बस्तर के किसान ने अपनाया सहफसली मॉडल, फूलगोभी और गेंदे से होगी बंपर कमाई बस्तर में छह एकड़ जमीन पर फूलगोभी और गेंदे की मिश्रित खेती कर किसान सूरदास मौर्य लागत निकालकर 1.30 लाख रुपये तक के मुनाफे की उम्मीद कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ के बस्तर इलाके में पारंपरिक खेती से हटकर नकदी फसलों के मेल से मुनाफा कमाने का एक सफल प्रयोग सामने आया है। यहां किसान सूरदास मौर्य ने लगभग छह एकड़ रकबे में एक साथ फूलगोभी और गेंदे के फूल की सहफसली खेती शुरू की है। इस तरीके की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसमें मौसम या बाजार का जोखिम काफी घट जाता है। अगर किसी कारण से एक फसल में नुकसान भी हो जाए, तो दूसरी उपज से उसकी पूरी भरपाई आसानी से हो जाती है। मौजूदा वक्त में बाजार में फूलगोभी 50 रुपये प्रति किलोग्राम और गेंदा 60 से 100 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से बिक रहा है। खेत की तैयारी और रोपाई का सही तरीका सूरदास मौर्य के अनुसार खेत की तैयारी पर विशेष ध्यान दिया गया। पहले पूरे रकबे की दो से तीन बार गहरी जुताई की गई और उसके बाद रोटावेटर चलाकर मिट्टी को भुरभुरा बनाया गया। इसके बाद चार-चार फीट की दूरी पर ऊंचे बेड तैयार किए गए। इन बेडों पर नर्सरी में पहले से तैयार किए गए पौधों की रोपाई की गई, जिसमें पौधे से पौधे की दूरी ठीक एक फीट रखी गई है। किस्मों के चुनाव में भी बाजार की मांग का ध्यान रखा गया है, जिसमें फूलगोभी हाइब्रिड वैरायटी की लगाई गई है और गेंदे के लिए कोलकाता वैरायटी का चयन किया गया है। पूरी छह एकड़ जमीन पर इस काम में कुल लागत लगभग 50 से 60 हजार रुपये आई है। पोषण प्रबंधन और कीट नियंत्रण फसलों की बढ़वार और गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पोषक तत्वों का संतुलित इस्तेमाल किया गया है। किसान ने खेत में डीएपी, गोबर की सड़ी खाद, यूरिया, पोटाश के साथ-साथ 19:19 घुलनशील खाद का उपयोग किया है। खेती के दौरान दोनों फसलों में अलग-अलग तरह की बीमारियां और कीट देखने को मिलते हैं। फूलगोभी में अक्सर पत्ता छेदक और कीटों का प्रकोप होता है, जबकि गेंदे की फसल में पौधे के सूखने की समस्या आती है। इन पर काबू पाने के लिए समय-समय पर जरूरी दवाओं का छिड़काव किया जाता है ताकि पैदावार पर कोई असर न पड़े। त्योहारी सीजन का फायदा और मुनाफे का गणित इस पूरी योजना का मुख्य केंद्र त्योहारी सीजन में मिलने वाली ऊंची कीमतें हैं। आने वाले महीनों में दुर्गा पूजा और दिवाली के समय गेंदे के फूलों की भारी मांग रहती है, जब यह फसल पूरी तरह तैयार होकर तुड़ाई के लिए उपलब्ध होगी। समय चक्र के हिसाब से फूलगोभी की फसल 45 से 60 दिनों के भीतर तैयार हो जाती है, जिससे अकेले लगभग 50,000 रुपये तक की कमाई का अनुमान है। गोभी की कटाई के बाद उसी खेत में गेंदे की फसल अगले 3 महीने तक लगातार फूल देती रहती है, जिससे खेत खाली नहीं रहता और जमीन का पूरा उपयोग होता है। लागत काटकर छह एकड़ से गेंदा और गोभी दोनों मिलाकर कुल शुद्ध मुनाफा लगभग 1 लाख से 1 लाख 30 हजार रुपये तक रहने की संभावना है। इसका आप पर असर यह सहफसली मॉडल दिखाता है कि छोटे और मझोले किसान किस तरह एक ही खेत में दो अलग-अलग फसलें लगाकर लागत और बाजार का जोखिम घटा सकते हैं। • भारत में: देश भर के किसान सीमित जमीन पर नकदी सब्जी और फूलों का ऐसा संयोजन अपनाकर अपनी प्रति एकड़ आय बढ़ा सकते हैं। इससे किसी एक फसल का भाव गिरने पर भी कुल आमदनी सुरक्षित रहती है। • बस्तर में: स्थानीय आदिवासी और ग्रामीण इलाकों के किसानों के लिए त्योहारी सीजन