बालोद में बनारसी टिकिया चाट का जलवा, ₹35 की प्लेट के लिए उमड़ रहे खाने के शौकीन छत्तीसगढ़ के बालोद में बनारस से आए कारीगर प्रेमचंद की टिकिया चाट काफी लोकप्रिय हो रही है, जहां दोपहर से रात तक ₹35 की भरपूर प्लेट के लिए भीड़ जुटती है। छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में स्ट्रीट फूड प्रेमियों के बीच इन दिनों पारंपरिक स्वाद की जबर्दस्त मांग देखी जा रही है। शहर के घड़ी चौक पर स्थित बीकानेर स्वीट्स में परोसी जाने वाली खास टिकिया चाट स्थानीय लोगों की जुबान पर चढ़ चुकी है। बेहतरीन स्वाद, शुद्ध सामग्री और पेट भर देने वाली मात्रा के चलते यह चाट रोजाना बड़ी संख्या में ग्राहकों को अपनी ओर खींच रही है। सिर्फ 35 रुपए प्रति प्लेट की बेहद किफायती कीमत होने के कारण यहां हर दिन करीब 150 प्लेट टिकिया चाट आसानी से बिक जाती है। दोपहर 1 बजे से लेकर रात 8 बजे तक इस प्रतिष्ठान के बाहर चाट चखने वालों का तांता लगा रहता है। बनारस से बालोद तक स्वाद का सफर इस लोकप्रिय चाट को तैयार करने वाले कारीगर प्रेमचंद मूल रूप से उत्तर प्रदेश के बनारस के रहने वाले हैं। उनका कहना है कि बनारसी चाट की अपनी एक अलग तासीर, खुशबू और पहचान होती है, जिसे वे पिछले कई वर्षों से लगातार बालोद के बाशिंदों तक पहुंचा रहे हैं। अपनी इसी अनूठी पहचान के कारण यह चाट शहर के आम नाश्ते से अलग हटकर अपनी मजबूत जगह बना चुकी है। दोपहर ढलते ही शाम तक दुकान के आसपास युवाओं और परिवारों की चहल-पहल साफ देखी जा सकती है। आलू, बेसन और चना दाल का अनोखा मेल प्रेमचंद के अनुसार इस खास टिकिया को तैयार करने में मुख्य घटक के रूप में आलू, बेसन और चना दाल का उपयोग किया जाता है। इन मुख्य चीजों के साथ जीरा, नमक और अन्य जरूरी मसालों का संतुलित मिश्रण तैयार कर टिकिया बनाई जाती है। गर्म टिकिया पर स्वादिष्ट चटनी और मसाले डालकर जब ग्राहकों को परोसा जाता है, तो इसका लाजवाब स्वाद लोगों को खूब भाता है। चाट की सबसे बड़ी खासियत इसका पारंपरिक स्वाद और मात्रा का भरपूर होना है, जिससे एक बार आने वाला ग्राहक बार-बार यहां खिंचा चला आता है। 18 वर्षों का अनुभव और लगन की कहानी प्रेमचंद इस पेशे में पिछले 18 वर्षों से सक्रिय हैं और लगातार अपने हुनर को निखार रहे हैं। उन्होंने यह कारीगरी अपने गांव बनारस में ही सीखी थी, जहां वे शुरुआती दिनों में चाट की एक सामान्य दुकान पर हेल्पर के तौर पर काम किया करते थे। वहीं काम करते हुए उन्होंने चाट के मसालों के संतुलन और टिकिया की हर बारीकी को गहराई से सीखा। आगे चलकर इसी हुनर को उन्होंने अपनी आजीविका का मुख्य साधन बना लिया। बनारस की गलियों से सीखा गया यही अनुभव आज बालोद में एक सफल स्ट्रीट फूड पहचान बन चुका है। इसका आप पर असर यह खबर स्थानीय खाने-पीने के शौकीनों को कम बजट में बेहतरीन पारंपरिक स्ट्रीट फूड का विकल्प उपलब्ध कराती है। • बालोद में: घड़ी चौक स्थित बीकानेर स्वीट्स पर जाने वाले लोग दोपहर 1 बजे से रात 8 बजे के बीच इसका स्वाद ले सकते हैं। ग्राहक मात्र 35 रुपए में शुद्ध और पेट भर देने वाली बनारसी टिकिया चाट का आनंद उठा सकते हैं। • किफायती खान-पान: महंगाई के दौर में यह स्टॉल आम बजट वाले ग्राहकों के लिए बढ़िया विकल्प पेश करता है। हर वर्ग के लोग बिना जेब पर बोझ डाले पारंपरिक स्वाद का अनुभव कर सकते