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  "title": "बस्तर के जगदलपुर में कांतारा फिल्म की तर्ज पर सजा अनोखा दुर्गा पंडाल, बांस की कारीगरी बनी मुख्य आकर्षण",
  "summary": "जगदलपुर के संतोषी वार्ड में 28वें साल के उपलक्ष्य में कांतारा सेट की शैली पर विशेष दुर्गा पंडाल तैयार किया गया है, जिसके निर्माण में मुख्य रूप से बांस का उपयोग हुआ है।",
  "content": "नवरात्रि के पावन उत्सव को लेकर बस्तर जिले के जगदलपुर में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शहर के अलग-अलग वार्डों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाओं की स्थापना को लेकर अंतिम चरण की तैयारियां चल रही हैं, जहां कल विधि-विधान से माता की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इन सबके बीच संतोषी वार्ड में तैयार किया जा रहा एक अनूठा दुर्गा पंडाल पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना हुआ है। इस पंडाल को मशहूर फिल्म 'कांतारा' के पारंपरिक सेट की तर्ज पर डिजाइन किया गया है, जिसके चलते दशहरा पर्व के दौरान यहां भारी संख्या में श्रद्धालुओं और दर्शकों के उमड़ने की संभावना जताई जा रही है।\n\n28 वर्षों की परंपरा और नया प्रयोग\nसंतोषी वार्ड में दुर्गा पूजा के आयोजन का इतिहास काफी पुराना है। स्थानीय लोग और आयोजन समिति यहां बीते 28 वर्षों से लगातार माता की प्रतिमा स्थापित करते आ रहे हैं। इस वर्ष समिति ने अपने पारंपरिक आयोजन में एक नया रूप देने की योजना बनाई। समिति के सदस्य रघु नायडू ने जानकारी दी कि उन्होंने दुर्ग और रायपुर में कांतारा फिल्म के सेट से प्रेरित पंडालों को देखा था, जहां लोगों ने उस अनूठे प्रारूप को खूब सराहा था। इसी से प्रेरित होकर जगदलपुर के श्रद्धालुओं और आम नागरिकों को कुछ नया अनुभव देने के उद्देश्य से संतोषी वार्ड में भी इसी शैली का पंडाल स्थापित करने का निर्णय लिया गया।\n\nबांस की नक्काशी और निर्माण की लागत\nइस पंडाल की सबसे बड़ी खासियत इसका अग्रभाग है, जिसे पूरी तरह से प्राकृतिक बांस का उपयोग करके तैयार किया गया है। जगदलपुर के इतिहास में यह पहला अवसर है जब किसी पूजा पंडाल के निर्माण में इतने व्यापक पैमाने पर बांस की कारीगरी का प्रयोग किया गया है। पूरे ढांचे और साज-सज्जा पर लगभग 3 लाख से 4.5 लाख रुपये तक का खर्च आ रहा है। इस बजट में भव्य लाइटिंग और प्रकाश व्यवस्था का पूरा खर्च भी शामिल किया गया है, जो शाम के समय पंडाल की सुंदरता को और बढ़ाएगा।\n\nकोलकाता के कारीगरों की 12 दिनों की मेहनत\nइस अनूठे पंडाल को आकार देने के लिए पश्चिम बंगाल से कुशल शिल्पकारों को बुलाया गया है। कोलकाता से आए प्रमुख पंडाल निर्माता शंकर ने बताया कि उनकी टीम पिछले लगभग 12 दिनों से लगातार इस निर्माण कार्य में जुटी हुई है। उन्होंने कहा कि समिति और स्थानीय लोगों की मांग कुछ अलग और आकर्षक बनाने की थी, जिसके चलते पूरी तरह बांस के ढांचों को तराश कर कांतारा शैली का यह अनूठा रूप गढ़ा जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nत्योहारी सीजन में जगदलपुर और आसपास के श्रद्धालुओं को इस बार नवरात्रि में एक अनूठा सांस्कृतिक व कलात्मक अनुभव देखने को मिलेगा।