बांग्लादेश से कश्मीर तक फैला युवतियों की तस्करी का नेटवर्क, रेलवे पुलिस की धरपकड़ में सामने आया पूरा खेल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से म्यांमार की लड़कियों को बहला-फुसलाकर सीमा पार कराने और कश्मीर में बेचने वाले एक बड़े गिरोह की कड़ियां खुली हैं, जिसमें छह गिरफ्तारियों के बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी को जांच सौंपने की तैयारी है। म्यांमार से ताल्लुक रखने वाली लड़कियों को बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों से गैरकानूनी रास्तों के जरिए भारत में दाखिल कराकर जम्मू-कश्मीर तक खपाने वाले एक सुनियोजित मानव तस्करी गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। रेलवे पुलिस ने हाल ही में कार्रवाई करते हुए छह रोहिंग्या मुसलमानों को हिरासत में लिया, जिनमें दो युवक और चार लड़कियां शामिल हैं। जांच के दौरान पता चला कि इन लड़कियों में से दो नाबालिग हैं, जिन्हें गैरकानूनी ढंग से सीमा पार कराकर भारत लाया गया था। इस नेटवर्क की योजना इन चारों लड़कियों की जम्मू-कश्मीर में जबरन शादी कराने की थी। पुलिसिया पूछताछ में तस्करों के पूरे वित्तीय ढांचे, लड़कियों की सौदेबाजी की दरों और दलालों के बीच कमीशन के बंटवारे से जुड़े चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। सौदा, कीमतें और दलालों का कमीशन जांच में खुलासा हुआ है कि इस गिरोह के जरिए युवतियों की सौदेबाजी 80 हजार रुपये से लेकर 1.20 लाख रुपये के बीच तय की जाती थी। इस पूरे गोरखधंधे में जमीनी स्तर पर आवाजाही कराने वाले बिचौलियों को प्रति युवती 15 से 20 हजार रुपये का कमीशन मिलता था। कमीशन काटने के बाद बची हुई बड़ी रकम सीमा पार बांग्लादेश में मौजूद नेटवर्क के सरगना हमदुल्ला तक विभिन्न जरियों से पहुंचाई जाती थी। पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने करीब 25 दिन पहले भी बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर से अवैध रास्तों से दो युवतियों को भारत लाकर श्रीनगर में 80-80 हजार रुपये में बेचा था। उस सौदे में हसन नाम के बिचौलिए को प्रति युवती 15-15 हजार रुपये मिले थे, जबकि बाकी रकम श्रीनगर के स्थानीय एजेंट के माध्यम से हमदुल्ला को भेजी गई थी। श्रीनगर में मौजूद एजेंट इन लड़कियों को केवल शादी के नाम पर ही नहीं, बल्कि विभिन्न घरों में घरेलू काम कराने के लिए भी झोंक देता था। भोपाल से अलीगढ़ तक पुलिस की दबिश इस पूरे गिरोह पर शिकंजा कसने की शुरुआत करीब पांच दिन पहले हुई, जब भोपाल जीआरपी से मिले इनपुट के आधार पर स्वर्ण जयंती एक्सप्रेस ट्रेन में छापेमारी की गई। इस कार्रवाई के दौरान म्यांमार के बूशीदांग धम्बाजार के निवासी मुबीन को पकड़ा गया। मुबीन से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो उसने मोहम्मद हसन के ठिकाने के बारे में सुराग दिया। इसके तुरंत बाद पुलिस दल ने अलीगढ़ में हसन के ठिकाने पर छापेमारी की, जहां से दो नाबालिग लड़कियों को सकुशल बरामद किया गया। फिलहाल इन दोनों लड़कियों को सुरक्षित तरीके से वापस भेजने की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कुतुपलोंग कैंप से कश्मीर तक का तस्करी रूट जांच अधिकारियों को पता चला है कि इस सिंडिकेट का जाल बांग्लादेश के कुतुपलोंग शरणार्थी शिविर से शुरू होता है। वहां मौजूद हमदुल्ला गरीब परिवारों को झांसा देता था कि उनकी बेटियों को भारत में सुरक्षित नौकरी और अच्छा वैवाहिक रिश्ता मिलेगा। परिवार के राजी होते ही लड़कियों को अवैध तरीके से सीमा पार कराने की तैयारी शुरू होती थी। आरोप के मुताबिक, मोहम्मद अली नाम का शख्स रात के अंधेरे में लड़कियों को नदी पार कराता था और फिर करीब पांच घंटे तक जंगलों के दुर्गम रास्तों पर पैदल चलाकर भारत की सीमा में दाखिल कराता था। भारतीय सीमा में प्रवेश करने के बाद लड़कियों को सबसे पहले हावड़ा पहुंचाया जाता था। वहां से उन्हें ट्रेन के जरिए अलीगढ़ भेजा जाता था, जिसके बाद अलीगढ़ से जम्मू और फिर निजी टैक्सियों के जरिए घाटी के श्रीनगर तक ले जाया जाता था। इस पूरे ट्रांसपोर्टेशन नेटवर्क में मुबीन और आदिल की सक्रिय भूमिका सामने आई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंटेलिजेंस