# आवारा कुत्ते के काटने पर मवेशियों में रेबीज का खतरा, पशु चिकित्सक ने दी तत्काल टीकाकरण की सलाह

> छत्तीसगढ़ के सरगुजा में पशुपालकों को सचेत करते हुए पशु चिकित्सक ने बताया कि कुत्ते के काटने पर गाय और बैलों में रेबीज का गंभीर खतरा रहता है, इसलिए लक्षण दिखने का इंतजार किए बिना तुरंत टीका लगवाना चाहिए।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/avara-kutte-ke-katane-para-maveshiyon-men-rebija-ka-khatara-pashu-chikitsaka-ne-di-tatkala-tikakarana-ki-salaha-41676 · **Language:** Hindi
**Tags:** रेबीज, गाय, पशुपालन, पशु चिकित्सा, सरगुजा, टीकाकरण, छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों की आजीविका सीधे तौर पर गाय और बैल जैसे मवेशियों के पालन-पोषण पर निर्भर करती है। ग्रामीण अंचलों में अक्सर खुले में घूमते आवारा कुत्ते पालतू मवेशियों पर हमला कर देते हैं। पशुपालक कई बार इसे मामूली खरोंच या साधारण घाव समझकर अनदेखा कर देते हैं, लेकिन यह लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। कुत्ते के काटने से मवेशियों के शरीर में रेबीज का घातक संक्रमण फैलने का पूरा अंदेशा रहता है। यदि किसी संक्रमित या पागल कुत्ते ने मवेशी को काट लिया है, तो समय पर उपचार न मिलने पर पशु की जान जाना लगभग तय हो जाता है। इतना ही नहीं, संक्रमित पशु के संपर्क में आने से झुंड की अन्य गायों और बैलों तक भी यह जानलेवा बीमारी फैल सकती है। इस गंभीर खतरे से मवेशियों को सुरक्षित रखने के लिए घटना का पता चलते ही तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क कर रेबीज रोधी टीका लगवाना चाहिए।

## मस्तिष्क तक कैसे पहुंचता है रेबीज का वायरस
पशु चिकित्सक डॉ. पीएल शोरी ने संक्रमण फैलने की पूरी जैविक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से बताया है। उनके मुताबिक जब कोई संक्रमित कुत्ता किसी गाय या बैल को काटता है, तो कुत्ते की लार में मौजूद रेबीज वायरस घाव के रास्ते मवेशी की शारीरिक प्रणाली में प्रवेश कर जाता है। शरीर में दाखिल होने के बाद यह वायरस रक्त प्रवाह के बजाय तंत्रिकाओं यानी नसों के माध्यम से अत्यंत धीमी गति से आगे बढ़ता है और अंततः मवेशी के मस्तिष्क पर हमला करता है। एक बार जब वायरस मस्तिष्क के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को अपनी चपेट में ले लेता है, उसके बाद ही पशु में इस बीमारी के स्पष्ट और खतरनाक लक्षण उभरने शुरू होते हैं। मस्तिष्क पूरी तरह प्रभावित होने के बाद पशु की मानसिक और शारीरिक स्थिति अनियंत्रित हो जाती है।

## व्यवहार में बदलाव, आवाज बदलना और लार टपकना शुरुआती लक्षण
रेबीज के संक्रमण की गिरफ्त में आने के बाद गाय के सामान्य आचरण में नाटकीय बदलाव दिखाई देने लगते हैं। डॉ. शोरी के अनुसार पीड़ित मवेशी की आवाज पूरी तरह बदल जाती है, उसके मुंह से लगातार गाढ़ी लार टपकने लगती है और वह पूरी तरह से दाना-पानी खाना बंद कर देती है। बीमारी के उग्र रूप धारण करने पर कई बार गाय अपने नियमित मालिक तथा आसपास के परिचित लोगों को भी पहचानना बंद कर देती है। ऐसी स्थिति में वह अत्यधिक हिंसक व्यवहार करने लगती है और आसपास रखी निर्जीव वस्तुओं, दीवारों या पास मौजूद दूसरे जानवरों पर हमला करके उन्हें काटने का प्रयास करती है।

संक्रमित मवेशी सामान्य स्वस्थ पशुओं की तरह शांत होकर एक जगह बैठने के बजाय हर समय अत्यधिक बेचैन रहता है। वह लगातार अपने पैर जमीन पर पटकता है या खूंटे के इर्द-गिर्द पागलों की तरह चक्कर लगाता दिखाई देता है। डॉ. शोरी रेखांकित करते हैं कि गाय और बैल में यह संक्रमण बहुत तेज गति से विकराल रूप धारण कर लेता है, जिससे पीड़ित पशु को असहनीय पीड़ा से गुजरना पड़ता है।