\n\n• जगदलपुर और बस्तर में: स्थानीय निवासियों और दशहरा पर्व में शामिल होने वाले पर्यटकों को संतोषी वार्ड में एक नया दर्शनीय स्थल मिलेगा। यदि आप इस पंडाल और बांस की कारीगरी को देखना चाहते हैं, तो शाम के समय लाइटिंग के साथ इसका अवलोकन कर सकते हैं।\n• त्योहारी भीड़ और आवागमन: संतोषी वार्ड क्षेत्र में आगामी दिनों में श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने की संभावना है। ऐसे में दर्शन के लिए जाने वाले लोग समय और भीड़ की स्थिति का ध्यान रखकर अपनी यात्रा की योजना बनाएं।\n• स्थानीय कारीगरी और थीम: अन्य आयोजन समितियों को भी पारंपरिक और पर्यावरण-अनुकूल बांस जैसी सामग्रियों से थीम आधारित पंडाल बनाने की प्रेरणा मिलेगी। इससे स्थानीय आयोजनों में विविधता और नवीनता देखने को मिल सकती है।\n• आयोजन का बजट: सीमित बजट (3 से 4.5 लाख रुपये) में भव्य थीम आधारित निर्माण का यह एक बेहतरीन उदाहरण है। छोटी पूजा समितियां भी इस तरह के रचनात्मक विचारों को अपने आयोजनों में लागू कर सकती हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह अनोखा पंडाल पारंपरिक पूजा आयोजनों में नवीनता लाने और बड़े शहरों की तर्ज पर स्थानीय स्तर पर आकर्षण पैदा करने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।\n\n• बड़े शहरों की सफलता से प्रेरणा: समिति के सदस्यों ने दुर्ग और रायपुर में कांतारा थीम वाले पंडालों की अपार लोकप्रियता और भारी जनसमूह को देखा था। उसी सफलता को देखते हुए जगदलपुर में भी इसे दोहराने का निर्णय लिया गया।\n• 28वें वर्ष का विशेष आयोजन: संतोषी वार्ड की समिति पिछले 28 वर्षों से लगातार आयोजन कर रही है और इस बार वे रजत जयंती से आगे बढ़कर कुछ विशिष्ट प्रस्तुत करना चाहते थे। इसी मांग के तहत कोलकाता के कारीगरों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।\n• प्राकृतिक सामग्री का अनूठा प्रयोग: फिल्म के पारंपरिक ग्रामीण परिवेश को यथार्थवादी रूप देने के लिए बड़े पैमाने पर बांस का चयन किया गया, जो शहर के पंडाल निर्माण के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर किया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. जगदलपुर के किस इलाके में कांतारा स्टाइल का पंडाल बनाया गया है?\nयह विशेष पंडाल जगदलपुर के संतोषी वार्ड में तैयार किया गया है।\n\n2. संतोषी वार्ड में दुर्गा पूजा का आयोजन कितने वर्षों से हो रहा है?\nसंतोषी वार्ड के लोग और समिति पिछले 28 वर्षों से लगातार दुर्गा प्रतिमा स्थापित कर रहे हैं।\n\n3. इस पंडाल की मुख्य विशेषता क्या है?\nइस पंडाल का सामने का हिस्सा पूरी तरह से बांस से तैयार किया गया है, जो जगदलपुर में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर हुआ है।\n\n4. पंडाल के निर्माण में कुल कितना खर्च आ रहा है?\nलाइटिंग सहित इस पंडाल के निर्माण में लगभग 3 लाख से 4.5 लाख रुपये की लागत आ रही है।\n\n5. पंडाल का निर्माण किस शहर के कारीगर कर रहे हैं और इसमें कितना समय लगा?\nकोलकाता से आए कारीगर शंकर और उनकी टीम लगभग 12 दिनों से इस पंडाल का निर्माण कर रही है।",
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  "category": "छत्तीसगढ़",
  "publishedAt": "2026-10-10",
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