ब्यूरो और एटीएस पहले ही आरोपियों से पूछताछ कर चुके हैं, वहीं एसपी रेल अंकित जायसवाल के अनुसार पूरे नेटवर्क की तह तक जाने के लिए एनआईए को औपचारिक पत्र भेजा गया है। इसका आप पर असर यह मामला अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर अवैध मानव तस्करी के बढ़ते खतरे और कानूनी सुरक्षा तंत्र की सतर्कता को दर्शाता है। • भारत में: सीमा सुरक्षा बलों और रेलवे नेटवर्क पर निगरानी कड़ी करने की जरूरत रेखांकित हुई है। लंबी दूरी की ट्रेनों और अंतरराज्यीय परिवहन में सतर्कता बढ़ने से संदिग्ध यात्राओं और दस्तावेजों की जांच अधिक सख्त हो सकती है। • जम्मू-कश्मीर में: राज्य में बिना स्थानीय सत्यापन के घरेलू सहायकों को रखने और बाहरी शादियों के नाम पर होने वाले सौदों पर प्रशासनिक नजर बढ़ाई जाएगी। स्थानीय निवासियों को किसी भी संदिग्ध दलाल या गैरकानूनी गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को देने की सलाह दी जाती है। • यात्रियों के लिए: ट्रेनों में किसी भी संदिग्ध समूह या जबरन ले जाई जा रही महिलाओं को देखने पर तुरंत रेलवे हेल्पलाइन पर संपर्क किया जा सकता है। समय पर दी गई सूचना पीड़ितों को बचा सकती है। • कानूनी कार्रवाई: राष्ट्रीय स्तर की जांच एजेंसियों के शामिल होने से सीमावर्ती इलाकों में सक्रिय अन्य दलालों और एजेंटों पर कानूनी शिकंजा कसने की प्रक्रिया तेज होगी। इससे भविष्य में ऐसे संगठित नेटवर्क को तोड़ा जा सकेगा। ऐसा क्यों हुआ यह तस्करी नेटवर्क सीमा पार के शरणार्थी शिविरों में रहने वाले असहाय परिवारों की गरीबी और मजबूरी का फायदा उठाकर चलाया जा रहा था। गिरोह के सदस्यों ने संगठित तरीके से काम बांट रखा था ताकि पकड़े जाने का खतरा कम से कम रहे। • झूठे वादों का जाल: बांग्लादेश के कुतुपलोंग शरणार्थी शिविर में हमदुल्ला नाम का सरगना परिवारों को लड़कियों के लिए अच्छी नौकरी और शादी का झांसा देकर राजी करता था। इस भरोसे के बाद ही परिवार अपनी बेटियों को सीमा पार भेजने के लिए तैयार होते थे। • अवैध सीमा पार कराने का तंत्र: मोहम्मद अली नाम का आरोपी रात के अंधेरे में नदी पार कराकर और घने जंगलों में पांच घंटे पैदल चलाकर लड़कियों को भारतीय सीमा में दाखिल कराता था। इस दुर्गम रास्ते से वे नियमित सुरक्षा जांच से बच निकलते थे। • संगठित लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन: भारत में प्रवेश के बाद पीड़ितों को हावड़ा, फिर अलीगढ़, जम्मू और अंत में निजी टैक्सियों से श्रीनगर पहुंचाया जाता था। मुबीन और आदिल जैसे बिचौलिए इस लंबी यात्रा के अलग-अलग चरणों का प्रबंधन करते थे। • जांच का अगला चरण: गिरोह के अंतरराज्यीय और विदेशी संपर्कों को देखते हुए अब मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपने की प्रक्रिया शुरू की गई है। अभी जांच जारी है ताकि नेटवर्क के अन्य वित्तीय संपर्कों और दलालों का पता लगाया जा सके। सवाल-जवाब 1. रेलवे पुलिस ने इस मामले में कितने लोगों को पकड़ा है? रेलवे पुलिस ने छह रोहिंग्या मुसलमानों को पकड़ा है, जिनमें दो युवक और चार लड़कियां शामिल हैं। 2. बरामद की गई लड़कियों में कितनी नाबालिग थीं? बरामद की गई लड़कियों में से दो लड़कियां नाबालिग पाई गईं, जिन्हें अलीगढ़ में दबिश देकर छुड़ाया गया। 3. तस्कर लड़कियों को किस कीमत पर बेचते थे? तस्कर युवतियों का सौदा 80 हजार रुपये से लेकर 1.20 लाख रुपये तक में करते थे। 4. इस सौदेबाजी में बिचौलियों को कितना कमीशन मिलता था? इस गोरखधंधे में बिचौलियों को प्रति युवती 15 हजार से 20 हजार रुपये का कमीशन मिलता था। 5. पीड़ित लड़कियों को भारत में किस मार्ग से लाया जाता था? लड़कियों को रात में नदी और पांच घंटे जंगल के रास्ते से भारत लाकर हावड़ा, अलीगढ़, जम्मू होते हुए श्रीनगर पहुंचाया जाता था। 6. मामले की आगे की जांच कौन सी एजेंसी करेगी? एसपी रेल अंकित जायसवाल के अनुसार मामले की विस्तृत जांच के लिए एनआईए को पत्र भेजा गया है। https://trendkia.com/chhattisgarh/bangladesh-se-kashmir-taka-phaila-yuvatiyon-ki-taskari-ka-netavarka-railway-police-ki-dharapakara-men-samane-aya-pura-khela-43685 TrendKia — Har trend, sabse pehle.