# बस्तर की पारंपरिक रसोई का स्वाद: खट्टा भाजी, बैंगन और आलू की खास देसी सब्जी की विधि

> छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में खट्टा भाजी, बैंगन और आलू से बनने वाली पारंपरिक सब्जी बेहद लोकप्रिय है। कम मसालों और प्राकृतिक खटास से तैयार होने वाली इस डिश को बनाने का आसान तरीका जानिए।

**Type:** article · **Category:** छत्तीसगढ़ · **Published:** 2026-09-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/chhattisgarh/bastar-ki-parnparika-rasoi-ka-svada-khatta-bhaji-baingana-aura-alu-ki-khasa-desi-sabji-ki-vidhi-35150 · **Language:** Hindi
**Tags:** बस्तर खानपान, खट्टा भाजी, बैंगन आलू रेसिपी, छत्तीसगढ़ी व्यंजन, देसी सब्जी रेसिपी, पारंपरिक भोजन

छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में पारंपरिक खानपान की अपनी एक अलग पहचान है, जहां मौसमी साग और सब्जियों से बेहद स्वादिष्ट देसी व्यंजन तैयार किए जाते हैं। इन्हीं पारंपरिक व्यंजनों में खट्टा भाजी, बैंगन और आलू का मेल विशेष स्थान रखता है। स्थानीय स्तर पर पसंद की जाने वाली यह सब्जी अपनी प्राकृतिक बनावट और अनोखे खट्टेपन के लिए जानी जाती है। इस रेसिपी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे पकाने में न तो बहुत ज्यादा समय लगता है और न ही इसमें भारी गरम मसालों की जरूरत होती है। कम मसालों की वजह से सब्जियों का मूल स्वाद बना रहता है।

## बरसात के मौसम में बाड़ी की ताजी उपज
बस्तर के ग्रामीण अंचलों में मानसून के दिनों में लगभग हर घर के पीछे मौजूद बाड़ी या बगीचे में बैंगन और खट्टा भाजी उगाई जाती है। बरसात का मौसम शुरू होते ही इन हरी पत्तियों और ताजे बैंगन की पैदावार बढ़ जाती है, जिससे स्थानीय लोग इसे अपने दैनिक भोजन का मुख्य हिस्सा बनाते हैं। खट्टा भाजी से मिलने वाली स्वाभाविक खटास बैंगन और उबले या भुने आलू के साथ घुलकर एक अनोखा तालमेल बैठाती है। यह खट्टापन अलग से कोई अतिरिक्त खट्टा तत्व डाले बिना ही सब्जी को बेहद चटपटा बना देता है।

## सब्जी तैयार करने के लिए जरूरी सामग्री
इस पारंपरिक देसी डिश को तैयार करने के लिए रसोई में मौजूद बेहद बुनियादी चीजों का इस्तेमाल किया जाता है। सामग्री का सही अनुपात इस प्रकार है

- 2 बैंगन
- 50 ग्राम कटी हुई खट्टा भाजी
- दो कटे हुए आलू
- एक कटी हुई प्याज
- दो सूखी लाल मिर्च
- 1/4 छोटी चम्मच हल्दी पाउडर
- 1/4 छोटी चम्मच मिर्च पाउडर
- स्वादानुसार नमक
- एक गिलास पानी और पकाने के लिए तेल

## पकाने का पारंपरिक तरीका और आसान विधि
सब्जी बनाने की शुरुआत एक कड़ाही में तेल गरम करके की जाती है। सबसे पहले तेल में कटी हुई प्याज और दो सूखी लाल मिर्च डालकर तब तक तला जाता है जब तक प्याज का रंग हल्का सुनहरा न हो जाए। इसके बाद कड़ाही में कटे हुए बैंगन और आलू डाले जाते हैं और उन्हें मध्यम आंच पर कुछ देर तक पकाया जाता है। जब आलू और बैंगन हल्के नरम होने लगें, तब इसमें 50 ग्राम कटी हुई खट्टा भाजी मिलाई जाती है।

भाजी डालने के बाद इसे सब्जियों के साथ कुछ मिनट तक और भुना जाता है। इस व्यंजन की एक खास बात यह है कि इसमें टमाटर का उपयोग बिल्कुल नहीं किया जाता। खट्टा भाजी की पत्तियां अपने आप में पर्याप्त खट्टी होती हैं, इसलिए टमाटर की कोई आवश्यकता नहीं पड़ती। हल्दी, मिर्च पाउडर और स्वादानुसार नमक मिलाने के बाद इसमें एक गिलास पानी डाला जाता है। कड़ाही को ढककर धीमी आंच पर तब तक पकाया जाता है जब तक सभी सब्जियां अच्छी तरह गल न जाएं और ग्रेवी गाढ़ी न हो जाए।