## सामान्य दिखने वाला कुत्ता भी फैला सकता है बीमारी
पशुपालकों के मन में अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या गांव या सड़क पर घूमने वाले हर कुत्ते के काटने से रेबीज हो सकता है। पशु चिकित्सक के अनुसार यह सच है कि हर आवारा कुत्ते में रेबीज का वायरस मौजूद नहीं होता। इसके बावजूद केवल कुत्ते के बाहरी तौर पर सामान्य और शांत दिखने के आधार पर संक्रमण की आशंका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। कई बार कुत्ता बीमारी के शुरुआती चरण में हो सकता है, जहां उसमें पागलपन के लक्षण पूरी तरह उभरे न हों लेकिन उसकी लार में वायरस मौजूद रहता है। इसलिए अगर किसी भी मवेशी को कोई भी कुत्ता काट ले, तो जोखिम उठाए बिना पशु का जल्द से जल्द टीकाकरण कराना ही एकमात्र सुरक्षित उपाय है।

## संक्रमित कुत्ते के असामान्य व्यवहार से पहचान
रेबीज से ग्रसित कुत्ते की पहचान के संदर्भ में डॉ. शोरी ने बताया कि ऐसा कुत्ता आमतौर पर अपने सामान्य व्यवहार से बिल्कुल अलग बर्ताव करता है। वह अन्य कुत्तों या झुंड से पूरी तरह कटकर अकेला घूमने लगता है। इसके अलावा वह बिना किसी उकसावे के असामान्य रूप से आक्रामक हो जाता है और राह चलते किसी भी अनजान व्यक्ति अथवा सामने आने वाले मवेशी को अकारण काटने के लिए दौड़ता है। यद्यपि ऐसे असामान्य आचरण से रेबीज का गहरा संदेह पैदा होता है, फिर भी केवल व्यवहार को देखकर रेबीज की चिकित्सकीय पुष्टि नहीं की जा सकती। इसी अनिश्चितता के कारण एहतियात बरतना अनिवार्य हो जाता है।

## झुंड के अन्य जानवरों तक संक्रमण का फैलाव
रेबीज का खतरा सिर्फ उसी एक मवेशी तक सीमित नहीं रहता जिसे कुत्ते ने काटा हो, बल्कि यह बाड़े में मौजूद अन्य मवेशियों के लिए भी भारी जोखिम पैदा कर देता है। यदि किसी संक्रमित पशु की लार दूसरे स्वस्थ पशु के शरीर पर लगे किसी ताजे घाव, आंख, नाक या मुंह के संपर्क में आती है, तो वायरस के आगे फैलने का पूरा खतरा बन जाता है। ग्रामीण परिवेश में पशुओं के आपस में एक-दूसरे को चाटने, एक ही नाद में चारा खाने या दूषित पानी पीने जैसी स्थितियों में यह वायरस आसानी से फैल सकता है। इसलिए मवेशियों के संपर्क में आने वाली दूषित सामग्री और लार से पूरी सावधानी बरतना जरूरी है।

## काटते ही टीकाकरण कराना ही एकमात्र कारगर बचाव
डॉ. पीएल शोरी ने पशुपालकों को अत्यधिक महत्वपूर्ण परामर्श देते हुए स्पष्ट किया है कि कुत्ते के काटने की घटना के तुरंत बाद टीकाकरण की प्रक्रिया शुरू कर देनी चाहिए। चाहे कुत्ता पूरी तरह सामान्य दिख रहा हो या फिर संदिग्ध और बीमार नजर आ रहा हो, मवेशी को जितनी जल्दी हो सके रेबीज का टीका लगवाना चाहिए। यदि पशुपालक प्राथमिक उपचार या टीकाकरण कराने में थोड़ी भी देरी करते हैं, तो मवेशी के बचने की संभावना तेजी से घटती जाती है।

## लक्षण प्रकट होने के बाद उपचार असंभव
पशु चिकित्सक ने चेतावनी दी है कि एक बार जब गाय या बैल के शरीर में रेबीज के स्पष्ट लक्षण दिखाई देने लगते हैं, तो उसके बाद बीमारी असाध्य हो जाती है और किसी भी प्रकार के प्रभावी उपचार की कोई गुंजाइश नहीं बचती। तंत्रिका तंत्र में वायरस के पूरी तरह फैल जाने के बाद आधुनिक चिकित्सा में भी पशु की जान बचाना असंभव हो जाता है। यही कारण है कि पशुपालकों को पशु के व्यवहार में बदलाव आने या बीमारी के लक्षण प्रकट होने का कतई इंतजार नहीं करना चाहिए। कुत्ते के काटते ही निकटतम पशु चिकित्सालय पहुंचकर विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में पूरा टीकाकरण चक्र पूरा कराना ही मवेशियों की रक्षा की एकमात्र गारंटी है।

