# बस्तर का पारंपरिक स्वाद: मिट्टी की हांडी में बनाएं रखिया बड़ी, सहजन और सब्जियों का देसी रसा

> छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में मिट्टी के बर्तनों में धीमी आंच पर पकने वाली रखिया बड़ी और मौसमी सब्जियों की रसेदार करी सादगी व बेहतरीन स्वाद का अनोखा संगम पेश करती है।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-10-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bastar-ka-parnparika-svada-mitti-ki-handi-men-banaen-rakhiya-badi-sahajana-aura-sabjiyon-ka-desi-rasa-45274 · **Language:** Hindi
**Tags:** बस्तर व्यंजन, रखियां बड़ी, देसी रेसिपी, पारंपरिक खाना, सब्जी रेसिपी

पारंपरिक खानपान की सादगी और मिट्टी की सौंधी खुशबू का आनंद लेना हो, तो बस्तर की रसोई में बनने वाली मौसमी सब्जियों का रसा एक बेहतरीन उदाहरण है। छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में रखिया बड़ी के साथ आलू, बैंगन और मूंगा (सहजन) को मिलाकर बेहद सादे मसालों में एक खास देसी रसेदार सब्जी पकाई जाती है। इस व्यंजन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे आज भी पारंपरिक रूप से आग पर रखे मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया जाता है। हल्की आंच और मिट्टी की हांडी के मेल से सब्जियों का स्वाभाविक रस और बड़ी का तीखापन आपस में मिलकर बेहद लाजवाब जायका तैयार करते हैं।

## रसोई के लिए जरूरी सामग्री और सही माप
इस पारंपरिक करी को बनाने के लिए किसी भारी-भरकम मसाले या जटिल तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती। इसे तैयार करने के लिए मुख्य सामग्रियों की सूची इस प्रकार है

- **मुख्य सब्जियां और बड़ी:** दो रखिया बड़ी, दो कटे हुए मध्यम आलू, दो कटे हुए बैंगन और दो कटी हुई मूंगा (सहजन की फलियां)।
- **तड़का और मसाले:** दो मिर्च, कटी हुई प्याज, कटे हुए टमाटर, हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक।
- **अन्य सामग्री:** भूनने के लिए तेल और तरी बनाने के लिए एक गिलास पानी।

## मिट्टी के बर्तन में पकाने की पारंपरिक विधि
इस व्यंजन को पकाने की शुरुआत मिट्टी के बर्तन को चूल्हे या आग पर चढ़ाकर की जाती है। सबसे पहले मिट्टी की हांडी में तेल डालकर अच्छी तरह गर्म करें। तेल के गर्म होते ही इसमें सूखी मिर्च और बारीक कटी हुई प्याज डालकर धीमी आंच पर सुनहरा होने तक भूनें। प्याज के भुन जाने पर बर्तन में रखिया बड़ी, कटे हुए आलू, बैंगन और मूंगा की फलियों को एक साथ डालकर पकाया जाता है, ताकि बड़ी और कड़े टुकड़े तेल के साथ अच्छी तरह सिक जाएं।

सब्जियों के थोड़े नरम पड़ते ही इसमें कटे हुए टमाटर शामिल किए जाते हैं। टमाटर के साथ ही हल्दी पाउडर, लाल मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर मिश्रण को कुछ देर तक लगातार भूना जाता है, जिससे मसालों का कच्चापन खत्म हो जाए और टमाटर पूरी तरह गल जाएं। जब सारी सामग्रियां अच्छी तरह भुन जाएं, तब इसमें तरी के लिए एक गिलास पानी डाला जाता है। इसके बाद हांडी को धीमी आंच पर तब तक उबलने दिया जाता है जब तक कि रसा गाढ़ा न हो जाए और सहजन व बड़ी पूरी तरह पक न जाएं। आंच से उतारने के बाद यह गरमागरम देसी रसेदार सब्जी खाने के लिए तैयार हो जाती है, जिसे रोटी या उबले चावल के साथ बेहद चाव से खाया जाता है।

