बालोद के इस ढाबे में सिर्फ 20 रुपये में मिलता है नाश्ता, रोज बिकती हैं 1000 प्लेट बालोद जिले के लाटाबोड़ गांव में चेमन चंद्रवंशी के होटल का गरमागरम नाश्ता अब पूरे इलाके में मशहूर है, यहां रोज 1000 से ज्यादा प्लेट बिकती हैं और फुल प्लेट की कीमत महज 20 रुपये है, इस कारोबार की नींव 15 साल पहले उनके पिता ने सिर्फ 5000 रुपये से रखी थी। छत्तीसगढ़ के बालोद जिले में लाटाबोड़ गांव का एक छोटा सा नाश्ता सेंटर आज इलाके की सबसे व्यस्त दुकानों में गिना जाने लगा है, जहां हर दिन 1000 से ज्यादा प्लेट गरमागरम नाश्ता ग्राहकों तक पहुंचता है। यह पहचान चेमन चंद्रवंशी और उनके परिवार की मेहनत की बदौलत बनी है, जो बस स्टैंड के पास अपना यह होटल चलाते हैं और आज पूरे जिले में अपने स्वाद के लिए जाने जाते हैं। बस स्टैंड के पास मिलता है गरमागरम नाश्ता यह होटल लाटाबोड़ बस स्टैंड से सटा हुआ है और यहां सुबह 8 बजे से लेकर रात 8 बजे तक लगातार नाश्ता परोसा जाता है, यानी ग्राहकों के पास पूरे बारह घंटे का मौका रहता है। यहां नाश्ते में वड़ा परोसा जाता है, साथ ही मिर्चा भजिया और आलू भजिया भी बनाए जाते हैं, इसके अलावा छोटा भजिया भी ग्राहकों को खूब पसंद आता है। इसके साथ टमाटर-मिर्ची की चटनी, धनिया की चटनी और कड़ी वाली खट्टी चटनी भी दी जाती है, जिससे स्वाद का यह मेल ग्राहकों को बार-बार यहां खींच लाता है, चाहे वे दिन के किसी भी समय पहुंचें। फुल प्लेट के बस 20 रुपये इस दुकान की सबसे बड़ी खासियत इसकी कीमत है। यहां फुल प्लेट नाश्ते के लिए ग्राहकों को केवल 20 रुपये चुकाने होते हैं, जबकि हाफ प्लेट सिर्फ 10 रुपये में मिल जाती है। इतनी कम कीमत के बावजूद नाश्ता हमेशा ताजा और गरमागरम रहता है, यही वजह है कि आसपास के इलाके से लोग रोजाना काम पर जाते, स्कूल जाते या बाजार जाते वक्त यहां रुकना नहीं भूलते। हर दिन बिक जाती हैं हजार से ज्यादा प्लेटें औसतन इस दुकान से रोजाना 1000 से ज्यादा प्लेट नाश्ता बिक जाता है, और सोमवार को यह संख्या और बढ़ जाती है क्योंकि उस दिन लाटाबोड़ में साप्ताहिक बाजार लगता है। रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने से भी ग्राहकों की भीड़ सामान्य से ज्यादा हो जाती है। चेमन ने दसवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी, इसके बाद उन्होंने स्कूल छोड़कर परिवार के इस कारोबार की पूरी जिम्मेदारी अपने कंधों पर ले ली। अब परिवार का हर सदस्य सुबह से लेकर रात तक इस काम में हाथ बंटाता है, यह दुकान किसी एक व्यक्ति का नहीं बल्कि पूरे परिवार का साझा उद्यम बन चुकी है। सिर्फ 5000 रुपये से शुरू हुआ था यह कारोबार इस दुकान की नींव करीब 15 साल पहले चेमन के पिता सोहनलाल चंद्रवंशी ने रखी थी, तब उन्होंने महज 5000 रुपये लगाकर यह काम शुरू किया था। शुरुआत बेहद छोटी थी, लेकिन लगातार मेहनत और ग्राहकों के भरोसे की बदौलत यह कारोबार साल दर साल आगे बढ़ता चला गया, बिना किसी बड़े बाहरी निवेश के। जो दुकान कभी एक मामूली नाश्ता काउंटर के तौर पर शुरू हुई थी, वह आज पूरे परिवार की कमाई का भरोसेमंद जरिया बन चुकी है, और रोजाना बिकने वाली हजार से ज्यादा प्लेटें यह साबित करती हैं कि सही कीमत, ताजा स्वाद और स्थानीय पसंद आज भी एक छोटे शहर में भारी भीड़ खींच सकते हैं। इसका आप पर असर इस खबर का सबसे