## परोसने का तरीका और खानपान की परंपरा
पूरी तरह पक जाने के बाद यह स्वादिष्ट रसेदार सब्जी थाली में परोसने के लिए तैयार हो जाती है। बस्तर के घरों में इसे नियमित भोजन के रूप में बेहद चाव से खाया जाता है। इसे सादी रोटी, उबले सफेद चावल या फिर बस्तर के पारंपरिक बड़े चावल के साथ परोसा जाता है, जिसके साथ इसका रसा बहुत ही उम्दा लगता है।

## इसका आप पर असर
इस पारंपरिक रेसिपी को अपनी रसोई में शामिल करके आप बहुत कम खर्च और न्यूनतम मसालों में एक पौष्टिक और स्वादिष्ट भोजन तैयार कर सकते हैं।

- **खानपान में बदलाव:** बाजार के पैक्ड और भारी मसालों के बजाय प्राकृतिक पत्तियों से तैयार इस सब्जी से पेट हल्का रहता है। कम तेल और बिना गरम मसाले के पकने के कारण यह स्वास्थ्य के लिहाज से भी एक बेहतरीन विकल्प है।
- **बजट की बचत:** सिर्फ दो बैंगन, दो आलू और मुट्ठी भर साग से यह पूरी सब्जी तैयार हो जाती है। महंगी सब्जियों या टमाटर पर अतिरिक्त खर्च किए बिना एक समय का स्वादिष्ट भोजन बन जाता है।
- **समय की बचत:** इस रसेदार सब्जी को तैयार करने में बहुत कम समय लगता है। व्यस्त दिनचर्या वाले कामकाजी लोग इसे फटाफट लंच या डिनर के लिए आसानी से पका सकते हैं।
- **छत्तीसगढ़ और बस्तर में:** स्थानीय निवासियों के लिए यह अपनी बाड़ी में उगी ताजी उपज का बेहतर उपयोग करने का साधन है। बरसात के मौसम में ग्रामीणों के लिए यह सुलभ और पोषण से भरपूर आहार उपलब्ध कराती है।

## ऐसा क्यों हुआ
बस्तर क्षेत्र में खट्टा भाजी, बैंगन और आलू की यह सब्जी स्थानीय मौसम, भौगोलिक परिस्थितियों और पारंपरिक खेती के कारण खानपान का अहम हिस्सा बनी है।

- **बरसात का मौसमी चक्र:** मानसून के आगमन के साथ ही बस्तर के ग्रामीण अपने घरों के पीछे बाड़ी में हरी सब्जियां उगाना शुरू करते हैं। इस मौसम में खट्टा भाजी और बैंगन प्रचुर मात्रा में उगते हैं, जिससे यह सब्जी स्वाभाविक रूप से दैनिक भोजन में शामिल हो जाती है।
- **टमाटर का प्राकृतिक विकल्प:** बस्तर की पारंपरिक रसोई में खट्टा भाजी का उपयोग प्राकृतिक खटास देने के लिए किया जाता रहा है। इसके पत्तों में मौजूद स्वाभाविक खट्टापन टमाटर की जरूरत को पूरी तरह खत्म कर देता है, जो सादगीपूर्ण जीवनशैली के अनुकूल है।
- **सांस्कृतिक खानपान परंपरा:** स्थानीय लोग भारी मसालेदार भोजन के बजाय सब्जियों के मूल स्वाद को प्राथमिकता देते हैं। बैंगन, आलू और खट्टी पत्तियों का यह संयोजन पीढ़ियों से बस्तर के बड़े चावल के साथ खाया जाता रहा है।

## सवाल-जवाब

### 1. बस्तर की इस सब्जी में खट्टा भाजी के साथ कौन-सी सब्जियां मिलाई जाती हैं?
इस रेसिपी में 50 ग्राम खट्टा भाजी के साथ 2 कटे हुए बैंगन और 2 कटे हुए आलू मिलाए जाते हैं।

### 2. क्या इस सब्जी को बनाने में टमाटर का इस्तेमाल होता है?
नहीं, इस सब्जी में टमाटर नहीं डाला जाता क्योंकि खट्टा भाजी की पत्तियां खुद ही सब्जी को पर्याप्त प्राकृतिक खटास दे देती हैं।

### 3. सब्जी में मसालों का अनुपात क्या रखा जाता है?
इसमें सिर्फ 1/4 छोटी चम्मच हल्दी पाउडर, 1/4 छोटी चम्मच मिर्च पाउडर, स्वादानुसार नमक, दो सूखी लाल मिर्च और एक कटी प्याज का उपयोग होता है।

### 4. यह पारंपरिक सब्जी किन चीजों के साथ परोसी जाती है?
इसे सादी रोटी, उबले सफेद चावल या बस्तर के पारंपरिक बड़े चावल के साथ परोसा जाता है।

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