को ध्यान में रखकर फूल और सब्जी की खेती करना अतिरिक्त नकद आमदनी का पक्का जरिया बन सकता है। इससे जिले के स्थानीय बाजारों में बाहर से फूल मंगाने की निर्भरता भी कम होगी। • लागत और मुनाफा: 50 से 60 हजार रुपये की शुरुआती लागत में 1 लाख से 1.30 लाख रुपये का शुद्ध लाभ कमाया जा सकता है। यह छोटे किसानों को कर्ज के जाल से बचाने में मददगार साबित हो सकता है। • भूमि का निरंतर उपयोग: 45 से 60 दिन में गोभी कटने के बाद अगले 3 महीने तक गेंदे से कमाई जारी रहती है। किसान पूरे सीजन बिना खेत खाली छोड़े निरंतर उत्पादन ले सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह कृषि प्रयोग पारंपरिक एकल फसल प्रणाली से होने वाले नुकसान और बाजार के उतार-चढ़ाव से बचने के उद्देश्य से शुरू किया गया। सही योजना और समय प्रबंधन के जरिए किसान ने दो अलग-अलग चक्रों वाली फसलों को एक साथ चुना। • जोखिम प्रबंधन: मौसम की मार या कीटों के हमले से अगर किसी एक फसल को नुकसान पहुंचता है, तो दूसरी फसल से लागत की भरपाई हो जाती है। इसी सुरक्षा के कारण किसान ने दोनों फसलों को एक साथ बोया। • त्योहारी मांग का लक्ष्य: दुर्गा पूजा और दिवाली के दौरान बाजार में गेंदे के फूलों की मांग और कीमतें अचानक बढ़ जाती हैं। किसान ने अपनी बुवाई का समय इसी मांग को भुनाने के हिसाब से तय किया। • जमीन और संसाधनों की बचत: चार फीट के बेड पर एक फीट की दूरी रखकर दोनों फसलों के पौधे लगाए गए। इससे खाद, पानी और निराई-गुड़ाई का खर्च अलग-अलग करने के बजाय एक ही साथ पूरा हो गया। सवाल-जवाब 1. बस्तर में किसान सूरदास मौर्य कितने रकबे में खेती कर रहे हैं? किसान सूरदास मौर्य लगभग छह एकड़ जमीन पर फूलगोभी और गेंदे की सहफसली खेती कर रहे हैं। 2. वर्तमान में फूलगोभी और गेंदे का बाजार भाव क्या चल रहा है? बाजार में फूलगोभी 50 रुपये प्रति किलो और गेंदा 60 से 100 रुपये प्रति किलो के भाव पर बिक रहा है। 3. इस सहफसली खेती में कौन-सी किस्में लगाई गई हैं? इसमें फूलगोभी की हाइब्रिड वैरायटी और गेंदे के लिए कोलकाता वैरायटी के पौधे लगाए गए हैं। 4. छह एकड़ में इस खेती की कुल लागत कितनी आई है? खेत की तैयारी और रोपाई मिलाकर इस खेती में कुल 50,000 से 60,000 रुपये का खर्च आया है। 5. फूलगोभी और गेंदे की फसल कितने समय में तैयार होती है? फूलगोभी 45 से 60 दिनों में तैयार हो जाती है, जबकि गेंदे की फसल कटाई के बाद अगले 3 महीने तक फूल देती रहती है। 6. किसान को इस पूरी फसल से कितने मुनाफे की उम्मीद है? दोनों फसलों को मिलाकर कुल शुद्ध मुनाफा 1 लाख रुपये से 1 लाख 30 हजार रुपये तक होने का अनुमान है। प्रेरणा और सबक बस्तर के किसान सूरदास मौर्य की यह पहल दर्शाती है कि सीमित संसाधनों के बावजूद सूझबूझ और वैज्ञानिक तरीके से खेती को घाटे से उबारकर मुनाफे का सौदा बनाया जा सकता है। • जोखिम का बंटवारा: कभी भी अपनी पूरी आजीविका एक ही फसल या उत्पाद पर निर्भर न रखें। सहफसली खेती अपनाकर नुकसान की आशंका को न्यूनतम किया जा सकता है। • मांग के अनुरूप योजना: बाजार की खपत और त्योहारी कैलेंडर को देखकर ही अपनी पैदावार का समय तय करें। सही समय पर बाजार पहुंचने से उपज के सबसे अच्छे दाम मिलते हैं। • संसाधनों का अधिकतम उपयोग: एक बार खेत की जुताई और बेड बनाने के बाद उसी खाद और जमीन पर दो फसलों का चक्र चलाना समझदारी है। इससे प्रति एकड़ लागत घटती है और शुद्ध मुनाफा बढ़ता है। https://trendkia.com/chhattisgarh/bastar-ke-kisana-ne-apanaya-sahaphasali-modala-phulagobhi-aura-gende-se-hogi-bnpara-kamai-35196 TrendKia — Har trend, sabse pehle.