हैं। • स्थानीय स्वरोजगार: छोटे शहरों में बाहरी पारंपरिक व्यंजनों की लोकप्रियता नए हुनरमंद कारीगरों को स्वरोजगार के अवसर देती है। यह दिखाता है कि प्रामाणिक स्वाद और उचित मूल्य के दम पर स्थानीय स्तर पर मजबूत ग्राहक वर्ग बनाया जा सकता है। • समय की सुविधा: दोपहर से लेकर देर शाम तक लगातार बिक्री होने से नौकरीपेशा और बाजार आने वाले लोगों को सुविधा मिलती है। ग्राहक अपनी सुविधानुसार शाम के नाश्ते के रूप में इसे चुन सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ बालोद में इस बनारसी टिकिया चाट की लोकप्रियता के पीछे प्रामाणिक स्वाद, किफायती दाम और बनाने वाले कारीगर का लंबा अनुभव है। • प्रामाणिक बनारसी स्वाद: चाट बनाने वाले प्रेमचंद स्वयं उत्तर प्रदेश के बनारस से आते हैं और वहीं की पारंपरिक शैली का पालन करते हैं। सामग्री में आलू, बेसन और चना दाल का सही अनुपात इस चाट को स्थानीय विकल्पों से अलग बनाता है। • किफायती मूल्य और भरपूर मात्रा: महज 35 रुपए की दर पर पर्याप्त मात्रा मिलना ग्राहकों को आकर्षित करने का बड़ा कारण बना है। ग्राहक संतुष्टि के चलते रोज लगभग 150 प्लेटों की लगातार बिक्री संभव हो पाई है। • कारीगर का 18 साल का अनुभव: प्रेमचंद ने बनारस में हेल्पर के तौर पर शुरुआत कर करीब 18 वर्षों में इस हुनर को गहराई से साधा है। मसालों का संतुलित प्रयोग और टिकिया तैयार करने की निपुणता ने ग्राहकों का भरोसा जीता है। सवाल-जवाब 1. बालोद में यह बनारसी चाट कहां मिलती है? यह चाट छत्तीसगढ़ के बालोद शहर में घड़ी चौक स्थित बीकानेर स्वीट्स पर उपलब्ध है। 2. एक प्लेट टिकिया चाट की कीमत कितनी है? टिकिया चाट की एक प्लेट की कीमत 35 रुपए है। 3. दुकान पर चाट मिलने का समय क्या है? दुकान पर चाट दोपहर 1 बजे से लेकर रात 8 बजे तक मिलती है। 4. टिकिया चाट बनाने में किन मुख्य सामग्रियों का इस्तेमाल होता है? इसे बनाने में मुख्य रूप से आलू, बेसन, चना दाल, जीरा, नमक और जरूरी मसालों का उपयोग किया जाता है। 5. चाट बनाने वाले कारीगर कौन हैं और उनका अनुभव कितना है? चाट बनाने वाले कारीगर बनारस निवासी प्रेमचंद हैं, जिन्हें चाट बनाने का 18 वर्षों का अनुभव है। 6. दुकान पर रोजाना कितनी प्लेट चाट बिक जाती है? दुकान पर रोजाना लगभग 150 प्लेट टिकिया चाट की बिक्री होती है। प्रेरणा और सबक प्रेमचंद का सफर यह सिखाता है कि जमीनी स्तर पर सीखी गई मेहनत और हुनर किसी भी इंसान को आत्मनिर्भर बना सकते हैं। • जमीनी स्तर से शुरुआत: प्रेमचंद ने अपने गांव में चाट की दुकान पर हेल्पर का काम करके शुरुआत की थी। कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने काम को छोटा नहीं समझा और लगन से सीखते रहे। • हुनर को आजीविका बनाना: वर्षों के अभ्यास से उन्होंने स्वाद और रेसिपी की हर बारीकी पर महारत हासिल की। उसी हुनर को आगे चलकर अपनी स्वतंत्र आजीविका का मजबूत आधार बनाया। • गुणवत्ता और ईमानदारी: केवल 35 रुपए में अच्छी क्वालिटी और भरपूर मात्रा देकर उन्होंने ग्राहकों का अटूट भरोसा जीता। निष्ठा और उचित मूल्य के दम पर किसी भी नए शहर में पहचान बनाई जा सकती है। https://trendkia.com/chhattisgarh/balod-men-banarasi-tikiya-chata-ka-jalava-35-ki-pleta-ke-lie-umara-rahe-khane-ke-shaukina-33729 TrendKia — Har trend, sabse pehle.