बस्तर में 2010 जैसी भयंकर बाढ़ का प्रकोप, एमआई-17 से एयरलिफ्ट और 42 कैंपों में हजारों शरणार्थी बस्तर में भारी बारिश और डेम से पानी छोड़े जाने के कारण 2010 जैसी बाढ़ आ गई है। वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर की मदद से लोगों को निकाला गया है और 42 राहत शिविरों में 4,798 बेघर लोगों को शरण दी गई है। बस्तर संभागीय मुख्यालय जगदलपुर सहित पूरे जिले में बाढ़ के हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के असर से लगातार पांच दिनों तक भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्य उड़ीसा के खातिगुड़ा डेम से भी भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया है, जिससे इंद्रावती नदी और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बेहद तेजी से ऊपर उठ गया है। नदियों के इस उफान के चलते कई गांव, बस्तियां और निचले इलाके पूरी तरह से पानी में डूब गए हैं और जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। प्रवीर और विजय वार्ड बने जलमग्न जगदलपुर शहर के प्रवीर वार्ड, विजय वार्ड और महादेव घाट जैसे इलाकों में तेजी से पानी भर गया है। शुरुआती दौर में स्थानीय निवासियों को यह उम्मीद थी कि बाढ़ का यह पानी जल्द ही उतर जाएगा, जिसके चलते लोग अपने घरों के भीतर ही रुके रहे। हालांकि, इंद्रावती नदी का जलस्तर अचानक और अधिक बढ़ने से चारों तरफ पानी भर गया और लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गईं। राहत की बात यह रही कि बारिश थमने के बाद रविवार की शाम को जलस्तर में कुछ कमी आनी शुरू हुई है। एमआई-17 हेलिकॉप्टर से चलाया गया रेस्क्यू घरों में पानी तेजी से भरने के बाद बस्तर पुलिस प्रशासन, निगम प्रशासन, एसडीआरएफ और नगर सेना ने मिलकर युद्धस्तर पर बचाव अभियान शुरू किया। बाढ़ बचाव दल ने पिछले दो दिनों में कुल 817 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है। वहीं, अंदरूनी और दुर्गम क्षेत्रों में फंसे 16 लोगों को भारतीय वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। विजय वार्ड के वार्ड पार्षद गौतम पाणिग्रही के अनुसार भी क्षेत्र के हालात बेहद चिंताजनक बने हुए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। 42 राहत शिविरों में 4798 लोगों ने ली शरण इस भीषण बाढ़ की वजह से कई लोगों के कच्चे-पक्के मकान क्षतिग्रस्त हो गए हैं और घरों में रखा जरूरी सामान तथा राशन पानी में बह गया है। जिला प्रशासन ने स्थिति से निपटने के लिए पूरे बस्तर जिले में कुल 42 राहत शिविर स्थापित किए हैं। इन शिविरों में कुल 4,798 बाढ़ प्रभावित लोगों ने शरण ले रखी है। इनमें से शहर के भीतर बनाए गए 7 राहत शिविरों में 1,808 लोग ठहरे हुए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के 35 शिविरों में 2,990 लोग रह रहे हैं। भोजन और चिकित्सा सुविधाओं का प्रबंध प्रशासन की तरफ से इन सभी राहत शिविरों में महिलाओं, पुरुषों, बुजुर्गों और छोटे बच्चों के लिए खाने-पीने और अन्य जरूरी बुनियादी सुविधाओं का पूरा इंतजाम किया गया है। इसके अलावा, शहर की तमाम सामाजिक संस्थाएं और जागरूक स्थानीय नागरिक भी खुलकर मदद के लिए आगे आए हैं। ये लोग शिविरों में पहुंचकर प्रभावितों को भोजन, नाश्ता, पेयजल, फल और बिस्किट वितरित कर रहे हैं, ताकि किसी को भी किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े। प्रशासन की मुस्तैदी और आगे का खतरा प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार जगदलपुर में फिलहाल बारिश का सिलसिला थम चुका है। हालांकि, इंद्रावती नदी का जलस्तर अभी भी ऊंचा बना हुआ है, जिसके कारण खतरा पूरी तरह टला नहीं है। अधिकारियों का मानना है कि पानी को पूरी तरह उतरने में अभी दो से तीन दिनों का वक्त और लग सकता है। गौर करने वाली बात यह है कि बस्तर में इससे पहले ठीक ऐसी ही भीषण बाढ़ वर्ष 2010 में आई थी। फिलहाल, किसी भी अनहोनी से निपटने के लिए राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित इलाकों में पूरी तरह मुस्तैद हैं। इसका आप पर असर बस्तर और जगदलपुर के प्रभावित इलाकों के आम नागरिकों को भारी जलभराव, मकानों के नुकसान और आवागमन में गंभीर बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। • छत्तीसगढ़ में: बस्तर और जगदलपुर के निचले इलाकों में रहने वाले परिवारों को अपना घर छोड़कर राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है। प्रशासन प्रभावितों को भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है। • यात्रा और जनजीवन: नदियों के उफान पर होने और सड़कों पर पानी भरने से यातायात बुरी तरह प्रभावित हुआ है और स्थिति सामान्य होने में अभी कुछ दिन और लगेंगे। ऐसा क्यों हुआ बस्तर में आई इस भीषण बाढ़ का मुख्य कारण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के प्रभाव से लगातार पांच दिनों तक हुई मूसलाधार बारिश और पड़ोसी राज्य उड़ीसा के बांध से पानी छोड़ा जाना है। • लगातार बारिश: चक्रवाती प्रणाली के कारण क्षेत्र में पांच दिनों तक भारी वर्षा हुई, जिससे जलस्रोतों का स्तर अचानक बढ़ गया। • बांध से पानी छोड़ा जाना: उड़ीसा के खातिगुड़ा डेम से पानी छोड़े जाने के कारण इंद्रावती नदी और उसकी सहायक नदियां खतरे के निशान से ऊपर बहने लगीं। • भौगोलिक स्थिति: निचले इलाकों और बस्तियों में पानी का तेजी सेिकास न होने के कारण रिहायशी इलाकों में पानी भर गया और स्थिति गंभीर हो गई। सवाल-जवाब 1. बस्तर में बाढ़ की मुख्य वजह क्या है? चक्रवात अर्नब के प्रभाव से पांच दिन की भारी बारिश और उड़ीसा के खातिगुड़ा डेम से पानी छोड़ा जाना बाढ़ की मुख्य वजह है। 2. कितने लोगों को राहत शिविरों में ठहराया गया है? बस्तर जिले के 42 राहत शिविरों में कुल 4,798 बाढ़ प्रभावित लोगों ने शरण ली है। 3. वायुसेना के हेलिकॉप्टर से कितने लोगों को निकाला गया? दुर्गम और अंदरूनी क्षेत्रों में फंसे 16 लोगों को वायुसेना के एमआई-17 हेलिकॉप्टर की मदद से एयरलिफ्ट किया गया। 4. जगदलपुर में कौन से वार्ड सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं? प्रवीर वार्ड, विजय वार्ड और महादेव घाट जैसे इलाके बाढ़ से सबसे ज्यादा जलमग्न हुए हैं। 5. इससे पहले बस्तर में ऐसी भीषण बाढ़ कब आई थी? बस्तर में इससे पहले वर्ष 2010 में ऐसी भयंकर बाढ़ आई थी। https://trendkia.com/chhattisgarh/bastar-faces-worst-floods-since-2010-as-mi-17-rescues-stranded-residents-and-4-798-take-shelter-in-42-camps-39632 TrendKia — Har trend, sabse pehle.