## इसका आप पर असर
कुत्ते के काटने पर मवेशियों का तत्काल टीकाकरण न कराने से पूरे पशुधन और ग्रामीण परिवार की आजीविका पर सीधा वित्तीय और सुरक्षा संबंधी खतरा पैदा हो सकता है।

- **भारत में:** मवेशियों में रेबीज के मामलों से डेयरी किसानों को भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ता है। समय पर एंटी-रेबीज टीकाकरण कराकर मवेशियों की अकाल मौत और दूध उत्पादन में होने वाले घाटे से बचा जा सकता है।
- **सरगुजा में:** सरगुजा जिले के पशुपालक अपने मवेशियों की सुरक्षा के लिए नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क कर सकते हैं। आवारा कुत्ते के काटने की स्थिति में बिना किसी विलंब के सरकारी पशु अस्पताल जाकर टीका लगवाना चाहिए।
- **पशुपालकों के लिए:** संक्रमित मवेशी की लार से अन्य जानवरों और इंसानों में भी संक्रमण फैलने का जोखिम रहता है। कुत्ते के काटने पर घायल पशु को तुरंत अलग बांधना चाहिए और घाव की जांच करानी चाहिए।
- **टीकाकरण के नियम:** एक बार रेबीज के लक्षण दिखने के बाद किसी भी दवा या इंजेक्शन का असर नहीं होता है। इसलिए लक्षण प्रकट होने की प्रतीक्षा किए बिना काटने के पहले ही दिन से टीका लगवाना आवश्यक है।

## ऐसा क्यों हुआ
आवारा और संक्रमित कुत्तों द्वारा मवेशियों को काटे जाने के कारण मवेशियों में रेबीज वायरस प्रवेश कर जाता है, जो समय पर टीका न लगने पर सीधे तंत्रिका तंत्र को नष्ट कर देता है।

- **लार के माध्यम से संचरण:** संक्रमित कुत्ते के काटने पर उसकी लार में मौजूद वायरस मवेशी के खुले घाव में चला जाता है। वहां से यह वायरस नसों के सहारे धीरे-धीरे रीढ़ और मस्तिष्क तक अपनी पहुंच बना लेता है।
- **लक्षणों की देरी से पहचान:** जब तक वायरस मवेशी के मस्तिष्क तक नहीं पहुंचता, तब तक पशु में कोई बाहरी बीमारी नजर नहीं आती। इसके चलते कई पशुपालक शुरुआत में घाव को सामान्य मानकर टीकाकरण टाल देते हैं।
- **लापरवाही और जागरूकता की कमी:** कई बार कुत्ते को सामान्य और शांत देखकर लोग यह मान लेते हैं कि उसमें रेबीज नहीं है। इसी भ्रम के कारण उपचार में देरी हो जाती है और संक्रमण जानलेवा बन जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. कुत्ते के काटने पर गाय में रेबीज कैसे फैलता है?
संक्रमित कुत्ते की लार के जरिए रेबीज वायरस गाय के शरीर में दाखिल होता है और नसों के रास्ते मस्तिष्क तक पहुंचता है।

### 2. रेबीज से पीड़ित गाय में क्या शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं?
गाय की आवाज बदल जाती है, मुंह से लार टपकने लगती है, वह खाना-पीना छोड़ देती है और अत्यधिक बेचैन या आक्रामक हो जाती है।

### 3. क्या शांत दिखने वाले कुत्ते के काटने से भी रेबीज हो सकता है?
हां, कुत्ता बाहर से सामान्य दिखे तब भी संक्रमण का खतरा बना रहता है, इसलिए टीका लगवाना अनिवार्य है।

### 4. रेबीज के लक्षण दिखने के बाद क्या गाय का इलाज संभव है?
नहीं, एक बार लक्षण दिखाई देने के बाद इस बीमारी का कोई प्रभावी इलाज संभव नहीं रहता है।

### 5. क्या रेबीज से ग्रसित गाय से दूसरे पशुओं में बीमारी फैल सकती है?
हां, यदि संक्रमित मवेशी की लार दूसरे पशु के संपर्क में आती है, तो संक्रमण फैलने का खतरा रहता है।

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