बड़ा असर छोटे कारोबारियों और आम ग्राहकों दोनों पर पड़ता है, खासकर बालोद जैसे इलाकों में जहां सस्ता और भरोसेमंद नाश्ता ढूंढना आसान नहीं होता। • भारत में: यह कहानी दिखाती है कि सिर्फ 5000 रुपये जैसी छोटी पूंजी से भी कारोबार शुरू किया जा सकता है। जो लोग नौकरी छोड़कर या पढ़ाई के बाद खुद का छोटा व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक व्यावहारिक उदाहरण है। • बालोद में: लाटाबोड़ बस स्टैंड के आसपास रहने वाले और यहां से गुजरने वाले लोगों को अब पता है कि सुबह 8 से रात 8 बजे तक सिर्फ 20 रुपये में भरपेट नाश्ता मिल सकता है। सोमवार और रविवार को जल्दी पहुंचना फायदेमंद रहेगा क्योंकि इन दिनों भीड़ ज्यादा होती है। • रोजगार पर असर: परिवार के सभी सदस्य इसी दुकान से जुड़कर काम कर रहे हैं, जिससे पता चलता है कि छोटा स्थानीय व्यापार भी पूरे परिवार को रोजगार दे सकता है। • ग्राहकों के लिए सीख: कम कीमत और अच्छी क्वालिटी साथ चलें तो ग्राहक अपने आप जुड़ते चले जाते हैं, यह हर छोटे दुकानदार के लिए सीखने वाली बात है। सवाल-जवाब 1. यह दुकान कहां स्थित है? यह छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के लाटाबोड़ गांव में बस स्टैंड के पास स्थित है। 2. यहां नाश्ते में क्या-क्या मिलता है? यहां वड़ा, मिर्चा भजिया, आलू भजिया और छोटा भजिया के साथ टमाटर-मिर्ची, धनिया और कड़ी की खट्टी चटनी परोसी जाती है। 3. फुल प्लेट और हाफ प्लेट नाश्ते की कीमत क्या है? फुल प्लेट नाश्ता 20 रुपये में और हाफ प्लेट 10 रुपये में मिलता है। 4. यह दुकान रोजाना कितनी देर खुली रहती है? यह होटल सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक खुला रहता है। 5. रोजाना कितनी प्लेट नाश्ता बिकता है? यहां रोजाना 1000 से ज्यादा प्लेट नाश्ता बिक जाता है। 6. यह कारोबार किसने और कब शुरू किया था? इसे करीब 15 साल पहले चेमन चंद्रवंशी के पिता सोहनलाल चंद्रवंशी ने महज 5000 रुपये की लागत से शुरू किया था। 7. किन दिनों में सबसे ज्यादा भीड़ रहती है? सोमवार को साप्ताहिक बाजार और रविवार को छुट्टी होने की वजह से इन दो दिनों में ग्राहकों की संख्या और बढ़ जाती है। प्रेरणा और सबक चेमन और उनके पिता सोहनलाल चंद्रवंशी की कहानी बताती है कि बड़ा निवेश नहीं, बल्कि सही सोच और लगातार मेहनत किसी भी छोटे कारोबार को बड़ा बना सकती है। • छोटी पूंजी से भी शुरुआत मुमकिन: सिर्फ 5000 रुपये से शुरू हुआ यह काम आज पूरे परिवार की कमाई का जरिया बन चुका है, यानी पूंजी की कमी बहाना नहीं बन सकती। • कीमत नहीं, भरोसा जीतें: कम दाम पर भी अच्छी क्वालिटी बनाए रखने से ग्राहकों का भरोसा बनता है, जो लंबे समय में मुनाफे में बदल जाता है। • पारिवारिक सहयोग की ताकत: परिवार के सभी सदस्यों का काम में जुटना दिखाता है कि सामूहिक मेहनत छोटे व्यवसाय को स्थिर बनाए रखने में कितनी मददगार हो सकती है। • जरूरत पड़ने पर फैसला लेने की हिम्मत: चेमन ने परिवार के कारोबार को संभालने के लिए दसवीं के बाद पढ़ाई छोड़ने का फैसला लिया, यह दिखाता है कि सही समय पर लिया गया फैसला भी सफलता की नींव बन सकता है। https://trendkia.com/chhattisgarh/balod-ke-isa-dhabe-men-sirpha-20-rupaye-men-milata-hai-nashta-roja-bikati-hain-1000-pleta-28746 TrendKia — Har trend, sabse pehle.