ियों का प्रदर्शन कैसा रहा था?
रायपुर के माना रेंज में हुई 25वीं राज्य प्रतियोगिता में बिलासपुर के खिलाड़ियों ने 21 गोल्ड समेत 32 मेडल जीते थे, जिसमें वसुधा ने 4 और सानवी ने 6 गोल्ड जीते थे।

## प्रेरणा और सबक
वसुधा डड़सेना और 14 वर्षीय सानवी मारू की यह यात्रा साबित करती है कि अनुशासित दिनचर्या और बड़े लक्ष्यों के प्रति समर्पण से किसी भी खेल में शीर्ष स्थान हासिल किया जा सकता है।

- **बड़ा लक्ष्य निर्धारित करना:** कोच की सलाह के अनुसार जीवन में सफलता पाने के लिए सबसे पहले ओलंपिक जैसा बड़ा लक्ष्य तय करना आवश्यक है, जो आपको रोज मेहनत करने की प्रेरणा देता है।
- **निरंतर अनुशासन और दिनचर्या:** सुबह जल्दी उठना, प्रतिदिन दो घंटे अभ्यास करना और फिटनेस पर ध्यान देना ही लंबे समय में पदक दिलाने वाली आदतें बनती हैं।
- **डिजिटल भटकाव से दूरी:** सोशल मीडिया और अस्वास्थ्यकर खान-पान से दूर रहकर अपने मुख्य लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रखना खेल और पढ़ाई में सफलता की कुंजी है।
- **असफलताओं से सीखकर आगे बढ़ना:** एक समय राज्य स्तर पर मेडल न जीत पाने वाली स्थिति से उभरकर ईस्ट जोन में 9 मेडल तक पहुंचना यह सिखाता है कि इच्छाशक्ति से हर परिस्थिति बदली जा सकती है।

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