## इसका आप पर असर
पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों में कम मसालों से बनने वाली यह सब्जी रोजमर्रा के खानपान में पौष्टिक और बेहद किफायती विकल्प उपलब्ध कराती है।

- **घरेलू बजट और रसोई:** केवल दो-दो सब्जियों और बेसिक मसालों के साथ यह पूरी तैयारी बेहद किफायती तरीके से तैयार हो जाती है। कम लागत में पूरे परिवार के लिए एक पौष्टिक भोजन मिनटों में बन जाता है।
- **स्वास्थ्य और पाचन:** मिट्टी के बर्तन में धीमी आंच पर पकने के कारण सब्जियों के पोषक तत्व सुरक्षित रहते हैं। सहजन और कम मसालों का संयोजन इसे पेट के लिए हल्का और सुपाच्य बनाता है।
- **पारंपरिक बर्तनों का उपयोग:** रसोई में मिट्टी की हांडी का इस्तेमाल भोजन को स्वाभाविक सौंधी महक देता है। रोज के भोजन में भारी तेल-मसालों की निर्भरता घटाने के लिए इसे अपनी रसोई में शामिल किया जा सकता है।
- **भोजन की विविधता:** इसे सादे उबले चावल और सादी रोटी दोनों के साथ आसानी से परोसा जा सकता है। दिन के भोजन या रात के खाने में यह एक संतुलित क्षेत्रीय स्वाद जोड़ती है।

## ऐसा क्यों हुआ
बस्तर क्षेत्र में मिट्टी के बर्तनों और देसी सब्जियों के मेल से बनने वाली यह करी स्थानीय खानपान की सादगी और उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग पर आधारित है।

- **क्षेत्रीय परंपरा:** बस्तर में ग्रामीण रसोई में चूल्हे की आंच और मिट्टी के बर्तनों का इस्तेमाल सदियों से स्वाभाविक रहा है। यह तरीका भोजन के प्राकृतिक स्वाद को बिना भारी मसालों के उभारने के लिए अपनाया जाता है।
- **सामग्रियों की स्थानीय उपलब्धता:** रखिया बड़ी, सहजन और मौसमी बैंगन मध्य भारत के ग्रामीण अंचलों में आसानी से घर-घर सुलभ होते हैं। इन्हें मिलाकर तरीदार सब्जी बनाना समय और सामग्री दोनों की बचत करता है।
- **सब्जियों का संतुलित संयोजन:** कड़े छिलके वाली सहजन और सूखी बड़ी को तरी में पकाने से ग्रेवी का स्वाद गाढ़ा और संतुलित हो जाता है। यही वजह है कि इस खास संयोजन को क्षेत्र में नियमित रूप से पसंद किया जाता है।

## सवाल-जवाब

### 1. बस्तर की इस खास सब्जी में कौन-कौन सी मुख्य सामग्रियां डलती हैं?
इसमें दो रखिया बड़ी, दो कटे आलू, दो कटे बैंगन, दो कटी हुई मूंगा (सहजन), दो मिर्च, प्याज, टमाटर, हल्दी, मिर्च पाउडर, नमक और एक गिलास पानी की जरूरत होती है।

### 2. सब्जी को मिट्टी के बर्तन में पकाने से क्या फायदा होता है?
मिट्टी के बर्तन में आंच पर पकने से इसमें खास सौंधापन आता है और इसका प्राकृतिक स्वाद काफी बढ़ जाता है।

### 3. तरी बनाने के लिए इसमें कितना पानी डाला जाता है?
मसाले और टमाटर भूनने के बाद तरीदार रसा तैयार करने के लिए इसमें ठीक एक गिलास पानी डाला जाता है।

### 4. इस देसी रसेदार सब्जी को किन चीजों के साथ परोसा जाता है?
तैयार होने के बाद इस रसेदार सब्जी को गरमागरम रोटी और चावल के साथ परोसा जा सकता है।

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